‘अम्बे तू है जगदम्बे काली’ माता दुर्गा की स्तुति में गाया जाने वाला अत्यंत लोकप्रिय और प्रभावशाली भजन है। यह भजन न केवल माता के शक्ति स्वरूप का आह्वान करता है, बल्कि भक्तों के हृदय में श्रद्धा, साहस और भक्ति का संचार भी करता है। नरेंद्र चंचल जी की ओजस्वी आवाज में यह आरती/भजन भारत के प्रत्येक घर में नवरात्रि और देवी पूजन के अवसर पर श्रद्धापूर्वक गाया जाता है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि संसार की समस्त शक्तियां और प्रकाश का स्रोत माँ जगदम्बा ही हैं। इस लेख में हम इस पावन भजन के बोल, अर्थ, आध्यात्मिक महत्व और इसके गायन की विधि पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गाएं भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गाएं भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
भक्तों पर अपने दया दृष्टि डालो, भक्तों की बिगड़ी बात बना दो,
भर दो भक्ति प्रेम रस प्याली, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली...
माँ बेटे का है इस जग में बड़ा ही निर्मल नाता,
पूत कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता,
सब पर करुणा बरसाने वाली, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली...
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना,
हम तो मांगें माँ तेरे मन में, एक छोटा सा कोना,
सबकी बिगड़ी मिटाने वाली, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती।
अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन में भक्त माँ दुर्गा को 'जगदम्बे' और 'काली' के रूप में संबोधित करता है। 'खप्पर वाली' माँ का वह स्वरूप है जो दुष्टों का संहार करने वाली और भक्तों की रक्षा करने वाली है। भजन का भाव यह है कि माँ की कृपा के बिना संसार में कुछ भी संभव नहीं है। भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वह अपनी दया दृष्टि बनाए रखें और जीवन की कठिनाइयों को दूर करें। 'पूत कपूत सुने हैं पर ना माता सुनी कुमाता' पंक्ति यह दर्शाती है कि माँ का हृदय अत्यंत कोमल होता है, चाहे संतान कैसी भी हो, माँ कभी अपने बच्चों का बुरा नहीं चाहती। अंत में, भक्त सांसारिक सुखों की कामना न करके केवल माँ के चरणों में स्थान मांगता है, जो सच्ची भक्ति का प्रतीक है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन देवी दुर्गा के प्रति समर्पण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसका मुख्य महत्व निम्नलिखित है:
- शक्ति का आह्वान: यह भजन नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सकारात्मकता का संचार करता है।
- भाव प्रधान: इसमें माँ और बच्चे के अटूट संबंध को रेखांकित किया गया है।
- लोकप्रियता: नरेंद्र चंचल जी द्वारा गाए जाने के बाद यह भजन जन-जन की जुबान पर है।
- मानसिक शांति: नियमित रूप से इस भजन का श्रवण करने से मन को असीम शांति प्राप्त होती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से गाया जाता है। इसके अलावा, मंगलवार और शुक्रवार को माँ दुर्गा की पूजा के समय इसे गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे गाते समय मन में पूर्ण श्रद्धा होनी चाहिए। यदि आप इसे आरती के रूप में गा रहे हैं, तो हाथ में जल का पात्र और धूप-दीप लेकर माँ की प्रतिमा के सामने खड़े होकर गायन करें।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| जगदम्बे | संसार की माता (दुर्गा) |
| खप्पर वाली | दुष्टों का संहार करने वाली |
| भारती | सरस्वती या भारत की जनता |
| कुमाता | बुरी माता (जो माँ कभी नहीं होती) |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | अम्बे तू है जगदम्बे काली |
|---|---|
| देवी | माँ दुर्गा / काली |
| गायक | नरेंद्र चंचल |
| भाषा | हिंदी |
| विषय | भक्ति एवं समर्पण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
अम्बे तू है जगदम्बे काली भजन कब गाना चाहिए?
इसे नवरात्रि, दुर्गा पूजा, या किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में गाया जा सकता है।
क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
हाँ, इसे घर पर माँ दुर्गा की पूजा करते समय श्रद्धापूर्वक गाया जा सकता है।
नरेंद्र चंचल जी का यह भजन इतना प्रसिद्ध क्यों है?
नरेंद्र चंचल जी की भक्तिपूर्ण आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति ने इस भजन को अमर बना दिया है।
क्या यह भजन केवल दुर्गा माँ के लिए है?
यह मुख्य रूप से माँ दुर्गा के लिए है, लेकिन काली माँ के भक्त भी इसे गाते हैं।
भजन गाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
मन में पवित्रता, स्वच्छता और माँ के प्रति अटूट विश्वास रखें।
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संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह लेख पारंपरिक भक्ति साहित्य और लोक मान्यताओं पर आधारित है।
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