hari bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मंगल भवन अमंगल हारी (Mangal Bhavan Amangal Hari) - Chaupai Shri Devkinandan Thakur Ji

मंगल भवन अमंगल हारी चौपाई का संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ और भावार्थ संदर्भ सहित। पढ़ें श्रीराम-हनुमान भक्ति की यह विशेष रचना Bhaktilok पर।

प्रस्तावना एवं परिचय

भक्ति का मंत्र: मंगल भवन अमंगल हारी

यह भजन भगवान के मंगलकारी स्वरूप का यशगान है, जिससे भक्तों को आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मंगल भवन अमंगल हार�
सियावर रामचंद्र की जय
हनुमान जी की जय

जय जय जय महाकाल�
जय जय जय महाकामेश्वर
जय जय जय धनतेरस
नमो नमो भोज भभुत

प्रगट हुए हैं ज�
मंगल भवन अमंगल हार�
साझा करें:
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ मंगल भवन अमंगल हारी भजन मुख्य रूप से भगवान श्रीराम और हनुमान जी की उपासना में समर्पित है। इसका मुख्य संदेश यह है कि भगवान अपने भक्तों के सभी संकटों और दुखों को हरकर उन्हें मंगलमय जीवन की ओर ले जाते हैं। 'मंगल भवन अमंगल हारी' का अर्थ है कि भगवान के आश्रय में सभी अमंगल का अंत होता है। यह भजन न केवल भक्तों को भक्ति और श्रद्धा की भावना से भरता है, बल्कि अपने जीवन के सभी नकारात्मक तत्वों को समाप्त करने की प्रेरणा भी देता है। यहाँ 'सियावर रामचंद्र' का जिक्र भी है, जो भगवान राम का सम्मानपूर्वक नाम है, और यह दर्शाता है कि राम सभी बुराईयों का नाश करते हैं और सच्चाई का विजय करते हैं।

भावार्थ की दृष्टि से, यह भजन हमें आत्मिक शक्ति प्रदान करता है, जिससे हम अपने जीवन की कठिनाइयों का सामना कर सकते हैं। जब हम कहते हैं 'हाथों में हनुमान जी का आशीर्वाद', तो यह संकेत करता है कि जब हम सच्चे मन से हनुमान जी का स्मरण करते हैं, तो उनकी शक्ति हमारे साथ होती है। यह भी दर्शाता है कि भक्ति मार्ग पर चलने वाले भक्तों का स्वभाव उन्नत और धर्मप्रिय होता है, जिनके हृदय में केवल प्रेम और श्रद्धा का संचार होता है। भक्त अपने जीवन में हनुमान जी को स्थाई रूप से अवशिष्ट रखते हैं और सदैव उनके गुणों का गुणगान करते हैं।
इस भजन में भक्ति का जो मार्ग दिखाया गया है, वह हमें सिखाता है कि हम भक्ति के माध्यम से आत्मिक उन्नति कर सकते हैं। भक्ति एक ऐसा साधन है जो हमें भगवान के निकट लाता है और हमारे हृदय को शुद्ध करता है। इसका दर्शन हमें यह भी बताता है कि सच्चे भक्त को बार-बार अपनी करनी को समर्पित करना चाहिए, क्योंकि भक्ति का मार्ग सरल है, परंतु यह प्रयास और समर्पण की मांग करता है। इस भजन के उच्चारण से, भक्तिनियाँ और भक्तों दोनों के लिए एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव संभव है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ इस भजन का आध्यात्मिक महत्व गहरी धार्मिक परंपराओं में निहित है, जहाँ यह माना जाता है कि भक्ति और समर्पण से भगवान श्रीराम और हनुमान जी की कृपा प्राप्त की जा सकती है। पुराणों में, विशेषकर रामायण में, भगवान राम को आदर्श पुरुष के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिनके धर्म, सत्य और न्याय के सिद्धांतों ने मानवता को प्रेरित किया है। रामायण की कथाएँ हमें सिखाती हैं कि भगवान हमेशा अपने भक्तों के संकटों का समाधान करते हैं, और जब हम सच्चे मन से उनके प्रति श्रद्धा दिखाते हैं, तो वह अमंगल को हरने में सक्षम होते हैं।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा शुभ मुहूर्त">दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भजन का नियमित जाप करने से मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य, और आध्यात्मिक उन्नति के लाभ प्राप्त होते हैं। यह मंत्र नकारात्मकता को समाप्त करता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। भजनों की धुनों और शब्दों के प्रभाव से भक्त अपने मन को स्थिर और शांत रख सकते हैं, जिससे तनाव और चिंताओं में कमी आती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि मंगल भवन अमंगल हारी का जाप करने के लिए सुबह या शाम का समय सर्वोत्तम माना जाता है। पूजा करते समय, दीप जलाना और फूलों या फलों का चढ़ावा देना चाहिए। सही मुद्रा में बैठकर, भक्त को ध्यान केंद्रित करना चाहिए और मन में श्रद्धा और भक्ति के भाव के साथ इस भजन का उच्चारण करना चाहिए। यह क्रिया सामूहिक रूप से या व्यक्तिगत स्तर पर की जा सकती है।
�� अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ) मंगल भवन अमंगल हारी का अर्थ क्या है?मंगल भवन अमंगल हारी का अर्थ है कि भगवान के आश्रय में सभी अमंगल का अंत होता है। यह भजन भक्तों को भगवान के मंगलकारी स्वरूप की याद दिलाता है।
इस भजन का प्रमुख उद्देश्य क्या है?इस भजन का प्रमुख उद्देश्य भक्तों को संकटों और दुखों से मुक्ति दिलाना और भगवान की भक्ति को बढ़ावा देना है। यह ध्यान और समर्पण का संदेश देता है।
इस भजन का जाप करने के लाभ क्या हैं?इस भजन का जाप मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है। यह नकारात्मकता को कम करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!