Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जय जननी जय जय (Jai Janani Jai Jai) - Astha Singh Khesari Lal Yadav Devi Geet

खेसारी लाल यादव और आस्था सिंह का प्रसिद्ध देवी गीत 'जय जननी जय जय' (Jai Janani Jai Jai)। यहाँ पढ़ें इस मधुर भजन के संपूर्ण लिरिक्स और भावार्थ।

देवी गीत & भजन

आस्था सिंह और खेसारी लाल यादव | संपूर्ण लिरिक्स एवं भावार्थ

अपडेटेड: अक्टूबर 2024 गायक: खेसारी लाल यादव एवं आस्था सिंह श्रेणी: देवी भजन

भोजपुरी संगीत जगत के सुप्रसिद्ध और लोकप्रिय गायक खेसारी लाल यादव और मधुर स्वर की धनी गायिका आस्था सिंह द्वारा प्रस्तुत "जय जननी जय जय" (Jai Janani Jai Jai) एक अत्यंत भावपूर्ण, ऊर्जावान और आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाला देवी गीत है। सनातन संस्कृति में 'जननी' शब्द का अर्थ केवल जन्म देने वाली माता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड, प्रकृति और चेतना की उत्पत्ति करने वाली पराशक्ति 'आदिशक्ति माँ दुर्गा' का बोध कराता है। यह भजन देवी के ममतामयी और शक्तिस्वरूपा दोनों रूपों का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है। नवरात्रि के पावन पर्वों, देवी जागरण, और कुंवारी कन्या पूजन के समय जब यह भजन गूंज उठता है, तो संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक महत्व और इसके गायन से मिलने वाली मानसिक शांति पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ जय जननी जय जय ॥

जय जननी जय जय, जय जननी जय जय
दुख हरनी सुख करनी, जय जननी जय जय

(मुखड़ा)

मैया मोरी, ओढ़नी ओढ़ले लाल चुनरिया
भक्तन के मन भावे, मैया के रूप सांवरिया
जय जननी जय जय, जय जननी जय जय
दुख हरनी सुख करनी, जय जननी जय जय

(अंतरा 1)

शेर सवारी मैया, हाथ में त्रिशूल सोहे
देख के मूरत तोहरी, सारा जगवा मोहित होवे
दुष्टन के तू काल, भक्तन के तू आधार
मैया मोरी, कर दूँ तोहरे नाम पे सब कुछ न्योछावर
जय जननी जय जय, जय जननी जय जय

(अंतरा 2)

घर-घर आवे महिमा तोहार गावे लोगवा
दर्शन पाके मैया, पावन भइल सब जोगवा
झंडा लहराए ऊंचे, द्वारे पे सजे मेला
मैया के चरणन में, पावे संसार बेड़ा पार
जय जननी जय जय, जय जननी जय जय

(अंतिम चरण / समापन)

खेसारी-आस्था गावे, महिमा अपार मैया
सबके संकट हर लीहें, जगदम्ब भवानी मैया
जय जननी जय जय, जय जननी जय जय
दुख हरनी सुख करनी, जय जननी जय जय!

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

"जय जननी जय जय" भजन की पंक्तियाँ सीधे भक्त के हृदय से निकलकर जगदंबा के चरणों में समर्पित होती हैं। यहाँ भजन के विभिन्न हिस्सों का सरल हिंदी में भावार्थ प्रस्तुत किया गया है:

मुखड़े का भाव:

भक्त माँ के रूप का वंदन करते हुए कहते हैं कि हे मैया! तुमने लाल रंग की चुनरी ओढ़ रखी है, जो अत्यंत शोभायमान है। आपका यह सांवरिया या अलौकिक रूप भक्तों के मन को अत्यंत भाता है। आप सभी के दुखों को हरने वाली और सुखों की वर्षा करने वाली हैं, इसलिए हे जननी! आपकी जय हो।

प्रथम अंतरे का भाव:

इस चरण में माँ के वीर और करुणामय दोनों रूपों का वर्णन है। माँ शेर पर सवार हैं और उनके हाथों में त्रिशूल सुशोभित है। उनकी इस दिव्य मूरत को देखकर संपूर्ण संसार मोहित हो जाता है। वे दुष्टों और अहंकारियों के लिए साक्षात काल (संहारकर्ता) हैं, वहीं सच्चे भक्तों के लिए जीवन का एकमात्र आधार हैं। भक्त अपना सर्वस्व माँ के चरणों में समर्पित करने की बात कहता है।

द्वितीय अंतरे का भाव:

यहाँ लोक-संस्कृति और नवरात्रि के उल्लास का चित्रण है। घर-घर में माँ की महिमा गाई जाती है। उनके दर्शन पाकर लोगों का जीवन और उनके सभी योग-अनुष्ठान पावन हो जाते हैं। द्वारों पर ऊंचे झंडे लहराते हैं और भव्य मेले सजते हैं। केवल माँ के चरणों की शरण में आने से ही इस भवसागर से बेड़ा पार हो जाता है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • भक्ति और ऊर्जा का संगम: खेसारी लाल यादव की ऊर्जावान और आस्था सिंह की मर्मस्पर्शी आवाज़ इस भजन को अनोखा बनाती है।
  • आदिशक्ति की वंदना: यह गीत माँ दुर्गा के तीनों रूपों - महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती - की समग्र ऊर्जा का प्रतीक है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मकता: इसके नियमित श्रवण से मन काटकाें, अज्ञात भय और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • लोक संस्कृति का प्रसार: भोजपुरी लोक संगीत में देवी गीतों की समृद्ध परंपरा को यह गीत आधुनिक वाद्ययंत्रों के साथ सजीव करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी गीतों को सुनने या गाने के लिए विशेष अवसरों पर अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है:

  1. नवरात्रि के नौ दिन: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान प्रातः काल या संध्या आरती के समय इसे बजाना बेहद शुभ माना जाता है।
  2. देवी जागरण एवं चौकी: माता के जागरण, संकीर्तन और भंडारे के समय इस गीत पर भक्त झूम उठते हैं।
  3. दैनिक पूजा: घर के पूजा गृह में दीप प्रज्वलित करने के पश्चात ध्यान मुद्रा में इस भजन को सुना जा सकता है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम जय जननी जय जय (Jai Janani Jai Jai)
गायक कलाकार खेसारी लाल यादव एवं आस्था सिंह
संगीत शैली भोजपुरी देवी गीत / लोक भजन
प्रमुख आराध्य आदिशक्ति माँ दुर्गा / जगदम्बा भवानी
भाषा भोजपुरी / हिंदी
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, करुणा और शक्ति वंदना
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, देवी जागरण, मंगलवार/शुक्रवार पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय देवी गीत को भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव और प्रसिद्ध गायिका आस्था सिंह ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

यह भजन आदिशक्ति माँ दुर्गा के ममतामयी स्वरूप, उनके पराक्रम (शेर सवारी, त्रिशूल) और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का गुणगान करता है।

यह गीत नवरात्रि के नौ दिनों, माता के जागरण, कन्या पूजन, तथा किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के समय सुनने के लिए अत्यंत उपयुक्त है।

सनातन संस्कृति में 'जननी' का अर्थ केवल जन्म देने वाली माता नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण ब्रह्मांड, प्रकृति और चेतना की उत्पत्ति करने वाली पराशक्ति का प्रतीक है।

हाँ, यह गीत विभिन्न आधिकारिक संगीत चैनलों और ऑडियो-वीडियो प्लेटफार्मों पर उपलब्ध है जहाँ लाखों भक्त इसे सुनते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह पृष्ठ Bhaktilok.in के संपादकीय मानकों के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य श्रोताओं को प्रामाणिक लिरिक्स, सही भावार्थ और आध्यात्मिक संदर्भ प्रदान करना है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।


स्रोत एवं संदर्भ:

पारंपरिक लोक संगीत परंपरा, भोजपुरी देवी गीत संग्रह, और समकालीन भक्ति संगीत प्रकाशनों के आधार पर संकलित।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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