Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) - Shankar Mahadevan Bhajan

पढ़ें हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa) - Shankar Mahadevan Bhajan - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक

शंकर महादेवन भजन - Bhaktilok

हनुमान चालीसा सनातन धर्म का एक ऐसा दिव्य और अलौकिक स्तोत्र है, जिसका पाठ करने मात्र से भक्तों के समस्त संकट और भय दूर हो जाते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित इस चालीसा को संगीत की दुनिया के सिरमौर और पद्मश्री से सम्मानित गायक शंकर महादेवन (Shankar Mahadevan) ने अपनी ओजस्वी, ऊर्जावान और भावपूर्ण आवाज में गाकर इसे एक नया आयाम दिया है। शंकर महादेवन द्वारा प्रस्तुत यह हनुमान चालीसा भजन न केवल कानों को तृप्त करता है, बल्कि श्रोता के मन में भगवान बजरंगबली के प्रति अटूट विश्वास, भक्ति और अदम्य साहस का संचार करता है। महाकाल के परम भक्त और रुद्र अवतार श्री हनुमान की स्तुति में गाया गया यह भजन महादेव और हनुमान जी के अनन्य संबंधों को भी रेखांकित करता है। आज के इस विस्तृत आलेख में हम इस अद्भुत भजन, इसके संपूर्ण बोल, शंकर महादेवन की गायन शैली, चालीसा के गहन भावार्थ और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

दोहा

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल सुजोसु, जो दायसु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस विकार॥

चौपाई

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर..
रामदूतम अतुलित बल धामा, अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा..
महावीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी..
कंचन बरन बिराज सुवेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा..
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै, कांधे मुंज जनेऊ साजै..
संकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग बंदन..
बिद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर..
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया..
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रूप धरि लंक جलावा..
भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे..
लाय संजीवन लखन जियाए, श्री हनुमान जी हर्षि उर लाए..
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई..
सहस बदन तुम्रों जस गावैं, अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं..
सनकादिक ब्रह्मा मुनीसा, नारद सारद सहित अहीसा..<
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कवि कोविद कहि सकैं कहाँ ते..
तुम सुग्रीवहि कीन्ह प्रहारि, राम मिलाय राज पद दीन्हो..<
तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना..
युग सहस्र योजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू..
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लांघि गए अचरज नाहीं..<
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते..
राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे..
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना..<
आपन तेज संहारो आपै, तीनों लोक हांक तें कांपै..
भूत पिसाच निकट नहिं आवै, महाबीर जब नाम सुनावै..
नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा..
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै..
सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा..
और मनोरथ जो कोई लावै, सोइ अमित जीवन फल पावै..
चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा..
साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे..
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता..
राम रसायन तुम्हारे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा..
तुम्हरे भजन राम को पावै, जन्म जन्म के दुख बिसरावै..
अंत काल रघुबर पुर जाई,जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई..
और देवता चित्त न धरैई, सर्ब सुख करै सर्व सुख करै हनुमान सेइ सर्व सुख करै..
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा..
जै जै जै हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरुदेव की नाईं..
जो यह पाठ करै कोई छूटै बंदी महासुख होई..
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा..
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मह डेरा॥

दोहा

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर सुहुर॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

शंकर महादेवन द्वारा गाए गए इस हनुमान चालीसा भजन का मूल भाव केवल शब्दों का उच्चारण नहीं, बल्कि भगवान हनुमान के दिव्य गुणों को अपने अंतःकरण में उतारना है। चालीसा की शुरुआत श्री गुरु चरणों की वंदना से होती है, जो यह सिखाती है कि विद्या और बुद्धि प्राप्त करने के लिए गुरु की कृपा अनिवार्य है। इसके पश्चात हनुमान जी के अतुलनीय बल, अपार बुद्धि, और श्रीराम के प्रति उनकी अनन्य निष्ठा का वर्णन किया गया है।

भजन में जब शंकर महादेवन अपनी ऊर्जावान शैली में "महावीर बिक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी" पंक्तियों को गाते हैं, तो यह संदेश स्पष्ट होता है कि बजरंगबली भक्तों के भीतर के अहंकार, दुर्बुद्धि और नकारात्मकता को दूर कर सद्बुद्धि प्रदान करते हैं। लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और समुद्र लांघना जैसे प्रसंग यह दर्शाते हैं कि भगवान अपने भक्तों की हर असंभव प्रतीत होने वाली कठिनाई को चुटकियों में हल कर देते हैं। इस भजन को सुनने मात्र से मन में व्याप्त सारे भय, चिंताएं और मानसिक तनाव छूमंतर हो जाते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

शंकर महादेवन का यह भजन अपनी अनूठी संगीत रचना और शास्त्रीय गायन की बारीकियों के लिए जाना जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • दिव्य ऊर्जा का संचार: शंकर महादेवन की भारी और गूंजती हुई आवाज श्रोताओं में असीम सकारात्मक ऊर्जा भर देती है।
  • महादेव और हनुमान का संगम: चूंकि हनुमान जी को भगवान शिव (रुद्र) का अवतार माना जाता है, इसलिए इस भजन में शिव तांडव स्तोत्र जैसी दिव्यता और ओज का अनुभव होता है।
  • शुद्ध उच्चारण और लय: संस्कृत और अवधी के शब्दों का अत्यंत स्पष्ट और व्याकरणिक शुद्धता के साथ उच्चारण किया गया है।
  • मानसिक शांति और सुरक्षा: इस भजन को नियमित रूप से सुनने से व्यक्ति को मानसिक संबल, निर्भयता और आंतरिक शांति की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को सुनने या पाठ करने के लिए कुछ विशेष नियमों और समय का पालन करने से सर्वोत्तम आध्यात्मिक फलों की प्राप्ति होती है:

  • सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातःकाल 4:00 से 6:00 बजे के बीच) या संध्या बेला (सूर्यास्त के समय) इस भजन को सुनना अत्यंत फलदायी है।
  • मंगलवार और शनिवार: इन दोनों दिनों में हनुमान मंदिर में अथवा घर के पूजा स्थल पर दीप प्रज्वलित कर इस भजन को सुनना विशेष रूप से लाभकारी माना गया है।
  • नियम एवं अनुशासन: भजन सुनते समय मन को शांत रखें, शरीर की पवित्रता का ध्यान रखें और श्रद्धा भाव बनाए रखें।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस संपूर्ण रचना के केंद्र बिंदु संकटमोचन श्री हनुमान जी हैं, जिन्हें कलियुग में सबसे जागृत और प्रत्यक्ष देवता माना जाता है। हनुमान जी भगवान शिव के अंश (रुद्र अवतार) हैं और आराध्य भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं। इस चालीसा के रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी हैं, जिन्होंने 16वीं शताब्दी में अवधी भाषा में इस महाकाव्य की रचना की थी। आधुनिक युग में संगीतकार और गायक शंकर महादेवन ने अपनी कला के माध्यम से इस प्राचीन स्तोत्र को घर-घर तक पहुँचाने का महान कार्य किया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

गोस्वामी तुलसीदास जी ने जब काशी के असी घाट पर हनुमान चालीसा की रचना की थी, तब उनका उद्देश्य आम जनमानस को सुलभ भक्ति मार्ग प्रदान करना था ताकि वे बिना किसी कठिन कर्मकांड के भगवान राम और हनुमान की कृपा प्राप्त कर सकें। समय के साथ विभिन्न कलाकारों ने इसे अपनी धुनों में ढाला, परंतु शंकर महादेवन का यह संस्करण अपनी समकालीन संगीत व्यवस्था (Contemporary Musical Arrangement) और शास्त्रीय सुदृढ़ता के कारण विशेष लोकप्रिय हुआ है। इसमें पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक सिम्फोनिक संगीत का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह चालीसा अवधी भाषा में रद्ध है, जो हिंदी की ही एक अत्यंत मधुर और लोकप्रिय शैली है। इसमें दोहा और चौपाई छंदों का प्रयोग किया गया है।

  • दोहा: चालीसा के आरंभ और अंत में कुल दो दोहे दिए गए हैं, जो मंगलाचरण और उपसंहार का कार्य करते हैं।
  • चौपाई: मध्य भाग में 40 चौपाइयां हैं, जिनमें चार-चार चरण होते हैं।
काव्य शैली में अनुप्रास, यमक और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है, जो इसके सौंदर्य को कई गुना बढ़ा देता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन जीने की कई अमूल्य कला सिखाता है:

  • निःस्वार्थ सेवा भाव: हनुमान जी ने बिना किसी स्वार्थ के आजीवन प्रभु श्रीराम की सेवा की। हमें भी अपने कर्तव्यों का पालन निष्काम भाव से करना चाहिए।
  • संकट में धैर्य: कठिन से कठिन परिस्थिति में भी घबराने के बजाय हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: असीम बल और शक्तियों के स्वामी होने के बावजूद हनुमान जी अत्यंत विनम्र हैं। विनम्रता ही सच्चे मनुष्य की पहचान है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
मुकुरु दर्पण या आईना मन रूपी दर्पण को पवित्र करना
अतुलित बल धामा अतुलनीय बल के भंडार हनुमान जी की असीम शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति
कुमति बुरी बुद्धि या नकारात्मक विचार मन के विकारों को दूर करना
संकर सुवन भगवान शिव के अंश या पुत्र हनुमान जी का रुद्र अवतार होना
अष्ट सिद्धि नौ निधि आठ प्रकार की सिद्धियां और नौ प्रकार की निधियां माता सीता द्वारा प्रदत्त वरदान

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

चालीसा की प्रत्येक पंक्ति में एक गहरा आध्यात्मिक रहस्य छिपा है। उदाहरण के लिए, "विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर" पंक्ति यह बताती है कि समस्त विद्याओं और गुणों से संपन्न होने के बावजूद हनुमान जी का एकमात्र ध्येय प्रभु श्रीराम के कार्यों को पूर्ण करना था। इसी प्रकार "प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लांघि गए अचरज नाहीं" यह दर्शाती है कि भगवान के नाम और उनकी दी हुई निशानी के सहारे जीवन के बड़े से बड़े समुद्र को भी आसानी से पार किया जा सकता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पौराणिक मंत्र का जाप करने से साधना और अधिक प्रभावशाली हो जाती है:

"मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥"

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम हनुमान चालीसा (Hanuman Chalisa)
गायक पद्मश्री शंकर महादेवन (Shankar Mahadevan)
रचयिता महाकवि गोस्वामी तुलसीदास जी
भाषा अवधी / हिंदी
मुख्य विषय भक्ति, शक्ति, समर्पण और संकट निवारण
भाव (Bhava) वीर रस एवं अगाध भक्ति भाव
उपयुक्त अवसर नित्य पूजा, मंगलवार, शनिवार और संकट काल

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शंकर महादेवन द्वारा गाया गया हनुमान चालीसा क्यों लोकप्रिय है?

इनकी ओजस्वी आवाज, शास्त्रीय संगीत की सुदृढ़ता और ऊर्जावान प्रस्तुति के कारण यह संस्करण श्रोताओं के मन में विशेष स्थान रखता है।

क्या हनुमान चालीसा का पाठ महिलाएं कर सकती हैं?

हाँ, हनुमान चालीसा का पाठ हर कोई कर सकता है। भक्ति में स्त्री-पुरुष का कोई भेद नहीं होता है।

हनुमान चालीसा का पाठ किस समय करना सबसे उत्तम है?

ब्रह्म मुहूर्त (सुबह) या संध्या काल में इसका पाठ करना सबसे अधिक फलदायी माना गया है।

क्या प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ने से संकट दूर होते हैं?

नियमित पाठ करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है, जिससे व्यक्ति हर प्रकार की कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम होता है।

हनुमान चालीसा में कुल कितनी चौपाइयां हैं?

हनुमान चालीसा में कुल 40 चौपाइयां और आरंभ व अंत में दो-दो दोहे हैं।

हनुमान जी को किसका अवतार माना जाता है?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी भगवान शिव (रुद्र) के अंशावतार हैं।

हनुमान चालीसा की रचना किस भाषा में हुई है?

इसकी रचना अवधी भाषा में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा की गई है।

क्या इस भजन को सुनने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है?

हाँ, इसके निरंतर श्रवण से आसपास का वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख शास्त्रीय ग्रंथों, तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा के मूल पाठ और आधुनिक संगीत परंपरा के आधार पर तैयार किया गया है। यह सामग्री पाठकों को आध्यात्मिक संतुष्टि और प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रस्तुत की गई है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्री रामचरितमानस एवं विनयपत्रिका - गोस्वामी तुलसीदास
  • बृज भाषा और अवधी साहित्य कोश
  • पारंपरिक सनातन धार्मिक ग्रंथ एवं हनुमान स्तोत्र संग्रह

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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