"तेरी मस्ती में झूमे जग सारा" एक अत्यंत ही पावन, भक्ति रस से परिपूर्ण और आत्मा को श्री कृष्ण के चरणों में लीन कर देने वाला प्रसिद्ध कृष्ण भजन है। इस भजन को प्रसिद्ध भक्ति गायक हेमंत बृजवासी (Hemant Brijwasi) की मधुर वाणी में प्रस्तुत किया गया है, जो अपनी सुरीली आवाज़ और गहरी भक्ति भावना के लिए जाने जाते हैं। यह भजन मूल रूप से भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं, उनकी मस्ती और उनकी दिव्य माया का गुणगान करता है। जब भक्त इस भजन को गाता है, तो वह स्वयं को श्री कृष्ण की मस्ती में झूमते हुए अनुभव करता है। यह भजन भक्ति, शरणागति और प्रेम का अद्भुत संगम है, जो साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक आनंद की ओर ले जाता है। राधा कृष्ण भजन के रूप में यह गीत विशेष रूप से हरिवंश, जन्माष्टमी, राधाष्टमी और अन्य मांगलिक अवसरों पर गाया जाता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा,
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा।
तेरे चरणों में झुके सब ये जग,
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा।।
तेरे नाम की महिमा न्यारी,
तेरे नाम की महिमा न्यारी।
तेरे नाम से तर जाए सारा,
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा।।
तेरे रूप की छटा निराली,
तेरे रूप की छटा निराली।
तेरे रूप में खो जाए सारा,
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा।।
तेरे प्रेम की गंगा बहती,
तेरे प्रेम की गंगा बहती।
तेरे प्रेम में डूबे जग सारा,
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा।।
तेरे भजन की तान सुहावन,
तेरे भजन की तान सुहावन।
तेरे भजन में मगन जग सारा,
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा।।
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा,
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा।
तेरे चरणों में झुके सब ये जग,
तेरी मस्ती में झूमे जग सारा।।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मुख्य भाव यह है कि भगवान श्री कृष्ण की मस्ती, उनकी लीला और उनकी माया में पूरा संसार झूम रहा है। "तेरी मस्ती में झूमे जग सारा" का अर्थ है कि हे प्रभु, आपकी दिव्य आनंदमयी लीला में समस्त ब्रह्मांड नाच रहा है। यहाँ "मस्ती" शब्द का तात्पर्य केवल आनंद नहीं, बल्कि उस परम आनंद से है जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ता है। भक्त कहता है कि संसार के सभी जीव-जंतु, पेड़-पौधे, नदियाँ, पर्वत सब आपकी मस्ती में झूम रहे हैं। जब भक्त श्री कृष्ण के चरणों में झुकता है, तो वह अपने अहंकार को त्याग कर पूर्ण शरणागति को प्राप्त होता है।
दूसरे अंतरे में भक्त कहता है कि आपके नाम की महिमा अत्यंत न्यारी है। आपका नाम इतना शक्तिशाली है कि जो भी इसका स्मरण करता है, वह भवसागर से तर जाता है। कलियुग में नाम जप ही परम साधन है। तीसरे अंतरे में भक्त श्री कृष्ण के रूप की छटा का वर्णन करता है। उनका रूप इतना मनोहर है कि पूरा संसार उसमें खो जाता है। चौथे अंतरे में भक्त कहता है कि आपके प्रेम की गंगा बहती है, और जो भी इस प्रेम में डूब जाता है, वही धन्य हो जाता है। पाँचवें अंतरे में भक्त कहता है कि आपके भजन की तान इतनी सुहावनी है कि पूरा जगत उसमें मगन हो जाता है।
इस भजन का गहरा आध्यात्मिक अर्थ यह है कि मनुष्य जब तक अपने अहंकार और मोह में बंधा रहता है, तब तक वह दुःखी रहता है। लेकिन जब वह श्री कृष्ण की मस्ती में झूमने लगता है, अर्थात जब वह अपने जीवन को भगवान के चरणों में समर्पित कर देता है, तो वह सभी दुःखों से मुक्त हो जाता है। यह भजन साधक को यह सिखाता है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन मुख्य रूप से भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है, जो प्रेम, करुणा और आनंद के देवता हैं। इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह भक्त के हृदय में श्री कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का भाव जगाता है। भजन का संगीत और लय इतनी मधुर है कि श्रोता स्वयं को झूमने से रोक नहीं पाता। यह भजन राधा कृष्ण भजन की परंपरा में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन उसी भावना को जीवंत करता है। इस भजन को सुनने और गाने से मन को अपार शांति मिलती है, भय और चिंता दूर होती है, और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए है जो श्री कृष्ण की लीलाओं में आनंद लेते हैं और उनके प्रेम में डूबना चाहते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को किसी भी शुभ अवसर पर गाया और सुना जा सकता है, लेकिन कुछ विशेष समय और पर्व इसे और भी पावन बना देते हैं:
- समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में या संध्या समय आरती के बाद इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
- पर्व: जन्माष्टमी, राधाष्टमी, हरियाली तीज, गोवर्धन पूजा, और एकादशी के दिन इस भजन का विशेष महत्व है।
- विधि: भजन गाने से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। श्री कृष्ण की मूर्ति या चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें। तुलसी दल और माखन-मिश्री का भोग अर्पित करें। फिर शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ इस भजन का गायन करें।
- ध्यान: भजन गाते समय मन में श्री कृष्ण की बाल लीलाओं, उनकी मुरली और उनके प्रेम का ध्यान करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"तेरी मस्ती में झूमे जग सारा" भजन किसने गाया है?
यह भजन प्रसिद्ध भक्ति गायक हेमंत बृजवासी (Hemant Brijwasi) द्वारा गाया गया है। उनकी मधुर आवाज़ में यह भजन विशेष रूप से लोकप्रिय है।
इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि भगवान श्री कृष्ण की मस्ती और प्रेम में पूरा संसार झूम रहा है। भक्त को चाहिए कि वह अपने अहंकार को त्याग कर श्री कृष्ण के चरणों में पूर्ण शरणागति प्राप्त करे।
क्या यह भजन राधा कृष्ण भजन की श्रेणी में आता है?
हाँ, यह भजन राधा कृष्ण भजन की श्रेणी में आता है क्योंकि इसका केंद्रीय भाव श्री कृष्ण के प्रेम, उनकी लीलाओं और उनकी मस्ती से जुड़ा है।
इस भजन को गाने का सर्वोत्तम समय कौन सा है?
प्रातःकाल या संध्या आरती के समय इस भजन का गायन सर्वोत्तम माना जाता है। जन्माष्टमी और राधाष्टमी पर इसका विशेष महत्व है।
क्या इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है?
हाँ, इस भजन की मधुर लय और भक्ति भावना मन को शांति प्रदान करती है, चिंता और तनाव को दूर करती है, और आध्यात्मिक आनंद का अनुभव कराती है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे भक्ति परंपरा, श्रीमद्भगवद्गीता और कृष्ण भक्ति साहित्य के संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। भजन के बोल पारंपरिक संकीर्तन परंपरा से लिए गए हैं और उनका भावार्थ सरल हिंदी में प्रस्तुत किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस सामग्री को भक्ति भाव से ग्रहण करें और अपने स्थानीय परंपरा के अनुसार भजन का गायन करें।
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