Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे (Hum Tumse Mohabbat Kar Baithe)

पढ़ें हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे | Hum tumse mohabbat kar baithe | Murli Wale Manmohan Krishna Bhajan - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ

श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित और उनके असीम प्रेम में सराबोर करने वाला भजन "हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे" (Hum Tumse Mohabbat Kar Baithe - Murli Wale Manmohan Krishna Bhajan) आधुनिक भक्ति संगीत का एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी रचना है। मुरली वाले मनमोहन की त्रिभंग मुद्रा, उनकी मोहिनी मूरत और उनकी बंसी की मादक तान पर सुध-बुध खो बैठना ही भक्त का वास्तविक स्वरूप है। इस भजन में एक भक्त और परमात्मा के बीच के उस अटूट रिश्ते को उजागर किया गया है जहाँ लौकिक प्रेम की भाषा का उपयोग अलौकिक और पारमर्मिक प्रेम को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। जब कोई जीवात्मा श्री बांके बिहारी या मुरली वाले मनमोहन के चरणों में अपनी प्रीति समर्पित करती है, तब उसे सांसारिक मोह-माया के बंधनों से मुक्ति का आभास होने लगता है। 'भaktilok' के इस पावन आलेख में हम इस अद्भुत भजन के संपूर्ण लिरिक्स, गूढ़ भावार्थ, इसकी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि, गायन विधि और जीवन पर इसके प्रभाव का विस्तार से अध्ययन करेंगे। यह भजन न केवल कानों को तृप्त करता है, बल्कि साधक के अंतःकरण को भी शुद्ध कर उसे ब्रज की दिव्य भावनाओं से ओत-प्रोत कर देता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

स्थाई (मखड़ा):
हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे, हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे,
हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे...

अंतरा 1:
(फिर इस अर्थ पर हमें एहसास हुआ की...)
तुम्हारी राधा हमें भा गई,
तेरी प्रीत की ज्योति दिल में छा गई।
तुम ही हो मेरे आराध्य, तुम ही हो मेरे तारणहार,
तेरे बिना यह जीवन है बिल्कुल ही बेकार।

अंतरा 2:
तेरे ही नाम से, तेरी ही छवि से पूरे होते हैं मेरे सपने,
इस दुनिया में अब तो हमें सब लगने लगे अपने।
तुम्हारे बिना जीवन अधूरा है हे मुरली वाले,
इस भवसागर से अब तुम ही हमको हो पाल लगाने वाले।

अंतरा 3:
इस मोहब्बत में सारा संसार समा गया है,
तेरा रूप मेरे रोम-रोम में बस गया है।
अब और कुछ नहीं चाहिए हमको ए मेरे मोहन,
बस तेरे चरणों में बीते मेरा यह सारा जीवन।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का केंद्रीय भाव 'मधुर भक्ति' या 'प्रेमाभक्ति' है, जिसका वर्णन श्रीमद्भागवत महापुराण और नारद भक्ति सूत्र में प्रमुखता से मिलता है। जब भक्त कहता है— "हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे"— तो यहाँ 'मोहब्बत' शब्द केवल किसी साधारण मानव प्रेम का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह जीवात्मा का परमात्मा के प्रति होने वाला परम समर्पण और आत्म-विस्मृति है। सांसारिक भाषा में जिसे प्रेम कहा जाता है, जब उसे भगवान की ओर मोड़ दिया जाता है, तो वह 'भक्ति' बन जाती है।

भजन की अगली पंक्ति— "(फिर इस अर्थ पर हमें एहसास हुआ की...) तुम्हारी राधा हमें भा गई"— अत्यंत गहरी दार्शनिक और आध्यात्मिक सत्य को दर्शाती है। सनातन धर्म में भगवान कृष्ण की आराधना उनकी शक्ति, अर्थात् श्री राधा रानी के बिना अधूरी मानी जाती है। राधा जी प्रेम की अधिष्ठात्री देवी हैं। जब कोई भक्त कृष्ण से प्रेम करता है, तो उसे स्वतः ही राधा रानी का वह महान भाव समझ आ जाता है जो समर्पण, त्याग और निष्काम प्रेम की पराकाष्ठा है। राधा रानी का चरित्र यह सिखाता है कि भगवान से प्रेम करने का अर्थ है अपनी अहंता और अहंकार को पूरी तरह मिटा देना।

भजन में आगे भक्त अपने आराध्य को अपना तारणहार स्वीकार करता है और यह मानता है कि उनके बिना यह जीवन व्यर्थ है। भगवान श्री कृष्ण केवल लीलाधारी ही नहीं, बल्कि हर संकट में अपने भक्तों की रक्षा करने वाले कन्हैया हैं। इस भजन का प्रत्येक शब्द साधक को इस बात का स्मरण कराता है कि सांसारिक बंधनों और दुखों से पार पाने का एकमात्र मार्ग गोविंद की शरण में जाना है। जब भक्त यह महसूस करता है कि "इस मोहब्बत में सारा संसार समा गया है", तो उसका हृदय विशाल हो जाता है और उसे संपूर्ण सृष्टि में अपने प्रियतम कन्हैया के ही दर्शन होने लगते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन मुरली वाले मनमोहन (श्री कृष्ण) के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • मधुर प्रेम भाव: इसमें माधुर्य भाव की भक्ति का सुंदर समावेश है, जो मीराबाई और सूरदास जैसे महान संतों की परंपरा की याद दिलाता है।
  • राधा-कृष्ण का समन्वय: श्री कृष्ण के साथ-साथ श्री राधा रानी के प्रति समर्पण इस भजन की आध्यात्मिक गहराई को और अधिक बढ़ा देता है।
  • मानसिक शांति और आनंद: इसके नियमित श्रवण या गायन से मन में चल रही उथल-पुथल शांत होती है और एक अलौकिक आनंद की अनुभूति होती है।
  • समर्पण का संदेश: यह भजन अहंकार का त्याग कर भगवान के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भक्ति संगीत के लिए समय और स्थान से अधिक साधक के मन की पवित्रता का महत्व होता है, फिर भी कुछ विशेष अवसरों पर इस भजन का गान करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है:

  • ब्रह्म मुहूर्त एवं संध्याकाल: सुबह उठकर पूजा के समय या शाम को संध्या वंदन के पश्चात इस भजन को सुनने से मन दिनभर की चिंताओं से मुक्त रहता है।
  • कीर्तन एवं सत्संग: श्री बांके बिहारी, खाटू श्याम बाबा या किसी भी राधा-कृष्ण के सत्संग और संकीर्तन समारोह में इस भजन को समूह में गाया जा सकता है।
  • जन्माष्टमी एवं राधिकाष्टमी: श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राधा जन्मोत्सव और गोपाष्टमी जैसे पावन पर्वों पर इस भजन का गान उत्सव के आनंद को द्विगुणित कर देता है।
  • मानसिक एकाग्रता के समय: जब भी मन अशांत हो या जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हो, तब इस भजन का श्रवण संबल प्रदान करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में लीलाधर भगवान श्री कृष्ण और प्रेम स्वरूपा श्री राधा रानी हैं। श्री कृष्ण को वेदों और पुराणों में पूर्ण पुरुषोत्तम माना गया है जो अपनी बंसी की मधुर तान से संपूर्ण चराचर जगत को सम्मोहित कर लेते हैं। ब्रज भूमि में गोपियों और संतों द्वारा की गई कृष्ण भक्ति को भारतीय संस्कृति में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई, सूरदास और रसखान जैसे महान संतों ने इसी प्रेम मार्ग को अपनाकर मोक्ष प्राप्त किया था। यह भजन उसी महान संप्रदाय और परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

आधुनिक डिजिटल युग में और यूट्यूब जैसे माध्यमों पर 'मुरली वाले मनमोहन' जैसे लोकप्रिय चैनलों और कलाकारों द्वारा ऐसे भजनों को जीवंत किया गया है। लोक संगीत और शास्त्रीय धुनों के मिश्रण से तैयार किए गए ये भजन युवाओं और वृद्धों दोनों को समान रूप से आकर्षित करते हैं। इसकी पृष्ठभूमि में ब्रज की वह शाश्वत प्रेम परंपरा है जहाँ भगवान को पाने के लिए किसी जटिल कर्मकांड की नहीं, बल्कि सच्चे और निश्छल प्रेम की आवश्यकता होती है। रचनाकारों ने आधुनिक संगीत शैली में पारंपरिक भक्ति भाव को पिरोकर इसे आज की पीढ़ी के लिए सुलभ बनाया है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सहज और आम बोलचाल की हिंदी (खड़ी बोली) है, जिसमें ब्रज संस्कृति की मिठास घुली हुई है। इसमें किसी भी प्रकार के कठिन संस्कृत के शब्दों का प्रयोग न करके सीधे दिल को छू लेने वाले शब्दों को चुना गया है। काव्य शैली की दृष्टि से यह एक मुक्तक गीत (Free-flowing Bhajan) है जिसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सहज प्रयोग देखने को मिलता है। शब्दों की पुनरावृत्ति (जैसे "हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे...") इस भजन के स्थायी भाव को और अधिक गहरा और प्रभावशाली बनाती है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल गाने या सुनने की वस्तु नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के लिए एक अमूल्य दार्शनिक संदेश देता है:

  • निसंकोच समर्पण: जिस प्रकार भक्त बिना किसी संकोच के अपने प्रेम को स्वीकार करता है, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन के सभी कर्म ईश्वर को समर्पित कर देने चाहिए।
  • अहंकार का त्याग: 'तुम ही हो मेरे तारणहार' की भावना हमारे भीतर के इस अहंकार को समाप्त करती है कि हम अपने जीवन के अकेले कर्ताधर्ता हैं।
  • सर्वभूतेषु कृष्ण: जब भजन में यह कहा जाता है कि "इस मोहब्बत में सारा संसार समा गया है", तो यह अद्वैत और सर्वव्यापिनी भक्ति का संदेश देता है कि कण-कण में ईश्वर का वास है।
  • धैर्य और संतोष: भगवान के चरणों में प्रीति लग जाने के बाद सांसारिक दुखों का प्रभाव कम हो जाता है और जीवन में एक अचल संतोष की प्राप्ति होती है।
  • भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

    शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संधर्भ / आध्यात्मिक प्रसंग
    मोहब्बत गहरा प्रेम, प्रीति, अनुराग जीवात्मा का परमात्मा के प्रति अगाध समर्पण
    आराध्य जिसकी पूजा या उपासना की जाए भगवान श्री कृष्ण या इष्टदेव
    तारणहार पार लगाने वाला, उद्धार करने वाला संसार रूपी भवसागर से मुक्त करने वाला प्रभु
    रोम-रोम शरीर का प्रत्येक अंग, कण-कण भक्त के मन और शरीर में पूरी तरह बसे हुए प्रभु
    भवसागर जन्म-मृत्यु का चक्र, संसार माया से भरा यह संसार जिससे पार पाना है

    पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

    पंक्ति: "हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे, हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे..."
    भावार्थ: भक्त अपने भगवान के सम्मुख अत्यंत प्रेम और अधिकार के साथ यह स्वीकार करता है कि उसने अपना दिल संसार के प्रपंचों से हटाकर केवल और केवल मुरली वाले मनमोहन को सौंप दिया है। यह समर्पण पूरी तरह स्वेच्छा से किया गया है।

    पंक्ति: "तुम्हारी राधा हमें भा गई, तेरी प्रीत की ज्योति दिल में छा गई।"
    भावार्थ: कृष्ण प्रेम की जब गहराई बढ़ती है, तो भक्त को राधारानी का वह आदर्श स्वरूप समझ आता है जो प्रेम की पराकाष्ठा है। भगवान के प्रति प्रेम की वह ज्योति भक्त के हृदय को प्रकाशित कर देती है।

    पंक्ति: "तुम ही हो मेरे आराध्य, तुम ही हो मेरे तारणहार, तेरे बिना यह जीवन है बिल्कुल ही बेकार।"
    भावार्थ: भक्त यह मानता है कि इस दुनिया में उसके सर्वोपरि इष्ट केवल कन्हैया ही हैं। इस नश्वर संसार में भगवान के स्मरण के बिना जीवन व्यर्थ और उद्देश्यहीन है।

    पंक्ति: "इस मोहब्बत में सारा संसार समा गया है, तेरा रूप मेरे रोम-रोम में बस गया है।"
    भावार्थ: जब भगवान से सच्चा प्रेम हो जाता है, तब साधक को संपूर्ण ब्रह्मांड में भगवान ही नजर आने लगते हैं। उसका कोई भी अंग या विचार भगवान की स्मृति से अछूता नहीं रहता।

    भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

    श्री कृष्ण की आराधना और उनके प्रति प्रेम को प्रकट करने के लिए सनातन धर्म में कई प्रसिद्ध श्लोक और मंत्र प्रचलित हैं। इस भजन के भाव से मेल खाता एक अत्यंत प्रसिद्ध श्लोक निम्नलिखित है:

    "कस्तूरी तिलकं लालेटा लपटले वक्ष्स्थल कौस्तुभं,
    नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणुं करे कंकणम्।<> सर्वांगे हरिचंदनं सुललितं कंठे च हारं वजे,<> गोपास्त्रीवेष्टितो विजयते गोपाल चूड़ामणिः॥"

    भावार्थ: जिनके मस्तक पर कस्तूरी का तिलक है, वक्षस्थल पर कौस्तुभ मणि सुशोभित है, जिनकी नाक में सुंदर मोती और हाथ में बंसी है, ऐसे गोपाल चूड़ामणि श्री कृष्ण की जय हो, जो गोपियों से घिरे हुए हैं।

    एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

    श्रेणी विवरण
    भजन का नाम हम तुमसे मोहब्बत कर बैठे (Hum Tumse Mohabbat Kar Baithe)
    प्रमुख देवता भगवान श्री कृष्ण एवं श्री राधा रानी
    भक्ति भाव माधुर्य भाव, प्रेमाभक्ति एवं पूर्ण समर्पण
    भाषा सरल हिंदी / ब्रज शैली
    उपयुक्त अवसर दैनिक पूजा, संकीर्तन, सत्संग, जन्माष्टमी, एकादशी
    आध्यात्मिक फल मन की शांति, मानसिक तनाव मुक्ति और ईश्वर भक्ति की प्राप्ति
    संबंधित मंच / शैली मुरli वाले मनमोहन भजन परंपरा

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

    इस भजन के मुख्य आराध्य लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण (मुरली वाले मनमोहन) और श्री राधा रानी हैं।

    इस भजन में 'माधुर्य भाव' और 'प्रेमाभक्ति' का सुंदर वर्णन किया गया है, जहाँ भक्त अपने आराध्य के प्रति अगाध प्रेम और पूर्ण समर्पण व्यक्त करता है।

    हाँ, इस भजन को सुबह या संध्या आरती के समय, या व्यक्तिगत ध्यान और कीर्तन के दौरान बहुत ही शांतिपूर्वक गाया या सुना जा सकता है।

    इस पंक्ति का अर्थ है कि कृष्ण भक्ति के मार्ग पर चलते हुए भक्त को श्री राधा रानी का वह महान प्रेम और समर्पण भाव समझ आ जाता है जो भक्ति की वास्तविक पहचान है।

    इसके निरंतर श्रवण से मन की व्याकुलता और सांसारिक चिंताएं दूर होती हैं, चित्त शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    बिल्कुल! इसकी सरल भाषा और मधुर धुन के कारण यह युवाओं और बच्चों के बीच बहुत लोकप्रिय है, जो उन्हें भारतीय संस्कृति और संगीत से जोड़ता है।

    इसे आधुनिक संकीर्तन शैली, सुगम संगीत और लोक धुन के मिश्रण के साथ हारमोनियम, ढोलक और बांसुरी की संगत में गाया जाता है।

    भगवान कृष्ण की शरण में जाने से अहंकार समाप्त होता है, क्षमा और करुणा का भाव जागृत होता है तथा मनुष्य निष्काम भाव से अपने कर्तव्यों का पालन करना सीखता है।

    संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

    संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह आलेख श्री कृष्ण भक्ति की पारंपरिक मान्यताओं, आधुनिक सुगम संगीत के रुझानों और पाठकों की आध्यात्मिक जिज्ञासा को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है। इसमें किसी भी प्रकार के असत्यापित दावों से बचा गया है और पूरी सामग्री विशुद्ध रूप से भक्ति रस पर केंद्रित है।

    स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

    • श्रीमद्भागवत महापुराण - गीताप्रेस गोरखपुर संस्करण।
    • नारद भक्ति सूत्र एवं सांदीपनि मुनि आश्रम के पारंपरिक संकीर्तन ग्रंथ।
    • ब्रज क्षेत्र की लोक संस्कृति एवं संकीर्तन परंपरा पर आधारित शोध लेख।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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