Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

ओढ़उल फुलवा में कवन गुनवा (Odhul Ke Phulawa Me Kawan Gunawa)

उज्जला उपाध्याय का प्रसिद्ध भोजपुरी देवी गीत ओढ़उल फुलवा में कवन गुनवा के लिरिक्स और भावार्थ पढ़ें। माता रानी के इस मधुर भजन का आनंद लें।

Devi Bhajan / Bhojpuri Devigeet

ओढ़उल फुलवा में कवन गुनवा | Odhul Ke Phulawa Me Kawan Gunawa Lyrics in hindi | Ujala Upadhyay Bhojpuri Devigeet Bhakti Song | Mata Bhajan

माता आदिशक्ति जगदंबा की उपासना का भारतीय सनातन संस्कृति में अत्यंत विशिष्ट स्थान है। नवरात्रि हो अथवा मांगलिक अनुष्ठान, देवी भगवती के चरणों में पुष्प अर्पित करने की परंपरा सदियों पुरानी है। उज्जला उपाध्याय द्वारा गाया गया यह लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत "ओढ़उल फुलवा में कवन गुनवा" माता रानी के चरणों में समर्पित एक अत्यंत भावपूर्ण और मधुर रचना है। इस भजन में लोकभाषा की मिठास के साथ-साथ उच्च कोटि की आध्यात्मिक भावना छिपी हुई है, जिसमें भक्त यह जानने का प्रयास करता है कि आखिर माता को गुड़हल (ओढ़उल) का लाल फूल इतना प्रिय क्यों है और उस साधारण से पुष्प में ऐसा कौन सा विशेष गुण विद्यमान है जो जगत जननी को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है।

भोजपुरी लोक संगीत की परंपरा में देवी गीतों का एक विशाल भंडार है, जहां माता को अपनी बेटी, बहन या मां के रूप में देखा जाता है। उज्जला उपाध्याय की ओजस्वी और मधुर आवाज ने इस भजन को अमर बना दिया है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल, इसका सरल हिंदी अर्थ, दार्शनिक महत्व, गायन की विधि और इससे जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों का रसास्वादन करेंगे। माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए इस भजन का स्मरण करना साधक के लिए अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

शुद्ध उच्चारण और पूर्ण भक्ति भाव के साथ उज्जला उपाध्याय द्वारा गाए गए इस प्रसिद्ध भोजपुरी देवी गीत के बोल नीचे दिए गए हैं:


स्थाई (मखड़ा):

ओढ़उल फुलवा में कवन गुनवा,
की रिझले भवानी हो माई...

अंतरा 1:

लाल-लाल फुलवा माई के सोहे,
देखि-देखि मनवा भक्तन के मोहे।
अरे दर्शन पाके तरसेला दुनिया,
की रिझले भवानी हो माई...

अंतरा 2:

मइया के चरणों में स्वर्ग समाइल,
भक्तन के संकट माई हरइले।
तूही त शारदा तूही भवानी,
की रिझले भवानी हो माई...

अंतरा 3:

उज्जला उपाध्याय गुण गावे अहिशीश,
चरणन में झुकावे रोज अपना सीस।
कृपा बनाइ रखना ओढ़उल वाली,
की रिझले भवानी हो माई...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन एक सरल किंतु अत्यंत गहरा दार्शनिक प्रश्न प्रस्तुत करता है। लोक-संस्कृति में गुड़हल के फूल को 'ओढ़उल' कहा जाता है। लाल रंग का यह पुष्प माता दुर्गा को अति प्रिय है। भजन की पंक्तियों के माध्यम से भक्त के मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न होती है कि इस साधारण से वन-पुष्प में ऐसा कौन सा गुण या रहस्य है, जिसे देखकर साक्षात जगदंबा भवानी इतनी जल्दी प्रसन्न (रिझ) हो जाती हैं।

भावार्थ यह है कि भगवान को महंगे और दिखावटी उपार नहीं, बल्कि भक्त की सच्ची भावना और समर्पण चाहिए। गुड़हल का लाल रंग माता के प्रचंड तेज, ऊर्जा और क्रोध (दुष्टों के लिए) तथा करुणा (भक्तों के लिए) दोनों का प्रतीक है। जब एक साधक पूरी श्रद्धा के साथ माता को यह लाल पुष्प अर्पित करता है, तो माता उसके सभी दुखों को हर लेती हैं। इस भजन का मुख्य संदेश यही है कि भगवान बाह्य आडंबरों से नहीं, बल्कि आंतरिक प्रेम और शुद्ध भक्ति से रीझते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

भोजपुरी देवी गीतों में लोक जीवन की जो सुगंध मिलती है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। इस भजन की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • देवी स्वरूप का बखान: इसमें माता दुर्गा के लाल स्वरूप और उनके श्रृंगार का सुंदर वर्णन किया गया है।
  • सादा समर्पण: महंगे फूलों के स्थान पर सहज उपलब्ध 'ओढ़उल' (गुड़हल) के माध्यम से भक्ति की सहजता को दर्शाया गया है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के श्रवण से मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: यह गीत पूर्वांचल और बिहार की लोक संस्कृति, व्रत-त्योहारों और नवरात्रि की परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

माता के इस पावन गीत को कब और कैसे सुनना चाहिए, इसका विवरण नीचे दिया गया है:

  • शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों में सुबह और शाम की पूजा के समय इसे विशेष रूप से सुना जा सकता है।
  • दैनिक पूजा: प्रातः काल स्नान करके माता के मंदिर या घर के पूजा स्थल पर दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात यह गीत बजाया जा सकता है।
  • जागरण एवं चौकी: माता की चौकी, जगराता या संकीर्तन के दौरान महिला मंडली द्वारा यह अत्यंत उत्साह के साथ गाया जाता है।
  • शुक्रवार और मंगलवार: माता के वारों पर विशेष रूप से इस भजन का पाठ या श्रवण करने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity & Saint

इस भजन की मुख्य आराध्य देवी माँ दुर्गा / भवानी हैं, जिन्हें हिंदू धर्म में शक्ति का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति, पालन और संहार की शक्ति उन्हीं में निहित है। इसके साथ ही, इस भजन को अपनी सुरीली आवाज से सजाने वाली लोकप्रिय भोजपुरी गायिका उज्जला उपाध्याय हैं, जिन्होंने अपनी कला के माध्यम से लोक भक्ति को घर-घर तक पहुँचाया है। उनकी गायकी में ग्रामीण परिवेश की मिठास और शास्त्रीय सुरों का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी लोकभाषा में रचित है। भोजपुरी अपनी ओज, मिठास और सरलता के लिए जानी जाती है। इस गीत में रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। 'ओढ़उल फुलवा' (गुड़हल का फूल) और 'रिझले भवानी' जैसे शब्द लोक जीवन के सीधे संवाद को दर्शाते हैं। काव्य शैली गीतात्मक है, जिसे आसानी से गुनगुनाया जा सकता है। यही कारण है कि यह गीत सुनने वाले के हृदय को सीधे स्पर्श करता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

भजनों का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को उच्च आदर्शों की ओर ले जाना होता है। इस भजन से हमें निम्नलिखित जीवन सीख मिलती हैं:

  • सरलता और सहजता: ईश्वर को पाने के लिए बड़े-बड़े विधानों की नहीं, बल्कि एक सच्चे और निर्मल मन की आवश्यकता होती है।
  • कृतज्ञता का भाव: माता के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए क्योंकि वही हमारे जीवन के समस्त संकटों को दूर करती हैं।
  • अहंकार का त्याग: पूजा-पाठ में दिखावा छोड़कर यदि हम अपने अहंकार का त्याग कर दें, तो ईश्वर स्वतः प्रसन्न हो जाते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
ओढ़उल गुड़हल का फूल माता को अति प्रिय लाल रंग का एक विशेष पुष्प
फुलवा पुष्प / फूल भक्ति का प्रतीक जो भक्त अर्पित करता है
कवन गुनवा कौन सा गुण / विशेषता भक्त की माता से जिज्ञासा
रिझले प्रसन्न होना / रीझना माता का भक्त पर संतुष्ट होना
भवानी माता दुर्गा / पार्वती जगत जननी का करुणामयी रूप

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"ओढ़उल फुलवा में कवन गुनवा, की रिझले भवानी हो माई..."
इस मुख्य पंक्ति में गायिका या भक्त माता से पूछता है कि हे माता भवानी! इस साधारण से ओढ़उल (गुड़हल) के फूल में ऐसी कौन सी खूबी है, जिसे देखकर आप इतनी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं?

"लाल-लाल फुलवा माई के सोहे, देखि-देखि मनवा भक्तन के मोहे..."
माता के चरणों में अर्पित वह लाल रंग का फूल ऐसा शोभायमान होता है कि उसे देखकर सभी भक्तों का मन मोह लिया जाता है। यह लाल रंग माता के शौर्य और ऊर्जा का प्रतीक है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं मंत्र | Related Mantra & Shlok

देवी भगवती की उपासना करते समय निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना इस भजन के प्रभाव को और अधिक बढ़ा देता है:

ॐ सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तु ते॥

यह मंत्र माता दुर्गा के शाश्वत और कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन करता है, जो भक्त के जीवन के सभी संकटों का निवारण करती हैं।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम ओढ़उल फुलवा में कवन गुनवा (Odhul Ke Phulawa Me Kawan Gunawa)
गायिका उज्जला उपाध्याय (Ujala Upadhyay)
संगीत शैली भोजपुरी देवी गीत / लोक भजन
आराध्य देवी माँ दुर्गा / भवानी / आदिशक्ति
भाषा भोजपुरी / हिंदी
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण और प्रेम
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, देवी पूजा, जागरण और सत्संग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. 'ओढ़उल फुलवा में कवन गुनवा' भजन के गायक/गायिका कौन हैं?

इस लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत को प्रसिद्ध गायिका उज्जला उपाध्याय ने अपनी मधुर आवाज में गाया है।

2. 'ओढ़उल' शब्द का क्या अर्थ है?

भोजपुरी और मैथिली लोकभाषा में 'ओढ़उल' गुड़हल के लाल फूल को कहा जाता है, जो माता दुर्गा को अत्यंत प्रिय है।

3. यह भजन मुख्य रूप से किस अवसर पर सुना जाता है?

यह भजन शारदीय और चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, मंगलवार/शुक्रवार की पूजा तथा देवी जागरण के समय विशेष रूप से सुना और गाया जाता है।

4. माता दुर्गा को लाल रंग का फूल क्यों चढ़ाया जाता है?

लाल रंग ऊर्जा, साहस, तेज और शक्ति का प्रतीक है। माता आदिशक्ति दुर्गा ऊर्जा की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिए उन्हें लाल गुड़हल का फूल अति प्रिय है।

5. क्या यह भजन घर पर सामान्य पूजा के दौरान गाया जा सकता है?

हाँ, आप इसे घर पर दैनिक पूजा, संध्या आरती या नवरात्रि अनुष्ठान के दौरान आसानी से सुन या गा सकते हैं।

6. इस भजन से हमें क्या आध्यात्मिक संदेश मिलता है?

यह भजन सिखाता है कि ईश्वर को महंगे उपहारों की नहीं, बल्कि भक्त की सच्ची भावना, प्रेम और समर्पण की आवश्यकता होती है।

7. इस भजन को किस भाषा में गाया गया है?

यह भजन ठेठ भोजपुरी लोकभाषा में रचित है, जो पूर्वांचल और बिहार की संस्कृति को दर्शाता है।

8. ऐसे भजन सुनने से मानसिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ता है?

देवी गीत सुनने से मन को शांत, सकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक शक्ति की प्राप्ति होती है, जिससे तनाव दूर होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok) के संपादकीय दल द्वारा सनातन संस्कृति, लोक संगीत और देवी परंपराओं के गहन अध्ययन के पश्चात तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी और भक्ति रस से ओतप्रोत सामग्री प्रदान करना है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भारतीय लोक संगीत और भोजपुरी देवी गीत परंपरा।
  • सनातन धर्म ग्रंथ एवं दुर्गा सप्तशती के विभिन्न पावन प्रसंग।
  • पारंपरिक लोक साहित्य और क्षेत्रीय संकीर्तन संग्रह।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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