Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

चली मईहर नगरिया - मोना सिंह (Chali Maihar Nagariya)

चली मईहर नगरिया देवीगीत मोना सिंह और रितिका पांडेय की आवाज में। माँ शारदा के इस लोकप्रिय भजन का संदर्भ एवं व्याख्या सहित आनंद लें। | Bhaktilok

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती की संयुक्त कृपा का गान करने वाला यह देवीगीत "चली मईहर नगरिया" सनातन शक्ति परंपरा की उस गहरी भक्ति-धारा का प्रतीक है, जिसमें भक्त जगत जननी के चरणों में स्वयं को समर्पित कर देता है। मोना सिंह एवं रितिका पांडेय की मधुर स्वर-लहरियों में सजी यह रचना माता के ममतामयी, दुष्टनाशिनी एवं कल्याणकारी स्वरूप का वर्णन करती है। मईहर नगरी — जो मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित माँ शारदा का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है — इस गीत का केंद्रीय प्रतीक है। भक्त जब "चली मईहर नगरिया" का स्वर उठाता है, तो वह केवल एक भौगोलिक यात्रा का वर्णन नहीं करता, बल्कि अपने भीतर की चेतना को माता के दरबार तक पहुँचाने की आंतरिक यात्रा प्रारंभ करता है। यह गीत श्रद्धा, करुणा, शक्ति और पवित्रता का ऐसा संगम है, जो साधक के हृदय में भक्ति-भाव जाग्रत करता है और जीवन के कष्टों को माता के आशीर्वाद से हल्का कर देता है। नवरात्रि, देवी भागवत पाठ, ज्योति कलश स्थापना तथा माता के जागरण जैसे अवसरों पर यह देवीगीत विशेष रूप से गाया जाता है।

सम्पूर्ण देवीगीत लिरिक्स | Complete Devi Geet Lyrics

मुखड़ा (Mukhda):

चली मईहर नगरिया, चली मईहर नगरिया,
माता के दरबार चली रे,
चली मईहर नगरिया।

अंतरा १:

शेरों वाली माता मेरी, पालनहारी जग की,
भक्तों के संकट हरती, दुखिया के दुख हर ले,
जय जय बोलो माता की, जय जय बोलो शेरों वाली की,
चली मईहर नगरिया।

अंतरा २:

माँ शारदा के दरबार में, ज्योति जले अखंड रे,
भक्त जन आते दूर-दूर से, मन्नत लेकर माँग रे,
हर मुरादें पूरी करती, माँ बड़ी दयालु रे,
चली मईहर नगरिया।

अंतरा ३:

नवरात्रि के पावन दिनों में, जागरण सजता रे,
ढोल मंजीरा बजता, भक्ति रस बरसता रे,
माता रानी की महिमा, जग में गाई जाती रे,
चली मईहर नगरिया।

अंतरा ४:

जो भी भक्त श्रद्धा से, माता के दर आता रे,
खाली झोली लेकर, कोई नहीं जाता रे,
माँ की कृपा से हर दुख, पल में मिट जाता रे,
चली मईहर नगरिया।

अंतरा ५:

जय जय माँ शारदे, जय जय जगदंबे,
जय जय महालक्ष्मी, जय जय महासरस्वती,
भक्तों की रक्षा करती, दुष्टों का नाश करती,
चली मईहर नगरिया।

समापन:

चली मईहर नगरिया, चली मईहर नगरिया,
माता के दरबार चली रे,
चली मईहर नगरिया।

देवीगीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Devi Geet Meaning & Bhavarth

इस देवीगीत का मूल स्वर माता के प्रति पूर्ण समर्पण और उनकी शरणागति का है। "चली मईहर नगरिया" पंक्ति भक्त की आंतरिक यात्रा का प्रतीक है — वह भक्त जो अपने जीवन के बोझ, पाप, कष्ट और अज्ञान को लेकर माता के दरबार की ओर बढ़ता है। मईहर नगरी यहाँ केवल एक स्थान नहीं, बल्कि श्रद्धा की वह भूमि है जहाँ माँ शारदा विराजमान हैं और जहाँ भक्त की हर पुकार सुनी जाती है।

गीत के प्रथम अंतरे में भक्त माता को "शेरों वाली" और "पालनहारी" कहकर संबोधित करता है। यह संबोधन माता दुर्गा के उस स्वरूप की ओर संकेत करता है, जिसमें वे सिंह पर आरूढ़ होकर अधर्म का नाश करती हैं और साथ ही अपने भक्तों की ममतामयी माँ के रूप में रक्षा करती हैं। "दुखिया के दुख हर ले" पंक्ति में भक्त की विनम्र प्रार्थना है — वह माता से अपने दुखों को हरने की प्रार्थना करता है, यह जानते हुए कि माँ से बड़ा कोई सहारा नहीं।

दूसरे अंतरे में माँ शारदा के दरबार की अखंड ज्योति का वर्णन है। यह ज्योति केवल दीपक की लौ नहीं, बल्कि ज्ञान, चेतना और आशा का प्रतीक है। भक्त दूर-दूर से आते हैं और अपनी मन्नतें माँगते हैं — यह दृश्य भारतीय तीर्थ परंपरा की सजीव झलक है। माँ की दयालुता का वर्णन करते हुए भक्त कहता है कि वे हर मुराद पूरी करती हैं, क्योंकि माँ का हृदय करुणा से भरा है।

तीसरे अंतरे में नवरात्रि और जागरण का वर्णन है। ढोल, मंजीरा और भक्ति-रस का वर्णन करते हुए यह गीत सामूहिक भक्ति की उस परंपरा को उजागर करता है, जिसमें पूरा समाज एक साथ माता की महिमा गाता है। चौथे अंतरे में भक्त की दृढ़ श्रद्धा प्रकट होती है — जो भी श्रद्धा से माता के दर आता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता। यह श्रद्धा का सार्वभौमिक सत्य है, जो भक्त और भगवान के बीच का अटूट संबंध दर्शाता है।

अंतिम अंतरे में भक्त माँ शारदे, जगदंबे, महालक्ष्मी और महासरस्वती की संयुक्त स्तुति करता है। यह त्रिदेवी स्वरूप — दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती — शक्ति, समृद्धि और ज्ञान का प्रतीक है। भक्त कहता है कि माँ भक्तों की रक्षा करती है और दुष्टों का नाश करती है — यह द्वंद्व ही सनातन धर्म का मूल आधार है, जहाँ शक्ति सदैव धर्म की रक्षा के लिए प्रयुक्त होती है।

देवीगीत की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह देवीगीत शक्ति उपासना की उस परंपरा का हिस्सा है, जिसमें माता को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। देवी भागवत पुराण, मार्कंडेय पुराण और श्री दुर्गा सप्तशती में माता की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। इस गीत की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • शक्ति उपासना का प्रतीक: यह गीत माता दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की संयुक्त उपासना का संदेश देता है।
  • मईहर शक्तिपीठ से जुड़ाव: मईहर नगरी माँ शारदा का प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जिससे यह गीत सीधे जुड़ा है।
  • भक्ति-भाव की गहराई: गीत की प्रत्येक पंक्ति में भक्त की विनम्रता, श्रद्धा और समर्पण झलकता है।
  • सामूहिक भक्ति का वाहक: नवरात्रि, जागरण और देवी भागवत पाठ के अवसरों पर यह गीत सामूहिक रूप से गाया जाता है।
  • मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा: इस गीत को श्रद्धापूर्वक सुनने से मन में शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

श्रवण एवं गायन के लाभ की दृष्टि से यह गीत साधक के भीतर भय का नाश करता है, आत्मविश्वास जगाता है और माता के प्रति अटूट विश्वास उत्पन्न करता है। जो भक्त नियमित रूप से इस देवीगीत का श्रवण करता है, उसके जीवन में माता की कृपा से सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

देवीगीत गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवीगीत का गायन और श्रवण श्रद्धा और शुद्धता के साथ किया जाना चाहिए। इसके लिए निम्नलिखित समय और विधि शुभ मानी जाती है:

  • शुभ समय: प्रातःकाल स्नान के बाद, संध्या आरती के समय, तथा नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से।
  • विशेष अवसर: नवरात्रि, दुर्गा अष्टमी, नवमी, ज्योति कलश स्थापना, देवी जागरण, माता का व्रत तथा मईहर शक्तिपीठ की यात्रा के समय।
  • विधि: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके, दीपक एवं धूप प्रज्वलित करके, माता के चरणों में पुष्प अर्पित करके गीत का गायन करें।
  • माला एवं जप: गीत के साथ माँ दुर्गा के बीज मंत्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे" का जप भी किया जा सकता है।
  • भाव: गायन में भक्ति-भाव, विनम्रता और एकाग्रता का होना अत्यंत आवश्यक है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "चली मईहर नगरिया" देवीगीत किस देवी को समर्पित है?

यह देवीगीत मुख्य रूप से माँ शारदा (मईहर शक्तिपीठ) को समर्पित है, जिसमें माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती की संयुक्त स्तुति की गई है।

प्रश्न 2: इस गीत को किसने गाया है?

यह देवीगीत मोना सिंह और रितिका पांडेय के स्वरों में प्रस्तुत किया गया है, जो भक्ति संगीत जगत की प्रसिद्ध गायिकाएं हैं।

प्रश्न 3: मईहर नगरी कहाँ स्थित है?

मईहर नगरी मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित है, जहाँ माँ शारदा का प्रसिद्ध शक्तिपीठ विराजमान है। यह स्थान त्रिकूट पर्वत की तलहटी में स्थित है।

प्रश्न 4: इस देवीगीत का श्रवण कब करना चाहिए?

इसका श्रवण प्रातःकाल, संध्या आरती के समय तथा विशेष रूप से नवरात्रि के नौ दिनों में करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

प्रश्न 5: क्या इस गीत के श्रवण से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं?

श्रद्धा और विश्वास के साथ इस देवीगीत का श्रवण एवं गायन करने से माता की कृपा प्राप्त होती है और भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं — यह भक्तों की गहरी आस्था है।

प्रश्न 6: क्या इस गीत को घर में गाया जा सकता है?

हाँ, इसे घर के पूजा स्थल पर, शुद्धता और भक्ति-भाव के साथ गाया जा सकता है। परिवार के साथ सामूहिक रूप से गायन और भी फलदायी माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसमें देवीगीत "चली मईहर नगरिया" के लिरिक्स, भावार्थ, महत्व एवं गायन विधि को शास्त्रीय एवं परंपरागत संदर्भों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। सामग्री को देवी भागवत पुराण, मार्कंडेय पुराण, श्री दुर्गा सप्तशती तथा मईहर शक्तिपीठ की प्रचलित लोक परंपराओं के आधार पर संदर्भ एवं व्याख्या सहित तैयार किया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि वे इस सामग्री को श्रद्धा एवं भक्ति-भाव के साथ ग्रहण करें तथा स्थानीय परंपराओं का भी सम्मान करें।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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