Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

अइली मोरी मईया (Shikha Tiwari, Ritika Pandey)

शिखा तिवारी और रीतिका पांडे द्वारा गाए लोकप्रिय देवी गीत 'अइली मोरी मईया' के संपूर्ण बोल, भावार्थ और भक्तिपूर्ण महत्व को यहाँ विस्तार से पढ़ें।

सनातन धर्म में आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व है। जब भी नवरात्रि का पावन पर्व आता है या घर में कोई मांगलिक कार्य होता है, तो देवी गीतों की गूंज से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो जाता है। इसी पावन श्रृंखला में "अइली मोरी मईया" (Aili Mori Maiya) एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी देवी गीत है, जिसे सुप्रसिद्ध गायिका शिखा तिवारी और रीतिका पांडे ने अपने मधुर स्वरों से सजाया है। यह गीत मुख्य रूप से भोजपुरी और पूर्वांचली लोक संस्कृति के अनूठे रंग को समेटे हुए है, जिसमें माता रानी के आगमन की खुशी, उनके दिव्य रूप का वर्णन और भक्तों के हृदय का असीम उत्साह परिलक्षित होता है। इस लेख के माध्यम से हम इस पावन देवी गीत के संपूर्ण बोल, उसका विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं का रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ अइली मोरी मईया ॥

(मुखड़ा)
अइली मोरी मईया, सजलीं दुअरिया हो ना!
मईया के सोहे लाल चुनरिया हो ना!
अइली मोरी मईया, सजलीं दुअरिया हो ना!
मईया के सोहे लाल चुनरिया हो ना!
बाजे पैजनिया छम-छम, चमके मुकुटवा हो ना!
अइली मोरी मईया, सजलीं दुअरिया हो ना!
मईया के सोहे लाल चुनरिया हो ना!

(अंतरा - 1)
हाथ में त्रिशूल सोहे, सिंह की सवारी हो,
मईया के रूप लागे सबसे न्यारी हो!
मस्तक पर बिंदिया चमके, नयना कजरारे हो,
मईया के दर्शन पाके भागे अंधियारे हो!
बाजे पैजनिया छम-छम, चमके मुकुटवा हो ना!
अइली मोरी मईया, सजलीं दुअरिया हो ना!
मईया के सोहे लाल चुनरिया हो ना!

(अंतरा - 2)
कलसा धरेली सखी, चौक पुरावेली,
मईया के अगवानी में मंगल गावेली!
धूप और दीप जले, महके अंगनवा हो,
मईया के चरणों में लागल बा मनवा हो!
बाजे पैजनिया छम-छम, चमके मुकुटवा हो ना!
अइली मोरी मईया, सजलीं दुअरिया हो ना!
मईया के सोहे लाल चुनरिया हो ना!

(अंतरा - 3)
शिखा और रीतिका गावे मईया के भजनिया हो,
मईया की कृपा से चमके जिंदगनिया हो!
भक्तन के संकट हरे, सुख बरसावेली,
मईया मोरी बिगड़ी सगरी बनावेली!
बाजे पैजनिया छम-छम, चमके मुकुटवा हो ना!
अइली मोरी मईया, सजलीं दुअरिया हो ना!
मईया के सोहे लाल चुनरिया हो ना!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह देवी गीत माता रानी के आगमन पर भक्तों के हर्ष और उल्लास को अभिव्यक्त करता है। इसके प्रत्येक अंतरे में भक्ति और समर्पण का गहरा भाव छिपा हुआ है:

मुखड़े का भावार्थ

गीत की शुरुआत में भक्त अत्यंत हर्षित होकर कह रहे हैं कि "मेरी मैया आ गई हैं और उनके स्वागत में घर का द्वार सज गया है।" माता रानी के दिव्य विग्रह पर लाल रंग की चुनरी अत्यंत सुशोभित हो रही है। जब माता रानी अपने भक्तों के घर पधारती हैं, तो उनके पैरों की पैजनिया (पायल) छम-छम बजती है और उनके मस्तक पर लगा मुकुट दिव्य प्रकाश से चमक उठता है। यह दृश्य भक्तों के मन को मोह लेता है।

प्रथम अंतरे का भावार्थ

प्रथम अंतरे में माता के सिंहवाहिनी रूप का सुंदर चित्रण है। माता के हाथों में दुष्टों का संहार करने वाला त्रिशूल है और वे सिंह पर सवार होकर आई हैं। उनका यह रूप ब्रह्मांड में सबसे अनोखा और सुंदर है। उनके मस्तक पर लगी बिंदिया और कजरारे नयन भक्तों के कष्टों को हरने वाले हैं। माता के दिव्य दर्शन मात्र से जीवन का सारा अज्ञान रूपी अंधकार दूर हो जाता है और ज्ञान का प्रकाश फैल जाता है।

द्वितीय अंतरे का भावार्थ

यहाँ गृहस्थ जीवन में माता के आगमन की तैयारियों का वर्णन है। सखियाँ मिलकर कलश की स्थापना कर रही हैं और आंगन में सुंदर रंगोली (चौक) सजा रही हैं। माता की अगवानी (स्वागत) में मंगल गीत गाए जा रहे हैं। घर के मंदिर में धूप और दीप जल रहे हैं, जिससे पूरा आंगन सुगंधित हो उठा है। भक्तों का मन पूरी तरह से माता के पावन चरणों में लीन हो गया है।

तृतीय अंतरे का भावार्थ

अंतिम अंतरे में गायिकाएं शिखा तिवारी और रीतिका पांडे माता के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए कहती हैं कि माता के भजनों को गाने से और उनकी भक्ति करने से जीवन संवर जाता है। माता अपने भक्तों के सभी संकटों को हर लेती हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि की वर्षा करती हैं। वे बिगड़े हुए कामों को बनाने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस देवी गीत की मुख्य भावना "वात्सल्य" और "समर्पण" है। हिंदू धर्म में देवी को केवल एक शक्ति के रूप में ही नहीं, बल्कि एक करुणामयी माता के रूप में पूजा जाता है। यह गीत हमें संदेश देता है कि जब हम सच्चे मन से, पवित्रता के साथ और पूर्ण समर्पण भाव से माता का आह्वान करते हैं, तो वे अवश्य हमारे घर और हृदय में पधारती हैं।

गीत का संदेश यह भी है कि ईश्वर की आराधना के लिए किसी कठिन कर्मकांड की आवश्यकता नहीं है; केवल प्रेमपूर्वक गाए गए भजन और श्रद्धा से सजाई गई "दुअरिया" (द्वार) ही माता को प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण बिंदु जानकारी
गीत का नाम अइली मोरी मईया (Aili Mori Maiya)
मुख्य गायिकाएं शिखा तिवारी, रीतिका पांडे (Shikha Tiwari, Ritika Pandey)
गीत का प्रकार देवी गीत / भोजपुरी भजन (Devigeet Bhakti Song)
समर्पित देवता आदिशक्ति माता दुर्गा (Goddess Durga)
भाषा भोजपुरी / लोक भाषा (Bhojpuri)
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम, पैड
प्रकाशन मंच भक्तिलोक (BhaktiLok)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस गीत को अपनी सुरीली आवाज से जीवंत बनाने का श्रेय शिखा तिवारी और रीतिका पांडे को जाता है। इन दोनों कलाकारों ने पारंपरिक भोजपुरी लोक शैली को आधुनिक संगीत के साथ इस प्रकार पिरोया है कि यह गीत युवाओं और बुजुर्गों दोनों को समान रूप से आकर्षित करता है। संगीत संयोजन में पारंपरिक वाद्य यंत्रों जैसे ढोलक और मंजीरे का सुंदर प्रयोग किया गया है, जो श्रोताओं के भीतर एक दिव्य ऊर्जा का संचार करता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ / उपयोग
अइली आ गईं / पधारीं माता रानी के आगमन के लिए प्रयुक्त शब्द।
दुअरिया द्वार / चौखट घर का मुख्य द्वार जिसे सजाया गया है।
सोहे सुशोभित होना / सुंदर लगना माता की लाल चुनरी की सुंदरता के लिए।
पैजनिया पायल / नूपुर माता के पैरों में बजने वाले आभूषण।
अगवानी स्वागत / अगवानी करना अतिथि या पूज्य के स्वागत की तैयारी।
चौक पुरावेली रंगोली बनाना शुभ कार्यों में आटे या रंगों से चौक पूरने की परंपरा।
सगरी सारी / संपूर्ण सभी बिगड़े हुए कार्यों को बनाने के संदर्भ में।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

पूर्वांचल और बिहार की सांस्कृतिक विरासत में देवी गीतों का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों में नवरात्रि के दौरान प्रत्येक घर में कलश स्थापना की जाती है और नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाई जाती है। ऐसे समय में "अइली मोरी मईया" जैसे गीत सामूहिक रूप से गाए जाते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से, यह गीत साधक के भीतर "कुंडलिनी शक्ति" के जागरण और हृदय चक्र के शुद्धिकरण का प्रतीक है। जब हम गाते हैं कि "महके अंगनवा हो", तो इसका अर्थ केवल भौतिक आंगन नहीं, बल्कि हमारा अंतःकरण है, जो भक्ति की सुगंध से महक उठता है। माता का सिंह पर सवार होना इस बात का प्रतीक है कि वे हमारे भीतर के पशुत्व (क्रोध, लोभ, अहंकार) को नियंत्रित कर हमें दिव्यता की ओर ले जाती हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • श्रद्धा और समर्पण: जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों, यदि हम ईश्वर के प्रति समर्पित रहते हैं, तो हमारे सभी संकट दूर हो जाते हैं।
  • सामूहिकता की भावना: गीत में सखियों द्वारा मिलकर चौक पूरने और मंगल गीत गाने का वर्णन है, जो हमें समाज में मिलजुलकर रहने और उत्सव मनाने की सीख देता है।
  • सकारात्मकता का संचार: माता के दर्शन से अज्ञान का अंधकार दूर होता है। हमें भी अपने जीवन से नकारात्मक विचारों को दूर कर सकारात्मकता को अपनाना चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि माता रानी का स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है, परंतु इस गीत को सुनने और गाने के कुछ विशेष अवसर निम्नलिखित हैं:

  • शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: इन नौ दिनों में माता के नौ रूपों की पूजा के समय यह गीत अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
  • मंगला गौरी व्रत एवं तीज: सुहागिन महिलाओं द्वारा किए जाने वाले व्रतों में माता के इस गीत को गाया जाता है।
  • पारिवारिक मांगलिक कार्य: मुंडन, जनेऊ, विवाह या गृह प्रवेश के समय माता की पूजा में इस गीत का गायन किया जाता है।

भक्ति भाव को और प्रगाढ़ करने के लिए आप इस गीत के साथ श्री दुर्गा चालीसा का पाठ भी कर सकते हैं, जो माता की असीम कृपा प्राप्त करने का एक अचूक साधन है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

विशेषता संक्षिप्त विवरण
मुख्य विषय माता दुर्गा का स्वागत और महिमा गान
भाव (Bhava) भक्ति, वात्सल्य, आनंद
प्रमुख वाद्य पारंपरिक ढोलक, मंजीरा
उपयुक्त समय प्रातःकाल एवं संध्या आरती के समय
सांस्कृतिक क्षेत्र भोजपुरी भाषी क्षेत्र (उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न | FAQs

यह सुंदर देवी गीत सुप्रसिद्ध लोक गायिका शिखा तिवारी और रीतिका पांडे द्वारा गाया गया है।

यह गीत आदिशक्ति माता दुर्गा (मैया रानी) को समर्पित है, जो सिंह पर सवार होकर अपने भक्तों के कष्टों का निवारण करने आती हैं।

यह गीत पारंपरिक और मधुर भोजपुरी भाषा में गाया गया है, जो उत्तर भारत की लोक संस्कृति का एक अभिन्न अंग है।

नवरात्रि में इस गीत को सुनने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, मानसिक शांति मिलती है और माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

"चौक पुरावेली" का अर्थ है शुभ अवसरों पर घर के मुख्य स्थान या पूजा स्थल पर आटे, हल्दी या रंगों से सुंदर पारंपरिक आकृतियां (रंगोली) बनाना।

हाँ, दैनिक सुबह या शाम की पूजा के समय इस गीत को सुनने से मन एकाग्र होता है और भक्ति भाव जाग्रत होता है।

इस गीत में मुख्य रूप से पारंपरिक ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम का प्रयोग किया गया है, जो इसे एक पारंपरिक लोक संगीत का रूप देते हैं।

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की सच्ची भक्ति और दर्शन से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा सभी प्रकार के भयों से मुक्ति मिलती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस गीत के बोल और भावार्थ को पारंपरिक भोजपुरी लोक गीतों की मर्यादा और शुद्धता को ध्यान में रखते हुए संकलित किया गया है। शिखा तिवारी और रीतिका पांडे का यह भजन वर्तमान समय में देवी भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। इस सामग्री का उद्देश्य सनातन धर्म की लोक कलाओं और भक्ति परंपरा को जन-जन तक पहुँचाना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण - माता की महिमा और सिंहवाहिनी रूप का वर्णन।
  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं पारंपरिक देवी गीत संग्रह।
  • भक्तिलोक डिजिटल आर्काइव (BhaktiLok.in)।

संबंधित लेख | Related Articles

यदि आपको यह देवी गीत पसंद आया है, तो आप हमारे ब्लॉग पर निम्नलिखित पावन भजनों और आरतियों का भी आनंद ले सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!