पालनहार Palanhar I Krishna Bhajan I ANUP JALOTA I Full HD Video Song - Bhaktilok
भगवान श्री कृष्ण इस सृष्टि के एकमात्र पालनहार, रक्षक और सर्वसुख प्रदाता हैं। संगीत जगत के प्रतिष्ठित एवं पावन स्वर सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा जी की मधुर वाणी में गाया गया यह भजन 'पालनहार ना ठोकर खायें...' भक्तों के हृदय में अगाध शांति, भक्ति और समर्पण का भाव जागृत करता है। श्री कृष्ण और राधा रानी के अलौकिक प्रेम, ब्रज की गोपियों की निष्काम भक्ति और ठाकुर जी के चरणों में पूर्ण शरणागति का यह भजन एक ऐसा आध्यात्मिक अनुभव है, जो श्रोताओं को भौतिक दुखों से ऊपर उठाकर भगवत चरणों में लीन कर देता है। अनूप जलोटा जी की soulful गायकी और भजन के गंभीर दार्शनिक बोल (lyrics) इसे हर सत्संग, मंदिर दर्शन और दैनिक पूजा का अनिवार्य हिस्सा बनाते हैं। यह मार्गदर्शिका इस पावन भजन के सम्पूर्ण गीत, विस्तृत भावार्थ, गायन विधि और इसके गहरे आध्यात्मिक संदेशों का विवेचन करती है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ मखड़ा (Refrain) ॥
पालनहार ना ठोकर खायें,
गोपियाँ मूरत सजेगी,
कंजलियों में कपट नहीं,
कन्हैया चंदन सजेगी।
॥ अंतरा 1 ॥
भरने चलें घनश्याम,
करके मन में अति प्यारा,
प्रेम से मनाऊं, सुमिरन कर,
मातोश्री का है सहारा।
॥ अंतरा 2 ॥
पालनहार ना ठोकर खायें,
कन्हैया मूरत सजेगी,
कंजलियों में कपट नहीं,
कन्हैया चंदन सजेगी।
॥ समापन पंक्ति ॥
अनूप जलोटा गाएं महिमा,
भक्तों का संकट टलेगा,
श्याम चरण में जो झुक गया,
उसका जीवन सुधरेगा।
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस दिव्य भजन का मुख्य विषय भगवान श्रीकृष्ण की अहैतुकी कृपा, करुणा और उनके पालनहार स्वरूप का अहसास कराना है। 'पालनहार' शब्द का अर्थ है वह परम सत्ता जो संपूर्ण ब्रह्मांड का भरण-पोषण करती है। भजन की पहली पंक्ति "पालनहार ना ठोकर खायें" यह संदेश देती है कि जो मनुष्य अपने जीवन की डोर भगवान श्री कृष्ण के हाथों में सौंप देता है, उसे संसार के मार्ग में कभी ठोकरें नहीं खानी पड़तीं। उसका जीवन कुटिलताओं से मुक्त होकर सहज और आनंदमय हो जाता है।
"गोपियाँ मूरत सजेगी, कंजलियों में कपट नहीं" - ब्रज की गोपियों का प्रेम निष्कलंक और स्वार्थहीन था। उनके हृदय में भगवान के प्रति जो पवित्र भाव था, वही सच्ची पूजा है। जब भक्त का अंतःकरण कपट, छल और अहंकार से मुक्त हो जाता है, तभी उसके भीतर श्री कृष्ण की जीवंत मूरत सजती है। "कन्हैया चंदन सजेगी" इस बात का प्रतीक है कि भगवान के चरणों में अर्पित होने वाली भक्ति शीतलता और पवित्रता से परिपूर्ण होनी चाहिए।
दूसरे अंतरे में "भरने चलें घनश्याम, करके मन में अति प्यारा" यह दर्शाता है कि भक्त जब प्रेम और श्रद्धा से घनश्याम को मनाता है, तो भगवान स्वयं उसके जीवन के सभी अभावों और रिक्तियों को भरने के लिए दौड़े चले आते हैं। माता यशोदा और देवकी के आत्मीय स्मरण के साथ, भक्त को यह विश्वास हो जाता है कि इस संसार में भगवान का आत्मीय संबल ही सबसे बड़ा सहारा है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- दिव्य गायक: संगीत जगत के दिग्गज गायक पद्मश्री अनूप जलोटा जी की सौम्य एवं गहरी आवाज में प्रस्तुत।
- आराध्य देव: जगत के पालनहार भगवान श्री कृष्ण, बांके बिहारी और राधा रानी को समर्पित।
- भक्ति का प्रकार: यह भजन माधुर्य भाव और साख्य भाव की भक्ति का सुंदर मिश्रण है, जो मन को शांत करता है।
- मानसिक शांति: तनावपूर्ण दैनिक जीवन में मानसिक शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम।
- संसार की भागदौड़ के बीच भगवान के स्मरण और शरणागति का अनुपम मार्ग प्रशस्त करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उचित समय और विधि का विशेष महत्व होता है:
- ब्रह्म मुहूर्त एवं प्रातःकाल: सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित करके इस भजन को सुनने या गुनगुनाने से पूरा दिन सकारात्मक ऊर्जा से भरा रहता है।
- संध्या बेला (प्रदोष काल): शाम के समय जब घर के मंदिर में दीपक जलाया जाता है, तब इस भजन का श्रवण करने से घर की नकारात्मकता दूर होती है।
- जन्माष्टमी एवं एकादशी व्रत: श्री कृष्ण जन्माष्टमी, राधाष्टमी, एकादशी और अन्नकूट जैसे पावन पर्वों पर इस भजन का गायन विशेष रूप से फलदायी माना गया है।
- सत्संग एवं सामूहिक अनुष्ठान: पारिवारिक आयोजनों, कीर्तन संध्या और भागवत कथा के दौरान इसे सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में लीलाधर भगवान श्री कृष्ण और ब्रजेश्वरियों (गोपियों) का पावन चरित्र है। सनातन धर्म में श्री कृष्ण को पूर्णावतार माना गया है जो गीता के माध्यम से संपूर्ण मानवता को कर्मयोग का पाठ पढ़ाते हैं। पद्मश्री अनूप जलोटा जी, जो भजन सम्राट के रूप में विश्वविख्यात हैं, ने अपनी सात्विक गायकी के माध्यम से संत परंपरा के उस संदेश को पुनर्जीवित किया है जिसमें ईश्वर को केवल प्रेम और समर्पण से ही रिझाया जा सकता है। अनूप जलोटा जी के भजन श्रोताओं को मीराबाई, सूरदास और चैतन्य महाप्रभु की भक्ति परंपरा की याद दिलाते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
'पालनहार' शीर्षक से सजे इस कृष्ण भजन की रचना पारंपरिक ब्रजभाषा और सरल हिंदी के मधुर शब्दों के मिश्रण से की गई है। अनूप जलोटा जी ने अपने एल्बम और वीडियो सांग्स की श्रृंखला में इसे अत्यंत भावपूर्ण संगीतबद्ध किया है। इसकी धुन इतनी कर्णप्रिय है कि सुनते ही मन वृंदावन की गलियों और बांके बिहारी के दरबार में पहुंच जाता है। वीडियो प्रस्तुति में कान्हा के बाल रूप, रासलीला और भक्तों के समर्पण को दृश्यों के माध्यम से सजीव किया गया है, जो आधुनिक तकनीकी और पारंपरिक भक्ति का अद्भुत समन्वय है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
भजन की भाषा अत्यंत सहज, प्रवाहमयी और भावप्रधान है। इसमें हिंदी और ब्रजभाषा के लोक-प्रचलित शब्दों जैसे 'पालनहार', 'घनश्याम', 'मूरत', 'कंजलियों' और 'कन्हैया' का अत्यंत सुंदर प्रयोग किया गया है। काव्य शैली की दृष्टि से यह पद शैली में रचित है, जिसमें टेक (स्थायी) और अंतरे की सुव्यवस्थित संरचना है। रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सहज प्रयोग इस भजन के साहित्यिक सौंदर्य को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है, जिससे यह साधारण श्रोता से लेकर विद्वान तक सबको समान रूप से आकर्षित करता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- पूर्ण शरणागति (Surrender): जब मनुष्य अपनी चिंताओं को भगवान पर छोड़ देता है, तो उसका जीवन भारमुक्त हो जाता है।
- कपटहीन भक्ति (Purity of Heart): ईश्वर को दिखावे की नहीं, बल्कि छल-कपट से मुक्त निर्मल हृदय की आवश्यकता होती है।
- धैर्य और विश्वास: कठिन परिस्थितियों में भी पालनहार पर भरोसा बनाए रखना ही सच्चे भक्त का लक्षण है।
- प्रेम की सर्वोपरि शक्ति: संसार में सभी रिश्तों से ऊपर भगवान के साथ प्रेम का संबंध स्थापित करना ही जीवन का चरम लक्ष्य है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| पालनहार | पोषण करने वाला, रक्षक | संपूर्ण सृष्टि और भक्तों का भरण-पोषण करने वाले श्री कृष्ण। |
| कंजलियों | नेत्रों के किनारे / पलकें | निर्मल दृष्टि और श्रद्धा से परिपूर्ण अंतःकरण। |
| घनश्याम | काले मेघ के समान सुंदर श्याम वर्ण | भगवान श्रीकृष्ण का सांवला और मनोरम स्वरूप। |
| सुमिरन | स्मरण करना, ध्यान लगाना | निरंतर भगवान के नाम का जाप और स्मरण करना। |
| मातोश्री | माता (यशोदा / देवकी) | वात्सल्य और ममता का आश्रय। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"पालनहार ना ठोकर खायें, गोपियाँ मूरत सजेगी..."
भावार्थ: जो मनुष्य भगवान कृष्ण को अपना पालनहार मानकर उनके मार्ग पर चलता है, उसे जीवन के पथ पर कभी असफलता या कष्ट की ठोकर नहीं खानी पड़ती। गोपियों जैसी अनन्य भक्ति से हृदय में भगवान की सुंदर मूरत स्वतः सज जाती है।
"कंजलियों में कपट नहीं, कन्हैया चंदन सजेगी..."
भावार्थ: जिसकी आँखों और मन में कोई कपट या द्वेष नहीं होता, उसके जीवन में कन्हैया के चरणों की चंदन रूपी शीतलता और पवित्रता स्थापित हो जाती है।
"भरने चलें घनश्याम, करके मन में अति प्यारा..."
भावार्थ: जब भक्त अपने मन में अपार प्रेम और श्रद्धा रखकर भगवान को पुकारता है, तो घनश्याम स्वयं उसके जीवन के सभी संकटों और अभावों को दूर करने के लिए दौड़े चले आते हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
श्री कृष्ण की शरण और उनके पालनहार स्वरूप को समर्पित यह प्रसिद्ध श्लोक इस भजन के भाव को पूर्ण करता है:
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने। प्रणात्मन क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः॥
(अर्थ: वासुदेव नंदन, समस्त क्लेशों का नाश करने वाले और संपूर्ण जगत के पालनहार भगवान गोविंद को बारंबार प्रणाम है।)
इसी प्रकार श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र की भांति कृष्ण भक्ति के ये पद भी साधक को मानसिक शक्ति प्रदान करते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | पालनहार (Palanhar Krishna Bhajan) |
|---|---|
| गायक | पद्मश्री अनूप जलोटा |
| संगीत शैली | देवotional / भजन / सात्विक संगीत |
| भाषा | हिंदी एवं ब्रजभाषा मिश्रित |
| मुख्य विषय | श्री कृष्ण की कृपा, शरणागति और निष्काम प्रेम |
| प्रमुख भाव | भक्ति, समर्पण, शांति और वात्सल्य |
| उपयुक्त अवसर | दैनिक पूजा, जन्माष्टमी, सत्संग, मंदिर दर्शन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. 'पालनहार' भजन के गायक कौन हैं?
इस लोकप्रिय भजन के गायक भारत के प्रख्यात भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा जी हैं, जिनकी मधुर आवाज भक्ति रस से सराबोर है।
Q2. इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
यह भजन हमें सिखाता है कि भगवान श्री कृष्ण ही हमारे एकमात्र पालनहार हैं। कपट रहित हृदय और अनन्य प्रेम से उनका स्मरण करने पर जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
Q3. इस भजन को कब सुनना सबसे अच्छा माना जाता है?
प्रातःकाल स्नान के पश्चात, संध्या वंदन के समय, अथवा श्री कृष्ण जन्माष्टमी और एकादशी के पावन व्रतों के दिन इस भजन को सुनना अत्यंत फलदायी होता है।
Q4. क्या इस भजन को घर पर परिवार के साथ गाया जा सकता है?
हाँ, यह एक अत्यंत शांत और पारिवारिक भजन है जिसे सत्संग, आरती या भजन संध्या के दौरान परिवार के साथ मिलकर गाया जा सकता है।
Q5. 'पालनहार' शब्द का क्या तात्पर्य है?
'पालनहार' का अर्थ है वह महान शक्ति जो संपूर्ण संसार का पालन-पोषण, संरक्षण और जीवों की देखभाल करती है। सनातन धर्म में यह उपाधि भगवान विष्णु और कृष्ण को दी जाती है।
Q6. इस भजन से मानसिक शांति कैसे मिलती है?
अनूप जलोटा जी की शांत शैली और भगवान कृष्ण की लीलाओं का स्मरण मन के विकारों और चिंताओं को शांत कर अगाध आंतरिक शांति प्रदान करता है।
Q7. क्या इस भजन के वीडियो में ब्रज की संस्कृति दिखाई गई है?
हाँ, फुल एचडी वीडियो सांग में श्री कृष्ण की बाल लीलाओं, गोपियों के प्रेम और ब्रज की सांस्कृतिक छटा को अत्यंत सुंदर ढंग से चित्रित किया गया है।
Q8. ऐसे अन्य लोकप्रिय कृष्ण भजन कहाँ मिल सकते हैं?
आप Bhaktilok.in पर अन्य अनेक प्रसिद्ध कृष्ण भजन, चालीसा, आरती और स्तोत्र के लिरिक्स व भावार्थ पढ़ सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह पृष्ठ संतों, आचार्यों और पारंपरिक भक्ति ग्रंथों के अध्ययन पर आधारित है। अनूप जलोटा जी द्वारा गाए गए इस भजन के शब्दों को लिपिबद्ध करते समय उनकी मूल भावना, काव्य सौंदर्य और दार्शनिक गहराई का पूर्ण ध्यान रखा गया है। यह सामग्री पाठकों को प्रामाणिक और शांतिप्रद आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने के लिए तैयार की गई है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भागवत महापुराण - कृष्ण लीला प्रसंग
- भक्ति संगीत परंपरा एवं अनूप जलोटा एल्बम संग्रह
- ब्रज लोक साहित्य और पारंपरिक भजन संकलन
- सनातन धर्म के ग्रंथ एवं संत वाणी
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