Akshaya Tritiya Special Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Akshaya

पढ़ें अक्षय तृतीय स्पेशल भजन 2022| Akshaya Tritiya Bhajan 2022 | Akshaya Tritiya Special Bhajan - Bhaktilok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पू

सनातन धर्म में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को 'अक्षय तृतीया' के रूप में मनाया जाता है। यह एक अत्यंत पावन और अबूझ मुहूर्त है, जिसमें किए गए दान, जप, तप और संकीर्तन का फल कभी क्षय नहीं होता। इसी पावन अवसर पर प्रस्तुत है "अक्षय तृतीया स्पेशल भजन", जो भगवान श्री लक्ष्मी-नारायण के चरणों में समर्पित है। यह भजन साधक के अंतःकरण में श्रद्धा, भक्ति और संतोष का संचार करता है। इस विशेष भजन के माध्यम से भक्त अपने आराध्य से भौतिक समृद्धि के साथ-साथ अक्षय भक्ति का वरदान मांगते हैं। इस लेख में हम इस पावन भजन के पूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व और इससे जुड़े पौराणिक प्रसंगों का सांगोपांग विवेचन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ अक्षय तृतीया विशेष भजन ॥

(कोरस/मुखड़ा)
अक्षय तृतीया की शुभ बेला, घर आए लक्ष्मी-नारायण।
भक्ति भाव से पूजें सब मिल, हर लें संकट सारे जन॥
अक्षय पुण्य मिले जीवन में, महके खुशियों से उपवन।
घर आए लक्ष्मी-नारायण, घर आए लक्ष्मी-नारायण॥

(अंतरा - 1)
सोना-चांदी क्या हम मांगें, मांगें प्रभु चरणों का प्यार।
सच्ची दौलत नाम तुम्हारी, जिससे तरता यह संसार॥
अक्षय घट भर दो श्रद्धा से, निर्मल कर दो सबका मन।
घर आए लक्ष्मी-नारायण, घर आए लक्ष्मी-नारायण॥

(अंतरा - 2)
गंगा मैया धरती पर आईं, परशुराम ने जनम लिया।
सुदामा की दीन दशा पर, कृष्ण ने सब कुछ दान दिया॥
ऐसी पावन लीला गाकर, धन्य हुआ है यह जीवन।
घर आए लक्ष्मी-नारायण, घर आए लक्ष्मी-नारायण॥

(अंतरा - 3)
अन्न-धन के भंडार भरे हों, दान-पुण्य की बहे बयार।
दीन-दुखी की सेवा करके, सफल करें हम यह अवतार॥
सत्य धर्म की राह चलें हम, अर्पित हो तुमको तन-मन।
घर आए लक्ष्मी-नारायण, घर आए लक्ष्मी-नारायण॥

(अंतरा - 4)
लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे, नारायण का मिले आशीष।
भक्तिलोक में गूंजे कीर्तन, चरणों में हम झुकाएं शीश॥
अक्षय सुख की वर्षा कर दो, हे प्रभु तुमको कोटि नमन।
घर आए लक्ष्मी-नारायण, घर आए लक्ष्मी-नारायण॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के स्वागत और आराधना का एक अनुपम दस्तावेज है। भजन की शुरुआत में भक्त हर्षोल्लास के साथ गाते हैं कि आज अक्षय तृतीया की अत्यंत शुभ घड़ी आई है और हमारे घर में साक्षात् लक्ष्मी-नारायण का आगमन हो रहा है। हम सभी मिलकर पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से उनकी पूजा-अर्चना कर रहे हैं ताकि वे हमारे जीवन के समस्त दुखों और संकटों का हरण कर लें।

भजन के प्रथम अंतरे में भौतिकता से ऊपर उठकर आध्यात्मिक चेतना को दर्शाया गया है। भक्त कहता है कि हे प्रभु! हम आपसे नश्वर सोना-चांदी या सांसारिक वैभव नहीं मांगते, बल्कि आपके चरणों का अनन्य प्रेम मांगते हैं। आपका पावन नाम ही हमारी वास्तविक और शाश्वत संपत्ति है। आप हमारे हृदय रूपी घट को श्रद्धा के अमृत से भर दें।

द्वितीय अंतरे में अक्षय तृतीया के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व को रेखांकित किया गया है। इसी दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, भगवान परशुराम का प्राकट्य हुआ था और भगवान श्री कृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता दूर कर उन्हें तीनों लोकों का ऐश्वर्य प्रदान किया था। इन लीलाओं का स्मरण करने मात्र से जीवन धन्य हो जाता है।

अंतिम चरणों में भक्त समाज कल्याण और परोपकार की भावना व्यक्त करता है। वह प्रार्थना करता है कि समाज में अन्न-धन के भंडार भरे रहें और हर हृदय में दान-पुण्य की भावना जाग्रत हो। हम दीन-दुखियों की सेवा कर सकें और सत्य के मार्ग पर चलते हुए अपना जीवन प्रभु चरणों में समर्पित कर सकें।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतमय प्रस्तुति नहीं है, बल्कि यह अक्षय तृतीया के दिन की जाने वाली साधना का एक संगीतमय रूप है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • अक्षय फल की प्राप्ति: मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन किया गया नाम-संकीर्तन साधक को अनंत गुना फल प्रदान करता है। यह भजन उस पुण्य को अर्जित करने का सरल माध्यम है।
  • लक्ष्मी-नारायण की संयुक्त आराधना: सनातन परंपरा में केवल लक्ष्मी जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। यह भजन विष्णु और लक्ष्मी दोनों की संयुक्त स्तुति करता है, जिससे जीवन में समृद्धि के साथ-साथ शांति और विवेक भी आता है।
  • परोपकार की प्रेरणा: भजन की पंक्तियां साधक को केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के वंचित वर्ग की सेवा और दान-पुण्य के लिए प्रेरित करती हैं।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस विशेष भजन के गायन और श्रवण के लिए निम्नलिखित विधि और समय को सर्वोत्तम माना गया है:

  • शुभ समय: अक्षय तृतीया के दिन प्रातः काल सूर्योदय के समय अथवा संध्या आरती के समय इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
  • पूजा विधि: सर्वप्रथम घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें पीले पुष्प, अक्षत, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। घी का दीपक प्रज्वलित कर शांत चित्त से इस भजन का गायन या श्रवण करें।
  • भाव शुद्धि: गायन के समय मन में किसी भी प्रकार का द्वेष या लालच न रखें। निष्काम भाव से की गई प्रार्थना ही प्रभु तक शीघ्र पहुंचती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु और ऐश्वर्य की देवी माता महालक्ष्मी को समर्पित है। इसके साथ ही, इसमें भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम और भगवान श्री कृष्ण के अनन्य सखा भक्त सुदामा का भी स्मरण किया गया है। भारतीय भक्ति परंपरा में सुदामा और कृष्ण का प्रसंग निश्छल मित्रता और समर्पण का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण है। संतों का मत है कि जब भक्त स्वयं को पूरी तरह भगवान के चरणों में सौंप देता है, तो भगवान उसे बिना मांगे ही सब कुछ प्रदान कर देते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन पारंपरिक लोक धुनों और शास्त्रीय भक्ति रस के समन्वय से तैयार किया गया है। अक्षय तृतीया के दिन भारत के विभिन्न क्षेत्रों में गाए जाने वाले लोकगीतों से प्रेरित होकर इस आधुनिक भजन की रचना की गई है ताकि युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़ सके। इस भजन की पृष्ठभूमि में श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णु पुराण के वे प्रसंग समाहित हैं जो अक्षय तृतीया की महिमा का गान करते हैं।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें तत्सम और तद्भव शब्दों का सुंदर मिश्रण है। इसकी काव्य शैली गेय (गाए जाने योग्य) है। 'शुभ बेला', 'अक्षय पुण्य', 'श्रद्धा घट' जैसे शब्दों का प्रयोग भजन को साहित्यिक गरिमा प्रदान करता है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का सहज प्रयोग देखने को मिलता है, जो श्रोता के मन में एक शांत और भक्तिमय वातावरण का निर्माण करता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

जीवन मूल्य भजन से सीख व्यावहारिक जीवन में उपयोग
संतोष (Contentment) सोना-चांदी के स्थान पर प्रभु प्रेम की याचना करना। भौतिक वस्तुओं की अंधी दौड़ से बचकर मानसिक शांति प्राप्त करना।
परोपकार (Charity) दीन-दुखियों की सेवा और दान की भावना। अपनी आय का कुछ हिस्सा समाज कल्याण और जरूरतमंदों की मदद में लगाना।
सत्य और धर्म (Righteousness) सत्य धर्म की राह पर चलने का संकल्प। कार्यक्षेत्र और व्यक्तिगत जीवन में ईमानदारी और नैतिकता बनाए रखना।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

कठिन शब्द सरल अर्थ भजन के संदर्भ में महत्व
अक्षय जिसका कभी नाश न हो (Endless) ऐसा पुण्य या सुख जो समय के साथ समाप्त नहीं होता।
शुभ बेला पवित्र और मंगलकारी समय अक्षय तृतीया का अबूझ और अत्यंत शुभ मुहूर्त।
अक्षय घट कभी खाली न होने वाला घड़ा श्रद्धा और भक्ति से भरा हुआ हृदय।
बयार हवा या पवन का झोंका समाज में परोपकार और सकारात्मकता का प्रसार।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"अक्षय तृतीया की शुभ बेला, घर आए लक्ष्मी-नारायण..."
कवि कहते हैं कि आज वैशाख मास की वह पावन तृतीया तिथि आई है जो कभी नष्ट नहीं होती। इस मंगलकारी समय में हम अपने घर के द्वार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए खोलते हैं।

"सोना-चांदी क्या हम मांगें, मांगें प्रभु चरणों का प्यार..."
सांसारिक मनुष्य इस दिन केवल भौतिक सोना खरीदने में व्यस्त रहते हैं, परंतु सच्चा भक्त प्रभु से प्रार्थना करता है कि मुझे इस नश्वर सोने की आवश्यकता नहीं है, मुझे तो आपकी शाश्वत भक्ति का वरदान चाहिए।

"गंगा मैया धरती पर आईं, परशुराम ने जनम लिया..."
यह पंक्ति इस दिन के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती है। यह याद दिलाती है कि इसी दिन भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर गंगा माता पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं और दुष्टों के संहार के लिए भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।

"लक्ष्मी जी की कृपा बनी रहे, नारायण का मिले आशीष..."
भजन के अंत में संपूर्ण सृष्टि के कल्याण की कामना की गई है। भक्त चाहता है कि माता लक्ष्मी की कृपा से जीवन में कभी अभाव न रहे और नारायण के आशीर्वाद से मन सदैव धर्म के मार्ग पर अग्रसर रहे।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

अक्षय तृतीया के दिन इस भजन के साथ-साथ निम्नलिखित मंत्रों का जप करने से अनंत गुना फल प्राप्त होता है:

॥ लक्ष्मी-नारायण महामंत्र ॥

"ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं लक्ष्मी नारायणाय नमः"

अर्थ: हम माता लक्ष्मी और भगवान नारायण को नमन करते हैं, वे हमारे जीवन में सुख, समृद्धि और ज्ञान का संचार करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण का क्षेत्र महत्वपूर्ण जानकारी
भजन का नाम अक्षय तृतीया स्पेशल भजन 2022
मुख्य आराध्य भगवान श्री लक्ष्मी-नारायण
मुख्य विषय अक्षय तृतीया का महत्व, दान-पुण्य और निष्काम भक्ति
काव्य भाषा सरल हिंदी (भक्ति रस प्रधान)
गायन का सर्वोत्तम अवसर अक्षय तृतीया, वैशाख मास, विष्णु पूजा
मुख्य संदेश भौतिकता से ऊपर उठकर आध्यात्मिक समृद्धि प्राप्त करना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

अक्षय तृतीया के दिन किए गए किसी भी शुभ कार्य या संकीर्तन का फल कभी समाप्त नहीं होता। इस भजन को गाने से मन शांत होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अपने दरिद्र मित्र सुदामा को अतुल्य ऐश्वर्य प्रदान किया था। यह प्रसंग दर्शाता है कि भगवान केवल भाव के भूखे हैं।

हां, यद्यपि यह भजन अक्षय तृतीया के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है, परंतु भगवान लक्ष्मी-नारायण की नित्य आराधना के लिए इसे प्रतिदिन भी गाया जा सकता है।

इस दिन किया गया दान अक्षय हो जाता है। सत्तू, घड़ा, पंखा, अन्न और जल का दान इस दिन अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है।

इसमें मां गंगा के अवतरण, भगवान परशुराम के जन्म और सुदामा पर भगवान कृष्ण की कृपा जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं का उल्लेख है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख और भजन "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने सनातन धर्म के ग्रंथों, पुराणों और पारंपरिक लोक गीतों का गहन अध्ययन करके इस सामग्री को संकलित किया है। इस भजन का उद्देश्य पाठकों में भक्ति भावना को जाग्रत करने के साथ-साथ उन्हें अक्षय तृतीया के वास्तविक आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व से परिचित कराना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • विष्णु पुराण: भगवान विष्णु की आराधना और अक्षय तृतीया के महात्म्य का संदर्भ।
  • श्रीमद्भागवत महापुराण: सुदामा चरित्र और भगवान कृष्ण की लीलाओं का वर्णन।
  • स्कंद पुराण: वैशाख मास के माहात्म्य और गंगा अवतरण की कथा।

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आपको यह भजन और इसकी व्याख्या पसंद आई हो, तो आप हमारे ब्लॉग पर निम्नलिखित लेख भी पढ़ सकते हैं:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!