Durga Bhajan Lyrics मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

दुर्गा अमृतवाणी - भक्ति गीत (Durga Amritvani - Vicky Tiwari)

विकी तिवारी द्वारा स्वरबद्ध दुर्गा अमृतवाणी का आनंद लें। माँ दुर्गा की महिमा, भक्ति गीत के बोल, अर्थ और आध्यात्मिक लाभ के लिए आज ही पढ़ें।

दुर्गा भजन / गीत

भक्ति गीत | Durga Amritvani - Vicky Tiwari Bhojpuri Bhakti Song - BhaktiLok

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह पावन भजन "दुर्गा अमृतवाणी - भक्ति गीत | Durga Amritvani - Vicky Tiwari Bhojpuri Bhakti Song - BhaktiLok" जगत जननी की असीम कृपा, महिमा और करुणा का सजीव गान करता है। भोजपुरी माटी की सुगंध और लोक संगीत की मिठास के साथ विकी तिवारी (Vicky Tiwari) द्वारा स्वरबद्ध यह भजन माँ के ममतामयी, दुष्टनाशिनी और कल्याणकारी स्वरूप को अत्यंत श्रद्धा के साथ प्रस्तुत करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को चराचर जगत का आदि कारण माना गया है, और यह अमृतवाणी साधक के अंतःकरण में आध्यात्मिक तेज, सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति का संचार करती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण बोल, हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक महत्व और गायन की विधि का रसास्वादन करेंगे।

अपडेटेड: 2026 श्रेणी: दुर्गा भजन, भोजपुरी भक्ति गीत पाठ समय: 8 मिनट

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

|| मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्। यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम् ||

॥ मुखड़ा ॥

निम्बु मिर्ची लटका के नजरिया उतार लीं,
मैया जी के दर पे आके झोली पसार लीं।
दुर्गा अमृतवाणी तू मन से सुनत जा,
मैया के चरणवा में जीवन बितत जा...

॥ अंतरा १ ॥

शेरवा पे सवार होके मैया जब आवेली,
भक्तन के विपदा तू पल में भगावेली।
झूठे जग के माया में काहे तू उलझल बाटे,
मैया के दरबार में सब कुछ मिलत बाटे।
सच्चे मन से जो कोई ध्यावे ओकर बेड़ा पार हो,
मैया के महिमा अपरम्पार हो...

॥ अंतरा २ ॥

पूरब पच्छिम उत्तर दक्खिन सब जग महिमा गावे,
जो माँ के द्वारे आवे खाली हाथ ना जावे।
लाल चुनरिया सोहे माथे मुकुटवा चमके,
भक्तन के हीया में माँ दुर्गा के ज्योति दमके।
विकी तिवारी गावे महिमा भवानी के,
सुन लेहू अरजिया हे मात कल्याणी के...

॥ समापन अंतरा ॥

जय माता दी बोलs भक्तन मिल के सारे,
मैया के आशीर्वाद बरसे सबहि के द्वारे।
सुख सम्पति अउर वैभव घर-घर में आई,
दुर्गा अमृतवाणी सब संकट नशाई...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

विकी तिवारी द्वारा गाई गई यह दुर्गा अमृतवाणी केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक भक्त की अपनी आराध्य देवी के प्रति अनन्य प्रेम, विनय और समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति है। भजन के मुखड़े में लोक संस्कृति की सुंदर छटा देखने को मिलती है जहाँ 'निम्बु मिर्ची' और 'नजरिया उतार लीं' के माध्यम से भक्त अपनी साधारण बोलचाल की भाषा में माँ के प्रति अपना अपनापन और अनन्य स्नेह प्रकट करता है। जीवन की हर कठिनाई में माँ का आंचल ही भक्त का सबसे बड़ा संबल होता है।

अंतरा भागों में कवि और गायक ने यह संदेश दिया है कि यह संसार नश्वर है और मनुष्य झूठी माया-मोह में फंसकर अपने असली उद्देश्य को भूल जाता है। ऐसे में माता दुर्गा का स्मरण ही एकमात्र मुक्ति का मार्ग है। शेर पर सवार होकर आने वाली आदिशक्ति अपने भक्तों की सभी विपत्तियों को पल भर में हर लेती हैं। पूरब से पश्चिम तक सभी दिशाओं में माता की महिमा का गान हो रहा है। जो भी भक्त सच्चे हृदय से माता के चरणों में अपनी झोली पसारता है, वह कभी निराश नहीं लौटता।

यह भजन साधक को यह भी सिखाता है कि सांसारिक बंधनों और चिंताओं को त्यागकर यदि माता के चरणों में ध्यान लगाया जाए, तो जीवन के सभी कष्ट स्वतः समाप्त हो जाते हैं। संगीतमय धुन और भक्तिरस से ओत-प्रोत यह रचना सुनने वाले के मन में सकारात्मक ऊर्जा और माता के प्रति अटूट विश्वास जगाती है। आप इसी प्रकार की अन्य पावन रचनाओं के दर्शन के लिए दुर्गा भजन लिरिक्स और 108 नाम की दुर्गा माला के पावन पृष्ठों का भी अवलोकन कर सकते हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

लोक संगीत और भक्ति का संगम

यह भजन भोजपुरी लोक संगीत की सुरीली परंपरा और उच्च कोटि के आध्यात्मिक भाव का अद्भुत मिश्रण है। आम जनमानस की भाषा में रचे जाने के कारण यह सीधे हृदय को स्पर्श करता है।

आदिशक्ति की महिमा

सनातन धर्म में माता दुर्गा को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी माना गया है। इस अमृतवाणी का श्रवण करने से साधक को माता के विभिन्न स्वरूपों जैसे महालक्ष्मी और महासरस्वती की कृपा का अनुभव होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी भजनों के गायन और श्रवण के लिए प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त और संध्या बेला को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। नवरात्रि के पावन नौ दिनों में, मंगलवार या शुक्रवार के विशेष दिनों में तथा दैनिक पूजा-अर्चना के समय इस अमृतवाणी का श्रवण करना अत्यधिक लाभकारी होता है।

  • उचित समय: प्रातः स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर या संध्याकाल में दीप प्रज्वलित करने के बाद।
  • स्थान: घर के पूजा स्थल, मंदिर अथवा शांत वातावरण में बैठकर एकाग्रचित्त होकर।
  • भाव: मन में पूर्ण समर्पण, श्रद्धा और विश्वास रखते हुए माता के चरणों में ध्यान लगाना।

आप अपने घर पर संध्या वंदन के समय अन्य लोकप्रिय स्तोत्रों जैसे शिव तांडव स्तोत्र या श्री हनुमान चालीसा के साथ भी इस अमृतवाणी का आनंद ले सकते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा हैं, जिन्हें शक्ति का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है। देवीभागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर अंधकार और अधर्म का बोलबाला होता है, तब-तब माता दुर्गा दुष्टों का संहार करने और भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होती हैं।

इस रचना को स्वरबद्ध करने वाले कलाकार विकी तिवारी (Vicky Tiwari) हैं, जिन्होंने अपनी मधुर एवं ओजस्वी वाणी से भोजपुरी भक्ति संगीत को एक नई ऊर्ध्वगामी दिशा दी है। उनकी गायकी में लोक संस्कृति की सोंधी खुशबू के साथ-साथ उच्चकोटि का भक्ति भाव स्पष्ट झलकता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी और हिंदी के लोक-सुलभ शब्दों में रचा गया है। इसमें प्रयुक्त शब्दावली जैसे 'झोली पसार लीं', 'शेरवा पे सवार', 'चरणवा' और 'मुकुटवा' भोजपुरी आ आँचलिक संस्कृति की मिठास को दर्शाती है। काव्य शैली प्रवाहमयी और संगीतात्मक है, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। रूपक और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग इस रचना को साहित्यिक दृष्टि से भी समृद्ध बनाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

पूर्ण शरणागति

जीवन की हर बाधा को पार करने के लिए ईश्वर के प्रति अनन्य समर्पण और विश्वास आवश्यक है।

माया से मुक्ति

संसार के झूठे प्रपंचों और मोह-माया से ऊपर उठकर अपने मूल आध्यात्मिक स्वरूप को पहचानना ही जीवन का सार है।

निर्भयता

माता की शरण में जाने वाला व्यक्ति सभी प्रकार के भय और संकटों से मुक्त हो जाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
अमृतवाणी अमृत तुल्य वचन या वाणी कल्याणकारी और आत्मा को तृप्त करने वाले पावन बोल
झोली पसार लीं हाथ फैलाकर प्रार्थना करना भगवान के समक्ष पूर्ण दीनता और समर्पण भाव प्रकट करना
शेरवा पे सवार सिंह पर आसीन होना माँ दुर्गा के शौर्य, तेज और नियंत्रण का प्रतीक
माया सांसारिक प्रपंच और भ्रम मनुष्य को ईश्वर से दूर करने वाली भौतिक आ सकती

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम दुर्गा अमृतवाणी - भक्ति गीत (Durga Amritvani)
गायक / कलाकार विकी तिवारी (Vicky Tiwari)
आराध्य देवी माँ दुर्गा (आदिशक्ति)
भाषा भोजपुरी / हिंदी
संगीत शैली लोक भक्ति गीत / भजन
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, करुणा और शरणागति
शुभ अवसर शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि, मंगलवार, शुक्रवार तथा दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय भजन को प्रसिद्ध भोजपुरी भक्ति गायक विकी तिवारी (Vicky Tiwari) ने अपने मनमोहक स्वर में गाया है।

यह भजन मुख्य रूप से ठेठ भोजपुरी लोक भाषा और सरल हिंदी के मिश्रण में प्रस्तुत किया गया है, जो आम जनमानस के हृदय को आसानी से छू लेता है।

इस अमृतवाणी का श्रवण करने से मन की अशांति दूर होती है, नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है तथा माता दुर्गा की असीम कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है।

इसे नवरात्रि के पावन पर्वों पर, मंगलवार और शुक्रवार को, अथवा अपने घर में दैनिक पूजा-पाठ और संध्या आरती के समय सुन सकते हैं।

हाँ, यह एक पूर्ण रूप से पारिवारिक और शुद्ध भक्ति भजन है जिसे परिवार के सभी सदस्य मिलकर सुन सकते हैं।

बिल्कुल, आप Bhaktilok.in पर दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती के श्लोक और 108 पावन नामों की माला का भी पाठ कर सकते हैं।

इस भजन का मुख्य भाव सांसारिक चिंताओं को त्यागकर माँ दुर्गा के चरणों में पूर्ण शरणागति और अटूट विश्वास रखना है।

हाँ, इस लेख में संपूर्ण भजन के बोल देवनागरी लिपि में और उनके अर्थ सहित विस्तार से दिए गए हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री: Bhaktilok.in पर प्रस्तुत यह मार्गदर्शिका सनातन परंपरा, लोक भक्ति गीतों और प्रामाणिक सांस्कृतिक संदर्भों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। हमारा उद्देश्य पाठकों को उच्च गुणवत्ता वाली और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध सामग्री प्रदान करना है। यदि आपको इस लेख से संबंधित कोई सुझाव देना हो, तो कृपया संपर्क करें।

स्रोत एवं संदर्भ

  • सनातन लोक संगीत एवं पारंपरिक भोजपुरी भजन परंपरा।
  • देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)।
  • विकी तिवारी द्वारा प्रस्तुत लोकगीत एवं भक्ति एल्बम अभिलेख।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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