Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

भोजपुरी देवीगीत - मैया भइली गुलरी के फूल (Sonam Raj & Mona Singh)

सोनम राज और मोना सिंह की मधुर आवाज़ में भोजपुरी देवीगीत 'मैया भइली गुलरी के फूल' का आनंद लें। माता दुर्गा की महिमा और भक्ति से भरे इस भजन को यहाँ सुनें।

Devi Geet / Bhojpuri Bhajan

मैया भइली गुलरी के फूल | Sonam Raj & Mona Singh Devigeet | Bhakti Song-Bhaktilok

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह पावन लोकगीत एवं भजन "मैया भइली गुलरी के फूल" जगत जननी की असीम कृपा, करुणा और महिमा का अत्यंत सुंदर गान करता है। भोजपुरी लोक संगीत की सोंधी खुशबू और लोक परंपरा में माता के रूपों का यह अनूठा वर्णन साधक के हृदय में भक्ति और समर्पण का भाव जागृत करता है। सोनम राज और मोना सिंह की मधुर आवाज़ में सजे इस देवी गीत में सनातन संस्कृति की उस अटूट आस्था की झलक मिलती है, जहाँ भक्त अपनी आराध्य को प्रकृति के सबसे दुर्लभ और पवित्र प्रतीकों के माध्यम से निहारता है। गुलरी का फूल (गूलर का फूल) प्रकृति में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है, और जब भक्त माता की महिमा को इस दुर्लभता से जोड़ता है, तो उसका अर्थ होता है कि माँ के दर्शन और उनकी कृपा का मिलना साधारण बात नहीं, बल्कि यह परम सौभाग्य का विषय है। यह गीत चैत्र और शारदीय नवरात्र के पावन अवसरों पर विशेष रूप से घर-घर, मंदिरों और पूजा पंडालों में गूंजता है, जो श्रोताओं को माँ के चरणों में पूरी तरह समर्पित होने की प्रेरणा देता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मखड़ा (स्थाई): निमिया के दाढ़ी मैया झुलेली झुलुवा, झुलुवा झुलेईं ना... मैया भइली गुलरी के फूल, दर्शन दियs ना मोर मइया! दर्शन दियs ना मोर मइया, कि भाग जागल हो... अंतरा 1: लहलहाए खेतावली हरियर बथुआ, मैया के चरणवा में लागल बा माथुआ। शेरावाली के महिमा अपार बा, भक्तन के बेइया में नैया त पार बा। मैया भइली गुलरी के फूल, दर्शन दियs ना मोर मइया! अंतरा 2: चैत के रतिया में जगराता सजेलs, अंखियां के तारा बनिके मनवा मोहेलs। सुनिहा पुकार मोरी हे जगदम्बा, तू ही तो हउअ मेहरारू के अम्बा। मैया भइली गुलरी के फूल, दर्शन दियs ना मोर मइया! समापन: सोनम राज गावे आ मोना सिंह संगे, भक्ति के रंग लागल सबके अंग-अंग में। भक्तलोक के दुआ बा कि कृपा बनल रहे, मैया के चरण में जीवन सफल भयल रहे। बोलs सांचा दरबार की जय!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस लोकगीत का भाव अत्यंत गहरा और लोक-संस्कृति से जुड़ा हुआ है। "मैया भइली गुलरी के फूल" पंक्ति के माध्यम से गीतकार ने माता के दर्शन की दुर्लभता और उनके प्रति अनन्य प्रेम को दर्शाया है। जिस प्रकार गूलर का फूल आसानी से दिखाई नहीं देता और जिसके मिलने को अत्यंत दुर्लभ व शुभ माना जाता है, उसी प्रकार कलियुग में सच्चे मन से जगत जननी माँ के अलौकिक दर्शन पाना और उनकी कृपा प्राप्त करना परम पुण्य का परिणाम है।

गीत की शुरुआत निमिया (नीम) के पेड़ से होती है, जिसे सनातन परंपरा में माँ दुर्गा का वास स्थल माना जाता है। नीम के पेड़ के नीचे शीतला माता और दुर्गा जी की पूजा का विधान है। भक्त भावुक होकर पुकारता है कि हे मैया! आप नीम की छांव में झूला झूल रही हैं, कृपया हमें अपने दर्शन देकर हमारे सोए हुए भाग्य को जगा दीजिए। खेतों की हरियाली और ग्रामीण परिवेश के बिंबों के माध्यम से गीत यह संदेश देता है कि प्रकृति के कण-कण में माँ की शक्ति समाहित है। जब भक्त पूरी निष्ठा से माँ की आराधना करता है, तो उसके जीवन की नैया भवसागर से पार हो जाती है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भोजपुरी देवी गीत की मूल भावना वात्सल्य, विनय, समर्पण और आनंद की है। लोक संगीत के माध्यम से भगवान और भक्त के बीच के रिश्ते को अत्यंत सहज और घरेलू रूप में प्रस्तुत किया गया है।

  • दुर्लभ दर्शन की आस: गुलरी के फूल के माध्यम से माँ की कृपा की दुर्लभता को दर्शाया गया है।
  • प्रकृति और देवत्व का समन्वय: नीम का पेड़, हरियाली और चैत्र नवरात्रि की रात्रियां ग्रामीण भारत की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाती हैं।
  • समर्पण और विश्वास: भक्त का यह अटूट विश्वास कि माँ उसकी पुकार अवश्य सुनेगी और उसका जीवन सफल बनाएगी।

पढ़िए अन्य पावन भजन जैसे श्री दुर्गा चालीसा और अंबे तू है जगदंबे काली आरती जो साधक के मन को शक्ति और शांति से भर देते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Name) भोजपुरी देवीगीत - मैया भइली गुलरी के फूल
गायिका (Singers) सोनम राज (Sonam Raj) & मोना सिंह (Mona Singh)
विधा (Genre) भोजपुरी देवी गीत / लोक भजन (Bhojpuri Devi Geet)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri / Hindi)
मुख्य विषय (Theme) माता दुर्गा की महिमा एवं दर्शन की लालसा
प्लेटफॉर्म / संदर्भ भक्तिलोक (Bhaktilok.in)

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ संदर्भ / प्रसंग
गुलरी के फूल गूलर का फूल (जो बहुत दुर्लभ होता है) माँ के दर्शन की दुर्लभता और पवित्रता
निमिया के दाढ़ी नीम के पेड़ के नीचे या छांव में माता दुर्गा का पारंपरिक वास स्थल
झुलुवा झूला नवरात्रि में माँ के स्वागत का उत्सव
भाग जागल सौभाग्य जागृत होना माँ के दर्शन से जीवन का धन्य हो जाना
जगराता जागरण (रात्रि भर भजन-पूजन) नवरात्रि के पावन दिनों की साधना

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भोजपुरी क्षेत्र में लोक गीतों के बिना कोई भी अनुष्ठान या त्योहार अधूरा माना जाता है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान जब माता के भक्त उपवास रखते हैं, तब घरों और मंदिरों में ऐसे देवी गीत गूंजते हैं जो वातावरण को पूरी तरह ऊर्जावान और पवित्र बना देते हैं। सोनम राज और मोना सिंह जैसे कलाकारों द्वारा गाए जाने वाले ये गीत नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़े रखने का कार्य करते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से, 'गुलरी का फूल' होना यह सिखाता है कि जिस प्रकार परमात्मा की प्राप्ति सहज नहीं है, उसके लिए साधना, धैर्य और सच्चे प्रेम की आवश्यकता होती है, ठीक उसी प्रकार माँ की कृपा पाने के लिए अहंकार का त्याग कर बालक की तरह सरल बनना पड़ता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह देवी गीत निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से सुना और गाया जाता है:

  • चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि: नौ दिनों तक चलने वाले माता के पर्व पर प्रतिदिन सुबह-शाम।
  • माता का जागरण एवं चौकी: रात्रि के समय जबज माता का गुणगान होता है।
  • पारंपरिक अनुष्ठान: मुंडन, विवाह या गृह प्रवेश के समय देवी पूजन के अवसर पर।
  • दैनिक पूजा: प्रातःकालीन स्तुति के समय जब मन को प्रसन्न करना हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: 'मैया भइली गुलरी के फूल' गीत के मुख्य गायक कौन हैं?

इस लोकप्रिय देवी गीत को सोनम राज और मोना सिंह ने अपनी मधुर आवाज़ में गाया है।

Q2: गीत में 'गुलरी के फूल' कहने का क्या आध्यात्मिक अर्थ है?

गूलर का फूल अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। यहाँ इसका अर्थ माँ के दर्शन और उनकी कृपा की दुर्लभता व विशिष्टता से है।

Q3: यह गीत किस भाषा और शैली में है?

यह गीत मधुर भोजपुरी लोक शैली में रचित एक लोकप्रिय देवी भजन है।

Q4: इस गीत को किस अवसर पर सुनना सबसे अच्छा माना जाता है?

इसे नवरात्रि, माता के जागरण, और किसी भी देवी पूजन के पावन अवसर पर सुनना अत्यंत आनंददायक और शुभ होता है।

Q5: निमिया के पेड़ का देवी गीतों में क्या महत्व है?

सनातन परंपरा में नीम (निमिया) के पेड़ में माता शीतला और आदिशक्ति दुर्गा का वास माना जाता है, इसलिए देवी गीतों में इसका बार-बार उल्लेख होता है।

Q6: क्या इस गीत को घर पर पूजा के दौरान गाया जा सकता है?

हाँ, यह एक अत्यंत सरल और मधुर लोक गीत है जिसे घर की महिलाएं और भक्तगण आसानी से गा सकते हैं।

Q7: ऐसे अन्य भजन कहाँ सुने जा सकते हैं?

आप Bhaktilok.in पर अन्य लोकप्रिय देवी भजन, चालीसा और स्तोत्र पढ़ और सुन सकते हैं।

Q8: क्या इस गीत से संबंधित कोई विशेष कथा है?

यह विशुद्ध रूप से भक्तिभाव और लोक-संस्कृति पर आधारित एक स्तुति गीत है जो माँ के प्रति प्रेम को प्रकट करता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है जो उपयोगकर्ताओं को पारंपरिक भोजपुरी देवी गीतों, उनके सांस्कृतिक महत्व और आध्यात्मिक भावार्थ से अवगत कराती है। सभी तथ्य लोक परंपराओं और उपलब्ध संगीत स्रोतों पर आधारित हैं।


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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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