हिंदू धर्म और भक्ति परंपरा में संकटमोचन श्री हनुमान जी की महिमा अनंत है। वे कलयुग के जागृत देव हैं जो अपने भक्तों की पुकार पर तुरंत दौड़े चले आते हैं। "गिरतों को जिसने संभाला वो है अंजनी लाला" (Girton Ko Jisne Sambhala) एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय हनुमान भजन है, जो साधक के भीतर अनन्य शरणागति, अगाध श्रद्धा और परम शांति का संचार करता है। यह भजन मुख्य रूप से 'विनय' और 'समर्पण' के भाव (शरणागति भाव) पर आधारित है। जब मनुष्य सांसारिक कठिनाइयों, मानसिक संताप और जीवन के थपेड़ों से टूटकर स्वयं को असहाय महसूस करता है, तब अंजनी पुत्र हनुमान जी की यह वंदना उसे एक नया संबल, आत्मबल और सुरक्षा का अहसास कराती है। इस भजन का गायन विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती और सुंदरकांड के पाठ के समय किया जाता है। यह लेख इस पावन भजन के आध्यात्मिक रहस्य, विस्तृत भावार्थ और इसके महत्व को उजागर करने वाला एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ गिरतों को जिसने संभाला वो है अंजनी लाला ॥
(कोरस / मुखड़ा)
गिरतों को जिसने संभाला, वो है अंजनी लाला।
संकट में जिसने बचाया, वो है अंजनी लाला॥
गिरतों को जिसने संभाला, वो है अंजनी लाला...
(अंतरा - 1)
राम का प्यारा, लक्ष्मण का दुलारा,
भक्तों की आँखों का वो है तारा।
जिसने भी सच्चे दिल से पुकारा,
दौड़ा चला आया वो अंजनी लाला॥
गिरतों को जिसने संभाला, वो है अंजनी लाला...
(अंतरा - 2)
लंका जलाई, सिया सुध लाए,
संजीवनी लाके लक्ष्मण बचाए।
पर्वत को जिसने उठाया, वो है अंजनी लाला॥
गिरतों को जिसने संभाला, वो है अंजनी लाला...
(अंतरा - 3)
कलयुग के देव तुम ही हो विधाता,
भक्तों के संकट तुम ही मिटाता।
चरणों में जिसने शीश झुकाया,
उसको गले से लगाया वो अंजनी लाला॥
गिरतों को जिसने संभाला, वो है अंजनी लाला...
(अंतरा - 4)
दीनों के बंधु, करुणा के सागर,
ज्ञान गुण शील के तुम हो उजागर।
'भक्तिलोक' में जो भी ध्यावे,
उसका बेड़ा पार लगाया वो अंजनी लाला॥
गिरतों को जिसने संभाला, वो है अंजनी लाला...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल संदेश अत्यंत गहरा और व्यावहारिक है। यहाँ "गिरतों" शब्द का अर्थ केवल शारीरिक रूप से गिरने वाले से नहीं है, बल्कि उन मनुष्यों से है जो अपने जीवन में हताश हो चुके हैं, जो पाप, अज्ञान, अवसाद और सांसारिक कष्टों के दलदल में धंसते जा रहे हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी समस्त शक्तियों को क्षीण पाता है और प्रभु की शरण में जाता है, तब हनुमान जी उसे अपनी कृपामयी भुजाओं से थाम लेते हैं।
भजन के प्रथम भाग में हनुमान जी के सौम्य और रक्षक रूप का वर्णन है। वे प्रभु श्री राम के अत्यंत प्रिय सेवक हैं और माता अंजनी के लाडले पुत्र हैं। जब लक्ष्मण जी रणभूमि में मूर्छित हुए थे, तब हनुमान जी ने द्रोणागिरी पर्वत उठाकर और संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राणों की रक्षा की थी। यह प्रसंग दर्शाता है कि हनुमान जी असंभव कार्य को भी संभव करने की सामर्थ्य रखते हैं।
अंतिम पंक्तियों में कलयुग में उनकी उपस्थिति और महत्ता को दर्शाया गया है। कलयुग में हनुमान जी को अष्टसिद्धि और नवनिधि के दाता के रूप में पूजा जाता है। जो भी भक्त निष्काम भाव से उनके चरणों में अपना मस्तक झुकाता है, हनुमान जी उसे अपनी शरण में लेकर उसके जीवन के समस्त क्लेशों का अंत कर देते हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह भजन केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि यह हनुमान जी के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- शरणागति का संदेश: यह भजन सिखाता है कि जब हम अपने अहंकार को त्यागकर हनुमान जी की शरण में जाते हैं, तो वे हमारे रक्षक बन जाते हैं।
- संकटमोचन रूप का स्मरण: भजन की प्रत्येक पंक्ति हनुमान जी के संकटमोचन स्वरूप को याद दिलाती है, जिससे साधक का भय दूर होता है।
- मानसिक शांति और सकारात्मकता: इस भजन के नियमित श्रवण और कीर्तन से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और अवसाद का नाश होता है।
- भक्ति मार्ग का सुदृढ़ीकरण: यह भजन रामभक्ति के बिना हनुमान जी की कृपा असम्भव है, इस सनातन सत्य को भी प्रतिपादित करता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यद्यपि ईश्वर की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु शास्त्रों और लोक परंपराओं के अनुसार इस भजन के गायन की एक विशेष विधि और समय है:
- सर्वोत्तम दिन: मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष माना गया है। इन दिनों इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी होता है।
- समय: संध्याकाल में हनुमान जी की आरती से पूर्व या सुंदरकांड के पाठ के उपरांत इस भजन को सामूहिक रूप से गाना चाहिए।
- विधि: सर्वप्रथम हनुमान जी की प्रतिमा के सम्मुख शुद्ध घी या चमेली के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। उन्हें लाल पुष्प और बूंदी का प्रसाद अर्पित करें। इसके पश्चात शांत चित्त होकर, हाथ जोड़कर पूर्ण श्रद्धा के साथ इस भजन का कीर्तन करें।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
यह भजन मुख्य रूप से पवनपुत्र श्री हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार माने जाते हैं। उनके साथ ही इस भजन में प्रभु श्री राम, माता सीता और भ्राता लक्ष्मण का भी स्मरण किया गया है, क्योंकि हनुमान जी की भक्ति श्री राम के बिना अधूरी है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी अपनी रचनाओं में स्पष्ट किया है कि जो राम का भक्त है, वही हनुमान जी का प्रिय पात्र बन सकता है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
यह भजन पारंपरिक लोक धुनों और आधुनिक भक्ति संगीत के समन्वय से तैयार किया गया है। इसकी रचना लोक कवियों द्वारा हनुमान जी की असीम अनुकंपा का अनुभव करने के बाद की गई है। भारतीय जनमानस में यह भजन वर्षों से विभिन्न संकीर्तन मंडलियों और मंदिरों में गाया जाता रहा है। इसकी सरल शब्दावली के कारण यह बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी की जिह्वा पर आसानी से चढ़ जाता है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली 'गेय' (गाने योग्य) है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का सहज प्रयोग हुआ है। "अंजनी लाला", "करुणा के सागर", "दीनों के बंधु" जैसे विशेषण हनुमान जी के दिव्य गुणों को अत्यंत सजीव रूप में प्रस्तुत करते हैं।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:
- अहंकार का त्याग: जब हम स्वीकार करते हैं कि "संभालने वाला" कोई और है, तो हमारे भीतर का कर्तापन का अहंकार समाप्त हो जाता है।
- निस्वार्थ सेवा: हनुमान जी ने जीवनभर निष्काम सेवा की। हमें भी अपने कर्तव्यों का पालन बिना किसी फल की आस के करना चाहिए।
- संकट में धैर्य: जैसे हनुमान जी ने विकट परिस्थितियों में भी धैर्य नहीं खोया, वैसे ही हमें भी कठिन समय में विचलित नहीं होना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| अंजनी लाला | माता अंजनी के पुत्र (हनुमान जी) | हनुमान जी का वात्सल्य रूप |
| गिरतों को | जो मार्ग से भटक गए हैं या दुखी हैं | सांसारिक कष्टों से पीड़ित जीव |
| सिया सुध | माता सीता की खोज / खबर | कर्तव्यनिष्ठा और भक्ति की पराकाष्ठा |
| संजीवनी | प्राणदायिनी बूटी | असंभव को संभव करने की शक्ति |
| दीनों के बंधु | गरीबों और असहायों के मित्र | हनुमान जी की असीम करुणा |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"गिरतों को जिसने संभाला, वो है अंजनी लाला..."
जो मनुष्य अपने कर्मों, परिस्थितियों या अज्ञानता के कारण जीवन में नीचे गिर रहे हैं, उन्हें जो सहारा देकर पुनः खड़ा करता है, वे कोई और नहीं बल्कि माता अंजनी के दुलारे हनुमान जी हैं।
"राम का प्यारा, लक्ष्मण का दुलारा, भक्तों की आँखों का वो है तारा..."
हनुमान जी प्रभु श्री राम के अत्यंत प्रिय सेवक हैं और लक्ष्मण जी के प्राणदाता होने के कारण उनके दुलारे हैं। वे समस्त रामभक्तों के हृदय के स्वामी और अत्यंत प्रिय हैं।
"लंका जलाई, सिया सुध लाए, संजीवनी लाके लक्ष्मण बचाए..."
यहाँ हनुमान जी के पराक्रम का वर्णन है। उन्होंने रावण की सोने की लंका को भस्म कर दिया, माता सीता की खोज की और जब लक्ष्मण जी युद्ध में मूर्छित हुए, तो संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राणों की रक्षा की।
"कलयुग के देव तुम ही हो विधाता, भक्तों के संकट तुम ही मिटाता..."
कलयुग में हनुमान जी साक्षात और जाग्रत देव हैं। वे अपने भक्तों के भाग्य का निर्माण करने वाले और उनके सभी कष्टों को हरने वाले परमेश्वर स्वरूप हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ हनुमान जी के इस सिद्ध श्लोक का स्मरण करने से भक्ति का प्रभाव दोगुना हो जाता है:
"अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥"
भावार्थ: जो अतुलनीय बल के धाम हैं, सोने के पर्वत (सुमेरु) के समान जिनका कांतियुक्त शरीर है, जो दैत्यरूपी वन को भस्म करने के लिए अग्नि स्वरूप हैं, ज्ञानियों में अग्रगण्य हैं, समस्त गुणों के निधान हैं, वानरों के स्वामी हैं और श्री रघुनाथ जी के प्रिय भक्त हैं, उन पवनपुत्र हनुमान जी को मैं प्रणाम करता हूँ।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | गिरतों को जिसने संभाला वो है अंजनी लाला |
| आराध्य देव | श्री हनुमान जी (अंजनी पुत्र) |
| मुख्य विषय | संकटमोचन रूप, शरणागति, करुणा |
| भाषा | सरल हिंदी (खड़ी बोली) |
| भक्ति भाव | दास्य भाव, शरणागति भाव |
| उपयुक्त अवसर | मंगलवार पूजा, शनिवार पूजा, हनुमान जयंती, सुंदरकांड पाठ |
| संबंधित ग्रंथ | श्रीरामचरितमानस, हनुमान चालीसा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के पाठ और इसके भावार्थ को तैयार करने में सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों जैसे 'श्रीरामचरितमानस' (सुंदरकांड) और पारंपरिक हनुमान भक्ति साहित्य का सहारा लिया गया है। हमारी संपादकीय टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि भजन के शब्द और उनका अर्थ पूरी तरह से शुद्ध और भक्ति भावना के अनुकूल हो, ताकि पाठकों को एक प्रामाणिक और समृद्ध आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हो सके।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण: हनुमान जी के पराक्रम और संजीवनी लाने का प्रसंग।
- श्रीरामचरितमानस (गोस्वामी तुलसीदास): हनुमान जी की भक्ति और राम-लक्ष्मण के प्रति उनका समर्पण।
- पारंपरिक भजन संग्रह: उत्तर भारत की कीर्तन परंपराओं से संकलित पाठ।
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