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गजानन की मूर्ति को करलो नमन (Gajanan Ki Murti Ko Karlo Naman)

गजानन की मूर्ति को करलो नमन भजन सुनें। नरेंद्र चंचल द्वारा गाये गए इस लोकप्रिय गणेश भजन के बोल, अर्थ और महत्व की जानकारी पढ़ें।

गजानन की मूर्ति को करलो नमन | Gajanan Ki Murti Ko Karlo Naman | Ganpati Bhajan Narendra Chanchal Full Audio Song - Bhaktilok

भगवान श्री गणेश जी हिन्दू सनातन संस्कृति और अध्यात्म में 'प्रथम पूज्य' के रूप में विराजमान हैं। किसी भी नए कार्य की शुरुआत, मांगलिक अनुष्ठान, विवाह या गृह प्रवेश से पूर्व विघ्नहर्ता गणेश जी का स्मरण करना अत्यंत शुभ और अनिवार्य माना गया है। लीजेंड्री पार्श्व गायक नरेंद्र चंचल द्वारा स्वरबद्ध किया गया यह पावन भजन "गजानन की मूर्ति को करलो नमन" गणेश भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रचना है। इस भजन का मुख्य भाव (Mood/Bhava) विनय, समर्पण, भक्ति और मंगलाचरण का है, जो साधक के मन से सभी प्रकार के डर, संकोच और विघ्नों को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। नरेंद्र चंचल जी की अनूठी और गूंजती हुई आवाज में यह गणपति भजन न केवल कानों को तृप्त करता है, बल्कि श्रोता के अंतःकरण में भगवान गणेश के गजमुख, विशाल उदर और मोदक प्रिय स्वरूप की एक अलौकिक छवि अंकित कर देता है। प्रातकालीन वंदना, गणेश चतुर्थी, बुधवार व्रत और विशेष अनुष्ठानों के समय इस भजन का श्रवण करने से मानसिक शांति, एकाग्रता और रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मूलाधार में वास तुम्हारा, विघ्नहर्ता नाम तुम्हारा,
जो भी ध्यावे मन से तुमको, पावे सुख और आराम सारा।
गजानन की मूर्ति को करलो नमन, करलो नमन भाई करलो नमन...

प्रथम पूजे गणेश भवानी, जिनकी महिमा वेदों ने जानी,
तीन लोक में गूंजे डंका, जिनकी महिमा सबसे सानी।
गजानन की मूर्ति को करलो नमन, करलो नमन भाई करलो नमन...

सूंड तुम्हारी प्यारी लागे, मूसा वाहन जिस पै भागे,
मोदक भोग लगाओ प्यारे, संकट सारे पल में भागे।
गजानन की मूर्ति को करलो नमन, करलो नमन भाई करलो नमन...

रिद्धि सिद्धि के तुम हो दाता, जगत पिता और जगत के माता,
नरेंद्र गाए तेरी महिमा, चरणों में झुकाए अपना माथा।
गजानन की मूर्ति को करलो नमन, करलो नमन भाई करलो नमन...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन श्री गणेश जी की महिमा, उनके स्वरूप और उनके आशीर्वाद का अत्यंत सरल और मार्मिक वर्णन प्रस्तुत करता है। भजन के मुखड़े और अंतरा में भक्त को यह प्रेरणा दी जाती है कि वह सांसारिक चिंताओं और विघ्नों से मुक्त होने के लिए भगवान गजानन की शरण में जाए।

भजन की पहली पंक्ति में गणेश जी को 'विघ्नहर्ता' और मूलाधार चक्र का स्वामी बताया गया है। योग साधना और अध्यात्म के अनुसार, मूलाधार चक्र हमारे शरीर का आधार है, और गणेश जी इस चक्र के अधिष्ठाता देव हैं। जो भक्त सच्चे मन से उनका ध्यान करता है, उसके जीवन के सभी कष्ट और बाधाएं समाप्त हो जाती हैं।

आगे गायक नरेंद्र चंचल जी वर्णन करते हैं कि तीनों लोकों में भगवान गणेश की महिमा अपरंपार है। वेदों और पुराणों में उन्हें देवताओं में सबसे पहले पूजनीय माना गया है। उनकी गजमुख आकृति, उनकी प्यारी सूंड, उनका मूसा (मूषक) वाहन और उन्हें प्रिय मोदक का भोग इस भजन की सुंदरता को और अधिक बढ़ाते हैं। भगवान गणेश अपने भक्तों के सभी संकटों को पल भर में हर लेते हैं। अंत में, गायक अपने समर्पण भाव को प्रकट करते हुए कहता है कि रिद्धि और सिद्धि के प्रदाता गणेश जी के चरणों में माथा झुकाने से जीवन सफल हो जाता है.

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुरीली और सरल शब्दावली है, जिसे किसी भी उम्र का व्यक्ति आसानी से गा और समझ सकता है। भगवान गणेश जी को समर्पित यह रचना विशेष रूप से निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण है:

  • विघ्ननाशक स्वरूप: भजन श्रवण करने से जीवन की बाधाएं दूर होने की आध्यात्मिक मान्यता है।
  • भक्ति रस का प्रवाह: नरेंद्र चंचल जी की ओजस्वी और भावपूर्ण आवाज श्रोताओं में तुरंत भक्ति भाव जगा देती है।
  • गणपति उपासना का आधार: यह भजन सनातन संस्कृति में गणेश वंदना के महत्व को गहराई से रेखांकित करता है।
  • मानसिक शांति: सुबह के समय इस भजन को सुनने से पूरा दिन सकारात्मक और ऊर्जावान रहता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन का आनंद और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित समय और विधियां उपयुक्त मानी जाती हैं:

  • प्रातःकाल की वंदना: स्नान के बाद सुबह पूजा के समय दीपक प्रज्वलित करके इसे सुना या गाया जा सकता है।
  • बुधवार का दिन: भगवान गणेश को समर्पित बुधवार के व्रत और पूजा में इसका विशेष रूप से गान किया जाता है।
  • गणेश चतुर्थी और महोत्सव: गणेश उत्सव, संकष्टी चतुर्थी और किसी भी नए कार्य के शुभारंभ पर यह भजन अत्यंत फलदायी है।
  • सांसारिक तनाव के समय: जब भी मन में निराशा या बाधा महसूस हो, इस भजन का श्रवण मानसिक संबल प्रदान करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश हैं, जिन्हें शिव और पार्वती का पुत्र, बुद्धि का देवता और रिद्धि-सिद्धि का स्वामी माना जाता है। इस भजन को स्वर देने वाले प्रसिद्ध भक्ति गायक नरेंद्र चंचल हैं, जिन्होंने अपनी अनूठी माता की भेंटों और भजनों के माध्यम से भारतीय संगीत जगत में अमर स्थान प्राप्त किया है। उनकी गायकी में एक खास जीवंतता होती है जो श्रोता को सीधे भगवान के चरणों से जोड़ देती है। अधिक जानकारी के लिए श्री गणेश चालीसा और गणपति आरती के पावन पाठ का भी अध्ययन कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

पारंपरिक भक्ति संगीत की परंपरा में रचे गए इस भजन को लोकप्रिय ऑडियो एलबम्स के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया गया। नरेंद्र चंचल जी की गायन शैली हमेशा से आम जनता के दिलों के करीब रही है। उन्होंने अपनी आवाज के जरिए गजानन के स्वरूप का ऐसा सजीव चित्रण किया है कि हर कोई गणेश भक्ति में झूम उठता है। यह भजन भारतीय लोक संस्कृति और शास्त्रीय भक्ति परंपरा का एक सुंदर संगम है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन सरल हिंदी और ब्रज-अवधि मिश्रित लोक भाषा में रज़ा गया है। इसमें अनुप्रास और रूपक अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है। शब्दों का चयन ऐसा है कि संगीत के ताल और सुर के साथ आसानी से बैठ जाता है। 'विघ्नहर्ता', 'मूलाधार', 'मोदक भोग', और 'रिद्धि-सिद्धि' जैसे पारंपरिक शब्दों के प्रयोग से इसकी धार्मिक गरिमा और अधिक बढ़ जाती है.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन केवल मनोरंजन या संगीत नहीं है, बल्कि जीवन का एक गहरा आध्यात्मिक पाठ पढ़ाता है:

  • विनम्रता और समर्पण: भगवान के चरणों में नमन करना अहंकार को त्यागने का प्रतीक है।
  • कार्यों की निर्विघ्नता: किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए गणेश जी जैसी बुद्धि और विवेक की आवश्यकता होती है।
  • संकटों का सामना: भगवान पर अटूट विश्वास रखने से जीवन के बड़े से बड़े संकट आसानी से टल जाते हैं।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ संधर्भित प्रसंग
गजानन हाथी के मुख वाले (श्री गणेश) भगवान गणेश का विशेष नाम
विघ्नहर्ता सभी बाधाओं को दूर करने वाले भक्तों के संकट हरने की क्षमता
मूलाधार शरीर का आधार चक्र / मूल केंद्र योग और कुंडलिनी में गणेश जी का स्थान
मोदक लड्डू / मिठाई गणेश जी का प्रिय भोग
रिद्धि-सिद्धि सफलता और ऐश्वर्य की देवियां गणेश जी की दोनों पत्नियां एवं शक्तियां

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"मूलाधार में वास तुम्हारा, विघ्नहर्ता नाम तुम्हारा..."
भावार्थ: हे गणेश जी! आप हमारे शरीर के मूल केंद्र में विराजमान हैं और आपका नाम ही सभी बाधाओं को हरने वाला है। जो भी भक्त आपको सच्चे मन से याद करता है, वह समस्त सुखों और आनंद को प्राप्त करता है।

"प्रथम पूजे गणेश भवानी, जिनकी महिमा वेदों ने जानी..."
भावार्थ: माता पार्वती और भगवान शिव के नंदन गणेश जी की पूजा सभी देवी-देवताओं से पहले की जाती है। वेदों और शास्त्रों ने आपकी महिमा का गान किया है और तीनों लोकों में आपकी महानता सर्वोपरि है।

"सूंड तुम्हारी प्यारी लागे, मूसा वाहन जिस पै भागे..."
भावार्थ: आपकी गजमुख सूंड अत्यंत मनमोहक है और आपका वाहन मूषक (चूहा) है। आप अपने भक्तों को मोदक का भोग स्वीकार करके तुरंत उनके सारे संकट दूर कर देते हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

अर्थात: हे घुमावदार सूंड वाले, विशाल शरीर वाले, करोड़ों सूर्यों के समान कांतिवान भगवान गणेश! मेरे सभी कार्य हमेशा बिना किसी विघ्न के संपन्न करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम गजानन की मूर्ति को करलो नमन (Gajanan Ki Murti Ko Karlo Naman)
प्रमुख गायक नरेंद्र चंचल (Narendra Chanchal)
आराध्य देव भगवान श्री गणेश (विघ्नहर्ता)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
भक्ति भाव (Bhava) विनय, समर्पण, मंगलाचरण
उपयुक्त अवसर प्रातःकालीन पूजा, बुधवार व्रत, गणेश चतुर्थी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध गणपति भजन के गायक प्रसिद्ध भजन सम्राट एवं पार्श्व गायक नरेंद्र चंचल जी हैं।

यह भजन प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश जी को समर्पित है।

इस भजन को प्रातःकाल की पूजा के समय, बुधवार के दिन या किसी भी नए कार्य की शुरुआत से पहले सुनना सबसे उत्तम माना जाता है।

भगवान गणेश को मोदक और लड्डू का भोग सबसे अधिक प्रिय है, जिसका उल्लेख इस भजन में भी किया गया है।

गणेश जी अपने भक्तों के जीवन की सभी बाधाओं, संकटों और विघों को समाप्त करते हैं, इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता कहा जाता है।

हाँ, इसकी भाषा बहुत सरल और लयबद्ध है, जिससे इसे घर पर पूजा या सत्संग के दौरान आसानी से गाया जा सकता है।

भगवान गणेश का वाहन मूषक (चूहा) है।

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में किसी भी कार्य की शुरुआत ईश्वर के स्मरण और विनय भाव के साथ करनी चाहिए ताकि सभी बाधाएं दूर हों।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में भगवान गणेश की महिमा और नरेंद्र चंचल द्वारा गाए गए भजन के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक पक्षों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। सभी तथ्यों और अर्थों को प्रामाणिक धार्मिक परंपराओं के आधार पर संकलित किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं गणेश पुराण
  • पारंपरिक सनातन भजन संग्रह एवं लोक कथाएं
  • भक्ति संगीत एवं शास्त्रीय स्तोत्र ग्रंथ

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श्रेणियां: Latest Bhakti Song

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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