आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा को समर्पित सुप्रसिद्ध भजन "दुर्गा अमृतधारा" (Durga Amritdhara), जिसे सुमधुर स्वर में गायिका सुमन सहानी (Suman Sahani) द्वारा गाया गया है, सनातन भक्ति संगीत जगत की एक अत्यंत प्रेरणादायी और कर्णप्रिय प्रस्तुति है। माता दुर्गा, जो महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली का सम्मिलित स्वरूप हैं, इस सृष्टि की संचालिका, रक्षणकर्त्री और संहारकर्त्री हैं। माता के इस पावन भजन में साधक की विनीत पुकार, माता के चरणों में पूर्ण समर्पण और उनके ममतामयी स्वरूप का अत्यंत सजीव चित्रण मिलता है। जब-जब कलियुग के प्रभाव से मानव मन विचलित होता है, तब-तब ऐसे भक्ति गीत भक्तों के अंतःकरण को जागृत कर उन्हें धर्म, कर्म और भगवत्कृपा की ओर अग्रसर करते हैं। इस लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), उसके आत्मीय भावार्थ, गायन के महत्व और माता की महिमा पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
गायक/कलाकार: सुमन सहानी (Suman Sahani)
श्रेणी: दुर्गा भजन, नवीनतम भक्ति गीत, माता भजन, 108 नाम दुर्गा माला
संदर्भ URL: 2022/02/durga-amritdhara-suman-sahani-new-mata.html
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
॥ श्री दुर्गाय नमः ॥
दुर्गा अमृतधारा : भजन के संपूर्ण बोल
नमो दुर्गे महामाये शिवायै सततं नमः,
नमः संकटहरिणि देवि, पाहि नः करुणानिधे।
आई री आई, शेरावाली माता आई,
भक्तों के द्वारे पे खुशियों की बहार लाई।
सुमन सहानी गाये महिमा तुम्हारी माँ,
चरणों में झुक के कहे दुनिया सारी माँ...
मुखड़ा:
ओ मैया तेरी अमृतधारा बरसे रे,
तेरे दर्शन को मेरा मन तरसे रे।
चरणों की धूल ले लूँ माथे लगा के,
कट जाए सारे दुख भजन गा के।
मैया तेरी अमृतधारा बरसे रे...
अंतरा १:
लाल चुनरिया मैया तेरे पाँव सुहावे,
जो भी दर पे आए वो मनचाहा पावे।
हाथों में त्रिशूल और सिंह विराजे,
भक्तों के दिलों में मैया तेरी ज्योति राजी।
अंधियारे जीवन में उजाला कर दे,
हृदय के हर कोने को प्रकाश से भर दे।
अंतरा २:
मार्कण्डेय पुराण में तेरी महिमा गाई,
देवों ने मिलकर जब विपदा सुनाई।
प्रगट भई तू शक्ति रूप में महामाये,
दुष्टों का संहार कर अभय वर भगाये।
आज भी जो तेरा सच्चा सिमरन करे,
माता तू उसके सारे संकट हरे।
अंतरा ३:
सुमन सहानी की ये वाणी पावन हो जाए,
हर भक्त के मुख से जय माता दी आए।
सुख में भी सिमरन हो, दुःख में पुकार,
मैया तेरा आंचल है जीवन का आधार।
जय माँ दुर्गा, जय माता दी, जय दुर्गे भवानी,
गूंज रही जग में तेरी अमर कहानी।
॥ इति सम्पूर्ण भजन ॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
"दुर्गा अमृतधारा" भजन का मूल भाव साधक की माता के प्रति अनन्य प्रेम, विरह और अटूट श्रद्धा को व्यक्त करता है। भजन के मुखड़े में भक्त कहता है कि हे मैया! आपके चरणों से प्रवाहित होने वाली प्रेम और कृपा की अमृतधारा निरंतर बरसती रहे, जिसके दर्शन के लिए मेरा चंचल मन व्याकुल रहता है। माता के चरणों की धूल को माथे से लगाना मनुष्य के अहंकार को मिटाकर उसे पवित्र कर देता है।
अन्तरों में माता के अलौकिक रूप—लाल चुनरी, हाथों में त्रिशूल, सिंह पर सवारी—का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया गया है। यह इस बात का प्रतीक है कि माता न केवल ममतामयी हैं, बल्कि धर्म की रक्षा और दुष्टों के नाश के लिए रुद्र रूप धारण करने में भी सक्षम हैं। मार्कण्डेय पुराण एवं दुर्गा सप्तशती का संदर्भ देते हुए भजन यह स्मरण कराता है कि जब-जब देवताओं पर संकट आया, माँ आदिशक्ति ने प्रकट होकर ब्रह्मांड की रक्षा की। आज के कलिकाल में भी जो भक्त सच्चे मन से माता का स्मरण करता है, माँ उसकी सभी बाधाओं को दूर कर देती हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- दिव्य शक्ति का आह्वान: यह भजन श्रोता के भीतर सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक साहस का संचार करता है।
- पारंपरिक और आधुनिक मेलोडी का संगम: सुमन सहानी की ओजस्वी और मधुर आवाज इसे आधुनिक माता भजनों में एक विशिष्ट स्थान दिलाती है।
- शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि विशेष: नवरात्रि के नौ दिनों में विशेष रूप से इस प्रकार के भजनों का गान और श्रवण घरों एवं पंडालों में आध्यात्मिक वातावरण निर्मित करता है।
- मानसिक शांति: भजन के नियमित श्रवण से तनाव, भय और मानसिक अशांति दूर होती है तथा मन में भगवत विश्वास दृढ़ होता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
माता दुर्गा के भजनों को प्रातःकाल (ब्रह्म मुहूर्त) या संध्या बेला में दीप प्रज्वलित करके सुनना सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।
- समय: प्रातः 4:00 से 7:00 बजे तक अथवा संध्या आरती के समय (गोधूलि बेला)।
- स्थान: घर का पूजा स्थल, मंदिर, अथवा किसी भी पवित्र और शांत स्थान पर बैठकर।
- विधि: माता की मूर्ति या तस्वीर के समक्ष घी का दीपक जलाएं, लाल पुष्प अर्पित करें, धूप दिखाएं और एकाग्रचित्त होकर भजन का गान या श्रवण करें।
- विशेष अवसर: नवरात्रि, मंगलवार, अष्टमी, चतुर्दशी तथा जागरण के पावन अवसरों पर विशेष रूप से।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की मुख्य आराध्य देवी आदिशक्ति माँ दुर्गा हैं, जिन्हें वेदों और पुराणों में 'प्रकृति', 'महामाया', 'नारायणी' और 'जगदम्बा' कहा गया है। इसके साथ ही, इस भजन की लोकप्रिय गायिका सुमन सहानी हैं, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज और भक्तिपूर्ण शैली से इस गीत को जन-जन तक पहुँचाया है। सनातन धर्म में संगीत को मोक्ष प्राप्ति का एक सुगम मार्ग (नाद ब्रह्म) माना गया है, और ऐसे भजन भक्तों को सीधे ईश्वरीय चेतना से जोड़ते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
वर्ष 2022 में रिलीज हुआ यह भजन इंटरनेट और यूट्यूब के माध्यम से माता के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुआ। इसकी रचना समकालीन भक्ति संगीतकारों और गीतकारों द्वारा की गई है, जिनका मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को पारंपरिक देवी साधना और भक्ति से जोड़ना था। भजन की भाषा अत्यंत सरल, सुबोध और आम जनमानस के हृदय को स्पर्श करने वाली है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
भजन की भाषा सरल हिंदी और लोक-ब्रजभाषा मिश्रित खड़ी बोली है। इसमें उपमा, रूपक और अनुप्रास अलंकारों का सुंदर प्रयोग किया गया है। "अमृतधारा", "लाल चुनरिया", "चरणों की धूल" जैसे प्रतीक भक्तों की गहरी आस्था और भगवान के साथ उनके आत्मीय संबंध को दर्शाते हैं। काव्य शैली में प्रवाह और संगीतात्मकता का विशेष ध्यान रखा गया है ताकि कोई भी इसे आसानी से गा सके।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- अहंकार का त्याग: माता के चरणों में झुकना मनुष्य के भीतर छिपे अहंकार और अभिमान का नाश करता है।
- अटूट विश्वास: जीवन की कितनी भी विकट परिस्थितियाँ क्यों न हों, माता की कृपा पर विश्वास कभी नहीं डगमगाना चाहिए।
- धर्म के मार्ग पर चलना: देवी शक्ति सदा धर्म, सत्य और न्याय की रक्षा करती है, अतः मनुष्य को भी सत्कर्म का मार्ग अपनाना चाहिए।
- निसंकोच पुकार: जैसे बालक अपनी माँ को संकट में पुकारता है, वैसे ही भक्त को निष्कपट भाव से माँ का स्मरण करना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल अर्थ | संदर्भ / भाव |
|---|---|---|
| अमृतधारा | अमृत की धार या कृपा का प्रवाह | माता की करुणा और प्रेम की निरंतर वर्षा |
| शेरावाली | सिंह पर सवार होने वाली | माता दुर्गा का सिंहवाहिनी स्वरूप |
| महामाये | महान माया की स्वामिनी | संपूर्ण ब्रह्मांड को अपनी माया से संचालित करने वाली शक्ति |
| सिमरन | स्मरण करना, जाप करना | निरंतर ईश्वर का ध्यान रखना |
| अभय वर | निडरता का वरदान | भय और संकटों से मुक्ति देने की कृपा |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"ओ मैया तेरी अमृतधारा बरसे रे, तेरे दर्शन को मेरा मन तरसे रे।"
भावार्थ: भक्त अपनी माता से प्रार्थना करता है कि आपकी करुणा रूपी अमृतधारा हमारे जीवन में निरंतर बरसती रहे। आपके अलौकिक दर्शन के बिना यह मन अत्यंत व्याकुल और प्यासा रहता है।
"चरणों की धूल ले लूँ माथे लगा के, कट जाए सारे दुख भजन गा के।"
भावार्थ: माता के चरण कमलों की रज (धूल) को माथे पर धारण करने से सारे पाप और कष्ट नष्ट हो जाते हैं तथा उनके यश का गान करने से जीवन के सभी दुख स्वतः कट जाते हैं।
"लाल चुनरिया मैया तेरे पाँव सुहावे, जो भी दर पे आए वो मनचाहा पावे।"
भावार्थ: माँ को लाल रंग अत्यंत प्रिय है, जो सौभाग्य और ऊर्जा का प्रतीक है। उनके दरबार में खाली हाथ कोई नहीं लौटता, जो भी सच्चे मन से आता है, वह अपनी मनोकामना पूर्ण पाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
"या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।< नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥"
(अर्थात: जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में स्थित हैं, उन को बार-बार नमस्कार है।)
माता दुर्गा के इस पावन श्लोक का स्मरण करने से साधक को मानसिक शक्ति और आत्मबल की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही आप श्री हनुमान चालीसा और शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करके अपनी साधना को और अधिक बल दे सकते हैं।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | तथ्य / जानकारी |
|---|---|
| भजन का नाम | दुर्गा अमृतधारा (Durga Amritdhara) |
| गायिका | सुमन सहानी (Suman Sahani) |
| आराध्य देवी | माँ दुर्गा / आदिशक्ति |
| भाषा | हिंदी / ब्रज मिश्रित |
| मुख्य भाव | भक्ति, समर्पण, विनय और करुणा |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, मंगलवार पूजा, जागरण, सत्संग |
| प्लेटफॉर्म | भक्ति संगीत एवं यूट्यूब (2022) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह सामग्री Bhaktilok.in के उच्च संपादकीय मानकों के अनुसार तैयार की गई है। इसमें माता दुर्गा के भजनों के पारंपरिक महत्व, आधुनिक संगीत प्रस्तुति और आध्यात्मिक पक्ष का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि पाठकों को प्रामाणिक, शुद्ध और भक्तिमय जानकारी प्राप्त हो।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन पौराणिक ग्रंथ: मार्कण्डेय पुराण एवं दुर्गा सप्तशती (श्री दुर्गा सप्तशती गीता प्रेस गोरखपुर)।
- पारंपरिक लोकगीत एवं आधुनिक माता भजन संग्रह (2022 रिलीज)।
- वैदिक और पौराणिक साहित्य में आदिशक्ति माँ दुर्गा की महिमा।
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