Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

चलो माँ के भवन Chalo Maa Ke Bhawan (Sanjay Giri)

माँ दुर्गा के प्रति समर्पित यह भजन भक्तों को उन्हें संकटों से उबारने और आशीर्वाद प्राप्त करने का माध्यम है।

प्रस्तावना एवं परिचय

माँ दुर्गा की शरण में: भक्ति का अनुपम संदेश

इस भजन के माध्यम से माँ दुर्गा के दिव्य दरबार में समर्पण का अनूठा अनुभव करें।

चलो माँ के भवन, चलो माँ के भवन, दर्शनों की गौरिया, माता के हाथों में छवि सुनहरा। चलो माँ के भवन, चलो माँ के भवन। जहाँ सुख की सावन, बहे फुलवारी में, तेरा प्रेम बहता है माँ, इंद्रधनुष छाए है। चलो माँ के भवन, चलो माँ के भवन। तेरे चरणों की धूलि, मन को करती शुद्ध, हर दर पर लूटते है, तेरा भक्ति का संस्कार। चलो माँ के भवन, चलो माँ के भवन। माते हो तुम जग जननी, अर्पण करती आत्मा में, जहा प्रेम है हर एक, तुम हो सच्ची ममता। चलो माँ के भवन, चलो माँ के भवन। संकट मोचन की जब गर्जना, गायें श्रंखल अभिषेक, माँ की कृपा पाकर सदा, स्वर्ग सा जीवन हो। चलो माँ के भवन, चलो माँ के भवन।
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

इस भजन में माँ दुर्गा के प्रति श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत अनुभव प्रस्तुत किया गया है। 'चलो माँ के भवन' का उद्घोष भक्तों को आमंत्रित करता है कि वे माँ के आश्रय में चलें। यह एक प्रकार का आह्वान है, जहाँ भक्त मुख्यतः माँ के दरबार में जाकर उनके दर्शन और आशीर्वाद की कामना रखते हैं। गाने के अंतरों में माँ के विभिन्न गुणों और उनकी भक्ति के महत्व का भी संदर्भ दिया गया है। इसके माध्यम से भक्त यह समझते हैं कि माँ का प्रेम और उनके चरणों की धूलि जीवन को पवित्र और समृद्ध बनाते हैं।

भावार्थ में यहाँ भक्त की चाहत को दर्शाया गया है। 'जहाँ सुख की सावन' का अर्थ है कि माँ के दरबार में सुख-शांति का माहौल होता है। भक्त यह अनुभव करते हैं कि माँ की कृपा से हर दुख दूर हो जाता है। इस भजन में हर शब्द के साथ माँ के प्रति भक्त की अटूट प्रेम और विश्वास प्रकट होता है। यह भक्ति के मार्ग की ओर ले जाता है, जहाँ भक्त अपने असफलताओं को मद्देनज़र रखते हुए माँ से उम्मीद करते हैं कि वह उन्हें अपनी करुणामय दृष्टि में स्वीकार करें।

इस भजन का केंद्रीय तत्त्व भक्ति है। भक्त का यह मानना है कि माँ दुर्गा सभी विघ्नों और कष्टों को दूर करती हैं। भक्तों का यह विश्वास है कि माँ का आशीर्वाद उन्हें हर संकट से उबारता है। 'संकट मोचन' की गुहार, माँ के नाम का भक्ति की शक्ति को दर्शाता है। जब भी कठिनाइयां आती हैं, भक्त माँ को पुकारते हैं, इस प्रकार माता के प्रति भक्ति मार्ग का अनुसरण होता है जहाँ अज्ञानता और कलह का नाश होता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

माँ दुर्गा की उपासना का यह भजन प्राचीन हिंदू ग्रंथों में निहित भक्तिभाव और शक्ति का प्रतीक है। देवी भागवत और दुर्गा सप्तशती में देवी की महिमा का वर्णन मिलता है, जहाँ माँ को संसार की जननी और विघ्नहर्ता माना गया है। यह भजन भक्तों को प्रेरित करता है कि वे ध्यान और समर्पण के माध्यम से देवी माँ के आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। माँ दुर्गा की उपासना से भक्त अपनी जीवन की कठिनाइयों को दूर कर, सच्चे प्रेम और भक्ति का मार्ग अपना सकते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। इस भजन का नियमित गायन मानसिक शांति, आत्मिक बल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। माँ की कृपा से भक्ति के लिए समर्पण से जुड़ी मानसिक स्थितियों में सुधार होता है। भक्तों के लिए यह एक आत्मिक कल्याण का साधन बनता है, जिससे वे अपने दुखों को भुलाकर अनंत प्रेम का अनुभव कर सकते हैं।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का जाप सुबह या संध्या समय उपयुक्त होता है। भक्तों को चाहिए कि वे एक शांत कठिनाई वाली जगह पर बैठकर इस भजन का उच्चारण करें। दीया जलाना, दूध या वस्त्र अर्पित करना और माँ के प्रति श्रद्धा का भाव रखना इस साधना को और प्रभावी बनाता है। मन को एकाग्र करके और ईश्वर के प्रति समर्पण भाव रखते हुए इस भजन का गान करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

चलो माँ के भवन भजन की मुख्य देवी कौन हैं?

इस भजन में मुख्य देवी माँ दुर्गा का गुणगान किया गया है, जो जगत जननी और सबको संकटों से मुक्त करने वाली मानी जाती हैं।

भजन का महत्व क्या है?

यह भजन माँ दुर्गा की कृपा को प्राप्त करने और भक्तों को संकट से उबारने की भावना को व्यक्त करता है। यह भक्ति का एक अनमोल साधन है।

इस भजन का सही समय क्या है?

इस भजन का गायन सुबह सूर्योदय के समय या संध्या काल में किया जाता है, जब मन प्रफुल्लित होता है और ध्यान केंद्रित करना सरल होता है।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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