I Punjabi Devi Bhajan I SARDOOL SIKANDAR I Full HD Video Song - Bhaktilok
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह पावन पंजाबी देवी भजन "Ankhiyan Nu Rajj Lain De" दिवंगत अमर गायक सरदूल सिकंदर (Sardool Sikandar) की सुरीली और गूंजती हुई आवाज में जगत जननी की असीम कृपा, ममता और महिमा का अद्भुत गान करता है। सनातन भारतीय परंपरा और पंजाब की लोक-भक्ति संस्कृति में स्त्री शक्ति (आदिशक्ति) को चराचर जगत का आदि कारण, पालनहार और संहारक माना गया है। जब कोई भक्त माता के दरबार में पूरी श्रद्धा और समर्पण भाव से उपस्थित होता है, तो उसकी आंखें मां के अलौकिक दर्शन पाकर तृप्त होना चाहती हैं। इस भजन की एक-एक पंक्ति और सरदूल सिकंदर की रूहानी गायकी मां के ममतामयी, करुणापूर्ण और दुष्टनाशिनी स्वरूप का ऐसा जीवंत चित्र खींचती है, जिसे सुनकर साधक का अंतःकरण भक्तिरस से सराबोर हो जाता है। नवरात्रों के पावन पर्वों, माता के जागरण, और दैनिक संध्या वंदन के समय इस भजन का श्रवण व गायन साधਕ के भीतर आध्यात्मिक तेज, मानसिक शांति और अनंत सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक महत्व और जीवनोपयोगी संदेशों का रसास्वादन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन — शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें:
॥ मुखड़ा ॥
अंखियां नू रज्ज लैण दे, मां दे दर्शन कर लैण दे!
रुटियां नू गले लाण दे, मां दे चरणां विच बहण दे...
अंखियां नू रज्ज लैण दे, मां दे दर्शन कर लैण दे!
॥ अंतरा १ ॥
जुग-जुग पिंड विच ज्योत जगाई, शेररां वालिए तू महिमा गाई।
तेरे दर ते जो वी आंदा, झोली भर के ओ घर जांदा।
मेहरां वाली दा पल्लू फड़ लैण दे, अंखियां नू रज्ज लैण दे...
॥ अंतरा २ ॥
दुःख दरिद्र सब दूर भगांदी, शेरांवली आप है आंदी।
बच्चे सारे पिंड दे आके, जोहरां जोत जगांदे गाके।
मैनू वी मां दी भेंट गा लैण दे, अंखियां नू रज्ज लैण दे...
॥ समापन / टेक ॥
सरदूल कहे मां दर तेरे, मिट जांदे ने पापक डेरे।
चरण कमल मेरा ठिकाणा, मां तेरे बिन किसे ना जाना।
अंखियां नू रज्ज लैण दे, मां दे दर्शन कर लैण दे!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
"Ankhiyan Nu Rajj Lain De" भजन का मूल स्वर निश्छल प्रेम, परम समर्पण और विरह-युक्त विनय का है। 'अंखियां नू रज्ज लैण दे' का शाब्दिक अर्थ है— 'मेरी इन आंखों को मां के अलौकिक रूप के दर्शन से तृप्त हो जाने दो।' भक्त सांसारिक मोह-माया और दुखों से विचलित होकर जब मां के दरबार में पहुंचता है, तो उसकी एकमात्र अभिलाषा यह होती है कि वह अपलक जगत जननी के श्रीचरणों और उनके दिव्य मुखमंडल का दर्शन करे।
भजन की पंक्तियों में यह दर्शाया गया है कि जिस प्रकार एक भूखा बालक भोजन पाकर और एक बिछड़ा बच्चा अपनी मां की गोद में पहुंचकर शांत हो जाता है, ठीक उसी प्रकार यह नश्वर जीवनरूपी संसार में भटका हुआ मन जब आदिशक्ति माता दुर्गा के चरणों में शरण पाता है, तब उसे परम शांति की प्राप्ति होती है। गायक सरदूल सिकंदर ने अपनी विशिष्ट पंजाबी गायन शैली के माध्यम से इस आध्यात्मिक प्यास को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। माता का दरबार ऐसा पावन तीर्थ है जहां जाति, धर्म, ऊंच-नीच का भेद मिटाकर हर प्राणी को शरण मिलती है और मां अपने आंचल की छांव में सभी के संताप हर लेती हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- आदिशक्ति स्वरूप का वंदन: यह भजन माता दुर्गा के ममतामयी और करुणामयी स्वरूप को उजागर करता है, जो अपने भक्तों के सभी दुखों को दूर करती हैं।
- दिव्य तृप्ति का भाव: आंखों द्वारा मां के दर्शन से तृप्त होने की लालसा साधक की पराभक्ति (उच्चतम भक्ति) को दर्शाती है।
- लोक संस्कृति और संगीत का संगम: पंजाबी लोक संगीत की मिठास और सूफी-भक्ति परंपरा का अनूठा मेल इसे हर वर्ग के श्रोता के लिए लोकप्रिय बनाता है।
- मानसिक शांति और सकारात्मकता: इस भजन का निरंतर श्रवण करने से चित्त की चंचलता शांत होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
सनातन धर्मग्रंथों जैसे देवीभागवत पुराण के अनुसार, आदिशक्ति की उपासना मनुष्य को भवसागर से पार लगाने वाली नौका के समान है। इस प्रकार के भजन साधक के भीतर छिपे हुए अहंकार को गलाकर नम्रता और प्रेम का बीज बोते हैं।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
भक्ति संगीत को अपने जीवन का हिस्सा बनाने के लिए समय और स्थान की कोई कठोर पाबंदी नहीं होती, तथापि कुछ विशेष अवसरों पर इसका गायन और श्रवण अत्यंत फलदायी माना गया है:
ब्रह्ममुहूर्त एवं संध्या
प्रातःकाल स्नान के पश्चात माता के सम्मुख दीपक प्रज्वलित कर इस भजन को सुनने से पूरा दिन ऊर्जावान और शांत रहता है।
नवरात्रि एवं विशेष पर्व
वर्ष में आने वाले चारों नवरात्रों, अष्टमी, चौदस अथवा मंगलवार व शुक्रवार को माता की चौकी या जागरण के समय यह भजन अवश्य गाया जाता है।
पारिवारिक सत्संग
घर के मांगलिक अवसरों, नए गृह प्रवेश या पारिवारिक अनुष्ठानों में माता के यशोगान हेतु इसे सामूहिक रूप से गाया जा सकता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की केंद्र बिंदु हैं— मां शेरावाली (आदिशक्ति माता दुर्गा)। सनातन संस्कृति में उन्हें प्रकृति, चेतना, बुद्धि, लज्जा, और शांति के रूप में पूजा जाता है। उनके सिंह पर आसीन होने का अर्थ यह है कि मां ने समस्त प्रवृत्तियों और ऊर्जाओं पर पूर्ण विजय प्राप्त कर रखी है।
इस भजन को अपनी स्वर लहरियों से अमर बनाने वाले स्वर्गीय सरदूल सिकंदर पंजाब के उन महान और लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने लोक संगीत के साथ-साथ रूहानी और धार्मिक गीतों को भी जन-जन तक पहुंचाया। उनकी आवाज में एक ऐसा दर्द और अपनापन था जो सुनने वाले के रोंगटे खड़े कर देता था। उनकी गायकी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक प्रकार की साधना थी।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
पंजाब की भूमि संतों, पीरों और गुरुओं की धरती रही है जहां लोकगीतों में भी ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम झलकता है। 'अंखियां नू रज्ज लैण दे' भजन पारंपरिक पंजाबी लोक-भक्ति शैली पर आधारित है। इसे आधुनिक वाद्ययंत्रों और सुरुचिपूर्ण संगीत संयोजन के साथ सजाया गया है, जिससे यह युवा पीढ़ी से लेकर बुजुर्गों तक सभी के दिलों को छू लेता है। इस रचना की पृष्ठभूमि में पंजाब के पारंपरिक माता के जगराते और मेलों की संस्कृति जुड़ी हुई है, जहां रातभर मां के भजनों पर भक्त झूमते हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस भजन की भाषा ठेठ और मधुर पंजाबी है, जो सीधे हृदय में उतर जाती है। इसमें सूफी काव्य जैसी गहराई और लोकगीतों जैसी सहजता का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। 'अंखियां नू रज्ज लैण दे' और 'चरणों विच बहण दे' जैसे मुहावरे और प्रयोग भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाते हैं। काव्य शैली उपमा और रूपक अलंकारों से परिपूर्ण है, जहां भक्त अपनी आंखों को चकोर और माता के दर्शन को पूर्णमासी के चंद्रमा के समान मानता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें यह सिखाता है कि भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भागते-भागते मनुष्य अपनी आत्मा की असली भूख को भूल जाता है। आत्मा की सच्ची भूख ईश्वर या माता के चरणों में प्रेम और शांति पाना है। जब तक मनुष्य का मन भगवद्दर्शन से तृप्त नहीं होता, तब तक उसकी अशांति दूर नहीं हो सकती। यह भजन हमें विनम्रता, अटूट विश्वास और अहंकार त्यागने का संदेश देता है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ |
|---|---|---|
| अंखियां नू रज्ज लैण दे | आंखों को तृप्त हो जाने दो | माता के अलौकिक दर्शन से नेत्रों और मन को मिलने वाली परम शांति। |
| शेरांवली | शेर पर सवारी करने वाली | माता दुर्गा का वह रूप जो अपनी असीम शक्ति से भक्तों की रक्षा करती हैं। |
| दर ते | दरवाजे पर या शरण में | ईश्वर या माता के पवित्र दरबार में शरणागत होना। |
| जोहरां जोत जगांदे | ज्योत प्रज्वलित करना | अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान और भक्ति का प्रकाश फैलाना। |
| चरण कमल | कमल रूपी चरण | भगवान या माता के पवित्र और कोमल चरण, जो भक्तों को आश्रय देते हैं। |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"अंखियां नू रज्ज लैण दे, मां दे दर्शन कर लैण दे..."
भक्त अपनी आराध्य मां से प्रार्थना करता है कि हे मां! दुनिया की भागदौड़ और दुखों से थक चुकी मेरी इन आंखों को जी भरकर आपके दर्शन करने दो। आपके एक झलक से मेरा जनम-जनम का संताप मिट जाएगा।
"जुग-जुग पिंड विच ज्योत जगाई, शेररां वालिए तू महिमा गाई..."
हे शेरावाली! युगों-युगों से इस संसार और हमारे गांवों-नगरों में तेरी ज्योत जग रही है और तेरी महिमा का गुणगान हो रहा है। तेरे दरबार में जो भी खाली हाथ आता है, वह झोली भरकर प्रसन्नचित्त लौटता है।
"सरदूल कहे मां दर तेरे, मिट जांदे ने पापक डेरे..."
गायक सरदूल सिकंदर कहते हैं कि माता के दरबार में आते ही मनुष्य के सारे पाप और संताप नष्ट हो जाते हैं। मां के चरणों के अलावा इस संसार में हमारा अन्य कोई सच्चा ठिकाना नहीं है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं मंत्र | Related Mantra & Shlok
इस भजन के गायन के पश्चात माता के निम्नलिखित बीज मंत्र या श्लोक का स्मरण करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है:
॥ ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ॥
या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | Ankhiyan Nu Rajj Lain De |
|---|---|
| समर्पित deity | आदिशक्ति माता दुर्गा / शेरावाली |
| गायक (Singer) | सरदूल सिकंदर (Sardool Sikandar) |
| भाषा | पंजाबी |
| मुख्य थीम / भाव | दर्शन की लालसा, समर्पण और भक्तिरस |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, माता का जागरण, संध्या वंदन |
| प्लेटफॉर्म | भक्तिलोक (Bhaktilok.in) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह मार्गदर्शिका और भजन विवरण संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत प्रकाशित किया गया है। इसका उद्देश्य माता रानी के भक्तों को प्रामाणिक बोल, उच्च कोटि का भावार्थ और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से अवगत कराना है। सभी पंक्तियों और संदर्भों को सनातन परंपरा व लोक-भक्ति के मानदंडों के अनुरूप प्रस्तुत किया गया है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- 1. देवीभागवत पुराण - महर्षि वेद व्यास रचित आदिशक्ति महात्म्य।
- 2. पंजाबी लोक संगीत एवं भक्ति साहित्य परंपरा।
- 3. पारंपरिक माता जागरण एवं संकीर्तन संग्रह।
- 4. Bhaktilok Editorial Research & Devotional Archives.
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