Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

पान फूल कसईली से नेवता भेजवन?? (Paan Phul Kasili Se Newatra Bhejawani)

पान फूल कसईली से नेवता भेजवनी देवी गीत के सम्पूर्ण बोल, हिंदी अर्थ व सांस्कृतिक महत्व जानें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित पढ़ें | Bhaktilok

आदिशक्ति माता दुर्गा की आराधना में भोजपुरी लोक-परंपरा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। "पान फूल कसईली से नेवता भेजवनी" जैसे देवी गीत न केवल भक्ति के प्रतीक हैं, बल्कि ये हमारी सांस्कृतिक जड़ों और माता के प्रति अटूट विश्वास को भी दर्शाते हैं। चांदनी सिंह द्वारा स्वरबद्ध यह भजन माता रानी को अपने घर आमंत्रित करने की एक भावपूर्ण प्रार्थना है। सनातन धर्म में 'नेवता' (निमंत्रण) का अर्थ केवल बुलाना नहीं, बल्कि श्रद्धा के साथ देवी को अपने हृदय और गृह में स्थान देना है। यह गीत भक्तों की उस व्याकुलता को व्यक्त करता है जहाँ भक्त अपनी आराध्या को पान, फूल और कसईली (सुपारी) जैसे सात्विक उपहारों के साथ पूजने की कामना करता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

पान फूल कसईली से नेवता भेजवनी,
आवा ए माई, तोहरा के दरस देखवनी।
भोर भइल बा, अरघिया सजाईनी,
तोहरे आस में, पलक बिछाईनी।

लाल चुनरिया, सोहे तोहरे गात में,
ज्योति जगेली, तोहरे परभात में।
मन के मुराद, आज पूरा कर द माई,
दुखवा मिटा के, सुखवा तू द द माई।

भक्तन के भीड़, तोहरे दुअरिया बा,
सबके जुबान पर, तोहरे नाम के गूंज बा।
चांदनी के पुकार, सुन ली ए भवानी,
तोहरे भरोसे, बा ई दुनिया दीवानी।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस गीत का भाव अत्यंत सरल किंतु गहरा है। भक्त कहता है कि उसने पान, फूल और सुपारी के माध्यम से माता को निमंत्रण भेजा है। यहाँ पान और सुपारी को शुभता का प्रतीक माना गया है। भक्त माता से आग्रह करता है कि वह उसके घर पधारें ताकि वह उनके दिव्य दर्शन कर सके। भोर के समय अरघ (अर्घ्य) सजाकर भक्त माता की प्रतीक्षा कर रहा है। गीत में माता के लाल वस्त्रों और उनकी ज्योति की महिमा का वर्णन है। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ण करने और दुखों के निवारण की प्रार्थना करता है। अंत में, भक्त कहता है कि पूरी दुनिया माता के नाम का जाप कर रही है और वह स्वयं भी माता की शरण में है। यह गीत समर्पण और विश्वास का एक सुंदर संगम है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'शरणागति' है। भक्त का मानना है कि यदि वह सच्चे मन से माता को बुलाता है, तो वे अवश्य आती हैं। यह गीत हमें सिखाता है कि भक्ति में आडंबर से अधिक भाव का महत्व है। पान और फूल तो केवल माध्यम हैं, असली नेवता भक्त का प्रेम है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण जानकारी
गीत का नामपान फूल कसईली से नेवता भेजवनी
गायिकाचांदनी सिंह
भाषाभोजपुरी
शैलीदेवी गीत / भक्ति भजन
मुख्य भावसमर्पण एवं प्रार्थना

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भोजपुरी अंचल में देवी गीतों का गायन नवरात्र और अन्य शुभ अवसरों पर अनिवार्य माना जाता है। "पान फूल कसईली से नेवता भेजवनी" जैसे गीत लोक-संस्कृति और धर्म को जोड़ते हैं। यह गीत हमें याद दिलाता है कि देवी केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि हमारे द्वारा किए गए सात्विक आह्वान में भी विद्यमान हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द अर्थ
नेवतानिमंत्रण (Invitation)
कसईलीसुपारी (Betel nut)
अरघियाअर्घ्य (जल अर्पण की विधि)
गात्रशरीर (Body)
मुरादमनोकामना (Desire)

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • धैर्य: जैसे भक्त माता की प्रतीक्षा करता है, हमें भी अपने कर्मों के फल के लिए धैर्य रखना चाहिए।
  • समर्पण: ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण ही दुखों का अंत करता है।
  • सात्विकता: पूजा में सात्विक वस्तुओं का प्रयोग मन की पवित्रता को दर्शाता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से नवरात्र के दौरान, माता की चौकी सजाते समय, या सुबह की पूजा के समय सुनना अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसे किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में माता का आशीर्वाद लेने हेतु सुना जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह गीत किस देवी को समर्पित है?

यह गीत आदिशक्ति माता दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को समर्पित है, जो भक्तों की मनोकामना पूर्ण करती हैं।

क्या इस गीत को घर पर गाया जा सकता है?

जी हाँ, यह एक लोक-भजन है जिसे आप घर पर पूजा के समय श्रद्धापूर्वक गा सकते हैं।

'नेवता' का आध्यात्मिक अर्थ क्या है?

आध्यात्मिक दृष्टि से नेवता का अर्थ है अपने मन के द्वार को ईश्वर के लिए खोल देना।

चांदनी सिंह के अन्य भक्ति गीत कौन से हैं?

चांदनी सिंह ने कई भोजपुरी देवी गीत गाए हैं जिन्हें आप भक्ति गाना भोजपुरी में श्रेणी में देख सकते हैं।

पूजा में पान और सुपारी का क्या महत्व है?

पान और सुपारी को सनातन परंपरा में शुभता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भोजपुरी लोक-भक्ति परंपरा के अध्ययन और श्रोताओं की रुचि को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। गीत के बोल और भावार्थ को प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर प्रस्तुत किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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