Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

झुलनवा झुलेली मोरी मईया

पढ़ें झुलनवा झुलेली मोरी मईया | #Video | Ujala Upadhyay Devigeet Bhakti Song | Bhojpuri Superhit Song - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार

भोजपुरी लोक संस्कृति और सनातन हिंदू धर्म में आदिशक्ति मां दुर्गा की आराधना का अत्यंत विशिष्ट स्थान है। "झुलनवा झुलेली मोरी मईया" एक अत्यंत लोकप्रिय और पारंपरिक देवी गीत (Devi Geet) है, जिसे सुप्रसिद्ध गायिका उजाला उपाध्याय (Ujala Upadhyay) ने अपनी सुमधुर आवाज में गाकर जीवंत कर दिया है। यह गीत मां दुर्गा के वात्सल्य, ममतामयी रूप और उनके प्रकृति के साथ गहरे संबंध को दर्शाता है। भोजपुरी लोकगीतों में नीम के पेड़ (निमिया के डाढ़) पर माता रानी के झूला झूलने की कल्पना अत्यंत प्राचीन और श्रद्धा से परिपूर्ण है। इस गीत के माध्यम से भक्त अपनी आराध्या देवी के प्रति अनन्य समर्पण, प्रेम और हर्षोल्लास को व्यक्त करते हैं। शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि और विभिन्न मांगलिक अवसरों पर गाया जाने वाला यह भजन श्रोताओं को एक अलौकिक और दिव्य शांति की अनुभूति कराता है। इस लेख में हम इस पावन गीत के बोल, उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ, सांस्कृतिक महत्व और कलात्मक पक्षों का सविस्तार विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

झुलनवा झुलेली मोरी मईया

झुलनवा झुलेली मोरी मईया, मोरी मईया हो मोरी मईया।
झुलनवा झुलेली मोरी मईया, निमिया के डारि॥
निमिया के डारि मईया झुलेली झुलनवा,
पवन बहे ससुरारि हो, झुलनवा झुलेली मोरी मईया॥

सोने के खड़ऊआ मईया के गोड़वा सोहे,
माथे पर मुकुट विराजे हो, झुलनवा झुलेली मोरी मईया॥
निमिया के डारि मईया झुलेली झुलनवा,
पवन बहे ससुरारि हो, झुलनवा झुलेली मोरी मईया॥

लाल चुनरिया मईया के तन सोहे,
हाथ में सोहे त्रिशूल हो, झुलनवा झुलेली मोरी मईया॥
निमिया के डारि मईया झुलेली झुलनवा,
पवन बहे ससुरारि हो, झुलनवा झुलेली मोरी मईया॥

उजाला उपाध्याय गावेली भजनवा,
मईया के चरणन में शीश नवावेली हो, झुलनवा झुलेली मोरी मईया॥
निमिया के डारि मईया झुलेली झुलनवा,
पवन बहे ससुरारि हो, झुलनवा झुलेली मोरी मईया॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह देवी गीत भोजपुरी लोक संवेदना और भक्ति रस का अद्भुत मिश्रण है। इसके प्रत्येक अंतरे में माता रानी के सौंदर्य, उनके दिव्य स्वरूप और भक्तों की अगाध श्रद्धा का वर्णन किया गया है:

प्रथम अंतरा: निमिया की डाल और झूला

गीत की शुरुआत में भक्त गाता है कि मेरी मैया नीम के पेड़ की डाल पर झूला झूल रही हैं। हिंदू धर्म और विशेषकर उत्तर भारत की लोक परंपराओं में नीम के वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। इसे 'शीतला माता' का निवास स्थान भी कहा जाता है। जब माता रानी नीम की डाल पर झूला झूलती हैं, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो संपूर्ण प्रकृति आनंदित हो उठी है और शीतल पवन बह रही है। यह पवन भक्तों के हृदय को शीतलता प्रदान करती है।

द्वितीय अंतरा: माता का दिव्य श्रृंगार

इस अंतरे में माता के दिव्य स्वरूप का वर्णन है। माता के चरणों में सोने की खड़ाऊं (पादुका) सुशोभित हो रही हैं और उनके मस्तक पर भव्य मुकुट विराजमान है। यह दृश्य माता के राजराजेश्वरी और ममतामयी दोनों रूपों को एक साथ प्रदर्शित करता है। भक्त अपनी मैया को सर्वश्रेष्ठ और अत्यंत सुंदर रूप में देखना चाहता है, इसलिए वह सोने के आभूषणों और मुकुट की कल्पना करता है।

तृतीय अंतरा: लाल चुनरी और त्रिशूल का तेज

माता ने अपने शरीर पर लाल रंग की सुंदर चुनरी धारण की हुई है। लाल रंग शक्ति, ऊर्जा और सुहाग का प्रतीक है। इसके साथ ही माता के हाथों में दुष्टों का संहार करने वाला और भक्तों की रक्षा करने वाला त्रिशूल सुशोभित है। यह त्रिशूल दर्शाता है कि माता जहां एक ओर अत्यंत करुणामयी हैं, वहीं दूसरी ओर वे अधर्म का नाश करने वाली महाशक्ति भी हैं।

चतुर्थ अंतरा: समर्पण और भक्ति भाव

अंतिम पंक्तियों में गायिका उजाला उपाध्याय माता के चरणों में अपना शीश नवाती हैं और प्रार्थना करती हैं कि माता अपनी कृपा सदैव उन पर और सभी भक्तों पर बनाए रखें। यह समर्पण भाव ही किसी भी भजन की आत्मा होता है, जहां भक्त स्वयं को ईश्वर के चरणों में पूरी तरह समर्पित कर देता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना वात्सल्य रस और भक्ति रस है। इसमें माता को एक ऐसी करुणामयी मां के रूप में चित्रित किया गया है जो अपने बच्चों के बीच, प्रकृति के सानिध्य में आनंदित हो रही हैं। इस गीत का मुख्य संदेश निम्नलिखित है:

  • प्रकृति और ईश्वर का एकाकार: नीम के पेड़ पर झूला झूलना यह दर्शाता है कि ईश्वर कहीं दूर नहीं, बल्कि हमारी प्रकृति और वनस्पति में ही वास करते हैं।
  • सरल समर्पण: ईश्वर को प्रसन्न करने के लिए किसी कठिन साधना की नहीं, बल्कि सरल और शुद्ध हृदय से की गई पुकार की आवश्यकता होती है।
  • नारी शक्ति का सम्मान: माता का यह रूप शक्ति और ममता का अद्भुत संतुलन है, जो समाज में नारी के बहुआयामी और पूजनीय स्वरूप को रेखांकित करता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) झुलनवा झुलेली मोरी मईया (Jhulanwa Jhuleli Maiya)
गायिका (Singer) उजाला उपाध्याय (Ujala Upadhyay)
गीतकार (Lyricist) महेश परदेशी (Mahesh Pardeshi)
संगीतकार (Music Composer) अविनाश, सिंटू कुमार (Avinash, Sintu Kumar)
श्रेणी (Category) भोजपुरी देवी गीत (Bhojpuri Devi Geet)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
म्यूजिक लेबल (Label) तरंग म्यूजिक (Tarang Music)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस सुपरहिट देवी गीत को सजाने में कई कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है:

  • उजाला उपाध्याय (गायिका): अपनी खनकती और सुरीली आवाज के लिए जानी जाने वाली उजाला उपाध्याय ने इस पारंपरिक गीत को बेहद भावुक और ऊर्जावान तरीके से गाया है। उनकी गायकी में लोक संस्कृति की सोंधी महक साफ महसूस होती है।
  • महेश परदेशी (गीतकार): उन्होंने बहुत ही सरल लेकिन गहरे अर्थ वाले शब्दों का चयन किया है, जो सीधे श्रोताओं के हृदय को छूते हैं।
  • अविनाश और सिंटू कुमार (संगीत): पारंपरिक वाद्यों जैसे ढोलक, मंजीरा और बांसुरी के साथ आधुनिक संगीत का बेहतरीन तालमेल बिठाया गया है, जिससे यह गीत सुनने में अत्यंत कर्णप्रिय लगता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) संदर्भ (Context)
झुलनवा (Jhulanwa) झूला (Swing) माता रानी का आनंदमयी झूला झूलना।
निमिया (Nimiya) नीम का पेड़ (Neem Tree) माता का प्रिय और पवित्र वृक्ष।
डारि / डाढ़ (Dari) डाल / शाखा (Branch) नीम के पेड़ की टहनी जिस पर झूला बंधा है।
गोड़वा (Godwa) पैर / चरण (Feet) माता के पावन और पूजनीय चरण।
खड़ऊआ (Khadaua) खड़ाऊं / लकड़ी की पादुका (Wooden Sandals) माता के चरणों की दिव्य खड़ाऊं।
शीश नवावेली (Sheesh Nawaweli) सिर झुकाना / प्रणाम करना (Bowing Down) भक्त द्वारा माता के प्रति आदर और समर्पण।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भोजपुरी भाषी क्षेत्रों (बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड) में देवी गीतों का सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। इन क्षेत्रों में माता दुर्गा को केवल एक सर्वोच्च शक्ति के रूप में ही नहीं, बल्कि घर की मुखिया या अपनी सगी माता के रूप में पूजा जाता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, नीम के पेड़ को आयुर्वेद और अध्यात्म दोनों में अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। नीम पर्यावरण को शुद्ध करता है और रोगों का नाश करता है। माता का नीम के पेड़ पर निवास करना यह दर्शाता है कि वे समस्त रोगों और कष्टों का हरण करने वाली 'आरोग्यदायिनी' हैं। जब भक्त इस देवी भजन को गाते हैं, तो वे केवल संगीत का आनंद नहीं लेते, बल्कि माता की दिव्य उपस्थिति को अपने आसपास महसूस करते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह पारंपरिक देवी गीत हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  1. प्रकृति का संरक्षण: नीम जैसे औषधीय वृक्षों की पूजा और उन्हें ईश्वर का निवास मानना हमें पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाता है।
  2. सादगी और पवित्रता: लोकगीतों की सरलता हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति के लिए आडंबर की नहीं, बल्कि मन की पवित्रता की आवश्यकता होती है।
  3. कृतज्ञता का भाव: माता के चरणों में शीश झुकाना हमें अहंकार से मुक्त कर विनम्र बनना सिखाता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि माता की आराधना किसी भी समय की जा सकती है, परंतु इस गीत को सुनने और गाने के कुछ विशेष अवसर हैं:

  • शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: इन नौ दिनों में सुबह और शाम के समय घरों और पूजा पंडालों में यह गीत विशेष रूप से बजाया जाता है।
  • मंगला गौरी व्रत एवं सावन: सावन के महीने में जब चारों ओर हरियाली होती है, तब झूला झूलने की परंपरा के साथ इस गीत का आनंद दोगुना हो जाता है।
  • पारिवारिक मांगलिक कार्य: मुंडन, जनेऊ या विवाह जैसे शुभ अवसरों पर देवी पूजन के समय महिलाएं इस पारंपरिक गीत को गाती हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु (Key Point) संक्षिप्त विवरण (Quick Details)
गीत का प्रकार भोजपुरी पारंपरिक देवी गीत (Bhojpuri Devi Geet)
मुख्य विषय माता दुर्गा का नीम की डाल पर झूला झूलना और उनका दिव्य श्रृंगार
प्रमुख वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, शहनाई, पैड
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, सावन, पारिवारिक पूजा, देवी जागरण
मुख्य संदेश समर्पण, प्रकृति प्रेम और मातृ शक्ति की वंदना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय देवी गीत को सुप्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायिका उजाला उपाध्याय (Ujala Upadhyay) ने गाया है।

सनातन परंपरा और लोक मान्यताओं के अनुसार, नीम के पेड़ को अत्यंत पवित्र और औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। इसे शीतला माता और दुर्गा माता का साक्षात निवास स्थान माना जाता है, इसलिए देवी गीतों में नीम की डाल पर झूला झूलने का वर्णन प्रमुखता से आता है।

यह गीत मधुर भोजपुरी (Bhojpuri) भाषा में लिखा गया है, जो उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से में बोली और समझी जाती है।

इस गीत के सुंदर बोल महेश परदेशी (Mahesh Pardeshi) ने लिखे हैं और इसका कर्णप्रिय संगीत अविनाश तथा सिंटू कुमार (Avinash, Sintu Kumar) द्वारा तैयार किया गया है।

हां, इस गीत को किसी भी पारिवारिक मांगलिक कार्य, मुंडन संस्कार, गृह प्रवेश या सावन के महीने में देवी पूजन के समय अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया और सुना जा सकता है।

गीत में माता के पैरों में सोने की खड़ाऊं, मस्तक पर दिव्य मुकुट, तन पर लाल चुनरी और हाथ में त्रिशूल धारण करने का अत्यंत सुंदर वर्णन किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पर आधारित है। इस भजन की समीक्षा करते हुए हमारे विद्वान संपादकों ने पाया कि यह गीत न केवल संगीत की दृष्टि से उत्कृष्ट है, बल्कि यह हमारी समृद्ध लोक विरासत को भी सहेज कर रखता है। उजाला उपाध्याय की प्रस्तुति ने पारंपरिक भोजपुरी देवी गीतों की गरिमा को बनाए रखा है। इस प्रकार के गीत युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और लोक संस्कृति से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं पारंपरिक देवी गीत संग्रह।
  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण - शक्ति उपासना और प्रकृति का संबंध।
  • तरंग म्यूजिक (Tarang Music) आधिकारिक प्रस्तुति एवं विवरण।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 07 Oct 2026

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