Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Ravindra

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रहिया बहारब माई अँचरा से | Ravindra Singh Jyoti New Bhakti Song - सम्पूर्ण देवी गीत एवं व्याख्या

आदिशक्ति माता दुर्गा की असीम कृपा, करुणा और वात्सल्य से ओतप्रोत सुप्रसिद्ध गायक रवींद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti) द्वारा स्वरबद्ध यह देवी गीत "रहिया बहारब माई अँचरा से" (Rahiya Baharab Anchara Se) सनातन भक्तों के हृदय में एक विशिष्ट स्थान रखता है। यह भजन केवल एक लोकप्रिय भक्ति रचना मात्र नहीं है, अपितु यह जगत जननी जगदम्बा के चरणों में एक निश्छल भक्त की अनन्य पुकार, समर्पण और अगाध प्रेम का जीवंत दस्तावेज है। सनातन धर्म और शाक्त परंपरा में माता को संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी, पालनहार और संकटमोचनी के रूप में पूजा जाता है। 'अँचरा' यानी माता का आंचल, भक्त के लिए इस संसार का सबसे सुरक्षित, पावन और ममतामयी आवरण है, जिसके साए में आते ही समस्त सांसारिक कष्ट, ताप और भय स्वतः समाप्त हो जाते हैं। यह देवी गीत विशेष रूप से शारदीय नवरात्रि, वांतिकीय चैत्र नवरात्रि, देवी जागरण, माता की चौकी और विभिन्न मांगलिक अनुष्ठानों के पावन अवसरों पर अत्यंत श्रद्धा के साथ गाया और सुना जाता है। इस विस्तृत लेख में हम इस भजन के संपूर्ण बोल, भावार्थ, साहित्यिक पृष्ठभूमि, सांस्कृतिक महत्व और आध्यात्मिक संदेश का रसास्वादन करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

मुखड़ा:

रहिया बहारब माई अँचरा से, माई अँचरा से
रहिया बहारब माई अँचरा से, माई अँचरा से
आवा तs आवा माई, तोहरा के निहारेलूँ
रहिया बहारब माई अँचरा से...

अंतरा 1:

फूलवा बिछावेली, मनवा के फुलवारी
दर्शन के प्यासी, तोहरी बलिहारी
भक्ति के दीपवा, हम तs जरावत बानी
रहिया बहारब माई अँचरा से...

अंतरा 2:

रवींद्र पुकारे, माई सुन लs पुकार
भक्तन के दुखवा, तू हर लs हमार
ममता के सागर, तू तs दुलारी
रहिया बहारब माई अँचरा से...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

आदिशक्ति माँ दुर्गा की महिमा का गुणगान करने वाला यह भजन भोजपुरी लोक संस्कृति और उच्च कोटि के भक्ति भाव का एक अत्यंत सुंदर संगम है। भजन के प्रत्येक शब्द में मातृत्व के प्रति अगाध निष्ठा और वात्सल्य की अनुभूति होती है। आइए इसके भावार्थ को गहराई से समझें:

मुखड़े का भाव: भक्त अपनी आराध्य देवी माँ से अत्यंत आर्त भाव से प्रार्थना करता है—हे महामये! हे माता! तू कृपा करके मेरे जीवन के मार्ग को, मेरी इस दुनिया को अपने पावन आंचल (अँचरा) से बुहार दे, स्वच्छ कर दे। 'रहिया बहारब' यानी रास्ता साफ करना। भक्त का आशय है कि मेरे जीवन पथ पर आने वाले सभी दुखों, बाधाओं और पापों के कांटों को तू अपने आंचल की हवा से दूर कर दे। हे माता! तू एक बार मेरे सम्मुख आ जा, ताकि मैं अपने नेत्रों भरकर तेरे अलौकिक रूप का दर्शन कर सकूँ, तुझे निहार सकूँ।

प्रथम अंतरा का भाव: भक्त अपनी आंतरिक साधना का वर्णन करते हुए कहता है कि हे मातेश्वरी! मैंने अपने मन रूपी फुलवारी में प्रेम और श्रद्धा के फूल बिछा रखे हैं। मेरे नेत्र तेरे पावन दर्शन के लिए अत्यंत प्यासे हैं और मैं तुझ पर अपना सर्वस्व न्योछावर (बलिहारी) करने को तत्पर हूँ। मैं अपनी अंतरात्मा में भक्ति का पावन दीपक प्रज्वलित कर रहा हूँ, ताकि मेरे भीतर का अज्ञान अंधकार दूर हो सके और तेरा प्रकाश सदा जगमगाता रहे।

द्वितीय अंतरा का भाव: गायक रवींद्र सिंह ज्योति स्वयं को भक्त के रूप में प्रस्तुत करते हुए पुकारते हैं—हे माँ! मेरी इस पुकार को सुन ले। संसार के सभी भक्तों के दुखों को हरने वाली माँ, तू मेरे भी समस्त कष्टों का निवारण कर दे। तू तो करुणा, प्रेम और ममता का असीम सागर है, और हम सब तेरे अत्यंत लाडले और दुलारे बच्चे हैं। जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चे की हर गलती को क्षमा कर उसका मार्ग प्रशस्त करती है, उसी प्रकार हे जगदम्बा! तू भी मुझ पर अपनी कृपा बनाए रख।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह देवी गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि यह सनातन संस्कृति की उस सनातन धारा का हिस्सा है जहाँ भगवान और भक्त का संबंध माता और संतान का माना गया है।

  • वात्सल्य और समर्पण का प्रतीक: इस भजन में ईश्वरीय भय के स्थान पर माता के प्रति अगाध वात्सल्य, अपनापन और अधिकार का भाव झलकता है।
  • लोक शैली और शास्त्रीय भक्ति का समन्वय: भोजपुरी लोक धुनों और आंचलिक शब्दों ('अँचरा', 'रहिया', 'दीपवा') का ऐसा प्रयोग किया गया है जो सीधे जन-मन को स्पर्श करता है।
  • मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा: नवरात्रि के दिनों में या माता की चौकी के समय इस गीत को सुनने से मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी गीतों के श्रवण और गायन से घर का वातावरण पवित्र और ऊर्जावान बनता है:

  • प्रातःकाल एवं संध्याकालीन वंदना: माता की पूजा के समय धूप-दीप प्रज्वलित करते हुए इस भजन को सुना जा सकता है।
  • नवरात्रि के नौ दिन: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में घटस्थापना और माता के शृंगार के समय यह गीत विशेष रूप से बजाया जाता है।
  • जागरण एवं चौकी: किसी भी मांगलिक उत्सव, देवी जागरण या पारिवारिक अनुष्ठान में सामूहिक रूप से इसे गाया जाता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की केंद्र बिंदु हैं आदिशक्ति माँ दुर्गा (Mahagauri, Katyayani, Shailputri स्वरूपों की अधिष्ठात्री)। माता दुर्गा को वेदों और पुराणों में 'सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता' कहा गया है। इस गीत के रचनाकार और स्वरकार सुप्रसिद्ध गायक रवींद्र सिंह ज्योति हैं, जिन्होंने अपनी मधुर एवं ओजस्वी वाणी से देवी भक्तों के बीच एक अनूठी छाप छोड़ी है। उनकी अन्य प्रस्तुतियां भी भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रही हैं, जिन्हें आप देवी भजन संग्रह में देख सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

वर्ष 2021 के दौरान रिलीज हुआ यह देवीपचरा गीत लोक संगीत और आधुनिक भक्ति संगीत का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। रवींद्र सिंह ज्योति ने पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक संगीत संयोजन के साथ पिरोकर इस गीत को एक नया आयाम दिया। यह गीत उन ग्रामीण और शहरी दोनों ही परिवेशों को जोड़ता है जहाँ माता के आंचल की छांव को सबसे बड़ा सुरक्षा कवच माना जाता है। इसी प्रकार के अन्य पारंपरिक गीतों के बारे में जानने के लिए लेटेस्ट भक्ति गीत लेख पढ़ें।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी आंचलिक भाषा में रचित है, जिसमें मिठास, सरलता और गहराई तीनों का अद्भुत समन्वय है:

  • लोक शब्दावली: 'रहिया' (रास्ता), 'बहारब' (बुहारना/साफ करना), 'अँचरा' (आंचल), 'दीपवा' (दीपक) जैसे शब्दों का प्रयोग इसे जनसामान्य के अत्यंत निकट लाता है।
  • रूपक अलंकार: 'मनवा के फुलवारी' और 'भक्ति के दीपवा' जैसे प्रयोग मन को एक सुंदर आकृतिक रूप प्रदान करते हैं।
  • काव्य प्रवाह: तुकबंदी और लयबद्धता ऐसी है कि एक बार सुनने वाला व्यक्ति इसे आसानी से गुनगुनाने लगता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मनुष्य को ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए। जिस प्रकार एक छोटी सी बच्ची अपनी माँ के आँचल में सुरक्षित महसूस करती है, उसी प्रकार साधक को भी यह समझना चाहिए कि इस संपूर्ण ब्रह्मांड की संचालिका माँ आदिशक्ति हर पल हमारी रक्षा कर रही हैं। अहंकार का त्याग कर शरणागत होने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है। भगवान शिव की स्तुति के लिए आप शिव तांडव स्तोत्र का अध्ययन कर सकते हैं, जो आत्मबल को बढ़ाता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / मुहावरा सरल हिंदी अर्थ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
रहिया रास्ता / मार्ग जीवन का पथ या भाग्य का मार्ग
बहारब बुहारना / साफ करना दुखों, पापों और बाधाओं को दूर करना
अँचरा आंचल / साड़ी का पल्ला माता का वात्सल्य और परम सुरक्षा कवच
फुलवारी फूलों का बगीचा भक्त का पवित्र और प्रेममय मन
बलिहारी न्योछावर होना माता के चरणों में पूर्ण समर्पण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

भजन की प्रत्येक पंक्ति साधक के मन की गहराइयों को छूती है:

  • "रहिया बहारब माई अँचरा से..." - हे माता, तू अपने पावन आंचल से मेरे जीवन के रास्तों को साफ कर दे ताकि मेरा मार्ग प्रशस्त हो सके।
  • "फूलवा बिछावेली, मनवा के फुलवारी..." - मैं अपने मन के सुंदर भाव रूपी फूलों को तुम्हारे स्वागत में बिछा रहा हूँ।
  • "भक्ति के दीपवा, हम तs जरावत बानी..." - मैं अपने भीतर अज्ञानता को मिटाने के लिए अनन्य भक्ति का दीप जला रहा हूँ।
  • "रवींद्र पुकारे, माई सुन लs पुकार..." - गायक रवींद्र सिंह प्रार्थना करते हैं कि हे माँ! भक्त की इस सच्ची पुकार को अनसुना न कर, इसे स्वीकार कर।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माँ दुर्गा की वंदना करते हुए निम्नलिखित पावन श्लोक का स्मरण करना इस भजन के भाव को और अधिक प्रगाढ़ करता है:

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।< नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

अर्थात्: जो देवी सभी प्राणियों में माता के रूप में विराजमान हैं, उन देवी को बार-बार नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

विवरण तथ्य / जानकारी
भजन का नाम रहिया बहारब माई अँचरा से (Rahiya Baharab Anchara Se)
गायक / स्वरकार रवींद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti)
शैली / विधा देवी गीत / देवीपचरा / भोजपुरी भक्ति भजन
भाषा भोजपुरी एवं हिंदी
प्रमुख देवता आदिशक्ति माँ दुर्गा / जगदम्बा
भक्ति भाव वात्सल्य, समर्पण, करुणा और विनय
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, देवी जागरण, माता की चौकी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध देवी गीत के गायक और स्वरकार सुप्रसिद्ध लोक एवं भक्ति गायक रवींद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti) हैं।

इस भजन का मुख्य भाव माता के प्रति अनन्य प्रेम, वात्सल्य, और संपूर्ण समर्पण है, जिसमें भक्त माँ से अपने जीवन के कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करता है।

यह भजन अत्यंत मधुर और सरल भोजपुरी आंचलिक भाषा में रचित है, जो उत्तर भारत के लोक संगीत का अभिन्न अंग है।

इस गीत को शारदीय और चैत्र नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण तथा प्रातःकालीन दैनिक पूजा के समय सुनना अत्यंत फलदायी और आनंददायक होता है।

'अँचरा' (आंचल) माता के वात्सल्य, सुरक्षा, ममता और शरण का प्रतीक है, जिसके नीचे आने पर भक्त सभी प्रकार के भयों से मुक्त हो जाता है।

हाँ, यह एक पूर्णतः सात्विक, पारिवारिक और भक्तिमय देवी गीत है जिसे परिवार के सभी सदस्यों के साथ नवरात्रि या किसी भी अनुष्ठान में सुना जा सकता है।

ऐसे लोकगीत हमारी पारंपरिक सांस्कृतिक जड़ों, स्थानीय भाषाओं और देवी-देवताओं के प्रति सहज प्रेम को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखते हैं।

नहीं, इसकी धुन बहुत सरल और सहज है। इसे कोई भी भक्त सच्चे भाव और श्रद्धा के साथ आसानी से गुनगुना सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। इस लेख में प्रस्तुत भजन के बोल, अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भ को प्रामाणिक लोक परंपराओं और संगीत स्रोतों के आधार पर संकलित किया गया है ताकि पाठकों को उत्तम भक्ति सामग्री मिल सके।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक लोक गाथाएं एवं देवीपचरा संग्रह
  • भोजपुरी लोक संगीत एवं संस्कृति अध्ययन
  • सनातन शाक्त परंपरा और दुर्गा स्तुति ग्रंथ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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