Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Pawan Singh - Ankhiya Ke Lor

पढ़ें Pawan Singh का सबसे दर्दभरा माँ का विदाई गीत - Ankhiya Ke Lor - Bhojpuri Devi Bidai Geet - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूज

पवन सिंह का "अंखिया के लोर" (Ankhiya Ke Lor) केवल एक भोजपुरी देवी विदाई गीत नहीं, बल्कि एक भक्त की करुण पुकार और माँ के प्रति अटूट समर्पण का जीवंत दस्तावेज है। शारदीय या चैत्र नवरात्रि के समापन पर जब भक्त अपनी आराध्या को विदा करते हैं, तो मन में जो विरह और व्याकुलता होती है, उसे इस गीत में अत्यंत मार्मिकता के साथ पिरोया गया है। यह गीत उस सनातन परंपरा का हिस्सा है जहाँ भक्त माँ को केवल एक शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपनी ममतामयी जननी के रूप में देखता है। विदाई के क्षणों में भक्त की आँखों से बहते आँसू (लोर) इस बात का प्रमाण हैं कि माँ का सानिध्य भक्त के लिए कितना महत्वपूर्ण है। यह गीत न केवल भोजपुरी लोक संस्कृति की मिठास को दर्शाता है, बल्कि भक्ति के उस उच्च स्तर को भी छूता है जहाँ भक्त और भगवान के बीच का अंतर मिट जाता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मुखड़ा:
अंखिया के लोर, माई रोके ना रुकई
तोहरा के छोड़, माई जिया ना सकई
अंखिया के लोर, माई रोके ना रुकई...

अंतरा 1:
नौ दिन के साथ, बड़ा प्यारा लागल
तोहरा बिना माई, जग अँधियारा लागल
कइसे विदा करीं, मनवा न मानई
अंखिया के लोर, माई रोके ना रुकई...

अंतरा 2:
अगिला बरस, जल्दी अइहूँ तू माई
भक्तन के दुःख, सब हर लिहूँ तू माई
तोहरे भरोसे, दुनिया चलई
अंखिया के लोर, माई रोके ना रुकई...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस गीत का भावार्थ अत्यंत गहरा है। भक्त अपनी माँ दुर्गा से कहता है कि हे माँ, तुम्हारे विदाई के समय मेरी आँखों से बहते आँसू रुक नहीं रहे हैं। तुम्हारे बिना मेरा जीवन सूना और अंधकारमय प्रतीत हो रहा है। नौ दिनों तक जो दिव्य ऊर्जा और आनंद हमने तुम्हारे सानिध्य में पाया, वह अब विदाई के क्षणों में एक विरह की अग्नि बन गया है। भक्त यहाँ अपनी विवशता व्यक्त करता है कि वह आपको विदा करने में असमर्थ है, क्योंकि उसका मन आपको छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। अंत में, भक्त माँ से यह प्रार्थना करता है कि आप अगले वर्ष पुनः पधारें और हमारे दुखों का नाश करें। यह गीत केवल एक विदाई गीत नहीं, बल्कि माँ के प्रति एक अटूट विश्वास और अगले वर्ष के आगमन की प्रतीक्षा का प्रतीक है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'विरह भक्ति' है। सनातन धर्म में विदाई का अर्थ अंत नहीं, बल्कि एक नए मिलन की आशा है। यह गीत संदेश देता है कि भक्ति में भाव का महत्व सबसे अधिक है। जब भक्त पूरी श्रद्धा से माँ को पुकारता है, तो माँ उसके हृदय में सदैव वास करती हैं। यह गीत धैर्य, करुणा और निरंतर भक्ति का संदेश देता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण जानकारी
गीत का नामअंखिया के लोर (Ankhiya Ke Lor)
गायकपवन सिंह
भाषाभोजपुरी
विषयदेवी विदाई (Devi Bidai)
भावविरह एवं समर्पण

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह ने अपनी भावपूर्ण आवाज से इस गीत को अमर बना दिया है। उनके गायन में जो दर्द और भक्ति का मिश्रण है, वह श्रोताओं को सीधे माँ के चरणों से जोड़ देता है। संगीत संयोजन और शब्दों का चयन इस प्रकार किया गया है कि यह हर उस भक्त के हृदय को छूता है जो नवरात्रि के समापन पर भावुक हो जाता है।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भोजपुरी अंचल में नवरात्रि का पर्व अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। विदाई गीत हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। ये गीत हमें सिखाते हैं कि ईश्वर के साथ हमारा संबंध केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक पारिवारिक और भावनात्मक जुड़ाव है। विदाई के समय माँ को विदा करना वास्तव में अपने भीतर की नकारात्मकता को विदा करना और माँ की कृपा को अपने हृदय में संजोकर रखना है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • समर्पण: ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण ही मोक्ष का मार्ग है।
  • धैर्य: विदाई के दुख में भी अगले मिलन की आशा रखना जीवन का सकारात्मक दृष्टिकोण है।
  • कृतज्ञता: माँ की कृपा के लिए सदैव कृतज्ञ रहना चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से नवरात्रि के अंतिम दिन, यानी विजयादशमी के अवसर पर माँ दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन के समय गाया और सुना जाता है। इसके अतिरिक्त, किसी भी देवी जागरण या भक्ति संध्या के समापन पर इसे गाकर माँ की विदाई की जा सकती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

अंखिया के लोर गीत का मुख्य भाव क्या है?

इस गीत का मुख्य भाव माँ दुर्गा के प्रति भक्त का विरह और उनके प्रति अटूट प्रेम है।

यह गीत कब सुना जाता है?

यह गीत नवरात्रि के समापन और माँ दुर्गा की विदाई के समय सुना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह लेख भोजपुरी भक्ति संगीत की परंपरा और पवन सिंह के गायन के भावनात्मक प्रभाव को ध्यान में रखकर लिखा गया है। संदर्भ हेतु देवी भागवत पुराण और लोक परंपराओं का सहारा लिया गया है।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 11 Oct 2026

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