Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Kabhi Durga Banke Kabhi Kaali Banke

पढ़ें Kabhi Durga Banke Kabhi Kaali Banke I Devi bhajan I TRIPTI SHAKYA I Full HD Video Song - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा

"कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके" सनातन हिंदू धर्म में आदिशक्ति मां भगवती की आराधना का एक अत्यंत लोकप्रिय, सुमधुर और हृदयस्पर्शी भजन है। सुप्रसिद्ध गायिका तृप्ति शाक्या की दिव्य आवाज में गाया गया यह भजन भक्तों के हृदय में अनन्य भक्ति और समर्पण का संचार करता है। इस भजन का मुख्य भाव 'सर्वदेवमयी' और 'सर्वशक्तिमयी' जगदम्बा के प्रति पूर्ण शरणागति है। भक्त अपनी आराध्य देवी से प्रार्थना करता है कि वे चाहे जिस रूप में भी आएं—चाहे ममतामयी दुर्गा के रूप में, संहारिणी काली के रूप में, ऐश्वर्यदात्री लक्ष्मी के रूप में, या ज्ञानदायिनी सरस्वती के रूप में—बस वे अपने भक्त के जीवन में पधारें। यह भजन विशेष रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि, देवी जागरण, माता की चौकी और दैनिक पूजा-अर्चना के समय गाया जाता है। इस लेख में हम इस पावन भजन के बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, दार्शनिक महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं का विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके ॥

स्थायी (मुखड़ा):
कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके,
चले आना मैया जी चले आना ॥
कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके,
चले आना मैया जी चले आना ॥

अंतरा 1:
तुम दुर्गा के रूप में आना,
तुम दुर्गा के रूप में आना।
सिंह पे सवारी करके, चक्र हाथ में लेके,
चले आना मैया जी चले आना ॥
कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके...

अंतरा 2:
तुम काली के रूप में आना,
तुम काली के रूप में आना।
हाथ में खप्पर लेके, गले मुंडमाल सजा के,
चले आना मैया जी चले आना ॥
कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके...

अंतरा 3:
तुम लक्ष्मी के रूप में आना,
तुम लक्ष्मी के रूप में आना।
हाथों में कमल लेके, धन की वर्षा करके,
चले आना मैया जी चले आना ॥
कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके...

अंतरा 4:
तुम शारदा के रूप में आना,
तुम शारदा के रूप में आना।
हाथों में वीणा लेके, ज्ञान का दीप जला के,
चले आना मैया जी चले आना ॥
कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके...

अंतरा 5:
तुम वैष्णो के रूप में आना,
तुम वैष्णो के रूप में आना।
हाथों में धनुष लेके, भक्तों का कष्ट हरने,
चले आना मैया जी चले आना ॥
कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके,
चले आना मैया जी चले आना ॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का केंद्रीय भाव ईश्वर के बहुआयामी रूपों को स्वीकार करना और उनके प्रति अनन्य प्रेम प्रकट करना है। श्रीमद्देवीभागवत पुराण के अनुसार, आदिशक्ति एक ही हैं, परंतु भक्तों के कल्याण और सृष्टि के संचालन के लिए वे विभिन्न रूपों में प्रकट होती हैं। इस भजन में भक्त अपनी माता से कहता है कि हे मैया! मेरे लिए आपका कोई भी रूप पराया नहीं है। आप जिस भी रूप में आना चाहें, आएं, परंतु मेरे हृदय मंदिर में अवश्य पधारें।

जब भक्त कहता है "कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके", तो वह देवी के सौम्य और उग्र दोनों रूपों के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करता है। दुर्गा रूप जहां अभय, सुरक्षा और धर्म की स्थापना का प्रतीक है, वहीं काली रूप काल (समय) और अज्ञान के विनाश का प्रतीक है। इसके बाद के अंतराओं में लक्ष्मी, शारदा (सरस्वती) और वैष्णो देवी के रूपों का आह्वान किया गया है। यह इस बात को दर्शाता है कि मानव जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए शक्ति (दुर्गा), सुरक्षा (काली), समृद्धि (लक्ष्मी), ज्ञान (सरस्वती) और करुणा (वैष्णो देवी) इन सभी की आवश्यकता होती है। यह भजन केवल एक प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह आत्मा का परमात्मा से मिलन का एक मधुर आमंत्रण है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल संगीत की दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • एकेश्वरवाद और बहुदेववाद का समन्वय: यह भजन यह स्पष्ट संदेश देता है कि सभी देवियां वास्तव में एक ही परम शक्ति (आदिशक्ति) के विभिन्न रूप हैं।
  • शरणागति का भाव: इसमें भक्त अपनी ओर से कोई शर्त नहीं रखता। वह माता को पूर्ण स्वतंत्रता देता है कि वे अपनी इच्छा से किसी भी रूप में आएं।
  • प्रतीकात्मकता: भजन का प्रत्येक अंतरा देवी के विशिष्ट आयुधों (हथियारों) और प्रतीकों जैसे सिंह, चक्र, खप्पर, मुंडमाल, कमल, वीणा और धनुष का वर्णन करता है, जिनका गहरा आध्यात्मिक अर्थ है।
  • मानसिक शांति: इस भजन के श्रवण और कीर्तन से साधक के मन में भय का नाश होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि भगवद्-भक्ति के लिए कोई समय निश्चित नहीं होता, फिर भी इस भजन के गायन और श्रवण के लिए कुछ विशेष अवसर अत्यंत फलदायी माने गए हैं:

  • नवरात्रि महोत्सव: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान इस भजन का गायन माता के दरबार में विशेष रूप से किया जाता है।
  • माता की चौकी और जागरण: किसी भी मांगलिक कार्य के अवसर पर आयोजित होने वाले माता के जागरण या चौकी में इस भजन को गाकर भक्त झूम उठते हैं।
  • दैनिक संध्या आरती: प्रत्येक शुक्रवार या प्रतिदिन संध्या काल में माता की आरती के पश्चात इस भजन का कीर्तन करने से घर का वातावरण पवित्र होता है।
  • गायन विधि: इस भजन को गाते समय हाथ में ताली बजाकर या ढोलक-मंजीरे की थाप पर सामूहिक रूप से गाना चाहिए। इससे सामूहिक चेतना जागृत होती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से आदिशक्ति महामाया को समर्पित है। सनातन परंपरा में त्रिदेवी (महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती) को सृष्टि की उत्पत्ति, स्थिति और लय का कारण माना गया है।

इस भजन को अपनी मधुर आवाज से जन-जन तक पहुंचाने का श्रेय सुप्रसिद्ध भजन गायिका तृप्ति शाक्या को जाता है। उन्होंने अपनी शास्त्रीय और सुगम संगीत की पृष्ठभूमि के माध्यम से इस भजन में ऐसे प्राण फूंके हैं कि इसे सुनते ही श्रोता भाव-विभोर हो जाते हैं। यह भजन पारंपरिक लोक धुनों पर आधारित है, जिसे समय-समय पर विभिन्न संतों और भक्तों ने अपने-अपने ढंग से गाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

"कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके" एक पारंपरिक देवी गीत है। इसकी रचना लोक-मानस द्वारा की गई है, जो सदियों से भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में गाया जाता रहा है। जब कोई गीत लोक-परंपरा से निकलकर आता है, तो उसमें किसी एक रचनाकार का नाम नहीं होता, बल्कि वह पूरे समाज की सामूहिक भक्ति का प्रतीक बन जाता है। तृप्ति शाक्या ने इस पारंपरिक गीत को आधुनिक संगीत के साथ संयोजित कर "BhaktiLok" और अन्य मंचों के माध्यम से वैश्विक पहचान दिलाई। इस भजन की पृष्ठभूमि उत्तर भारतीय लोक संगीत और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश व पंजाब की जगराता शैली से प्रेरित है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और ब्रजभाषा के शब्दों का सुंदर पुट देखने को मिलता है। इसकी काव्य शैली अत्यंत प्रवाहमयी और गीतात्मक है।

  • पुनरावृत्ति (Refrain): "चले आना मैया जी चले आना" की बार-बार पुनरावृत्ति भजन में एक लयबद्धता और सम्मोहन पैदा करती है, जिससे ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
  • बिंब विधान (Imagery): भजन में प्रयुक्त शब्द जैसे "सिंह पे सवारी", "हाथों में वीणा", "गले मुंडमाल" श्रोता के मन में देवी के विभिन्न रूपों का एक सजीव चित्र अंकित कर देते हैं।
  • रस: इस भजन में मुख्य रूप से 'भक्ति रस' और 'शांत रस' का परिपाक हुआ है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण संदेश भी देता है:

  1. स्वीकार्यता का भाव (Acceptance): जैसे हम देवी के उग्र (काली) और सौम्य (लक्ष्मी) दोनों रूपों को स्वीकार करते हैं, वैसे ही हमें जीवन के सुख और दुख दोनों को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए।
  2. संतुलन (Balance): जीवन में प्रगति के लिए शक्ति (दुर्गा), ज्ञान (सरस्वती) और समृद्धि (लक्ष्मी) तीनों का संतुलन आवश्यक है।
  3. अहंकार का त्याग: माता काली का रूप हमें सिखाता है कि जब तक हम अपने अहंकार (मुंड) का त्याग नहीं करेंगे, तब तक हमें वास्तविक ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती।
  4. कर्म और पुरुषार्थ: देवी के हाथों में शस्त्र इस बात के प्रतीक हैं कि हमें अपने जीवन में अधर्म और बुराइयों के खिलाफ निरंतर संघर्ष करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
मैया जी जगत जननी माता सृष्टि की आदि जननी, जो सभी जीवों की माता हैं।
सिंह सवारी शेर पर बैठना क्रोध, भय और पाशविक प्रवृत्तियों पर नियंत्रण का प्रतीक।
खप्पर मिट्टी या धातु का पात्र असुरों के रक्त को पीने और अज्ञान को समाप्त करने का प्रतीक।
मुंडमाल सिरों की माला वर्णमाला के अक्षरों और सृष्टि के चक्र (काल) का प्रतीक।
वीणा एक वाद्य यंत्र नाद ब्रह्म और जीवन के संगीत व सामंजस्य का प्रतीक।
वैष्णो विष्णु की शक्ति सत्व गुण प्रधान देवी, जो भक्तों का कल्याण करती हैं।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

पंक्ति: "कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके, चले आना मैया जी चले आना ॥"
भावार्थ: हे माता! आप चाहे महिषासुरमर्दिनी दुर्गा के रूप में आएं या दुष्टों का संहार करने वाली महाकाली के रूप में, आप मेरे जीवन में अवश्य पधारें। मेरे लिए आपके दोनों ही रूप पूजनीय हैं।

पंक्ति: "तुम दुर्गा के रूप में आना, सिंह पे सवारी करके, चक्र हाथ में लेके..."
भावार्थ: जब आप दुर्गा के रूप में आएं, तो सिंह पर सवार होकर आएं और अपने हाथों में सुदर्शन चक्र धारण करें, ताकि मेरे भीतर के काम, क्रोध और लोभ रूपी राक्षसों का अंत हो सके।

पंक्ति: "तुम काली के रूप में आना, हाथ में खप्पर लेके, गले मुंडमाल सजा के..."
भावार्थ: हे मां! जब आप काली के रूप में आएं, तो अपने हाथों में खप्पर और गले में मुंडों की माला पहनकर आएं, जिससे मेरे अज्ञान और अंधकार का समूल नाश हो सके।

पंक्ति: "तुम लक्ष्मी के रूप में आना, हाथों में कमल लेके, धन की वर्षा करके..."
भावार्थ: जब आप महालक्ष्मी के रूप में आएं, तो हाथों में पवित्र कमल का पुष्प लेकर आएं और मेरे जीवन में सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक धन की वर्षा करें।

पंक्ति: "तुम शारदा के रूप में आना, हाथों में वीणा लेके, ज्ञान का दीप जला के..."
भावार्थ: हे मां सरस्वती! जब आप शारदा के रूप में आएं, तो वीणा की मधुर तान छेड़ते हुए आएं और मेरे अज्ञानमय हृदय में ज्ञान का दिव्य दीपक प्रज्वलित कर दें।

पंक्ति: "तुम वैष्णो के रूप में आना, हाथों में धनुष लेके, भक्तों का कष्ट हरने..."
भावार्थ: हे त्रिकुटा पर्वत वासिनी मां वैष्णो! आप अपने हाथों में कोदंड धनुष लेकर आएं और अपने इस दीन भक्त के सभी सांसारिक और आध्यात्मिक कष्टों का निवारण करें।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ माता दुर्गा के इस परम कल्याणकारी श्लोक का स्मरण करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जो देवी के सर्वव्यापी रूप को दर्शाता है:

सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

अर्थ: हे नारायणी! आप सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हैं। आप कल्याणकारिणी, सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागतवत्सला, तीन नेत्रों वाली गौरी हैं। आपको नमस्कार है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम कभी दुर्गा बनके कभी काली बनके (Kabhi Durga Banke Kabhi Kaali Banke)
मुख्य देवी-देवता आदिशक्ति मां दुर्गा, महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती
मुख्य गायिका तृप्ति शाक्या (Tripti Shakya)
भाषा हिंदी (लोक शैली)
भक्ति का भाव पूर्ण शरणागति, वात्सल्य और आत्म-निवेदन
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, माता की चौकी, जागरण, शुक्रवार व्रत पूजा
प्रकाशक / स्रोत BhaktiLok

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन की मुख्य और सबसे प्रसिद्ध गायिका तृप्ति शाक्या हैं। उनकी भावपूर्ण और सुरीली आवाज ने इस भजन को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

इस भजन में देवी के पांच प्रमुख रूपों का वर्णन है: मां दुर्गा, मां काली, मां लक्ष्मी, मां शारदा (सरस्वती) और मां वैष्णो देवी।

इसका मुख्य संदेश यह है कि ईश्वर एक हैं और वे भक्तों की पुकार पर किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। भक्त को ईश्वर के सभी रूपों के प्रति समान श्रद्धा रखनी चाहिए।

हां, यह भजन नवरात्रि के दौरान गाने और सुनने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है और यह भजन भी देवी के बहु-रूपों को समर्पित है।

"खप्पर" अज्ञान और नकारात्मकता को समाप्त करने का प्रतीक है, जबकि "मुंडमाल" अहंकार के विनाश और काल (समय) पर विजय का प्रतीक है।

इस भजन के नियमित श्रवण से मन को शांति मिलती है, भय दूर होता है, घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माता की कृपा प्राप्त होती है।

यह भजन मुख्य रूप से भारतीय लोक संगीत और सुगम संगीत की मिश्रित शैली पर आधारित है, जिससे यह आम लोगों के लिए गाने में बहुत सरल और सुरीला बन जाता है।

भजन या पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना सर्वोत्तम माना जाता है, क्योंकि यह दिशाएं सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र होती हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी विद्वान संपादकीय टीम ने इस भजन के पाठ, दार्शनिक अर्थ और पौराणिक संदर्भों की गहन जांच की है। इस भजन में वर्णित देवी के रूपों का विश्लेषण श्रीमद्देवीभागवत पुराण और श्री दुर्गा सप्तशती के आलोक में किया गया है। यह भजन सनातन धर्म की उस महान परंपरा को रेखांकित करता है जहां ईश्वर को केवल एक रूप में नहीं, बल्कि अनंत रूपों में स्वीकार किया गया है। तृप्ति शाक्या का यह भजन आज भी करोड़ों भक्तों के लिए भक्ति का मुख्य मार्ग बना हुआ है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण: देवी के विभिन्न अवतारों और उनकी शक्तियों का वर्णन।
  • श्री दुर्गा सप्तशती: मां दुर्गा के चरित्र और महिषासुर वध की कथा।
  • पारंपरिक लोक संगीत संग्रह: उत्तर भारतीय भजन और जगराता परंपरा।
  • BhaktiLok संगीत प्रभाग: भजन के प्रामाणिक बोल और गायन शैली।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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