Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

bade hanuman ji allahabad (Mankameshwar Mandir Allahabad)

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तीर्थ एवं मंदिर | Temple & Pilgrimage Guide

बड़े हनुमान जी प्रयागराज, मनकामेश्वर मंदिर और बाढ़ का पौराणिक एवं आध्यात्मिक महत्व

संगम नगरी प्रयागराज (इलाहाबाद) की पावन धरती पर स्थित बड़े हनुमान जी (लेटे हुए हनुमान मंदिर) और मनकामेश्वर मंदिर सनातन संस्कृति, भक्ति और आस्था के अद्वितीय केंद्र हैं। त्रिवेणी संगम के तट पर विराजमान बड़े हनुमान जी विश्व के एकमात्र ऐसे लेटे हुए विग्रह हैं, जिनके दर्शन मात्र से भक्तों के बड़े से बड़ा संकट दूर हो जाता है। वहीं, यमुना तट के समीप स्थित मनकामेश्वर मंदिर अपनी पौराणिक महत्ता और भगवान शिव के साक्षात स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। हर वर्ष मानसूनी वर्षा और गंगा-यमुना के बढ़ते जलस्तर के कारण आने वाली प्रयागराज की बाढ़ (Flood in Prayगराज) इन ऐतिहासिक मंदिरों के प्रांगण तक पहुँच जाती है, जिसे देखने और माँ गंगा द्वारा हनुमान जी के चरण पखारने की अलौकिक घटना को निहारने देश-विदेश से श्रद्धालु पहुँचते हैं। भ_क्तिलोक के इस विस्तृत शोध-आधारित लेख में हम इन पावन तीर्थों के इतिहास, बाढ़ की प्राकृतिक घटना और उनकी आध्यात्मिक प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

मंदिर का इतिहास एवं पौराणिक कथा | History & Mythology of Bade Hanuman Ji

प्रयागराज के किले (Allahabad Fort) के ठीक सనుत स्थित बड़े हनुमान मंदिर का इतिहास सदियों पुराना है और इसका सीधा संबंध रामायण काल तथा द्वापर युग से जुड़ता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान श्रीराम लंका विजय के पश्चात अयोध्या लौटे और राजा बने, तब हनुमान जी ने माँ सीता से माँगा कि वे हमेशा उस स्थान पर निवास करें जहाँ निरंतर साधु-संतों की सेवा और भगवत चर्चा हो। तदुपरांत, हनुमान जी प्रयाग क्षेत्र में गंगा-यमुना के संगम तट पर आ विराजे।

एक अन्य प्रचलित पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक राजा निःसंतान था और उसने संतान प्राप्ति की मनोकामना हेतु महाबली हनुमान की विशाल प्रतिमा का निर्माण करवाकर संगम तट पर स्थापित करने का संकल्प लिया। जब प्रतिमा का निर्माण हो रहा था, तो दैवीय चमत्कार से वह मूर्ति अपने आप लेटी हुई अवस्था में स्थापित हो गई और उसे कोई भी सीधा नहीं कर सका। तब से यह मंदिर 'लेटे हुए हनुमान मंदिर' या 'बड़े हनुमान जी' के नाम से प्रसिद्ध हो गया। मंदिर की विशेषता यह है कि यहाँ हनुमान जी की प्रतिमा लगभग 20 फीट लंबी है और वे विश्राम की मुद्रा में लेटे हुए हैं। इनके दाहिने चरण में अहिरावण का वध करने का भी सूक्ष्म संकेत मिलता है।

मनकामेश्वर मंदिर प्रयागराज का ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व

प्रयागराज के दारागंज क्षेत्र में यमुना नदी के तट पर स्थित मनकामेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और जागृत मंदिर है। ऐसा विश्वास किया जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस मंदिर में अपनी मनोकामना लेकर आता है, भगवान शिव उसकी सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं।

ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार, इस स्थान पर महर्षियों ने तपस्या की थी। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग स्वयंभू माना जाता है। सावन के महीने में और महाशिवरात्रि पर यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करते हुए जलाभिषेक करते हैं। यमुना नदी के बिल्कुल पास होने के कारण जब भी प्रयागराज में बाढ़ आती है, मनकामेश्वर मंदिर का निचला हिस्सा जलमग्न हो जाता है, जिसके बाद भक्तगण नावों के माध्यम से बाबा के दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

प्रयागराज में बाढ़ (Flood in Prayagraj) और बड़े हनुमान जी की अलौकिक लीला

प्रयागराज अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण गंगा और यमुना नदियों के संगम पर बसा है। प्रतिवर्ष मानसून सत्र (जुलाई से सितंबर) के दौरान जब उत्तर भारत में भारी वर्षा होती है, तो गंगा और यमुना दोनों नदियाँ उफान पर आ जाती हैं। इस प्राकृतिक चक्र के कारण प्रयागराज में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है, जिसे स्थानीय भाषा में 'संगम की बाढ़' कहा जाता है।

बड़े हनुमान मंदिर का भू-तल संगम के जलस्तर से नीचा होने के कारण, बाढ़ आने पर सबसे पहले यही क्षेत्र जलमग्न होता है। गंगा नदी का बढ़ता हुआ पानी सीधे मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर जाता है और हनुमान जी के चरणों को स्पर्श करता है। इसे बाढ़ या आपदा न मानकर प्रयागराज के सनातनधर्मी भक्त एक अत्यंत पवित्र और सौभाग्यशाली घटना मानते हैं। भक्तों का मानना है कि माँ गंगा स्वयं अपने जल से संकटमोचन हनुमान जी के चरणों का अभिषेक करने आती हैं। इस दौरान मंदिर प्रशासन द्वारा मूर्ति के ऊपरी हिस्सों की रक्षा करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और प्रशासन द्वारा नावों के जरिए श्रद्धालुओं को सुरक्षित दर्शन कराए जाते हैं।

मंदिर की वास्तुकला एवं गर्भगृह की विशेषता

बड़े हनुमान मंदिर की वास्तुकला अत्यंत अनूठी है। यह मंदिर भूमि तल से गहराई में स्थित है। गर्भगृह में प्रवेश करते ही एक सीढ़ीनुमा मार्ग से नीचे उतरना पड़ता है जहाँ बजरंगबली लेटी हुई मुद्रा में विराजमान हैं। मूर्ति के चारों ओर परिक्रमा मार्ग बना हुआ है। बाढ़ के दिनों में जब पूरा मंदिर परिसर पानी से भर जाता है, तब गर्भगृह के चारों ओर का जलदृश्य देखने योग्य होता है।

दूसरी ओर, मनकामेश्वर मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय नागर शैली की सुंदर बानगी प्रस्तुत करती है। मंदिर के प्रांगण में विशाल वटवृक्ष और अन्य देवी-देवताओं के छोटे मंदिर भी स्थापित हैं, जो पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रखते हैं।

प्रमुख उत्सव, दर्शन एवं पूजा विधि

इन दोनों मंदिरों में वर्ष भर उत्सवों का तांता लगा रहता है। विशेष अवसरों पर मंदिरों की छटा देखते ही बनती है:

  • बड़े हनुमान मंदिर के प्रमुख पर्व: हनुमान जयंती, मंगलवार विशेष शृंगार, बड़ा मंगल और दीपावली पर यहाँ भव्य अनुष्ठान होते हैं। भक्त अपनी मनोकामना पूर्ति हेतु हनुमान जी को सिंदूर और चोला अर्पित करते हैं। नियमित साधना के लिए भक्त श्री हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करते हैं।
  • मनकामेश्वर मंदिर के प्रमुख पर्व: महाशिवरात्रि, सावन के प्रत्येक सोमवार और प्रदोष व्रत पर यहाँ विशेष रुद्राभिषेक किया जाता है।
  • दर्शन का समय: ग्रीष्मकाल और शीतकाल में प्रातः 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक मंदिर के कपाट खुले रहते हैं। दोपहर में अल्प समय के लिए पट बंद होते हैं।

कैसे पहुंचे एवं यात्रा मार्ग (How to Reach Prayagraj Temples)

प्रयागराज भारत के प्रमुख शहरों से रेल, वायु और सड़क मार्ग से भली-भांति जुड़ा हुआ है:

  • वायु मार्ग (By Air): प्रयागराज विमानक्षेत्र (Bamrauli Airport) शहर से लगभग 12 किमी दूर है। इसके अलावा वाराणसी (120 किमी) और लखनऊ (200 किमी) हवाई अड्डे भी निकट हैं।
  • रेल मार्ग (By Train): प्रयागराज जंक्शन (Prayagraj Junction), प्रयाग स्टेशन, दारागंज और सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन देश के सभी प्रमुख महानगरों से जुड़े हैं। बड़े हनुमान मंदिर प्रयागराज जंक्शन से मात्र 5-6 किमी की दूरी पर स्थित है।
  • सड़क मार्ग (By Road): राष्ट्रीय राजमार्गों के माध्यम से यह शहर दिल्ली, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर और पटना से अच्छी तरह कनेक्टेड है।

एक नजर में मंदिर और बाढ़ की जानकारी | Quick Facts

प्रमुख मंदिर बड़े हनुमान मंदिर एवं मनकामेश्वर मंदिर
स्थान प्रयागराज (इलाहाबाद), उत्तर प्रदेश
मुख्य देवता संकटमोचन श्री हनुमान जी एवं भगवान शिव
विशेष विशेषता विश्व की एकमात्र लेटे हुए हनुमान जी की मूर्ति, बाढ़ के दौरान चरणों का जल अभिषेक
निकटतम रेलवे स्टेशन प्रयागराज जंक्शन (Prayagraj Junction)
निकटतम हवाई अड्डा बमरौली हवाई अड्डा, प्रयागराज
प्रमुख पर्व हनुमान जयंती, महाशिवरात्रि, सावन मास

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. बड़े हनुमान मंदिर प्रयागराज में हनुमान जी की मूर्ति लेटी हुई क्यों है?

ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस मूर्ति की स्थापना के समय यह अपने आप लेटी हुई मुद्रा में स्थापित हो गई थी और इसे सीधा करने के सभी प्रयास असफल रहे, तभी से यह इसी स्वरूप में पूजी जाती है।

Q2. प्रयागराज में बाढ़ के दौरान बड़े हनुमान मंदिर का क्या हाल होता है?

बाढ़ के दिनों में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने पर पानी मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर जाता है और हनुमान जी के चरणों को स्पर्श करता है, जिसे भक्त माँ गंगा द्वारा भगवान के अभिषेक के रूप में देखते हैं।

Q3. मनकामेश्वर मंदिर कहाँ स्थित है?

मनकामेश्वर मंदिर प्रयागराज के दारागंज मोहल्ले में यमुना नदी के तट पर स्थित है।

Q4. बड़े हनुमान मंदिर के दर्शन का सबसे उत्तम समय कौन सा है?

वर्षभर कभी भी दर्शन किए जा सकते हैं, परंतु मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती और बाढ़ के समय (मानसून) विशेष आध्यात्मिक अनुभव होता है।

Q5. क्या बाढ़ के समय मंदिर में दर्शन बंद रहते हैं?

जलस्तर अधिक होने पर प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा नावों के माध्यम से या सुरक्षित स्थानों से भक्तों को दर्शन कराने की व्यवस्था की जाती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख प्रयागराज के प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों, पौराणिक इतिहास, मानसून के दौरान आने वाली बाढ़ की प्राकृतिक स्थिति और स्थानीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे पाठकों की धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारी को समृद्ध करने के लिए संकलित किया गया है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री — भक्तिलोक

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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