Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

अष्ट भुजी अम्बे जगदम्बे (Asht Bhuji Ambe Jagdambe)

पढ़ें अष्ट भुजी अम्बे जगदम्बे | Asht bhuji Ambe Jagdambe | Devi Geet | Singer Rudrakant Thakur | Navratri2021 - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हि

आदिशक्ति माँ दुर्गा के अष्टभुजी स्वरूप को समर्पित यह भजन "अष्ट भुजी अम्बे जगदम्बे" साधकों के हृदय में भक्ति का संचार करने वाला एक अत्यंत प्रभावशाली देवी गीत है। गायक रुद्रकांत ठाकुर द्वारा स्वरबद्ध यह रचना नवरात्रि के पावन पर्व पर विशेष रूप से सुनी जाती है। सनातन धर्म में 'अष्टभुजी' का अर्थ है आठ भुजाओं वाली, जो माता के उस पराक्रमी रूप को दर्शाता है जिसमें उन्होंने महिषासुर का संहार करने के लिए देवताओं के तेज से जन्म लिया था। यह भजन न केवल एक संगीतमय प्रस्तुति है, बल्कि यह माता की शरणागति का एक माध्यम भी है। इस भजन में निहित भाव भक्त को सांसारिक दुखों से मुक्त होकर माँ की गोद में आश्रय पाने की प्रेरणा देते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

अष्ट भुजी अम्बे जगदम्बे, मेरी बिगड़ी बना दे माँ,
तेरी शरण में आए हैं हम, अपना हमें बना ले माँ।

सिंह सवारी करती मैया, दुष्टों का संहार करे,
भक्तों की तू पीड़ा हरती, कष्टों का तू नाश करे।
अष्ट भुजाओं वाली मैया, ज्योति तेरी जगा दे माँ,
अष्ट भुजी अम्बे जगदम्बे, मेरी बिगड़ी बना दे माँ।

लाल चुनरिया ओढ़ के मैया, पर्वत पर तू रहती है,
भक्तों की जो भी अरजी हो, बिन बोले ही सुनती है।
ममता की तू मूरत मैया, प्रेम की धारा बहा दे माँ,
अष्ट भुजी अम्बे जगदम्बे, मेरी बिगड़ी बना दे माँ।

शस्त्र अस्त्र सब हाथों में है, शक्ति का तू रूप है,
तेरी एक झलक पाने को, तरसे ये संसार है।
भक्ति का वरदान दे मैया, चरणों में बिठा ले माँ,
अष्ट भुजी अम्बे जगदम्बे, मेरी बिगड़ी बना दे माँ।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन में भक्त अपनी माँ जगदम्बे से अत्यंत भावुक होकर प्रार्थना कर रहा है। 'अष्ट भुजी' माँ दुर्गा का वह स्वरूप है जो शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है। भक्त कहता है कि हे माँ, मेरे जीवन की सभी उलझनें और बिगड़े हुए कार्य आप ही सुधार सकती हैं। मैं आपकी शरण में आया हूँ, कृपया मुझे अपना मानकर स्वीकार करें। भजन की पंक्तियों में माँ की शक्ति का वर्णन है—वे सिंह पर सवार होकर दुष्टों का विनाश करती हैं और अपने भक्तों के कष्टों को हर लेती हैं।

भजन का भावार्थ यह है कि माँ दुर्गा केवल एक देवी नहीं, बल्कि ममता की प्रतिमूर्ति हैं। वे पर्वत (त्रिकुटा) पर विराजमान होकर अपने भक्तों की अनकही प्रार्थनाओं को भी सुन लेती हैं। भक्त उनसे प्रार्थना करता है कि वह उसके भीतर भक्ति की ज्योति जला दें और उसे अपने चरणों में स्थान दें। यह समर्पण का भाव ही मोक्ष का मार्ग है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • शक्ति का प्रतीक: यह भजन माँ दुर्गा के अष्टभुजी स्वरूप के प्रति समर्पित है, जो साहस और विजय का प्रतीक है।
  • भक्ति भाव: इसमें शरणागति (Surrender) का भाव प्रमुख है, जो भक्त को अहंकार मुक्त होने की प्रेरणा देता है।
  • नवरात्रि का महत्व: नवरात्रि के नौ दिनों में इस भजन का श्रवण करने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • कष्ट निवारण: यह भजन भक्तों को मानसिक शांति और दुखों से लड़ने का आत्मबल प्रदान करता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को नवरात्रि के दौरान सुबह या शाम की पूजा के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे आप माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्वलित करके गा सकते हैं। यदि आप इसे सामूहिक सत्संग में गाते हैं, तो इसका प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएँ, ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना चाहिए। माँ की ममता पर भरोसा करना ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। जिस प्रकार माँ अपने भक्तों की अरजी बिन बोले सुन लेती हैं, उसी प्रकार हमें भी निस्वार्थ भाव से उनकी सेवा करनी चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द अर्थ
अष्ट भुजी आठ भुजाओं वाली (माँ दुर्गा का स्वरूप)
संहार विनाश करना (दुष्टों का)
अरजी प्रार्थना या विनती
ममता माँ का प्रेम और वात्सल्य

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम अष्ट भुजी अम्बे जगदम्बे
देवी माँ दुर्गा
गायक रुद्रकांत ठाकुर
भाषा हिंदी
भाव शरणागति एवं भक्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

अष्ट भुजी माँ दुर्गा शक्ति, साहस और सुरक्षा की प्रतीक हैं। उनकी पूजा से शत्रुओं पर विजय और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

हाँ, यह भजन किसी भी समय सुना जा सकता है, विशेषकर मंगलवार या शुक्रवार को, जो माँ दुर्गा के लिए समर्पित दिन हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री भक्ति परंपरा और देवी गीतों के संदर्भ में संकलित की गई है। भजन के बोल और भावार्थ को भक्ति साहित्य के मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

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यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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