Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

का सबसे हिट देवी गीत (Mori Maiya)

पढ़ें 2017 का सबसे हिट देवी गीत 2017 - Raja - घुमादी विंध्याचल राजा जी - Mori Maiya - Bhojpuri Devi Geet - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भा

2017 का सबसे हिट देवी गीत - राजा घुमादी विंध्याचल राजा जी - Mori Maiya - Bhojpuri Devi Geet

अपडेट किया गया: 2026 | श्रेणी: Devi Bhajan, Devi Geet | भाषा: भोजपुरी / हिंदी

भोजपुरी लोक संस्कृति और आद्य शक्ति माँ दुर्गा की आराधना का अनूठा संगम प्रस्तुत करता यह लोकप्रिय देवी गीत "घुमादी विंध्याचल राजा जी" शारदीय और वासंतिक नवरात्रि के पावन पर्वों पर भक्तों की जुबान पर रहता है। भोजपुरी भक्ति संगीत की परंपरा में विंध्यवासिनी माँ विंध्याचल की महिमा का गुणगान करने वाले गीतों का एक विशिष्ट स्थान है। इस गीत में एक नवविवाहिता पत्नी अपने पति से अपनी परम आराध्य माँ विंध्यवासिनी के दर्शन कराने और विंध्याचल धाम की यात्रा करवाने का सजीव और अत्यंत भावुक आग्रह करती है। यह केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि जीव की उस आर्त पुकार का प्रतीक है जो भवसागर से तरने के लिए आदि शक्ति माँ के चरणों में शरण पाना चाहता है। देवी भजन और गीतों की श्रृंखला में इस रचना ने अपनी सुमधुर धुन और मार्मिक शब्दों से लाखों भक्तों के हृदयों को स्पंदित किया है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मखड़ा (Refrain):

निमिया के डार मइया झूले ली झुमउवा,
झुलेली झुमउवा हो मइया झुलेली झुमउवा...
ऐ राजा जी, हमहू के लई चलू ना,
घुमादी विंध्याचल राजा जी...
दर्शन कराई मोर मइया के,
घुमादी विंध्याचल राजा जी।

पहला अंतरा:

सकल जग के पालनहारी, जगदम्बा भवानी हो,
दर्शन पाके धन्य हो जाईि प्रानी-प्रानी हो।
सुनाS ए राजा हमार अरजिया, न करीहूँ बहाना,
चलो दर्शन करे खातिर सजवले बानी बियाना।
मोरे अंगना में आ जइती, मोरी मइया रानी हो...
घुमादी विंध्याचल राजा जी।

दूसरा अंतरा:

त्रिकोण मन्दिरवा में बाड़ी बिराजेलु,
अष्टभुजा मइया के महिमा अपारेलु।
गंगा तट पर ब बइठल काली खोहिया,
जहाँ पावेला भगतिन मन के सोखिया।
अइसे धाम के दर्शन तू करा दी सुहानी हो...
घुमादी विंध्याचल राजा जी।

तीसरा अंतरा:

नवरत में भीड़ बाटे भारी नगरिया,
चली मिलके चढ़ाई मइया के चुनरिया।
नारियल चुनरी नारियल घरे से धइले बानी,
मइया के दरस बिनु जीवन हम मानी।
जल्दी से चलू ना, मानू हमार बानिया हो...
घुमादी विंध्याचल राजा जी।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस प्रसिद्ध भोजपुरी देवी गीत का भावार्थ अत्यंत गंभीर और पारिवारिक समर्पण से जुड़ा हुआ है। भारतीय संस्कृति, विशेषकर उत्तर भारत और उत्तर प्रदेश-बिहार के ग्रामीण एवं शहरी अंचलों में, नवरात्रि के दौरान कुलदेवी या शक्तिपीठों के दर्शन की अत्यंत प्रगाढ़ परंपरा रही है। गीत में नायिका अपने पति से अत्यंत अनुनय-विनय करते हुए कहती है कि हे प्राणनाथ! जिस प्रकार नीम की डाल पर माँ शीतला या दुर्गा झूला झूलती हैं और उनकी पावन कृपा संपूर्ण संसार पर बरसती है, उसी प्रकार मेरी भी हार्दिक अभिलाषा है कि आप मुझे विंध्याचल धाम ले चलें।

विंध्याचल वह पावन शक्तिपीठ है जहाँ महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती तीनों रूपों में माँ विंध्यवासिनी त्रिकोण पर्वत पर विराजमान हैं। नायिका कहती है कि संसार के सभी लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी करने माँ के दरबार में जा रहे हैं, इसलिए आप मेरे इस छोटे से निवेदन को टालें नहीं। गंगा तट पर स्थित काली खोह और अष्टभुजा मंदिर के दर्शन मात्र से मनुष्य के जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। यह गीत पति-पत्नी के पवित्र प्रेम के साथ-साथ ईश्वरीय चेतना के प्रति अगाध निष्ठा और समर्पण को भी रेखांकित करता है। पारंपरिक देवी गीतों के माध्यम से लोक जीवन की सरलता और भगवत्प्रेम का यह अद्भुत दर्शन प्राप्त होता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

पारिवारिक समन्वय व भक्ति

गीत में एक गृहस्थ महिला के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि सांसारिक उत्तरदायित्वों का निर्वाह करते हुए भी भगवती माँ की आराधना और तीर्थ यात्रा कैसे परिवार में सुख-शांति लाती है।

तीर्थाटन की लालसा

विंध्याचल शक्तिपीठ के दर्शन की तीव्र तड़प और व्याकुलता को इस गीत के हर एक शब्द में अत्यंत सजीवता के साथ पिरोया गया है, जो श्रोता के मन में भी भक्ति जगाता है।

लोक संस्कृति का प्रसार

भोजपुरी माटी की सुगंध और ठेठ लोक धुनों के माध्यम से सनातन धर्म के शक्ति-उपासना पर्व नवरात्रि के उल्लास को जन-जन तक पहुँचाना इस गीत का मुख्य उद्देश्य है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का विवरण विवरण / तथ्य
गीत का शीर्षक घुमादी विंध्याचल राजा जी (Raja - Ghumadi Vindhyachal Raja Ji)
एल्बम / संदर्भ Mori Maiya - Bhojpuri Devi Geet (2017 Hit)
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri Folk / Devotional)
मुख्य विषय विंध्याचल शक्तिपीठ दर्शन और माँ दुर्गा की महिमा
संगीत शैली लोक देवी गीत / पारंपरिक भोजपुरिया धुन
प्रासंगिकता नवरात्रि, चैत्र/शारदीय पर्व, देवी जागरण और सांस्कृतिक कार्यक्रम

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल अर्थ संदर्भ / भाव
निमिया के डार नीम का पेड़ माता दुर्गा का वासस्थान, जहाँ शीतला और देवी का निवास माना जाता है।
झुमउवा झूला / झूलना माँ के प्रसन्नता और उत्सव का प्रतीक, झूला झूलना।
विंध्याचल प्रसिद्ध शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर स्थित माँ विंध्यवासिनी का पवित्र धाम।
त्रिकोण मन्दिरवा त्रिकोण पहाड़ी विंध्याचल क्षेत्र जहाँ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती त्रिकोण रूप में हैं।
अष्टभुजा आठ भुजाओं वाली देवी विंध्याचल पर्वत पर स्थित माँ अष्टभुजी देवी का पावन मंदिर।
नवरत नवरात्रि वर्ष में आने वाले दो प्रमुख नौ दिनों के पावन व्रत और उत्सव।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सनातन धर्म में शक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। मार्कण्डेय पुराण एवं दुर्गा सप्तशती के अनुसार, आदि शक्ति जगदम्बा ही इस ब्रह्मांड की संचालिका हैं। भोजपुरी अंचल के लोकगीतों में देवी को केवल एक दूरस्थ शक्ति के रूप में नहीं, बल्कि अपने परिवार के एक स्नेही सदस्य, बेटी, बहन और माता के रूप में देखा जाता है। जब एक भक्त अपनी साधारण घरेलू भाषा में माँ से संवाद करता है, तो भक्ति अत्यंत सहज और जीवंत हो जाती है।

विंध्याचल धाम केवल एक भौगोलिक तीर्थ स्थल नहीं है, बल्कि यह तांत्रिक और वैदिक साधना का प्रमुख केंद्र है। माँ विंध्यवासिनी के दर्शन से साधक के जीवन के सभी प्रकार के संताप और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। इस प्रकार के लोकगीत नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, धार्मिक धरोहर और पारंपरिक तीर्थों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे भजन सुनने से मन में दिव्यता और सकारात्मकता का संचार होता है। अधिक जानकारी के लिए आप हमारे अन्य देवी भजनों और स्तोत्रों का अध्ययन कर सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • पारिवारिक सामंजस्य: जीवनसाथी के साथ मिलकर धार्मिक और आध्यात्मिक यात्राएं करना पारिवारिक प्रेम और सद्भाव को मजबूत करता है।
  • नियमित भगवत्स्मरण: व्यस्त जीवनशैली के बीच भी देवी-देवताओं के दर्शन और पर्वों के उल्लास के लिए समय निकालना आवश्यक है।
  • शरणागति का भाव: माँ के दरबार में जाने की तीव्र उत्कंठा यह सिखाती है कि भौतिकता से ऊपर उठकर ईश्वरीय शरण में जाने से आत्मिक शांति मिलती है।
  • लोक संस्कृति का संरक्षण: अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय लोकगीतों के माध्यम से अपनी संस्कृति को जीवित रखना हमारा सांस्कृतिक कर्तव्य है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह देवी गीत विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर अत्यंत चाव से सुना और गाया जाता है:

शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि

वर्ष के दोनों प्रमुख नवरात्रि पर्वों के दौरान जब माता के पंडाल सजते हैं और घरों में घटस्थापना होती है, तब सुबह-शाम इन गीतों का गान होता है।

देवी जागरण एवं चौकी

पारिवारिक अनुष्ठानों, मुंडन संस्कार, विवाह के उपरांत देवी पूजन या माता के जागरण के समय महिला मंडली द्वारा इन लोकगीतों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

विशेषता विवरण
गीत का नाम घुमादी विंध्याचल राजा जी
गायक / कलाकार लोक कलाकार / क्षेत्रीय भोजपुरी गायक
शैली भोजपुरी देवी लोकगीत / भजन
भाषा भोजपुरी
प्रमुख आराध्य माँ विंध्यवासिनी (दुर्गा जी)
विशेष महत्व विंध्याचल शक्तिपीठ यात्रा की प्रेरणा और पारिवारिक भक्ति

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह गीत एक पत्नी द्वारा अपने पति से उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ विंध्याचल धाम ले चलने और माँ विंध्यवासिनी के दर्शन कराने के स्नेहिल आग्रह पर आधारित है।

विंध्याचल भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। यहाँ माँ विंध्यवासिनी त्रिकोण पर्वत पर विराजमान हैं। ऐसा माना जाता है कि यहाँ महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों शक्तियों का संगम स्थल है।

ये गीत मुख्य रूप से शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों के दौरान, घरों में होने वाली पूजा-पाठ और देवी जागरण के समय अत्यंत चाव से सुने जाते हैं।

'निमिया के डार' का अर्थ नीम की डाल है। लोक परंपरा में नीम के पेड़ को शीतला माता और दुर्गा जी का निवास स्थान माना जाता है, इसलिए देवी गीतों में इसका बार-बार उल्लेख होता है।

हाँ, यह एक अत्यंत स्वच्छ और पारंपरिक लोक गीत है जिसे महिलाएं और परिवार के सभी सदस्य मिलकर किसी भी मांगलिक या देवी पूजन के अवसर पर गा सकते हैं।

विंध्याचल में मुख्य रूप से माँ विंध्यवासिनी मंदिर, अष्टभुजा मंदिर और काली खोह मंदिर प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं, जिनकी परिक्रमा त्रिकोण यात्रा के रूप में की जाती है।

भोजपुरी देवी गीत कठिन पौराणिक कथाओं और श्लोकों को सरल लोक भाषा में आम जनमानस तक पहुँचाते हैं, जिससे हर वर्ग के लोग भक्ति भाव से जुड़ पाते हैं।

इन गीतों के बोल लिखकर, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करके और नई पीढ़ी को पारिवारिक अनुष्ठानों में इन्हें गाने के लिए प्रेरित करके इनका संरक्षण किया जा सकता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह आलेख लोक संस्कृति, क्षेत्रीय संगीत परंपरा और सनातन शक्ति उपासना के पारंपरिक आयामों को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस गीत के माध्यम से भोजपुरी अंचल की लोक-आस्था और विंध्याचल धाम की महिमा का सुंदर चित्रण किया गया है। किसी भी प्रकार की त्रुटि या सुझाव के लिए आप संपर्क कर सकते हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भारतीय लोक संगीत और भोजपुरी संस्कृति परंपरा का अध्ययन।
  • विंध्याचल शक्तिपीठ इतिहास एवं महात्म्य ग्रंथ।
  • देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)।
  • पारंपरिक लोकगीत संग्रह एवं क्षेत्रीय संकीर्तन पुस्तिकाएं।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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