छठीपूजा गीत : मातृत्व, वात्सल्य और लोक आस्था का पावन महागीत
सनातन संस्कृति और लोक आस्था के महापर्व छठी पूजा (Chhath Puja) के पावन अवसर पर गाए जाने वाले गीतों में सूर्योपासना, प्रकृति प्रेम और मातृत्व की अद्भुत महिमा देखने को मिलती है। "गोदी भरिए छठी मईया - छठीपूजा गीत" केवल एक पारंपरिक लोकगीत नहीं है, बल्कि यह उन समस्त संतानों की अंतरात्मा की पुकार है जो छठी मैया से अपनी सूनी गोद भरने और वंश वृद्धि की मंगलकामना करते हैं। पूर्वांचल, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में गूंजने वाला यह भजन लोक जीवन के उस गाढ़े विश्वास को दर्शाता है, जिसमें छठी मईया को साक्षात माता के रूप में स्वीकार किया गया है जो हर दुःख, संताप और निसंतानता को दूर कर घर-आंगन को किलकारियों से भर देती हैं।
इस विस्तृत आलेख में हम छठी मईया के इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, इसके मार्मिक अर्थ, पूजा की विधि, शास्त्रीय एवं लोक परंपरा में इसके महत्व तथा इससे जुड़े विभिन्न आध्यात्मिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं। साथ ही, सूर्य भगवान और छठी मैया की कृपा प्राप्ति के उपायों पर भी प्रकाश डालेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
(स्थायी / मुखड़ा)
गोदी भरिए छठी मईया, भरिए हमरो कोखिया,
अरघ के बेर भइल, दर्शन दS मोर मईया!
उगS हे सुरुज देव, भइले बिहानवा,
तोहरे चरनिया में झुके सगरो जहानवा।
(पहला अंतरा)
घाट पर सजले बा कउना के पसारिया,
दउरा में सजले बा ठेकुआ कचवरिया!
सुगवा के बेटी मोर डोले मंडपिया,
आई ना मईया मोरे सूने भवनिया!
(दूसरा अंतरा)
बरत तोहार हम तs नेमन से कइली,
भूखे-प्यासे रह के जगदम्बे मनाईली!
सुन लS पुकार मोरी हे दीनानाथ,
अब ना छोड़ब हम तs तोहरे इ हाथ!
(अंतिम चरण / समापन)
छठी मईया की महिमा अपार बा,
जेकर दर पे झूले ला ललना हजार बा!
भक्तन के काज सवारेली मईया,
सबके गोदी आके भरेली मईया!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह पारंपरिक छठी गीत एक निस्संतान माता या अपने परिवार के कल्याण की कामना करने वाली गृहिणी की करुण और आर्त पुकार को व्यक्त करता है। गीत के मुखड़े में भक्त छठी मईया से प्रार्थना करता है कि हे मैया! मेरी सूनी गोद भर दो, अर्घ्य देने का पावन समय हो चुका है, अब और विलंब मत करो और अपने भक्तों को साक्षात दर्शन दो। साथ ही, जगत के पालनहार सूर्यदेव से यह विनती की जाती है कि हे सूर्य देव! अब प्रातःकाल हो चुका है, आपके चरणों में सारा संसार नतमस्तक होता है, आप अपनी किरणों से हमारे जीवन को आलोकित करें।
पहले अंतरे में छठी घाट के अलौकिक सौंदर्य का वर्णन है। बांस के सूप और दउरा में रखे गए पवित्र ठेकुआ, कसार, फल और गन्ने की सजी हुई झांकी का सुंदर चित्रण किया गया है। भक्त मैया से आर्त स्वर में निवेदन करता है कि हे माता! तुम्हारे आगमन से यह सूना भवन भी उत्सवमय हो जाए।
दूसरे और अंतिम अंतरे में व्रत की कठोरता और साधक की निष्ठा का वर्णन है। व्रती कहता है कि मैंने अत्यंत नियम-संयम और उपवास के साथ यह कठिन व्रत पूरा किया है। हे दीनानाथ! अब मेरी पुकार सुन लीजिए, मैं आपकी शरण में हूं। छठी मैया की महिमा अपरंपार है, उनके दरबार में आने वाले किसी भी भक्त की झोली खाली नहीं रहती। मैया सभी की सूनी गोद को भर देती हैं और उनके जीवन में खुशियों का संचार करती हैं।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
छठी पूजा के लोकगीतों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें शास्त्रीय जटिलताओं के स्थान पर सहज लोक संवेदना, मार्मिक पुकार और मातृवत प्रेम झलकता है। 'गोदी भरिए छठी मईया' गीत मातृत्व की उस लालसा को वाणी देता है जो सनातन संस्कृति में स्त्री के जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव माना गया है।
- लोक संस्कृति का जीवंत दस्तावेज: यह गीत पूर्वांचल की संस्कृति, लोक धुनों और संस्कारों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
- कठिन व्रतों की प्रेरणा: यह गीत व्रतियों को असीम ऊर्जा और प्रेरणा प्रदान करता है ताकि वे 36 घंटे का निर्जला व्रत बिना किसी कठिनाई के पूर्ण कर सकें।
- समर्पण और विश्वास: भजन यह सिखाता है कि पूर्ण निष्ठा और शरणागति से की गई प्रार्थना कभी निष्फल नहीं होती।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
यह पारंपरिक गीत विशेष रूप से कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि के अवसर पर गाया जाता है। जब महिलाएं और पुरुष सूप-दउरा लेकर नदी या तालाब के घाट की ओर प्रस्थान करते हैं, तब यह गीत सामूहिक रूप से स्वर में गाया जाता है। इसके अतिरिक्त:
- संध्या अर्घ्य (नहाय-खाय से लेकर खरना और मुख्य पर्व) के दौरान महिलाएं इसे बैठकर या घाट पर गाती हैं।
- प्रातःकाल सूर्योदय के समय जब अर्घ्य देने की बेला होती है, तब इस भजन के माध्यम से सूर्य भगवान का आह्वान किया जाता है।
- घरों में जब छठी माई के गीत और सोहर गाए जाते हैं, तब भी इस भजन को विशेष स्थान दिया जाता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन के केंद्र में प्रत्यक्ष देवता भगवान सूर्य (सूर्यनारायण) और प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी षष्ठी माता (छठी मईया) हैं। सनातन धर्म में छठी मईया को भगवान सूर्य की बहन या प्रकृति का मातृ स्वरूप माना गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, षष्ठी देवी ब्रह्माजी की मानस पुत्री और बच्चों की रक्षा करने वाली तथा आयु, स्वास्थ्य व संतान प्रदान करने वाली देवी हैं।
विस्तृत जानकारी के लिए आप हमारे अन्य लेख जैसे छठी पूजा व्रत कथा और सूर्य देव स्तोत्र का अध्ययन कर सकते हैं।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
छठी पूजा के अधिकांश पारंपरिक गीत लोककंठ की उपज हैं। इन्हें किसी एक विशिष्ट रचनाकार नेबद्ध नहीं किया है, बल्कि यह पीढ़ियों से मौखिक परंपरा (Shruti Parampara) के माध्यम से एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक प्रवाहित होते रहे हैं। माताओं और बुजुर्ग महिलाओं द्वारा संजोए गए ये गीत समाज की सामूहिक चेतना का हिस्सा बन चुके हैं। समय के साथ आधुनिक गायकों और लोक कलाकारों ने इन्हें स्टूडियो संस्करणों में ढालकर वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया है।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
इस गीत की भाषा भोजपुरी, मैथिली और अंगिका की लोक बोलियों का सुंदर मिश्रण है। इसमें ठेठ ग्रामीण शब्दावली जैसे 'कउना', 'दउरा', 'ठेकुआ', 'सुरुज देव' और 'कोखिया' का प्रयोग हुआ है, जो इसकी मिठास और प्रामाणिकता को और अधिक बढ़ा देता है। इसकी काव्य शैली सरल, संगीतमय और गेय है, जिसे बिना किसी कठिन रियाज के कोई भी महिला या भक्त आसानी से गुनगुना सकता है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन केवल संतान प्राप्ति की कामना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर अभाव में ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने की प्रेरणा देता है। इसका मुख्य संदेश यह है कि जब मनुष्य अपनी सभी ओर से निराश हो जाता है, तब प्रकृति और छठी मईया की शरण में जाने से उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
- कठिन परिस्थितियों में धैर्य: व्रत के नियम यह सिखाते हैं कि किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संयम और अनुशासन आवश्यक है।
- प्रकृति के प्रति कृतज्ञता: यह पर्व सूर्य, जल, वायु और पृथ्वी के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| कोखिया | गोद / संतान प्राप्ति का स्थान | वंश वृद्धि और संतान की कामना हेतु |
| अरघ (अर्घ्य) | सूर्य देव को जल अर्पित करना | छठी पूजा का मुख्य अनुष्ठान |
| दउरा | बांस से बनी बड़ी टोकरी | पूजा सामग्री रखने का पारंपरिक पात्र |
| ठेकुआ | गुड़ और आटे से बनी पवित्र मिठाई | छठी मईया का प्रमुख प्रसाद |
| सुगवा | तोता (पवित्र पक्षी प्रतीक) | लोकगीतों में शुभता का प्रतीक |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"गोदी भरिए छठी मईया, भरिए हमरो कोखिया..."
इस पंक्ति में व्रती महिला अपनी सुनी गोद भरने की प्रार्थना कर रही है। मातृत्व की भावना को समर्पित यह पुकार अत्यंत भावुक और पवित्र है।
"उगS हे सुरुज देव, भइले बिहानवा..."
यहाँ सूर्य देव को प्रातःकाल की बेला में जागने और अपनी दिव्य किरणों से संसार को रोशन करने का आह्वान किया जा रहा है। सूर्य ही जीवन के ऊर्जा स्त्रोत हैं।
"घाट पर सजले बा कउना के पसारिया..."
नदी के घाट पर सजे हुए पूजा पंडाल और सूप-दउरे की सुंदरता का वर्णन करते हुए व्रती कह रहा है कि हमने पूरी श्रद्धा से सारी व्यवस्था की है, हे मैया अब आप भी पधारिए।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
छठी पूजा और सूर्योपासना के समय निम्नलिखित वैदिक मंत्र का स्मरण करना अत्यंत फलदायी माना गया है:
ॐ सूर्याय नमः शिवाय नमस्तुभ्यं भास्कर নমঃ अस्तु ते।
इसके साथ ही भगवान सूर्य की स्तुति के लिए आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना भी श्रेष्ठकर है।
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | गोदी भरिए छठी मईया - छठीपूजा गीत |
|---|---|
| अधिष्ठात्री देवी | षष्ठी मईया एवं भगवान सूर्य |
| रचना शैली | पारंपरिक लोकगीत (लोक कंठ) |
| भाषा | भोजपुरी / लोक भाषा |
| मुख्य थीम | मातृत्व, संतान प्राप्ति, सूर्योपासना एवं प्रकृति प्रेम |
| प्रमुख भाव | अनन्य भक्ति, समर्पण और आर्त पुकार |
| उपयुक्त अवसर | छठी पूजा महापर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. छठी मईया कौन हैं और इनकी पूजा का क्या महत्व है?
उत्तर: छठी मईया को प्रकृति की देवी और बच्चों की रक्षा करने वाली तथा आयु-स्वास्थ्य व संतान प्रदान करने वाली माता माना जाता है। इनकी पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि और संतान की दीर्घायु का वरदान मिलता है।
Q2. "गोदी भरिए छठी मईया" गीत मुख्य रूप से कब गाया जाता है?
उत्तर: यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के छठ पर्व के दौरान, नहाय-खाय से लेकर खरना और घाट पर अर्घ्य देते समय महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से गाया जाता है।
Q3. इस भजन का मुख्य आध्यात्मिक संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि पूर्ण निष्ठा, व्रत के कठोर नियमों और सच्चे प्रेम के साथ छठी मईया और सूर्यदेव की आराधना करने से निसंतान दंपत्तियों को भी संतान सुख की प्राप्ति होती है और समस्त कष्ट दूर होते हैं।
Q4. छठी पूजा में सूर्य देव की पूजा का क्या कारण है?
उत्तर: सूर्य देव ऊर्जा, स्वास्थ्य, प्रकाश और आयु के प्रत्यक्ष देवता हैं। प्रकृति के संवर्धन और जीवन के अस्तित्व के लिए सूर्य की उपासना को सनातन धर्म में सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
Q5. क्या इस गीत को पुरुष भी गा सकते हैं?
उत्तर: यद्यपि छठ पर्व के अधिकांश पारंपरिक गीत महिलाओं द्वारा गाए जाते हैं, किंतु भक्ति भाव से परिपूर्ण इस गीत को कोई भी भक्त छठी मईया के स्मरण हेतु गा सकता है।
Q6. छठ पूजा में ठेकुआ का क्या महत्व है?
उत्तर: ठेकुआ छठ पर्व का सबसे प्रमुख प्रसाद है जिसे शुद्ध घी, गुड़ और आटे से अत्यंत पवित्रता के साथ छठी मईया को भोग लगाने के लिए तैयार किया जाता है।
Q7. छठ व्रत कितने दिनों का होता है?
उत्तर: छठ का महापर्व कुल चार दिनों का होता है, जो नहाय-खाय से शुरू होकर खरना, संध्या अर्घ्य और अंत में ऊषा अर्घ्य (पारंपरिक पारण) के साथ संपन्न होता है।
Q8. इस भजन को आसानी से कैसे सीखें?
उत्तर: इस भजन की धुन बहुत सरल और लोक-सुलभ है। इसके बोलों को पढ़कर और पारंपरिक यूट्यूब या ऑडियो संस्करणों को सुनकर इसे आसानी से सीखा जा सकता है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह आलेख छठी पूजा की समृद्ध लोक परंपराओं, सांस्कृतिक धरोहर और आध्यात्मिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें प्रस्तुत बोल, अर्थ और विवरण विभिन्न प्रामाणिक लोक स्रोतों तथा पारंपरिक व्रतियों के अनुभवों पर आधारित हैं।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- सनातन लोक साहित्य एवं पूर्वांचल की पारंपरिक गीत परंपरा।
- स्कंद पुराण एवं भविष्य पुराण में वर्णित सूर्योपासना एवं षष्ठी व्रत प्रसंग।
- पारंपरिक व्रतियों और लोक गायकों द्वारा संकलित सामग्री।
संबंधित भजन एवं लेख
छठी पूजा व्रत कथा और महत्व
व्रत की पौराणिक कथा और संपूर्ण अनुष्ठान विधि की विस्तृत जानकारी।
सूर्य देव स्तोत्र एवं मंत्र
भगवान सूर्य की कृपा प्राप्ति हेतु शक्तिशाली वैदिक मंत्र और स्तोत्र।
आदित्य हृदय स्तोत्र पाठ
श्रीराम द्वारा पूजित अद्भुत स्तोत्र जो विजय और आरोग्यता प्रदान करता है।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें