छठी मईया भर दिहले गोदिया: असीम अनुकंपा और संतान प्राप्ति का अत्यंत भावुक भोजपुरी छठ गीत
प्रकाशित तिथि: 25 अक्टूबर 2026 | अध्ययन एवं आलेख: भक्तिलोक संपादकीय टीम
छठ पूजा भारतीय सनातन संस्कृति और विशेष रूप से पूर्वांचल, बिहार, झारखंड तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश की लोक आत्मा का सबसे पवित्र और जीवंत महापर्व है। चार दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान में सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। इस पावन अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक और आधुनिक भोजपुरी गीत इस उत्सव के प्राण हैं। 'छठी मईया भर दिहले गोदिया' एक ऐसा ही अत्यंत लोकप्रिय, कर्णप्रिय और भावुक कर देने वाला भोजपुरी छठ गीत है, जिसे भोजपुरी संगीत जगत की सुप्रसिद्ध गायिका अंतरा सिंह प्रियंका और अन्य प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी मधुर वाणी से सजाया है। यह गीत न केवल छठी मैया की असीम अनुकंपा, महिमा और संतान प्राप्ति की मन्नत पूरी होने पर व्यक्त की जाने वाली गहरी कृतज्ञता को दर्शाता है, बल्कि यह एक मां के हृदय की असीम प्रसन्नता का सजीव चित्रण भी करता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय गीत के संपूर्ण बोल, उसका सरल हिंदी अर्थ, आध्यात्मिक महत्व, लोक परंपराओं और छठ पर्व की महिमा का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
॥ छठी मईया भर दिहले गोदिया ॥
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए।
बहंगी लचकत जाए...
होई ना बलम जी कहरिया, बहंगी घाट पहुंचाए॥
छठी मईया भर दिहले गोदिया, दुअरिया बाजे बाजैया हो。
बाजे बाजैया हो...
करब हम छठिया बरतिया, मईया के महिमा अपार हो॥
सूप सजाईब हम तामा के, फलवा से देब हम भराई हो。
फलवा से देब हम भराई हो...
अरघ देब हम सुरुज देव के, मईया के चरन धूरि पाई हो॥
झुमकी झुमकिहा ललनवा खेले, दियना बारे रे सखिया।
दियना बारे रे सखिया...
पूरा भइल मन के कामना, धन्य भइल मोर तपस्या॥
अंतरा सिंह प्रियंका के सुरवा, गूंजे घटवे के तीर हो。
घाटवे के तीर हो...
भक्ति भाव से झूमे संसार, छठी मईया के महिमा अपार हो॥
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह गीत लोक जीवन की उन गहराइयों से जुड़ा है जहाँ निःसंतान दंपत्ति या मन्नत मांगने वाले भक्त छठी मैया की शरण में जाते हैं और उनकी कृपा से जब घर में संतान सुख की प्राप्ति होती है, तो उनका आनंद शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता।
गीत की पंक्तियों में बांस की बहंगी का वर्णन है, जिसे सजा-धजाकर नदी के घाट तक ले जाया जाता है। बहंगी ढोने वाले जीवनसाथी से आग्रह किया जाता है कि वे इसे पूरी पवित्रता और संभाल कर घाट तक पहुंचाएं। इसके बाद मुख्य भाव प्रकट होता है कि छठी मैया ने सूनी गोद भर दी है, जिससे घर के द्वार पर उत्सव का माहौल है, बधाईयां बज रही हैं और मंगल गीत गाए जा रहे हैं। भक्त कृतज्ञता से भर-कर कहता है कि वह पूरी निष्ठा के साथ छठ का व्रत और अनुष्ठान संपन्न करेगा क्योंकि मैया की महिमा अपरंपार है। तांबे के सूप को तरह-तरह के मौसमी फलों और ठेकुआ से सजाकर संध्या और सुबह के अर्घ्य देने का सजीव चित्रण इस गीत में किया गया है। अंत में, घर में किलकारी गूंजने और मन की कामना पूरी होने पर भक्त अपनी तपस्या को धन्य मानता है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत की केंद्रीय भावना 'कृतज्ञता' (Gratitude) और 'अटूट विश्वास' है। छठी माता को प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी और बच्चों की रक्षक (षष्ठी देवी) के रूप में पूजा जाता है। यह गीत संदेश देता है कि जो भी भक्त सच्चे मन, शुचिता और कठिन नियमों के साथ छठ महापर्व का अनुष्ठान करता है, छठी मैया उसकी सूनी गोद अवश्य भरती हैं। इसमें पारिवारिक सहयोग, पति-पत्नी का समर्पण और समाज के सामूहिक उल्लास का अद्भुत दर्शन होता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण | तथ्य / जानकारी |
|---|---|
| गीत का शीर्षक | छठी मईया भर दिहले गोदिया |
| गायिका | अंतरा सिंह प्रियंका एवं अन्य सहयोगी कलाकार |
| संगीत शैली | पारंपरिक लोकधुन मिश्रિત आधुनिक भोजपुरी छठ गीत |
| भाषा | भोजपुरी (लोक भाषा) |
| विषय / थीम | संतान प्राप्ति, छठ व्रत की महिमा, कृतज्ञता एवं लोक आस्था |
| संबंधित पर्व | कार्तिक एवं चैती छठ महापर्व |
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द / पद | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| बहंगिया | बांस की डंडी जिसमें दोनों सिरों पर टोकरी या सूप बांधकर कंधे पर उठाया जाता है | पूजा सामग्री घाट तक ले जाने का साधन |
| कहरिया | बहंगी ढोने या ले जाने वाला व्यक्ति / जीवनसाथी | परिवार का पुरुष सदस्य जो सेवा में सहयोग करता है |
| बाजैया | बधाई गीत, ढोल-नगाड़े या शहनाई की आवाज | खुशी का उत्सव |
| अरघ | अर्घ्य (सूर्य देव को जल और दूध अर्पित करना) | छठ पूजा का मुख्य अनुष्ठान |
| धूरि | चरणों की धूल / आशीर्वाद | मैया के प्रति पूर्ण समर्पण |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
भोजपुरी छठ गीत केवल मनोरंजन के साधन नहीं हैं, बल्कि वे वेदों और पुराणों में वर्णित प्रकृति पूजा की परंपरा को जीवित रखते हैं। छठी मैया भगवान सूर्य की बहन और प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी हैं। यह गीत इस बात का प्रतीक है कि सनातन धर्म में हर मनोकामना की पूर्ति का मार्ग साधना, व्रत, संयम और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने से होकर गुजरता है। इस गीत को सुनकर देश-विदेश में रह रहे पूर्वांचल के प्रवासियों को अपनी संस्कृति, मातृभूमि और मां के आंचल की याद आ जाती है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत विशेष रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले छठ महापर्व के दौरान—विशेषकर नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देते समय—घरों, गलियों और घाटों पर गूंजता है। इसके अलावा, जिन घरों में मन्नत पूरी होने पर छठ व्रत का अनुष्ठान पहली बार शुरू किया जाता है, वहां इस गीत को बजाना और गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। आप भोजपुरी देवी गीत और नवीनतम भक्ति गीतों के संग्रह में ऐसे अनगिनत पारंपरिक गीतों का आनंद ले सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और धार्मिक मान्यताओं के गहन अध्ययन के आधार पर संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को भोजपुरी लोक संगीत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पक्षों से परिचित कराना है। किसी भी प्रकार की पारंपरिक त्रुटि या सुझाव के लिए आप हमारी संपादकीय टीम से संपर्क कर सकते हैं।
स्रोत एवं संदर्भ
- पूर्वांचल की लोक गाथाएं एवं छठ पर्व परंपराएं
- भोजपुरी लोक संगीत एवं संस्कृति साहित्य
- पारंपरिक लोकगीत संग्रह एवं मौखिक परंपराएं
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