Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

तूने मुरली काहे बजाई (Shri Krishna By Hari Kishan Sharma)

पढ़ें तूने मुरली काहे बजाई | Tune Murli Kaahe Bajai | Shri Krishna Bhajan by Hari Kishan Sharma ( Full HD) - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी

भगवान श्री कृष्ण की मुरली केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि वह दिव्य ध्वनि है जो जीवात्मा को परमात्मा की ओर खींचती है। "तूने मुरली काहे बजाई" (Tune Murli Kaahe Bajai) एक अत्यंत भावपूर्ण और लोकप्रिय कृष्ण भजन है, जिसे श्री हरि किशन शर्मा जी ने अपनी मधुर आवाज से जीवंत किया है। यह भजन 'विरह' और 'उलाहना' के भाव पर आधारित है, जहाँ एक भक्त या गोपी कान्हा से प्रश्न करती है कि उन्होंने वह मधुर तान क्यों छेड़ी, जिसने सुध-बुध भुला दी। भक्ति साहित्य में इस भाव को 'प्रेम-लक्षणा भक्ति' कहा गया है, जहाँ भक्त भगवान से इतना प्रेम करता है कि वह उनके प्रति मीठा क्रोध और शिकायत भी व्यक्त करता है। यह लेख इस भजन के गहरे आध्यात्मिक अर्थ, इसकी काव्य शैली और श्री कृष्ण की मुरली के दार्शनिक रहस्य को उजागर करने के लिए समर्पित है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

तूने मुरली काहे बजाई

(स्वर: हरि किशन शर्मा)

(मुखड़ा)
तूने मुरली काहे बजाई, ओ मुरली वाले श्याम।
मेरी सुध-बुध तूने भुलाई, ओ मुरली वाले श्याम॥
तूने मुरली काहे बजाई...

(अंतरा - 1)
मैं तो सोई थी अपने भवन में,
तूने सोती हुई जगाई, ओ मुरली वाले श्याम।
तूने मुरली काहे बजाई, ओ मुरली वाले श्याम॥

(अंतरा - 2)
मैं तो गई थी जमुना तट पर,
तूने गागर मोरी गिराई, ओ मुरली वाले श्याम।
तूने मुरली काहे बजाई, ओ मुरली वाले श्याम॥

(अंतरा - 3)
लोक लाज और कुल की मर्यादा,
सब तज के मैं दौड़ी आई, ओ मुरली वाले श्याम।
तूने मुरली काहे बजाई, ओ मुरली वाले श्याम॥

(अंतरा - 4)
'हरि किशन' अब शरण तुम्हारी,
अब राखो मोरी सचाई, ओ मुरली वाले श्याम।
तूने मुरली काहे बजाई, ओ मुरली वाले श्याम॥
मेरी सुध-बुध तूने भुलाई, ओ मुरली वाले श्याम॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह भजन 'मधुरा भक्ति' का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें भक्त का भगवान के प्रति जो समर्पण है, वह सांसारिक संबंधों से ऊपर उठकर है। यहाँ 'मुरली' उस 'अनाहत नाद' का प्रतीक है जो योगी अपने ध्यान में सुनते हैं, और जब वह ध्वनि सुनाई देती है, तो संसार की सारी सुध-बुध खो जाती है।

भावार्थ: भजन की शुरुआत में गोपी (भक्त) कहती है कि हे श्याम! आपने यह मुरली क्यों बजाई? आपकी इस मुरली की तान ने मेरे मन को विचलित कर दिया है और मेरी चेतना (सुध-बुध) को हर लिया है। यहाँ 'भवन में सोना' अज्ञानता की नींद का प्रतीक है। जब भगवान की कृपा रूपी मुरली बजती है, तो जीव अज्ञान की निद्रा से जाग जाता है। जमुना तट पर गागर का गिरना इस बात का संकेत है कि जब ईश्वर का प्रेम मिलता है, तो सांसारिक कर्मों का बोझ (गागर) स्वतः ही गिर जाता है।

भजन के अगले भाग में 'लोक-लाज' और 'कुल की मर्यादा' को त्यागने की बात कही गई है। यह भक्ति का वह उच्चतम स्तर है जहाँ भक्त को समाज की चिंता नहीं रहती, उसे केवल अपने आराध्य की पुकार सुनाई देती है। अंत में, कवि हरि किशन जी पूर्ण शरणागति का भाव व्यक्त करते हुए कहते हैं कि अब मैं आपकी शरण में हूँ, मेरी लाज और मेरी भक्ति की सच्चाई अब आपके ही हाथों में है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • मुरली का रहस्य: श्री कृष्ण की मुरली को 'वेणु' कहा जाता है। यह खोखली होती है, जो यह सिखाती है कि यदि मनुष्य अपने भीतर से अहंकार को निकाल दे (खोखला हो जाए), तो भगवान स्वयं उसमें अपनी सांसें भरकर मधुर संगीत पैदा करेंगे।
  • प्रेम और उलाहना: इस भजन में 'उलाहना' (शिकायत) का भाव है, जो केवल अत्यंत निकट के संबंधों में ही संभव है। यह भक्त और भगवान के बीच की आत्मीयता को दर्शाता है।
  • सांसारिक विरक्ति: भजन स्पष्ट करता है कि ईश्वर की पुकार सुनने के बाद संसार के सारे बंधन और मर्यादाएं गौण हो जाती हैं।
  • हरि किशन शर्मा की गायकी: उनकी सरल और भावपूर्ण गायकी ने इस पारंपरिक भाव को आधुनिक श्रोताओं तक पहुँचाया है, जिससे यह भजन घर-घर में लोकप्रिय हुआ।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस भजन को गाने या सुनने के लिए कोई कठोर नियम नहीं हैं, क्योंकि भक्ति हृदय का विषय है। फिर भी, निम्नलिखित समय और विधियाँ विशेष फलदायी मानी जाती हैं:

  • संध्या काल: शाम के समय जब मंदिर में दीप प्रज्वलित होते हैं, तब इस भजन का श्रवण मन को शांति प्रदान करता है।
  • सत्संग और कीर्तन: सामूहिक रूप से इस भजन को गाने से वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • एकादशी और जन्माष्टमी: भगवान कृष्ण के विशेष दिनों पर इस भजन का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • ध्यान की अवस्था: शांत चित्त होकर इस भजन को सुनने से मानसिक तनाव कम होता है और भगवान के प्रति अनुराग बढ़ता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन साक्षात् भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। श्री कृष्ण को 'मुरलीधर' कहा जाता है क्योंकि वे अपनी मुरली से समस्त चराचर जगत को मोहित कर लेते हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण के 'वेणु गीत' प्रसंग में मुरली की महिमा का विस्तार से वर्णन है।

इस भजन के गायक और रचनाकार के रूप में हरि किशन शर्मा जी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से ब्रज की भक्ति परंपरा को जीवित रखा है। उनके भजनों में सरलता और समर्पण का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल हिंदी है जिसमें ब्रजभाषा का पुट (जैसे- 'काहे', 'मोरी', 'तज के') समाहित है। यह शैली 'पद' परंपरा का हिस्सा है, जो सूरदास और मीराबाई जैसे संतों द्वारा स्थापित की गई थी।

काव्य सौंदर्य:

  • अनुप्रास अलंकार: 'मुरली वाले श्याम' में शब्दों की आवृत्ति से संगीतात्मकता उत्पन्न हुई है।
  • रूपक: मुरली की तान यहाँ ईश्वर की कृपा और पुकार का रूपक है।
  • भाव: इसमें 'विप्रलंभ श्रृंगार' और 'शांत रस' का मिश्रण है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द/वाक्यांश सरल अर्थ संदर्भ/महत्व
मुरली बांसुरी भगवान कृष्ण का प्रिय वाद्य, दिव्य नाद का प्रतीक।
सुध-बुध होश-हवास / चेतना संसार का ज्ञान भूलकर ईश्वर में लीन होना।
भवन घर / अंतर्मन यहाँ अज्ञानता की अवस्था को दर्शाया गया है।
जमुना तट यमुना नदी का किनारा कृष्ण की लीलाओं का मुख्य केंद्र।
लोक लाज सामाजिक शर्म भक्ति मार्ग में आने वाली सामाजिक बाधाएं।
तज के त्याग कर पूर्ण वैराग्य और समर्पण का भाव।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

1. तूने मुरली काहे बजाई, ओ मुरली वाले श्याम: भक्त पूछता है कि हे कृष्ण, आपने वह आकर्षण क्यों पैदा किया? आपकी मुरली ने मुझे अपनी ओर खींच लिया है।

2. मैं तो सोई थी अपने भवन में, तूने सोती हुई जगाई: मैं संसार की मोह-माया में सोई हुई थी, लेकिन आपकी कृपा ने मुझे सत्य के प्रति जागृत कर दिया।

3. मैं तो गई थी जमुना तट पर, तूने गागर मोरी गिराई: मैं अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थी, लेकिन आपने उन कार्यों के प्रति मेरी आसक्ति को समाप्त कर दिया।

4. लोक लाज और कुल की मर्यादा, सब तज के मैं दौड़ी आई: जब आपकी पुकार सुनी, तो समाज क्या कहेगा, इसकी चिंता छोड़ दी और आपकी ओर खिंची चली आई।

5. 'हरि किशन' अब शरण तुम्हारी, अब राखो मोरी सचाई: अब मैं पूरी तरह आपके अधीन हूँ, मेरी भक्ति की लाज रखना अब आपका दायित्व है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

श्री कृष्ण की मुरली और उनकी शरण के महत्व को दर्शाने वाला प्रसिद्ध श्लोक:

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुचः॥

(श्रीमद्भगवद्गीता 18.66)

अर्थ: सभी धर्मों (कर्तव्यों) को त्यागकर केवल मेरी शरण में आओ। मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा, डरो मत।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तूने मुरली काहे बजाई (Tune Murli Kaahe Bajai)
मुख्य देवता भगवान श्री कृष्ण (मुरलीधर)
गायक/रचनाकार हरि किशन शर्मा (Hari Kishan Sharma)
भाषा हिंदी (ब्रज मिश्रित)
मुख्य भाव प्रेम, उलाहना, शरणागति
उपयुक्त अवसर जन्माष्टमी, सत्संग, दैनिक पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भजन को श्री हरि किशन शर्मा (Hari Kishan Sharma) जी ने गाया है। उनकी मधुर आवाज ने इस भजन को बहुत लोकप्रियता दिलाई है।

आध्यात्मिक दृष्टि से मुरली 'दिव्य पुकार' या 'अनाहत नाद' का प्रतीक है, जो जीवात्मा को परमात्मा की ओर आकर्षित करती है।

गागर गिराना सांसारिक अहंकार और बोझ के समाप्त होने का प्रतीक है। जब ईश्वर का प्रेम मिलता है, तो सांसारिक जिम्मेदारियों का अहंकार स्वतः ही गिर जाता है।

यह भजन 'मधुरा भक्ति' और 'प्रेम-लक्षणा भक्ति' को दर्शाता है, जहाँ भक्त और भगवान के बीच एक अत्यंत व्यक्तिगत और प्रेमपूर्ण संबंध होता है।

हाँ, जन्माष्टमी भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव है और इस दिन उनकी मुरली की महिमा के भजन गाना अत्यंत फलदायी और आनंददायक होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के विद्वानों द्वारा आध्यात्मिक ग्रंथों और पारंपरिक भक्ति संगीत के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। "तूने मुरली काहे बजाई" भजन केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह आत्मा की परमात्मा के प्रति तड़प का संगीतमय प्रकटीकरण है। हरि किशन शर्मा जी की प्रस्तुति ने इस प्राचीन भाव को आधुनिक संदर्भ में प्रासंगिक बनाए रखा है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। अंतिम अद्यतन: अक्टूबर 2023।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्भागवत महापुराण - वेणु गीत प्रसंग।
  • भक्ति रत्नावली - विष्णुपुरी।
  • हरि किशन शर्मा भजन संग्रह - भक्तिलोक आर्काइव्स।
  • ब्रज साहित्य एवं लोक परंपरा।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

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