Punjabi Devi Bhajan बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

तुलसी विवाह बधाई गीत (Ambey Bhakti)

पढ़ें तुलसी विवाह बधाई गीत | Tulsi Vivah Song 2020 | Tara Devi | Tulsi ji ke bhajan | Ambey Bhakti - BhaktiLok का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ,

सनातन धर्म में देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह का पर्व अत्यंत पावन और हर्षोल्लास का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप और माता तुलसी का विवाह संपन्न कराया जाता है। इस पावन अवसर पर गाए जाने वाले बधाई गीत न केवल उत्सव के माहौल को भक्तिमय बनाते हैं, बल्कि साधक के हृदय में ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और समर्पण का भाव भी जाग्रत करते हैं। सुप्रसिद्ध गायिका तारा देवी द्वारा गाया गया "तुलसी विवाह बधाई गीत" (Tulsi Vivah Song 2020) एक ऐसा ही मधुर और भावपूर्ण भजन है, जो माता तुलसी और भगवान शालिग्राम के पावन परिणय उत्सव का सजीव चित्रण करता है। इस भजन के माध्यम से भक्तगण माता तुलसी के चरणों में अपनी श्रद्धा निवेदित करते हैं और उनके मंगलमय विवाह की खुशियां मनाते हैं।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

॥ तुलसी विवाह बधाई गीत ॥

(मुखड़ा)
तुलसी मैया का ब्याह रचाने आए हैं शालिग्राम,
सखियों मंगल गाओ री, आज आए हैं सुंदर श्याम।
बधाई हो बधाई, आज तुलसी मैया की शादी आई,
देवलोक से देव पधारे, खुशियां मन में छाई।

(अंतरा - 1)
हरि संग ब्याह रचाने चलीं, हमारी तुलसी महारानी चलीं,
सज-धज कर सोलह श्रृंगार किए, जग की कल्याणी चलीं।
हाथों में रची है सुंदर मेहंदी, माथे पर बिंदिया चमके,
लाल चुनरिया ओढ़ के मैया, रूप अनूठा दमके।
सखियों मंगल गाओ री, आज आए हैं सुंदर श्याम...

(अंतरा - 2)
शालिग्राम बने हैं दूल्हा, सुंदर मुकुट सजाए हैं,
पीतांबर की ओढ़ के चादर, मंद-मंद मुस्काए हैं।
शंख, नगाड़े, ढोल बजत हैं, गूंज रहा जयकार,
ऋषि-मुनि सब वेद पढ़त हैं, हर्षित है संसार।
सखियों मंगल गाओ री, आज आए हैं सुंदर श्याम...

(अंतरा - 3)
फेरे लेते हैं दोनों मिलकर, अग्नि को साक्षी मान,
धन्य-धन्य यह पावन बेला, धन्य-धन्य भगवान।
जो भी गाए यह बधाई गीत, पाए सुख और शांति अपार,
तारा देवी गाए महिमा, मैया कर दो बेड़ा पार।
सखियों मंगल गाओ री, आज आए हैं सुंदर श्याम...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

यह बधाई गीत भगवान विष्णु (शालिग्राम) और माता तुलसी के पावन विवाह उत्सव का अत्यंत सुंदर और सजीव वर्णन करता है। भजन की शुरुआत में सखियों (भक्तों) से मंगल गीत गाने का आह्वान किया गया है, क्योंकि स्वयं भगवान शालिग्राम माता तुलसी से विवाह करने पधारे हैं। इस शुभ अवसर पर पूरे देवलोक में हर्ष व्याप्त है और सभी देवता इस अलौकिक विवाह के साक्षी बनने के लिए धरती पर आए हैं।

भजन के अंतरा में माता तुलसी के दिव्य श्रृंगार का वर्णन है, जहां वे सोलह श्रृंगार कर लाल चुनरी ओढ़े अत्यंत मनमोहक लग रही हैं। वहीं दूसरी ओर, भगवान शालिग्राम दूल्हे के रूप में पीतांबर धारण किए और सिर पर सुंदर मुकुट सजाए मंद-मंद मुस्कुरा रहे हैं। विवाह की वेदी पर अग्नि को साक्षी मानकर दोनों फेरे ले रहे हैं। इस पावन प्रसंग का श्रवण और गायन करने वाले भक्तों को सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस भजन की कई ऐसी विशेषताएं हैं जो इसे तुलसी विवाह के अवसर पर विशेष रूप से लोकप्रिय बनाती हैं:

  • उत्सव और उल्लास का भाव: यह भजन विवाह के पारंपरिक गीतों की शैली में गाया गया है, जिससे घर और मंदिर में उत्सव का जीवंत वातावरण निर्मित होता है।
  • भक्ति और समर्पण: भजन की प्रत्येक पंक्ति माता तुलसी और भगवान विष्णु के प्रति अनन्य श्रद्धा और समर्पण को दर्शाती है।
  • पारंपरिक वाद्ययंत्रों का समन्वय: ढोलक, मंजीरा और शहनाई की मधुर ध्वनि इस भजन के आध्यात्मिक प्रभाव को और अधिक बढ़ा देती है।
  • कल्याणकारी फल: मान्यता है कि तुलसी विवाह के दिन इस बधाई गीत को सुनने या गाने से वैवाहिक जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

यद्यपि इस भजन को कार्तिक मास में कभी भी सुना जा सकता है, परंतु इसका विशेष लाभ प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित विधि अपनाई जा सकती है:

  • शुभ समय: देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) और द्वादशी तिथि के दिन संध्याकाल में तुलसी विवाह के समय इस भजन का गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • पूजा विधि: घर के आंगन में तुलसी के पौधे और शालिग्राम जी को सजाकर मंडप तैयार करें। धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करने के बाद पूरे परिवार के साथ मिलकर इस बधाई गीत को गाएं।
  • भाव: गायन के समय मन में यह भाव होना चाहिए कि हम साक्षात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी (तुलसी स्वरूप) के विवाह उत्सव में सम्मिलित हो रहे हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन मुख्य रूप से भगवान विष्णु के विग्रह रूप शालिग्राम और माता लक्ष्मी के अंशावतार तुलसी जी (वृंदा) को समर्पित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जालंधर की पत्नी वृंदा की पतिव्रता शक्ति और भगवान विष्णु के वरदान स्वरूप वृंदा तुलसी के पौधे के रूप में प्रकट हुईं। भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया कि उनकी पूजा शालिग्राम के बिना अधूरी रहेगी। इस भजन को सुप्रसिद्ध लोक गायिका तारा देवी ने अपनी मधुर आवाज में गाकर जन-जन तक पहुंचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

तुलसी विवाह की परंपरा सदियों पुरानी है। यह भजन पारंपरिक लोक गीतों की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जिसे आधुनिक संगीत के साथ वर्ष 2020 में "Ambey Bhakti" के बैनर तले प्रस्तुत किया गया था। इस गीत की रचना में भारतीय लोक संस्कृति और विवाह गीतों (गाली, बधाई और मंगल गीत) का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है, जो उत्तर भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से लोकप्रिय है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा सरल, सुबोध और प्रवाहमयी खड़ी बोली हिंदी है, जिसमें अवधी और भोजपुरी लोक शैलियों का पुट भी दिखाई देता है। इसकी काव्य शैली अत्यंत सरल है ताकि आम जनमानस भी इसे आसानी से समझ और गा सके। "सखियों मंगल गाओ री" और "बधाई हो बधाई" जैसे शब्दों का प्रयोग गीत में लयबद्धता और सामूहिक गायन की भावना को सुदृढ़ करता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण आध्यात्मिक और व्यावहारिक सीख देता है:

  • समर्पण की शक्ति: माता तुलसी का जीवन ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। यदि हम भी ईश्वर के प्रति समर्पित रहें, तो हमारा कल्याण निश्चित है।
  • प्रकृति और ईश्वर का संबंध: तुलसी एक औषधीय और पवित्र पौधा है। इसकी पूजा हमें प्रकृति के संरक्षण और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की सीख देती है।
  • गृहस्थ जीवन की पवित्रता: तुलसी-शालिग्राम का विवाह गृहस्थ जीवन को मर्यादा, पवित्रता और धर्म के मार्ग पर चलाने की प्रेरणा देता है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

कठिन शब्द/वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ आध्यात्मिक संदर्भ
शालिग्राम भगवान विष्णु का विग्रह रूप काले रंग का पवित्र पत्थर जो गंडकी नदी में पाया जाता है।
मंगल गाओ शुभ और कल्याणकारी गीत गाना विवाह या शुभ अवसरों पर गाए जाने वाले मांगलिक गीत।
पीतांबर पीला वस्त्र भगवान विष्णु का प्रिय वस्त्र जो तेज और पवित्रता का प्रतीक है।
सोलह श्रृंगार नारी के पूर्ण सौंदर्य के १६ साधन माता तुलसी का दिव्य और अलौकिक रूप।
बेड़ा पार संसार रूपी सागर से मुक्ति मोक्ष या ईश्वर के चरणों में स्थान प्राप्त करना।

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

१. "तुलसी मैया का ब्याह रचाने आए हैं शालिग्राम..."
भगवान विष्णु स्वयं शालिग्राम का रूप धारण कर माता तुलसी से विवाह करने आए हैं। भक्तगण इस अलौकिक दृश्य को देखकर आनंदित हो रहे हैं।

२. "सज-धज कर सोलह श्रृंगार किए, जग की कल्याणी चलीं..."
माता तुलसी, जो संपूर्ण जगत का कल्याण करने वाली हैं, दुल्हन के रूप में सज-धज कर विवाह मंडप की ओर प्रस्थान कर रही हैं।

३. "फेरे लेते हैं दोनों मिलकर, अग्नि को साक्षी मान..."
अग्नि देव को साक्षी मानकर दोनों दिव्य विभूतियां फेरे ले रही हैं, जिससे यह विवाह ब्रह्मांड का सबसे पवित्र बंधन बन जाता है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

तुलसी विवाह के समय इस पावन मंत्र का उच्चारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है:

॥ तुलसी प्रार्थना मंत्र ॥

देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः।
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये॥

अर्थ: हे देवी! पूर्वकाल में मुनीश्वरों ने आपकी अर्चना की थी। भगवान विष्णु की प्रिय तुलसी, आपको बारंबार नमस्कार है, आप मेरे समस्त पापों का हरण करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम तुलसी विवाह बधाई गीत (Tulsi Vivah Song 2020)
मुख्य देवी-देवता माता तुलसी एवं भगवान शालिग्राम (विष्णु जी)
गायिका तारा देवी (Tara Devi)
संगीत लेबल Ambey Bhakti
भाषा हिंदी (लोक शैली)
मुख्य विषय तुलसी विवाह उत्सव और बधाई
उपयुक्त अवसर देवउठनी एकादशी, तुलसी विवाह, कार्तिक पूर्णिमा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

तुलसी विवाह प्रतिवर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी एकादशी) से लेकर पूर्णिमा तिथि के बीच मनाया जाता है। मुख्य रूप से इसे द्वादशी तिथि को मनाने की परंपरा है।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, जालंधर की पत्नी वृंदा को भगवान विष्णु ने वरदान दिया था कि वे शालिग्राम रूप में उनसे विवाह करेंगे। इसी वरदान को पूरा करने और सृष्टि के कल्याण के लिए यह विवाह कराया जाता है।

तुलसी विवाह के दिन "तुलसी विवाह बधाई गीत" और माता तुलसी की आरती गाना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। तारा देवी द्वारा गाया गया यह भजन इस अवसर के लिए सर्वोत्तम है।

हां, तुलसी विवाह को घर के आंगन या छत पर बेहद सरल तरीके से आयोजित किया जा सकता है। इसके लिए तुलसी के पौधे और शालिग्राम जी को मंडप में स्थापित कर विवाह की रस्में निभाई जाती हैं।

इस भजन को सुनने से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, वैवाहिक जीवन के तनाव दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। इस भजन के बोल और इसकी व्याख्या सनातन धर्म की पारंपरिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों (जैसे पद्म पुराण और देवीभागवत पुराण) तथा लोक संस्कृति के गहन अध्ययन पर आधारित हैं। इसका उद्देश्य पाठकों को शुद्ध और प्रामाणिक आध्यात्मिक जानकारी प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पद्म पुराण: उत्तराखंड में वर्णित कार्तिक महात्म्य और तुलसी जन्म कथा।
  • श्रीमद्देवीभागवत महापुराण: वृंदा-जालंधर प्रसंग और तुलसी विवाह की शास्त्रीय विधि।
  • पारंपरिक लोक संगीत संग्रह: उत्तर भारतीय मांगलिक एवं विवाह गीतों की मौखिक परंपरा।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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