Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

बुलाऊं मैं तो आऊं बाबा (Bulaun Main To Aaun Baba)

बुलाऊं मैं तो आऊं बाबा भजन पढ़ें। गायक धनीधर दाधीच के इस प्रसिद्ध हनुमान भजन के बोल, अर्थ और महिमा की संदर्भ एवं व्याख्या सहित जानकारी।

श्री हनुमान जी की महिमा कलयुग में सर्वाधिक फलदायी मानी गई है। "बुलाऊं मैं तो आऊं बाबा" शीर्षक यह भजन भक्त और भगवान के बीच के उस अटूट विश्वास का प्रतीक है, जिसमें साधक अपने आराध्य को सहज स्नेह से पुकारता है। गायक धनीधर दाधीच की भक्ति-भरी वाणी में गाया गया यह भजन 2021 में प्रस्तुत हुआ और शीघ्र ही हनुमान भक्तों के हृदय में स्थान बना लिया। इस भजन का मूल स्वर है — "हे बाबा! जब मैं तुम्हें पुकारूं, तो तुम अवश्य आना।" यह पुकार केवल शब्द नहीं, बल्कि एक आत्मीय संबंध है, जिसमें भक्त हनुमान जी को अपने परिवार का सदस्य मानकर उनसे सहायता मांगता है। भजन का भाव भय-मुक्ति, आत्मविश्वास, निष्काम सेवा और प्रभु श्रीराम के प्रति अनन्य प्रेम पर आधारित है। संकटमोचन हनुमान जी की शरण में जाने वाले साधक के जीवन से बड़े-से-बड़े संकट क्षण भर में दूर हो जाते हैं — यही इस भजन की आत्मा है। मंगलवार और शनिवार को, तथा विशेष रूप से हनुमान जयंती, रामनवमी और दीपावली के अवसर पर यह भजन विशेष भक्ति-भाव से गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

बुलाऊं मैं तो आऊं बाबा

बुलाऊं मैं तो आऊं बाबा, तेरे द्वार से जाऊं ना।
जय जय जय हनुमान, जय जय जय हनुमान।।

तेरे चरणों की शरण में आया, अब तो दूर भगा दे मेरा भय।
संकट हरने वाले बाबा, तू ही मेरा सहारा है।।

लंका जलाकर तूने दिखाया, तेरी शक्ति अपार है।
संजीवनी लाकर तूने बचाई, लक्ष्मण की जान प्यारी।।

राम नाम की महिमा न्यारी, तूने जग को दिखलाई।
सीता माता की रक्षा करके, तूने की महिमा गाई।।

बुलाऊं मैं तो आऊं बाबा, तेरे द्वार से जाऊं ना।
जय जय जय हनुमान, जय जय जय हनुमान।।

भक्त तेरा मैं, तू मेरा स्वामी, यही है मेरा अभिमान।
तेरे दर से खाली ना जाऊं, यही है मेरा वरदान।।

बुलाऊं मैं तो आऊं बाबा, तेरे द्वार से जाऊं ना।
जय जय जय हनुमान, जय जय जय हनुमान।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन का प्रारंभिक मुखड़ा — "बुलाऊं मैं तो आऊं बाबा, तेरे द्वार से जाऊं ना" — भक्त और भगवान के बीच के सहज, आत्मीय और अटूट संबंध को दर्शाता है। भक्त हनुमान जी से कहता है कि जब भी मैं तुम्हें पुकारूं, तुम अवश्य आना और मुझे खाली हाथ लौटाकर मत भेजना। यह पुकार केवल सहायता की याचना नहीं, बल्कि एक विश्वास है कि हनुमान जी अपने भक्तों की प्रार्थना कभी निराश नहीं करते। "जय जय जय हनुमान" का उच्चारण भक्त के हृदय में उत्साह, शक्ति और भक्ति का संचार करता है।

दूसरी पंक्ति "तेरे चरणों की शरण में आया, अब तो दूर भगा दे मेरा भय" में भक्त अपने सभी भय — भय, चिंता, अशांति, रोग, शत्रु और दुःख — को हनुमान जी के चरणों में समर्पित कर देता है। हनुमान जी को "संकट हरने वाले" कहकर भक्त उनकी संकटमोचन भूमिका को स्वीकार करता है। यह भावार्थ बताता है कि जब भक्त पूर्ण समर्पण भाव से हनुमान जी की शरण में जाता है, तो उसके जीवन के सभी संकट स्वतः दूर हो जाते हैं।

तीसरी पंक्ति में भक्त हनुमान जी की महान लीलाओं का स्मरण करता है — लंका दहन और संजीवनी बूटी लाना। लंका दहन यह दर्शाता है कि हनुमान जी अधर्म और अहंकार का नाश करने में समर्थ हैं, तथा संजीवनी लाना यह बताता है कि वे अपने भक्तों के जीवन की रक्षा करने में सक्षम हैं। यह भाव भक्त के भीतर यह विश्वास जगाता है कि जो प्रभु लक्ष्मण की जान बचा सकते हैं, वे मेरे जीवन की रक्षा भी कर सकते हैं।

चौथी पंक्ति "राम नाम की महिमा न्यारी, तूने जग को दिखलाई" में हनुमान जी के राम-भक्ति के आदर्श को प्रस्तुत किया गया है। हनुमान जी ने अपने पूरे जीवन में यह सिद्ध किया कि राम-नाम ही परम सत्य है और प्रभु श्रीराम की सेवा ही जीवन का चरम लक्ष्य है। सीता माता की रक्षा और उनकी महिमा गाना यह दर्शाता है कि हनुमान जी स्त्री-सम्मान और धर्म-रक्षा के प्रतीक हैं।

अंतिम पंक्तियों में भक्त अपने और हनुमान जी के संबंध को "भक्त और स्वामी" के रूप में परिभाषित करता है और कहता है कि तेरे दर से खाली न जाना ही मेरा वरदान है। यह भाव भक्ति की पराकाष्ठा है, जहाँ भक्त भगवान से कुछ मांगता नहीं, केवल उनका सान्निध्य और आशीर्वाद चाहता है। इस प्रकार यह भजन भय-मुक्ति, आत्म-समर्पण, निष्काम भक्ति और हनुमान जी की शरणागति का सुंदर स्तवन है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन हनुमान भक्ति परंपरा की एक सुंदर कड़ी है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • सहज भाषा एवं आत्मीय स्वर: भजन की भाषा सरल और हृदयस्पर्शी है, जिससे सामान्य भक्त भी इसे सहजता से गा सकता है।
  • संकटमोचन भाव: भजन का केंद्रीय भाव हनुमान जी की संकटमोचन शक्ति पर पूर्ण विश्वास है।
  • राम-भक्ति का आदर्श: हनुमान जी की राम-भक्ति और सेवा-भाव इस भजन में प्रमुखता से प्रस्तुत है।
  • भय-निवारण एवं आत्मबल: भजन साधक के भीतर के भय को दूर कर आत्मगौरव और आत्मविश्वास जगाता है।
  • निष्काम सेवा भाव: भजन भक्त को निष्काम सेवा और समर्पण की प्रेरणा देता है।

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नव निधि के दाता माना गया है। इस भजन के नियमित श्रवण और गायन से भक्त के जीवन में साहस, ऊर्जा, रोग-निवारण, बाधा-निवारण और मानसिक शांति का संचार होता है। विद्यार्थियों के लिए यह भजन स्मरण-शक्ति और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक माना जाता है, तथा गृहस्थ जीवन में सुख-शांति और पारिवारिक सामंजस्य के लिए भी यह भजन लाभकारी है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

हनुमान भजनों का गायन और श्रवण किसी भी शुभ अवसर पर किया जा सकता है, परंतु कुछ विशेष समय और विधियाँ इसे और अधिक फलदायी बनाती हैं:

  • शुभ दिन: मंगलवार और शनिवार हनुमान जी की उपासना के लिए सर्वाधिक शुभ माने जाते हैं।
  • शुभ समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पूर्व) और सायंकाल दीपदान के समय भजन गाना विशेष फलदायी है।
  • विशेष पर्व: हनुमान जयंती, रामनवमी, दीपावली, विजयादशमी और कार्तिक पूर्णिमा पर यह भजन विशेष भक्ति-भाव से गाया जाता है।
  • विधि: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें, हनुमान जी के समक्ष घी का दीपक प्रज्वलित करें, लाल पुष्प और बूंदी का प्रसाद अर्पित करें, तत्पश्चात हाथ जोड़कर भजन का गायन करें।
  • माला एवं जप: भजन के साथ "ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्" मंत्र का जप भी किया जा सकता है।
  • श्रवण विधि: भजन सुनते समय मन को एकाग्र रखें, आँखें बंद कर हनुमान जी के स्वरूप का ध्यान करें और प्रत्येक पंक्ति के भाव में डूबें।

यदि संभव हो तो भजन गाने से पूर्व श्री हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें, क्योंकि चालीसा और भजन का संयुक्त पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: "बुलाऊं मैं तो आऊं बाबा" भजन किसने गाया है?

यह भजन गायक धनीधर दाधीच की भक्ति-भरी वाणी में 2021 में प्रस्तुत हुआ। यह भजन हनुमान भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है और इसे भक्तिभाव से गाया एवं सुना जाता है।

प्रश्न 2: यह भजन किस देवता को समर्पित है?

यह भजन संकटमोचन श्री हनुमान जी को समर्पित है। इसमें हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी लाना और राम-भक्ति जैसी लीलाओं का स्मरण किया गया है।

प्रश्न 3: इस भजन को कब और कितनी बार सुनना चाहिए?

इसे मंगलवार, शनिवार तथा हनुमान जी से संबंधित पर्वों पर विशेष रूप से सुना जाता है। नियमित रूप से प्रतिदिन प्रातः या सायं इसका श्रवण या गायन करने से मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है।

प्रश्न 4: क्या इस भजन के गायन से संकट दूर होते हैं?

हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ इस भजन का गायन और श्रवण करने पर भक्त के जीवन के संकटों में राहत मिलने की मान्यता है। यह भजन भक्त के भीतर साहस और धैर्य का संचार करता है।

प्रश्न 5: क्या इस भजन को गाने के लिए किसी विशेष नियम का पालन आवश्यक है?

भजन गाने के लिए किसी कठोर नियम का पालन आवश्यक नहीं है, परंतु स्वच्छता, श्रद्धा और एकाग्रता आवश्यक है। स्नान करके, दीपक प्रज्वलित करके और हनुमान जी का ध्यान करके भजन गाना श्रेष्ठ माना जाता है।

प्रश्न 6: क्या यह भजन हनुमान चालीसा के समान फलदायी है?

हनुमान चालीसा और हनुमान भजन दोनों की अपनी-अपनी महिमा है। चालीसा में हनुमान जी की संपूर्ण महिमा का वर्णन है, जबकि भजन में भक्त और भगवान के आत्मीय संबंध का भाव प्रधान है। दोनों का संयुक्त पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे हनुमान भक्ति परंपरा, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड तथा रामचरितमानस के प्रामाणिक संदर्भों के आधार पर तैयार किया गया है। भजन के भावार्थ और महत्व को समझाने में श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड तथा हनुमान जी की पौराणिक लीलाओं का सहारा लिया गया है। पाठकों से अनुरोध है कि भजन का गायन और श्रवण श्रद्धा एवं भक्ति-भाव से करें तथा इसे केवल मनोरंजन का साधन न मानें।

संदर्भ: श्रीरामचरितमानस (सुंदरकांड), हनुमान चालीसा, वाल्मीकि रामायण तथा हनुमान भक्ति परंपरा के लोकगीत।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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