SAMAR SINGH | Khub Nachal Jaai Nagin Dhun Bajai Ke - खूब नाचल जाई नागिन धुन बजाई के | Devi Geet 2020
प्रकाशित तिथि: नवंबर 2021 | श्रेणी: देवी गीत, भोजपुरी भक्ति संगीत | साभार: Bhaktilok.in संपादकीय टीम
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह ऊर्जावान और उल्लास से भरपूर भजन "SAMAR SINGH | Khub Nachal Jaai Nagin Dhun Bajai Ke - खूब नाचल जाई नागिन धुन बजाई के" लोक प्रसिद्ध भोजपुरी गायक समर सिंह की सुरीली आवाज में जगत जननी की कृपा, शक्ति और महिमा का अद्भुत गान करता है। सनातन परंपरा में नवरात्रि और विभिन्न देवी उत्सवों के दौरान शक्ति की आराधना केवल मौन साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि लोक संगीत, नृत्य और उत्सवधर्मिता के माध्यम से माता के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा प्रकट करने की एक प्राचीन परंपरा रही है। इस भजन की एक-एक पंक्ति और नागिन धुन की अनूठी ताल भक्तों के भीतर उत्साह, आनंद और माता के प्रति समर्पण का संचार करती है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन देवी गीत के संपूर्ण बोल, इसका सरल हिंदी अर्थ, सांस्कृतिक संदर्भ, और इसके गायन से जुड़े आध्यात्मिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
॥ मुखड़ा ॥
निम्बुआ के गछिया से डोले चुनरिया,
आइल बाड़न शेरावाली धरि के नजरिया।
अरे झूम के माई के दरसवा पइ के,
खूब नाचल जाई नागिन धुन बजाई के!
हाँ... खूब नाचल जाई नागिन धुन बजाई के!
॥ अंतरा 1 ॥
सर्जवा पs झूमेले भक्तन के टोली,
भरल बा झोली सबही के खाली झोली।
मइया के महिमा अपार बा निराली,
शेरावाली के दरबार में सबन पे कृपा वाली।
अरे डमरू बजाय के, अरु सिंगी सजाइ के,
खूब नाचल जाई नागिन धुन बजाई के!
॥ अंतरा 2 ॥
समर सिंह गावे महिमा भवानी के,
ध्यान धरेनी हम तs अम्बे महारानी के।
भक्तन का मन में उमंग जगल बा भारी,
दर्शन करे खातिर उमड़ल दुनिया सारी।
अरे अलख जगाइ के, ज्योतवा जराइ के,
खूब नाचल जाई नागिन धुन बजाई के!
॥ समापन / रिफ्रेन ॥
जय माता दी बोलs सब मिलि के,
भाग जाई संकट सब दिल से हिलि के।
नागिन धुन बाजे जब पंडालवा में,
नचे ला भक्त मगन भइ के ख्याल में।
खूब नाचल जाई नागिन धुन बजाई के...
जय शेरावाली! जय माता दी!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह देवी गीत लोक संस्कृति और धार्मिक उल्लास का एक सुंदर संगम है। गीत के माध्यम से गायक समर सिंह ने नवरात्रि के दिनों में माता के दरबार में होने वाले उत्सव और भक्तों के उत्साह का बहुत ही जीवंत चित्रण किया है।
मुखड़े का भाव: गायक वर्णन करता है कि नीम के वृक्षों के बीच जब माँ की चुनरी हवा में लहराती है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो माता शेरावाली अपनी कृपालु दृष्टि सब पर डालने के लिए पधार चुकी हैं। इस पावन अवसर पर भक्त अपनी सुधबुध खोकर झूम उठते हैं और लोक धुनों तथा नागिन धुन के बीच माता के चरणों में आनंदित होकर नृत्य करने का आह्वान करते हैं।
अंतरियों का भाव: आगे की पंक्तियों में बताया गया है कि माता के दरबार में जाति, भेद और ऊंच-नीच से परे सभी भक्त एक साथ मिलकर झूमते हैं। माता की महिमा इतनी निराली है कि उनकी शरण में आने वाले हर निराश व्यक्ति की झोली भर जाती है। कलाकार समर सिंह कहते हैं कि अम्बे महारानी के ध्यान में मग्न होकर, अलख जगाकर और ज्योत प्रज्वलित करके इस उत्सव को मनाना ही सच्ची भक्ति है, जहाँ हर संकट स्वतः ही दूर हो जाता है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत का मूल भाव उत्सवधर्मिता (Celebration), आनंद और सामूहिक भक्ति (Collective Devotion) है। सनातन धर्म में देवी उपासना केवल रुदन या कठिन तपस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि माता को अपनी पुत्री, माता और कुलदेवी के रूप में मानकर उनके आगमन पर आनंदोत्सव मनाना लोक परंपरा का अभिन्न अंग रहा है।
- सामूहिक समरसता: पंडालों और मंदिरों में जब ऐसे गीत गूंजते हैं, तो सभी भेद-भाव मिट जाते हैं और लोग एक परिवार की तरह झूमते हैं।
- ऊर्जा और सकारात्मकता: नागिन धुन और ढोल-नगाड़ों की थाप मनुष्य के भीतर की सुस्ती को दूर कर आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता भर देती है।
- भयमुक्त जीवन: माता शेरावाली के दरबार में नाचने और गाने का अर्थ है कि भक्त अपने सारे संतापों और दुखों को भूलकर पूर्ण रूप से भगवती की शरण में आ चुका है।
गीत की जानकारी | Song Information
| गीत का नाम (Song Title) | Khub Nachal Jaai Nagin Dhun Bajai Ke (खूब नाचल जाई नागिन धुन बजाई के) |
|---|---|
| गायक (Singer) | समर सिंह (Samar Singh) |
| संगीत शैली (Genre) | भोजपुरी देवी गीत / लोक भक्ति संगीत |
| रिलीज वर्ष (Release Year) | 2020 |
| भाषा (Language) | भोजपुरी / हिंदी |
| मुख्य विषय (Theme) | नवरात्रि उत्सव, माता दुर्गा की महिमा, लोक नृत्य एवं उल्लास |
| संबंधित पावन पाठ | आप माता की कृपा प्राप्ति हेतु श्री दुर्गा चालीसा का भी पाठ कर सकते हैं। |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
भोजपुरी संगीत जगत में समर सिंह अपनी दमदार गायकी और ऊर्जावान प्रस्तुतियों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने लोकगीतों की मिट्टी की खुशबू को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर देवी गीतों को एक नया आयाम दिया है। ऐसे गीत उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और देश-विदेश में बसे प्रवासियों के बीच नवरात्रि के दिनों में अत्यधिक लोकप्रिय होते हैं। इन गीतों के माध्यम से लोक संस्कृति और सनातन आस्था पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| निम्बुआ के गछिया | नीम का वृक्ष / उपवन | माता दुर्गा का वास स्थान (नीम और पीपल में देवियों का वास माना जाता है) |
| शेरावाली | शेर पर सवारी करने वाली | माता दुर्गा का विशेष संबोधन |
| नगिन धुन | सपेरे की बीन या नागिन धुन की तर्ज | लोक संगीत और नृत्य का एक लोकप्रिय ताल-सुर |
| अलख जगाई के | ईश्वर स्मरण का संदेश फैलाना | भक्ति भाव को जागृत करना |
| ज्योतवा | अखंड ज्योति या दीपक | माता के सामने प्रज्वलित पवित्र दीप |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
भारतीय संस्कृति में नृत्य और संगीत को मोक्ष और आनंद प्राप्ति का मार्ग माना गया है। नटराज शिव का तांडव हो या ब्रज की रासलीला अथवा शक्ति के दरबार में होने वाला जवारा और नृत्य, सभी का उद्देश्य अहंकार का विसर्जन करना है। जब कोई भक्त माता के दरबार में पूरी तन्मयता से नाचता है, तो उसका अर्थ होता है कि उसने अपने सारे दुखों, चिंताओं और अहंकार को चरणों में अर्पित कर दिया है।
देवी भागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, आदिशक्ति संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी हैं। उनकी आराधना से मनुष्य को भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है। ऐसे लोकगीत जन-जन तक धर्म और संस्कृति के संदेश को बहुत ही सरल भाषा में पहुँचाने का कार्य करते हैं। आप माता के अन्य स्तोत्रों के बारे में जानने के लिए दुर्गा सप्तशती पाठ महत्व भी पढ़ सकते हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- आनंद और सकारात्मकता: जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी उत्साह और प्रसन्नता बनाए रखना आवश्यक है।
- सामूहिकता की भावना: धर्म और उत्सव हमें अकेलेपन से निकालकर समाज और परिवार के साथ जोड़ते हैं।
- अहंकार का त्याग: जब व्यक्ति भगवान के सामने नाचता-गाता है, तो उसका अहंकार गल जाता है और वह विनम्र बन जाता है।
- संकटों से मुक्ति: माता पर अटूट विश्वास रखने वाले भक्त के सारे संकट स्वतः ही दूर हो जाते हैं।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर सुना और गाया जाता है:
- शारदीय और चैत्र नवरात्रि: माता के पंडालों, जागरण और कलश स्थापना के समय।
- माता के विसर्जन और शोभायात्रा के समय: जब भक्त झूमते हुए माँ को विदा करते हैं।
- पारिवारिक अनुष्ठान और मुंडन/विवाह उत्सव: जब देवी गीत गाए जाते हैं।
- दैनिक साधना के पश्चात: मन को तरोताजा करने और ऊर्जावान बनाने के लिए।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| गीत का प्रकार (Type) | भोजपुरी देवी गीत / लोक भजन |
|---|---|
| प्रमुख देवता (Deity) | माँ दुर्गा / शेरावाली |
| मुख्य गायक (Lead Artist) | समर सिंह |
| भाषा (Language) | भोजपुरी |
| मुख्य संदेश (Core Message) | भक्ति में उल्लास, नृत्य और माता की महिमा |
| उपयुक्त अवसर (Occasion) | नवरात्रि, देवी जागरण, पंडाल उत्सव |
| संबंधित लिंक | अधिक जानकारी के लिए भक्ति गीत संग्रह देखें। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख Bhaktilok.in की संपादकीय टीम द्वारा लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और सनातन देवी उपासना के दृष्टिकोण से तैयार किया गया है। सामग्री का उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी और सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करना है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री
अंतिम बार अपडेट किया गया: वर्ष 2026
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत एवं नवरात्रि उत्सव परंपराएं
- देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (शक्ति महिमा संदर्भ)
- भक्तिकोश एवं संगीत दीर्घा अभिलेखागार
संबंधित भजन एवं लेख
श्री दुर्गा चालीसा
माता दुर्गा के 40 पावन छंदों का संपूर्ण पाठ और उसका विस्तृत भावार्थ।
दुर्गा सप्तशती पाठ
आदिशक्ति महामाया के श्लोकों और अध्यायों की पावन कथा व विधि।
भक्ति गीत संग्रह
लोकप्रिय देवी गीतों, भजनों और स्तोत्रों का विशाल और पवित्र संकलन।
पाठकों के विचार (0)
भक्ति रस चर्चा में भाग लें