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पहला छठ गीत - स्वागतम छठी माई के

पढ़ें पहला छठ गीत - स्वागतम छठी माई के का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

स्वागतम छठी माई के | Pawan Singh Chhath Song Lyrics & Meaning

लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के पावन अवसर पर संगीत जगत के अनमोल रत्न और सूर्य उपासना के प्रतीक माने जाने वाले गायक पवन सिंह का यह दिव्य गीत 'स्वागतम छठी माई के' (Swagatam Chhathi Mai Ke) करोड़ों श्रद्धालुओं के अंतर्मन को झंकृत कर देता है। यह गीत केवल एक संगीत रचना नहीं है, बल्कि छठी मैया के आगमन पर प्रकृति, परिवार और समाज द्वारा की जाने वाली अलौकिक मनुहार और श्रद्धा का सजीव चित्रण है। छठ पर्व, जो कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है, सूर्य देव और उनकी बहन छठी मैया (प्रकृति देवी) की उपासना का सबसे कठिन और पवित्र अनुष्ठान माना जाता है। इस भजन में उस भक्तिमय भाव, विसर्जन, समर्पण, और उल्लास का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है जब व्रती महिलाएं पूरी निष्ठा के साथ अचल सुहाग और संतान की दीर्घायु की कामना करते हुए छठी मैया का अपने घरों और घाटों पर स्वागत करती हैं। इस लेख में हम इस पावन छठ गीत के संपूर्ण बोल, इसका विस्तृत हिंदी अर्थ, इसकी आध्यात्मिक पृष्ठभूमि और छठ महापर्व के सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

स्थायी (मुखड़ा):

उगी हे सूर्यदेव भइले बिहान,
अवतारी छठी मैया धइले निशान।
आह्वान करे तोहरा सभे मिलके भक्तजन,
स्वागतम छठी माई के, करऽ अभिनंदन!

अंतरा 1:

घाटवा सजवले बानी सुंदर कतार में,
दीपवा जरत बाटे गंगा के धार में।
ललकी चुनरिया नथिया सोहे माई के,
दरस परस खातिर तरसे मनवा गाई के।
कोइना पिरितिया के तू राखब मान,
स्वागतम छठी माई के, करऽ अभिनंदन!

अंतरा 2:

घर-घर गूंजेइले सोहर अउरी गारी,
दउरा सजवले बाड़ी घर के महतारी।
केरा के पात पर ठेकुआ सजवले,
भक्ति भाव से सभे अउरी मन गवले।
सुनी पुकार माई दया के निदान,
स्वागतम छठी माई के, करऽ अभिनंदन!

अंतिम चरण (समापन):

पवन कहे महिमा अपार हे मैया,
तोहरे भकुसा से बउले संसार भैया।
चरण कमल में धइले बानी धियान,
स्वागतम छठी माई के, करऽ अभिनंदन!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह लोकप्रिय छठ गीत अपनी सरल भोजपुरी शब्दावली के माध्यम से अत्यंत गहरे भक्ति भाव को प्रकट करता है। गीत के मुखड़े में सूर्य देव से प्रार्थना की जाती है कि हे सूर्य देव! प्रातः काल हो चुका है और छठी मैया अपनी महिमा के साथ अवतरित हो चुकी हैं। सभी भक्तगण मिलकर उनका आह्वान कर रहे हैं, अतः हम सबका कर्तव्य है कि हम अत्यंत श्रद्धा के साथ 'स्वागतम छठी माई के, करऽ अभिनंदन' का उद्घोष करें।

पहले अंतरे में घाट की सुंदरता का वर्णन है। व्रती और उनके परिवारजन नदी के घाट को सुंदर पंक्तियों में सजाते हैं, जहाँ पवित्र गंगा या अन्य नदियों की धाराओं के बीच मिट्टी के दीप टिमटिमाते हैं। छठी मैया के लाल रंग की चुनरिया और नाक की नथिया का रूप अत्यंत मनमोहक है, जिसके दर्शन और स्पर्श के लिए हर भक्त का मन व्याकुल रहता है। भक्त प्रार्थना करते हैं कि हे मैया! हमारी इस पवित्र प्रीति और निष्ठा का मान अवश्य रखिएगा।

दूसरे अंतरे में लोक संस्कृति की सोंधी खुशबू आती है। घरों में छठ के सोहर और पारंपरिक गीत गूंज रहे हैं। घर की माताएं और बहनें बांस के सूप और दउरा को ठेकुआ, कसार, मौसमी फलों और गन्ने से सजाकर रखती हैं। केले के पत्तों पर प्रसाद की सजावट और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। अंत में गायक पवन सिंह मैया की अपार महिमा का गुणगान करते हुए कहते हैं कि हे दया की सागर मैया, हम अपने संपूर्ण अहंकार को त्यागकर आपके चरण कमलों में ध्यान लगाए हुए हैं, हमारी रक्षा करें।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत का मुख्य केंद्रीय भाव लोक आस्था, प्रकृति प्रेम और पारिवारिक सौहार्द है। छठ महापर्व भारतीय सनातन संस्कृति में स्वच्छता, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा उदाहरण है। इस गीत के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि ईश्वर की प्राप्ति के लिए बाह्य आडंबर की नहीं, बल्कि अंतःकरण की पवित्रता और सच्ची निष्ठा की आवश्यकता होती है। छठी मैया, जिन्हें प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी और भगवान सूर्य की शक्ति माना जाता है, उनकी आराधना से जीवन में आरोग्यता, संतान सुख और समृद्धि का संचार होता है। इस गीत को सुनकर श्रترुओं के मन में अपनी माटी और संस्कृति के प्रति प्रेम और गहरा हो जाता है। आप इसी प्रकार की अन्य पावन रचनाओं के लिए छठ पूजा गीत संग्रह का अवलोकन कर सकते हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम स्वागतम छठी माई के (Swagatam Chhathi Mai Ke)
मुख्य गायक पवन सिंह (Pawan Singh)
संगीत शैली पारंपरिक लोक धुन एवं आधुनिक भक्ति संगीत
भाषा भोजपुरी (हिन्दी मिश्रित लोक भाषा)
पर्व / अवसर छठ महापर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)
मुख्य विषय छठ मैया का स्वागत, सूर्य उपासना और लोक आस्था

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

पवन सिंह भारतीय लोक संगीत और भोजपुरी सिनेमा के एकछत्र युवा सम्राट और बहुमुखी प्रतिभा के धनी गायक माने जाते हैं। उनकी आवाज में जो ओज, मिठास और ठेठ गवईं अंदाज़ है, वह सीधे श्रोताओं के हृदय को छू लेता है। जब वे छठी मैया जैसे पावन विषयों पर गीत गाते हैं, तो उनकी गायकी में एक अलग ही समर्पण और तल्लीनता दिखाई देती है। गीत के गीतकार और संगीतकार ने लोक परंपराओं को आधुनिक वाद्ययंत्रों के साथ इस प्रकार पिरोया है कि यह युवा पीढ़ी से लेकर बुजुर्गों तक सभी की जुबान पर चढ़ जाता है। इसी प्रकार के अन्य लोक पर्वों के लिए आप गोवर्धन पूजा व्रत कथा भी पढ़ सकते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द सरल अर्थ संदर्भ
अवतारी प्रकट होने वाली / दिव्य रूप में आने वाली छठ मैया के आगमन के संदर्भ में
दउरा बांस से बना बड़ा डलिया या टोकरी पूजा सामग्री रखने का पारंपरिक पात्र
ठेकुआ गेहूं के आटे और गुड़ से बना पारंपरिक प्रसाद छठ का मुख्य नैवेद्य
सोहर उत्सव और जन्म के अवसर पर गाए जाने वाले गीत पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्ति
भकुसा कृपा / आशीर्वाद / वैभव मैया की कृपा दृष्टि

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ पर्व भारत के पूर्वी राज्यों विशेषकर बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में अत्यंत धूमधाम से मनाया जाता है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए और उगते हुए दोनों सूर्यों को अर्घ्य दिया जाता है, जिसका दार्शनिक अर्थ है कि जो इस संसार में उदय हुआ है उसका अस्त होना निश्चित है, और जो अस्त हुआ है उसका पुनः उदय होना भी तय है। यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का पर्व है। 'स्वागतम छठी माई के' गीत इस सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रखता है। यह पर्व जाति, ऊंच-नीच और वर्ग भेद से परे होकर समाज को एक सूत्र में पिरोता है। इस दौरान गाए जाने वाले गीत समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नैतिक मूल्यों का संचार करते हैं। आप भारतीय संस्कृति की इस महान परंपरा के बारे में अधिक जानने के लिए नवीनतम भक्ति गीत संग्रह देख सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह गीत हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  • प्रकृति के प्रति सम्मान: सूर्य, जल, वायु और पृथ्वी के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती, और छठ पर्व इन्हीं प्राकृतिक तत्वों को नमन करता है।
  • अनुशासन और संयम: छठ का 36 घंटे का निर्जला व्रत शारीरिक और मानसिक अनुशासन का सर्वोच्च उदाहरण है।
  • पारिवारिक एकता: इस पर्व में पूरा परिवार मिलकर घाट की सफाई, प्रसाद बनाने और अन्य व्यवस्थाओं में जुटता है, जो सामूहिक एकता की सीख देता है।
  • शरणागति का भाव: जीवन की सभी कठिनाइयों को भूलकर ईश्वर के चरणों में पूर्ण समर्पण करना ही सच्ची भक्ति है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक चलने वाले चार दिवसीय छठ महापर्व के दौरान सुना और गाया जाता है। विशेषकर 'नहाय-खाय', 'खरना' और 'संध्या अर्घ्य' के समय जब पूरा परिवेश छठ गीतों से गूंज रहा होता है, तब इस गीत को सुनने का आनंद ही अलग होता है। इसके अलावा घरों में होने वाले मांगलिक कार्यों, पारिवारिक अनुष्ठानों और माता के जागरण के समय भी इस लोकगीत को पूरे उत्साह के साथ बजाया जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

गीत शीर्षक स्वागतम छठी माई के (Swagatam Chhathi Mai Ke)
गायक पवन सिंह
शैली भोजपुरी लोक भजन / छठ गीत
विषय छठ मैया का स्वागत एवं सूर्य उपासना
मुख्य संदेश प्रकृति प्रेम, निष्ठा और समर्पण
उपयुक्त अवसर छठ पूजा महापर्व (कार्तिक शुक्ल षष्ठी)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध छठ गीत के मुख्य गायक भोजपुरी संगीत जगत के लोकप्रिय कलाकार पवन सिंह हैं, जिनकी ओजस्वी आवाज इस भजन को अत्यंत प्रभावशाली बनाती है।

छठ महापर्व मुख्य रूप से भगवान सूर्य और उनकी बहन प्रकृति देवी (छठी मैया) को समर्पित है। इसमें सूर्योपासना के माध्यम से आरोग्यता और ऊर्जा की कामना की जाती है।

मुख्य छठ पर्व वर्ष में दो बार मनाया जाता है - एक चैत्र मास में (वासंती छठ) और दूसरा कार्तिक मास में (कार्तिक छठ)। कार्तिक छठ का विशेष सामाजिक और धार्मिक महत्व है।

ठेकुआ छठ पूजा का सबसे प्रमुख और पवित्र प्रसाद है, जिसे शुद्ध घी, गेहूं के आटे और गुड़ से पूरी पवित्रता के साथ तैयार किया जाता है। इसे छठी मैया को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है।

यह गीत लोक भाषा भोजपुरी में है, जिसे हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोग भी बहुत प्रेम से सुनते और समझते हैं।

छठ का अनुष्ठान कुल चार दिनों का होता है, जिसकी शुरुआत नहाय-खाय से होती है और इसका समापन उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होता है।

इस गीत को सुनने से श्रोताओं के मन में अपनी सांस्कृतिक जड़ों, परिवार के प्रति प्रेम और छठी मैया के प्रति अगाध श्रद्धा व भक्ति का भाव जागृत होता है।

मुख्य व्रत और अनुष्ठान व्रती महिलाओं (परमवतियों) द्वारा किए जाते हैं, परंतु घाट की व्यवस्था, सामग्री ढोने और पूजा में सहयोग करने में पुरुष भी पूरी निष्ठा से भाग लेते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

भक्तिकुल की इस प्रस्तुति को सनातन धर्म की लोक परंपराओं, प्रामाणिक सांस्कृतिक संदर्भों और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। गीत के बोल और उनके अर्थों को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठक इस पावन पर्व की गरिमा और संगीत के मर्म को भली-भांति समझ सकें। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि पाठकों को सटीक, प्रेरणादायक और त्रुटिहीन जानकारी प्राप्त हो।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत और लोक गाथा संग्रह।
  • सनातन संस्कृति, व्रत-त्योहार और लोक पर्वों से जुड़े ग्रंथ।
  • छठ महापर्व की लोक परंपराएं और रीति-रिवाज।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 09 Oct 2026

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