मंगल ही मंगल करेगा मातारानी का ये भजन - संपूर्ण भक्ति मार्गदर्शिका
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह पावन भजन "मंगल ही मंगल करेगा मातारानी का ये भजन" जगत जननी जगदम्बा की असीम कृपा, करुणा और महिमा का अद्भुत गान करता है। सनातन संस्कृति और वैदिक परंपरा में स्त्री शक्ति को सृजन, पालन और संहार — तीनों शक्तियों का आदि कारण माना गया है। नवरात्रि के पवित्र पर्वों पर, दैनिक संध्या वंदन में अथवा विशेष मां दुर्गा के अनुष्ठानों में माता रानी के भजनों का गान साधक के अंतःकरण को पवित्र और ऊर्जावान बना देता है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माँ के ममतामयी, दुष्टनाशिनी और कल्याणकारी स्वरूप का सजीव चित्रण करती है। जब एक भक्त पूरी श्रद्धा, भाव और शुद्ध उच्चारण के साथ माँ शेरावाली के चरणों में अपनी प्रार्थना प्रस्तुत करता है, तो देवी माँ उसके जीवन के समस्त बाधाओं, दुखों और संकटों का निवारण कर देती हैं। यह भजन न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक के भीतर आत्मबल, साहस, तेज और भक्तिभाव का संचार करता है। इस लेख में हम इस लोकप्रिय देवी भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, हिंदी भावार्थ, गायन की विधि, आध्यात्मिक महत्व और जीवन पर पड़ने वाले इसके सकारात्मक प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
मंगला करणी दुख हरणी, शेरावाली का नाम जपो।
मंगल ही मंगल करेगा मातारानी का ये भजन जपो॥
ऊँचे पहाड़ों वाली माँ का दरबार सजा है प्यारा,
चरणों में झुककर जो आया, मिला उसे जग का सहारा।
माता की महिमा निराली, भक्तों की भरती झोली,
प्रेम से जो भी गाए, भर जाती उसकी खोली।
मंगल ही मंगल करेगा मातारानी का ये भजन जपो॥
लाल चुनरिया लाल सिंदूर, माता को अति भाये,
जो भी सच्चे मन से ध्याए, माँ दौड़ी चली आये।
सिंह सवारी करती मैया, दुष्टों का संहार करे,
भक्तन की रक्षा के हित, माँ प्रगट बारंबार करे।
मंगल ही मंगल करेगा मातारानी का ये भजन जपो॥
सुख और संपत्ति की दाता, अंबे महारानी है,
तीनों लोकों में गूंजे, मैया तेरी ये कहानी है।
भक्ति का दीप जलाओ, मन का अंधियारा मिटाओ,
मंगल ही मंगल होगा, माँ का गुणगान गाओ।
मंगल ही मंगल करेगा मातारानी का ये भजन जपो॥
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस दिव्य भजन का मूल स्वर माता के प्रति निश्छल समर्पण, विश्वास और विनय का है। भजन के मुखड़े में ही यह संदेश दिया गया है कि 'मंगला करणी दुख हरणी' अर्थात माँ सभी का मंगल करने वाली और समस्त दुखों का नाश करने वाली हैं। 'शेरावाली का नाम जपो' — सिंह पर सवारी करने वाली भगवती दुर्गा का स्मरण मात्र ही भवसागर के बंधनों को काट देता है।
पंक्तियों में आगे बताया गया है कि माता रानी का दरबार ऊंचे पर्वतों (त्रिकूट पर्वत या ऊंचे पहाड़ों) पर सजा हुआ है, जो दिव्यता और भव्यता का प्रतीक है। जो भी भक्त अपने अहंकार का त्याग कर माँ के चरणों में नतमस्तक होता है, उसे इस संसार में सच्चा आश्रय और मोक्ष मार्ग प्राप्त होता है। माँ की महिमा इतनी अपरंपार है कि वह अपने हर सच्चे भक्त की झोली खुशियों से भर देती है। लाल चुनरिया और लाल सिंदूर माँ के सुहाग और तेज का प्रतीक हैं, और जो भक्त अनन्य भाव से माँ को पुकारता है, उसकी रक्षा के लिए माँ तुरंत प्रकट होती हैं। अंततः भजन यह उपदेश देता है कि हृदय में भक्ति का दीप प्रज्वलित कर अज्ञान रूपी अंधकार को मिटा देना चाहिए, क्योंकि माँ का गुणगान करने से जीवन में केवल और केवल मंगल ही होता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
देवी दुर्गा की उपासना सनातन धर्म में अनादि काल से चली आ रही है। देवीभागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, आदिशक्ति की आराधना से न केवल भौतिक सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का भी विकास होता है। इस भजन की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- भक्ति रस की प्रधानता: यह भजन साधक के मन में प्रेम, करुणा और शरणागति के भाव को जागृत करता है।
- संकट नाशक स्वरूप: माता के शेरावाली रूप का स्मरण करने से डर, भय और मानसिक अवसाद दूर होते हैं।
- सार्वभौमिक अपील: इसे किसी भी आयु वर्ग के लोग, विशेषकर नवरात्रि और जागरण के अवसरों पर आसानी से गा सकते हैं।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: भजन के नियमित गायन या श्रवण से घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बनता है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
किसी भी भक्ति गीत या भजन का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए उसे उचित विधि और समय पर गाना या सुनना अत्यंत लाभकारी माना जाता है:
- उत्तम समय: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में (सूर्योदय से पूर्व) अथवा संध्या बेला में (गोधूलि वेला) माँ की आरती के समय इसका गान करना श्रेष्ठ है।
- विशेष अवसर: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में, माता के चौकी या जागरण के समय, तथा शुक्रवार के व्रत के दिन विशेष रूप से इसका पाठ करना चाहिए।
- गायतन विधि: स्नान आदि से निवृत्त होकर, स्वच्छ वस्त्र धारण कर, माता के सम्मुख घी का दीया प्रज्वलित कर ताली बजाते हुए या संगीत वाद्ययंत्रों के साथ भावपूर्ण स्वर में गाना चाहिए।
- अटूट विश्वास: कठिन समय में भी ईश्वर और शक्ति पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
- अहंकार का त्याग: माँ के दरबार में झुकने का अर्थ अपने अहंकार और घमंड का त्याग करना है।
- निस्वार्थ सेवा और समर्पण: भक्त का जीवन माँ की आराधना और मानवता की सेवा में समर्पित होना चाहिए।
- आशावादी दृष्टिकोण: जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न आएं, भक्ति का प्रकाश कभी बुझने नहीं देना चाहिए।
- श्री दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण एवं गीता प्रेस गोरखपुर प्रकाशन)
- देवीभागवत पुराण - आदि शक्ति महात्म्य
- पारंपरिक लोक भजन एवं संकीर्तन संग्रह
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती का समन्वित स्वरूप 'आदिशक्ति' हैं। सनातन परंपरा में इन्हें जगत जननी कहा गया है, जो सम्पूर्ण ब्रह्मांड का संचालन करती हैं। लोक परंपरा और आधुनिक भक्ति संगीत परंपरा में ऐसे भजन विभिन्न संतों, लोक गायकों और भक्त कवियों द्वारा रचे गए हैं जिनका उद्देश्य जन-जन तक माँ की महिमा का प्रसार करना है।
भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background
भक्ति संगीत की यह धारा भारतीय लोक संस्कृति और शास्त्रीय परंपरा का सुंदर संगम है। "मंगल ही मंगल करेगा" जैसे भजन पारंपरिक शैली पर आधारित हैं, जिन्हें पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के लोक उत्सवों में बड़े चाव से गाया जाता है। इसकी पृष्ठभूमि में माँ वैष्णो देवी, चिंतपूर्णी, ज्वाला देवी और अन्य शक्तिपीठों की यात्रा और वहाँ के अलौकिक अनुभव जुड़े हुए हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल, सुबोध और प्रवाहित हिंदी तथा लोक भाषा (खड़ी बोली एवं ब्रज-अवधि के प्रभावयुक्त) में रचित है। इसमें अनुप्रास और उपमा अलंकारों का सहज प्रयोग हुआ है जैसे 'मंगला करणी दुख हरणी' और 'ऊंचे पहाड़ों वाली माँ'। शब्दावली अत्यंत मधुर है जो आम जनमानस के हृदय को तुरंत स्पर्श करती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
यह भजन हमें जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण संदेश देता है:
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / पद | सरल अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| मंगला करणी | कल्याण करने वाली | माता का वह स्वरूप जो सबका मंगल करता है |
| दुख हरणी | कष्टों का नाश करने वाली | भक्तों के दुखों को दूर करने वाली माँ |
| शेरावाली | सिंह पर सवार रहने वाली | माँ दुर्गा का प्रसिद्ध नाम |
| जग का सहारा | संसार का आधार | संकट में ईश्वर की शरण |
| खोली | हृदय या निवास | भक्त का अंतःकरण या झोली |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"मंगला करणी दुख हरणी, शेरावाली का नाम जपो..."
यहाँ कवि कहते हैं कि हे भक्तों! जो माँ सबका मंगल करती है और सभी दुखों को हर लेती है, उस सिंहवाहिनी शेरावाली का निरंतर नाम स्मरण करो।
"ऊँचे पहाड़ों वाली माँ का दरबार सजा है प्यारा..."
माता का पावन धाम ऊंचे पर्वतों पर स्थित है, जहाँ अलौकिक छटा बिखरी है। जो भी भक्त शरणागत होकर वहाँ पहुँचता है, उसे इस संसार में संबल और सहारा मिलता है।
"लाल चुनरिया लाल सिंदूर, माता को अति भाये..."
माँ को लाल रंग अति प्रिय है जो सौभाग्य, तेज और ऊर्जा का प्रतीक है। सच्चे मन से स्मरण करने पर माँ अपने भक्तों की रक्षा के लिए बिना देर किए चली आती हैं।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
माता रानी के इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करना अत्यधिक फलदायी होता है:
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके。
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| विवरण | तथ्य |
|---|---|
| भजन का नाम | मंगल ही मंगल करेगा मातारानी का ये भजन |
| आराध्य देवी | माँ दुर्गा / शेरावाली |
| श्रेणी / लेबल | Devi Bhajan, Devi Geet, Navratri Song |
| भाषा | सरल हिंदी / लोक भाषा |
| मुख्य भाव | समर्पण, श्रद्धा और कल्याण |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, जागरण, माता की चौकी, संध्या वंदन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"मंगल ही मंगल करेगा मातारानी का ये भजन" किस देवी को समर्पित है?
यह भजन आदिशक्ति जगत जननी माँ दुर्गा (शेरावाली माता) को समर्पित है।
इस भजन को गाने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
इस भजन को प्रातःकाल पूजा के समय, संध्या आरती में या नवरात्रि के दिनों में कभी भी गाया जा सकता है।
क्या इस भजन को घर पर होने वाले जागरण में गाया जा सकता है?
हाँ, यह भजन माता की चौकी और जागरण के लिए अत्यंत उपयुक्त और लोकप्रिय गीत है।
नवरात्रि में देवी भजनों का क्या महत्व है?
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी भजनों के गान से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को आध्यात्मिक शांति मिलती है।
क्या इस भजन के गायन से मानसिक शांति मिलती है?
निश्चित रूप से, माता के गुणों का गान करने से चिंता, भय और तनाव दूर होते हैं तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है।
इस भजन से हमें क्या मुख्य जीवन सीख मिलती है?
यह भजन हमें कठिनाइयों में भी ईश्वर पर अटूट विश्वास रखने और अहंकार त्यागकर सरल जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
क्या इस भजन को बिना किसी संगीत यंत्र के भी गाया जा सकता है?
हाँ, इसे पूरी श्रद्धा के साथ ताली बजाकर या केवल मन में गुनगुनाकर भी गाया जा सकता है, भाव सबसे महत्वपूर्ण है।
माँ दुर्गा के अन्य प्रसिद्ध भजन कहाँ पढ़ सकते हैं?
आप हमारे पोर्टल देवी भजन संग्रह पर जाकर अन्य लोकप्रिय पावन भजन पढ़ सकते हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख भक्तिलोक (Bhaktilok.in) के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन परंपरा, देवी उपासना और भक्ति साहित्य के गहन अध्ययन के पश्चात तैयार किया गया है। सामग्री का उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक, सरल और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध जानकारी प्रदान करना है। (संपादकीय रूप से तैयार सामग्री)
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