सारे दुखो की दवा हे ये भजन || Mata Bhajan Jai Mata Di New Mata Bhajan Amba Bhakti
सनातन संस्कृति और शाश्वत भक्ति परंपरा में माता रानी (माँ अम्बे, माँ दुर्गा, शेरावाली) के चरणों में अर्पण किया जाने वाला प्रत्येक भजन जीवात्मा के लिए भवसागर से पार उतरने की नौका के समान है। "सारे दुखो की दवा हे ये भजन || Mata Bhajan Jai Mata Di New Mata Bhajan Amba Bhakti" शीर्षक से यह पावन माता भजन कलयुग के संतापों, मानसिक विडंबनाओं और जीवन के असहनीय दुखों से घिरे साधक के अंतर्मन को शांति प्रदान करने वाला एक अद्वितीय साधन है। जब मनुष्य संसार की तमाम बाधाओं से थक जाता है और चारों ओर अंधकार नजर आता है, तब भगवती जगदम्बा के नाम का संकीर्तन और यह पावन भजन उसके जीवन में आशा, शक्ति और भक्ति का संचार करता है। इस लेख में हम इस दिव्य भजन के संपूर्ण लिरिक्स, विस्तृत भावार्थ, माता रानी की महिमा, ध्यान एवं स्मरण की विधि तथा इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालेंगे।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
|| मूकं करोति वाचालं पंगुं लंघयते गिरिम्। यत्कृपा तमहं वन्दे परमानन्द माधवम् ||
(स्थाई / मुखड़ा)
सारे दुखों की दवा है ये भजन, माँ अम्बे का भजन,
गा ले तू दो घड़ी बैठकर मैया के चरण।
मिल जाएगा तुझे जग में हर ख़ुशी का ठिकाना,
माँ के दरबार में कभी किसी ने न खाली हाथ है जाना।
(अंतरा - 1)
दुनिया के मेले में मन जो तू भटकाएगा,
दर्द और आंसुओं के सिवा कुछ न पाएगा।
पकड़ ले आंचल मैया का विश्वास की डोरी से,
कट जाएंगे सारे बंधन कर्मों की चोरी से।
शेरावाली माँ के चरणों में है अमृत की धारा,
मैया के बिना इस जग में नहीं कोई सहारा।
(अंतरा - 2)
ऊँचे पर्वत पे विराजे मैया लाल चुनरिया वाली,
झोली भरती है सबकी जो आता दर पे खाली।
जय माता दी बोल बंदे संकट टल जाएंगे,
बिगड़े हुए तेरे सारे काम बन जाएंगे।
अम्बे भवानी की महिमा वेदों ने है गाई,
जिसने भी श्रद्धा से पुकारा, मैया दौड़ी आई।
(समापन / विश्राम)
बोलो साचा दरबार की जय!
जय माँ अम्बे, जय शेरावाली!
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
यह अत्यंत पावन भजन साधक को यह बोध कराता है कि भौतिक संसार की भागदौड़ और मानसिक चिंताओं से मुक्ति पाने का एकमात्र और अचूक उपाय भगवती माँ जगदम्बा का स्मरण और संकीर्तन है। जिस प्रकार शारीरिक रोगों के लिए औषधि होती है, ठीक उसी प्रकार भवसागर के दुखों, कष्टों और संतापों की एकमात्र दवा 'माँ का भजन' है।
भजन के मुखड़े में कवि या रचनाकार ने बहुत ही सुंदर ढंग से समझाया है कि यदि मनुष्य अपने व्यस्त जीवन में से कुछ पल निकालकर मैया के चरणों में ध्यान लगा ले, तो उसे दुनिया की हर खुशी स्वतः प्राप्त हो जाती है। माँ अम्बे का दरबार कभी किसी श्रद्धालु के लिए रिक्त नहीं रहता।
पहले और दूसरे अंतरे में यह संदेश दिया गया है कि मनुष्य जब भौतिकता की अंधी दौड़ में भटकता है, तो उसे केवल दुख और निराशा हाथ लगती है। इसके विपरीत, यदि वह अटूट विश्वास के साथ माँ शेरावाली का आंचल थाम ले, तो उसके पूर्व जन्मों के संचित कर्मों के बंधन भी कट जाते हैं। पहाड़ों पर विराजमान माँ लाल चुनरी वाली अपने हर भक्त के दुख को हरने के लिए सदैव तत्पर रहती है। केवल "जय माता दी" के उद्घोष मात्र से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- मैया की शरणागति (Surrender): यह भजन साधक को माता रानी के प्रति पूर्ण समर्पण और शरणागति का पाठ पढ़ाता है।
- कलयुग में नाम जप का प्रभाव: कलयुग में भगवती के नाम का स्मरण समस्त पापों और दुखों का नाश करने वाला माना गया है।
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार: इस भजन के नियमित श्रवण या गान से अंतर्मन में सकारात्मकता, शांति और ऊर्जा का संचार होता है।
- पारिवारिक एवं सामूहिक सत्संग: नवरात्रि, जागरण या किसी भी मांगलिक अवसर पर सामूहिक रूप से गाने के लिए यह भजन अत्यंत उपयुक्त है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
माता रानी के इस भजन को किसी भी समय सुना या गाया जा सकता है, परंतु इसके आध्यात्मिक लाभ को अधिकतम करने के लिए निम्नलिखित नियमों का पालन करना श्रेष्ठ माना जाता है:
- प्रातःकाल एवं संध्या वंदना: सुबह स्नान के पश्चात पूजा घर में दीप प्रज्वलित करके या संध्या के समय इस भजन का गान करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- विशेष अवसर एवं व्रत: गुप्त नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि या मंगलवार एवं शुक्रवार के पावन दिनों में इस भजन का विशेष रूप से स्मरण करना चाहिए।
- माता का जागरण एवं चौकी: माता के जागरण, कीर्तन या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के दौरान इस भजन को गाकर माहौल को पूर्णतः भक्तिमय बनाया जा सकता है।
भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint
इस भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा / माँ अम्बे / शेरावाली हैं, जिन्हें सनातन धर्म में आदि शक्ति, पराशक्ति और ब्रह्मांड की जननी माना गया है। मार्कण्डेय पुराण और दुर्गा सप्तशती के अनुसार, महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती का समन्वित स्वरूप ही माँ दुर्गा है।
संतों और आचार्यों का मत है कि जिस प्रकार एक बालक अपनी माता के सान्निध्य में आकर सारे भय भूल जाता है, ठीक उसी प्रकार साधक जब आदिशक्ति जगदम्बा के चरणों में शरण लेता है, तो उसके सारे सांसारिक दुख और संताप स्वतः समाप्त हो जाते हैं।
भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style
यह भजन सरल और सुबोध हिंदी (खड़ी बोली एवं लोकभाषा के संमिश्रण) में रचा गया है, ताकि आम जनमानस इसे आसानी से समझ सके और गा सके।
इसकी काव्य शैली गेय (Melodious) है, जिसमें तुकबंदी (Rhyme scheme) का सुंदर प्रयोग किया गया है। शब्दों की सहजता और भावों की गहराई इस भजन को हर आयु वर्ग के भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाती है।
भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons
- अटूट विश्वास (Faith): जीवन में कितनी भी विकट परिस्थिति क्यों न आए, ईश्वर और माता रानी की कृपा पर से विश्वास कभी नहीं डगमगाना चाहिए।
- संतोष और संयम (Patience): सांसारिक प्रलोभनों में मन भटकाने के बजाय अपने भीतर झांकना और संतोष रखना ही सच्ची खुशी की कुंजी है।
- शरणागति का भाव (Surrender): अहंकार का त्याग करके माँ के चरणों में समर्पित हो जाना ही सभी दुखों का अचूक समाधान है।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द / वाक्यांश | सरल हिंदी अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| दुखों की दवा | कष्टों और संतापों का निवारण | माता के भजन का स्मरण |
| शेरावाली | शेर की सवारी करने वाली माँ | माँ दुर्गा का संबोधन |
| भवसागर | जन्म-मृत्यु का संसार चक्र | संसार रूपी सागर जिसे पार करना है |
| दरबार | चरण या पवित्र धाम | माता का पावन मंदिर या शरण |
पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation
"सारे दुखों की दवा है ये भजन, माँ अम्बे का भजन..."
इस पंक्ति का अर्थ है कि संसार के तमाम चिकित्सीय या भौतिक उपाय भले ही शारीरिक पीड़ा दूर कर दें, परंतु आंतरिक संतापों और मानसिक व्याधियों की एकमात्र औषधि भगवती अम्बे का यह पावन भजन है।
"पकड़ ले आंचल मैया का विश्वास की डोरी से..."
यहाँ कवि समझा रहा है कि ईश्वर या माता से जुड़ने का एकमात्र मार्ग अटूट विश्वास (श्रद्धा) है। जब भक्त विश्वास की मजबूत डोरी से माँ का आंचल पकड़ लेता है, तो उसके सारे कर्म बंधन और कष्ट स्वतः कट जाते हैं।
भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok
इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्र का स्मरण करने से साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है:
ॐ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
(अर्थ: हे नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल करने वाली हो, कल्याणमयी हो, सब प्रकार के पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हो, शरण में आए हुए की रक्षा करने वाली और तीन नेत्रों वाली हो। हे गौरी! तुम्हें नमस्कार है।)एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | सारे दुखो की दवा हे ये भजन || Mata Bhajan Jai Mata Di |
|---|---|
| आराध्य देवी | माँ अम्बे / दुर्गा / शेरावाली |
| भाषा | सरल हिंदी / ब्रज-खड़ी बोली मिश्रित |
| मुख्य थीम | भक्ति, शरणागति और दुख निवारण |
| प्रमुख भाव | अटूट विश्वास, प्रेम और समर्पण |
| उचित अवसर | नवरात्रि, माता जागरण, दैनिक पूजा, सत्संग |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख सनातन भक्ति परंपरा, दुर्गा स्तुति और लोक भजनों के सांस्कृतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक भजन लिरिक्स, सरल भावार्थ और सकारात्मक आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- 1. श्रीमद्देवीभागवत पुराण
- 2. दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण)
- 3. पारंपरिक लोकगीत एवं भक्ति संकीर्तन परंपरा
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