Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

माई के मूरतिया (Ravindra Singh Jyoti)

Ravindra Singh Jyoti द्वारा गाया गया लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत 'माई के मूरतिया' (Mai Ke Murtiya)। पढ़ें संदर्भ एवं व्याख्या सहित यह पावन भजन।

माई के मूरतिया | Mai Ke Murtiya | Ravindra Singh Jyoti | Bhojpuri Devi Geet Song

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती के अनंत स्वरूपों को समर्पित यह लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत "माई के मूरतिया" (Mai Ke Murtiya) सुप्रसिद्ध गायक रविंद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti) की मनमोहक आवाज में गाया गया एक अत्यंत भावपूर्ण भजन है। सनातन संस्कृति और विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोक-जीवन में शारदीय और चैत्र नवरात्र के पावन अवसरों पर देवी गीतों का एक विशिष्ट स्थान रहा है। यह भजन जगत जननी माँ जगदम्बा की महिमा, उनके ममतामयी स्वरूप और दुष्टों के संहारक तेज का अद्भुत वर्णन करता है। जब भक्त माता के दरबार में अपनी अर्जी लगाते हैं और उनकी अलौकिक मूरत का दर्शन करते हैं, तो उनके जीवन के समस्त कष्ट और संताप स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। इस लेख में हम इस पावन भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics), विस्तृत अर्थ, भावार्थ, और इसके आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

(मुखड़ा / स्थायी)

माई के मूरतिया लागातारs बड़ा निक लागे,
शेरवा पे सवार भइले बड़ा सुघड़ लागे।
दर्शन पाके हमार भाग जग जाए,
माई के मूरतिया लागातारs बड़ा निक लागे...

(अंतरा - 1)

हाथ में खड़ग त्रिशूल सोहे माई के,
लिलार पर बिंदिया चमके सान के।
भक्तन के संकट तू पल में हरsली,
मैया के महिमा जग में निराली।
मैया के चरणन में शीश झुकाए,
माई के मूरतिया लागातारs बड़ा निक लागे...

(अंतरा - 2)

लौट के आइल बा नवराता के पावन दिन,
एकहु पल मैया लागे ना मन दिन।
ज्योत जगे घर-घर में लागे दरबार,
झूमे नाचे भक्तन के पूरा परिवार।
रविंद्र ज्योति गुण मैया के गाए,
माई के मूरतिया लागातारs बड़ा निक लागे...

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

रविंद्र सिंह ज्योति द्वारा रचित और गाये गए इस पावन भोजपुरी देवी गीत का भावार्थ अत्यंत सरल और सीधा होने के साथ-साथ गंभीर आध्यात्मिक संदेश से परिपूर्ण है। इस भजन की पंक्तियाँ भक्त और भगवान के बीच के अनन्य प्रेम, श्रद्धा और समर्पण को दर्शाती हैं।

मुखड़ा का भाव: गायक कहते हैं कि माता शेरावाली की मूरत (प्रतिमा या स्वरूप) इतनी सुंदर और आकर्षक लगती है कि उसे देखते ही आँखें तृप्त हो जाती हैं। जब माँ सिंह पर सवार होकर अपने भक्तों की रक्षा के लिए प्रकट होती हैं, तो उनका वह रूप अत्यंत मनोहर और भव्य प्रतीत होता है। ऐसे दिव्य स्वरूप का दर्शन पाकर साधक का भाग्य जाग उठता है और उसका जीवन धन्य हो जाता है।

अंतरा का भाव: माँ दुर्गा के दिव्य स्वरूप का वर्णन करते हुए गायक उनके हाथों में सुशोभित शस्त्रों—जैसे खड़ग (तलवार) और त्रिशूल—तथा उनके ललाट पर चमकती हुई बिंदी का जिक्र करते हैं। यह इस बात का प्रतीक है कि माँ जहाँ एक ओर अपने भक्तों के लिए प्रेम और करुणा की सागर हैं, वहीं दूसरी ओर अधर्मियों और दुष्टों के लिए संहारक शक्ति हैं। नवरात्र के पावन दिनों में जब घर-घर में माँ की ज्योत जगती है, तो पूरा परिवार भक्ति रस में डूबकर झूम उठता है। गायक रविंद्र सिंह ज्योति भी माँ की इसी महिमा का गान कर रहे हैं।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • लोकमंगल की भावना: यह गीत लोकभाषा भोजपुरी में होने के कारण जन-जन के हृदय को सरलता से स्पर्श करता है।
  • नवरात्र पर्व का उल्लास: इस भजन में नवरात्र के दिनों में होने वाली उत्सवधर्मिता और सामूहिक पूजा-पाठ का सुंदर चित्रण मिलता है।
  • भक्ति और शक्ति का संगम: माता के ममतामयी रूप के साथ-साथ उनके रौद्र रूप (असुर संहारक) का भी सूक्ष्म संकेत मिलता है, जो साधक को निर्भय बनाता है।
  • मानसिक शांति: ऐसे कर्णप्रिय और भक्तिरस से ओत-प्रोत गीतों के श्रवण से मन को असीम शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

देवी गीतों और भजनों को सुनने या गाने के लिए किसी कठोर नियम की आवश्यकता नहीं होती, केवल भाव की शुद्धता मुख्य होती है। तथापि, निम्नलिखित अवसरों पर इस भजन का श्रवण विशेष रूप से फलदायी माना जाता है:

  • शारदीय और चैत्र नवरात्र: नौ दिनों तक चलने वाले इन पावन उत्सवों में सुबह और शाम की आरती के समय इस वीडियो ज्यूकबॉक्स का आनंद लिया जा सकता है।
  • दैनिक पूजा के दौरान: घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करते समय प्रातः या सायं काल में इसे बजाने से घर का वातावरण पवित्र और ऊर्जावान बनता है।
  • माता के जागरण और चौकी में: सामूहिक सत्संग, माता के जगराते या संध्या कार्यक्रमों में मंडली के साथ इस गीत का सामूहिक गान बहुत आनंदित करता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की आराध्य देवी माँ दुर्गा (माता शेरावाली, जगदम्बा) हैं। सनातन धर्म में आदि शक्ति को ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा माना गया है। देवीभागवत पुराण और मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती) के अनुसार, जब-जब पृथ्वी पर अंधकार और अधर्म बढ़ा है, तब-तब आदिशक्ति ने विभिन्न रूपों में अवतार लेकर देवताओं और संतों की रक्षा की है। इस भजन के माध्यम से गायक रविंद्र सिंह ज्योति ने उन्हीं परम शक्ति के प्रति अपनी अनन्य निष्ठा व्यक्त की है। आप माता की आराधना के साथ दुर्गा सप्तशती पाठ का भी स्मरण कर सकते हैं।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

लोक संगीत और भोजपुरी भक्ति संगीत की परंपरा में रविंद्र सिंह ज्योति एक जाना-माना नाम हैं। उन्होंने अपनी सुरीली आवाज और ठेठ लोक शैली के माध्यम से पारंपरिक देवी गीतों को आधुनिक संगीत संयोजन के साथ प्रस्तुत किया है। "माई के मूरतिया" गीत उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है जो ग्रामीण संस्कृति, लोक वाद्यों और पारंपरिक धुनों के साथ देवी की आराधना करना पसंद करते हैं। यह वीडियो ज्यूकबॉक्स यूट्यूब और अन्य डिजिटल माध्यमों पर भक्तों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय रहा है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन ठेठ भोजपुरी भाषा की मिठास से सुसज्जित है। इसमें लोक बोलचाल के शब्दों का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है जैसे— 'मूरतिया', 'सुघड़', 'शेरवा', 'हरsली' आदि। काव्य शैली दृश्यात्मक (Visual Imagery) है, जहाँ गायक शब्दों के माध्यम से माता के श्रृंगार, उनके वाहन सिंह और पूजा के माहौल का ऐसा जीवंत चित्र खींचता है कि श्रोता की आँखों के सामने माता का दरबार साकार हो उठता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • शरणागत की रक्षा: माँ अपने हर उस भक्त के संकट को हर लेती हैं जो सच्चे मन से उनके चरणों में शीश झुकाता है।
  • कृतज्ञता का भाव: जीवन में जो भी सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है, उसके लिए ईश्वर और अपनी माता के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए।
  • नकारात्मकता का नाश: जिस प्रकार माँ दुर्गा दुष्टों और असुरों का नाश करती हैं, उसी प्रकार साधक को भी अपने भीतर के विकारों (काम, क्रोध, लोभ, मोह) का नाश करना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रसंग
मूरतिया सुंदर मूर्ति या प्रतिमा माता के विग्रह का रूप
सुघड़ सुंदर, आकर्षक, श्रेष्ठ माता के स्वरूप की सुंदरता
शेरवा सिंह (शेर) माता दुर्गा का वाहन
लिलार ललाट, मस्तक माता का मुखमंडल
हरsली हर लेती हैं, दूर कर देती हैं भक्तों के संकटों का निवारण

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"माई के मूरतिया लागातारs बड़ा निक लागे..."
अर्थात, हे माता! आपकी यह प्यारी सी मूरत लगातार (निरंतर) देखने पर बहुत ही मनमोहक और सुंदर लगती है। आपके इस अलौकिक रूप से नजरें हटाने का मन ही नहीं करता।

"शेरवा पे सवार भइले बड़ा सुघड़ लागे..."
अर्थात, जब आप अपने वाहन सिंह पर सवार होकर भक्तों को दर्शन देने के लिए निकलती हैं, तो आपकी वह सवारी अत्यंत भव्य और शोभायमान प्रतीत होती है।

"भक्तन के संकट तू पल में हरsली..."
अर्थात, हे जगदम्बा! आप अपने शरणागत भक्तों के सभी प्रकार के दुखों और संकटों को एक पल में दूर कर देती हैं, आपकी महिमा इस संसार में सबसे निराली है।

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

माता की आराधना के समय निम्नलिखित बीज मंत्र का स्मरण इस भजन के प्रभाव को और अधिक बढ़ा देता है:

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

आप नियमित साधना के लिए श्री दुर्गा चालीसा का पाठ भी अवश्य करें।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम माई के मूरतिया (Mai Ke Murtiya)
गायक (Singer) रविंद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti)
संगीत शैली भोजपुरी देवी गीत / वीडियो ज्यूकबॉक्स
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri)
आराध्य देवी माँ दुर्गा / आदिशक्ति
मुख्य भाव (Bhava) भक्ति, समर्पण, उल्लास और श्रद्धा
उपयुक्त अवसर नवरात्र, देवी जागरण, मंगलवार/शुक्रवार पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भोजपुरी देवी गीत के गायक सुप्रसिद्ध लोक एवं भक्ति गायक रविंद्र सिंह ज्योति (Ravindra Singh Jyoti) हैं।

यह ठेठ भोजपुरी भाषा में गाया गया एक पारंपरिक शैली का देवी गीत है, जिसे वीडियो ज्यूकबॉक्स के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इस भजन को आप शारदीय और चैत्र नवरात्र के दिनों में, दैनिक पूजा के समय, या किसी भी दिन प्रातः और सायं काल की बेला में सुन सकते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश माता दुर्गा की असीम कृपा में अटूट विश्वास रखना और सच्चे मन से उनके चरणों में समर्पण करना है, जिससे सभी कष्ट दूर होते हैं।

हाँ, यद्यपि यह नवरात्र विशेष गीत है, परंतु माता के भक्त इसे मंगलवार, शुक्रवार या किसी भी शुभ अवसर पर आनंदपूर्वक सुन सकते हैं।

इस गीत में माता के शेर पर सवार रूप, उनके हाथों में खड़ग व त्रिशूल तथा उनके ममतामयी एवं संकटमोचनी स्वरूप का वर्णन किया गया है।

निश्चित रूप से, ऐसे पारंपरिक और ऊर्जावान भजन घर में होने वाले मुंडन, जनेऊ या माता के पूजन उत्सवों में अत्यंत आनंद के साथ गाए जाते हैं।

इसके नियमित श्रवण से मन की चंचलता शांत होती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और माँ जगदम्बा के प्रति भक्ति भाव दृढ़ होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री: Bhaktilok.in पर प्रस्तुत यह आलेख सनातन लोक संस्कृति, भोजपुरी भक्ति संगीत परंपरा और देवी आराधना के विभिन्न आयामों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी, संपूर्ण गीत के बोल और उसका आध्यात्मिक भावार्थ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। सभी विवरण पारंपरिक मान्यताओं और लोक कला के संदर्भों पर आधारित हैं।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • देवीभागवत पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण (दुर्गा सप्तशती संदर्भ)
  • भोजपुरी लोक संगीत एवं देवी गीत परंपरा
  • रविंद्र सिंह ज्योति द्वारा प्रस्तुत आधिकारिक वीडियो ज्यूकबॉक्स संदर्भ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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