Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मैं शेर हूँ शेरावाली का (Lyrical Video)

मैं शेर हूँ शेरावाली का देवी गीत के संपूर्ण बोल, अर्थ और महत्व पढ़ें। पवन सिंह का यह पावन भजन माता दुर्गा को समर्पित है। संदर्भ सहित जानकारी।

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह पावन गीत "मैं शेर हूँ शेरावाली का" भोजपुरी संगीत जगत के लोकप्रिय एवं यशस्वी गायक पवन सिंह द्वारा वर्ष 2021 में प्रस्तुत किया गया एक अत्यंत मधुर, ऊर्जावान और ओजस्वी देवी गीत है। सनातन भक्ति परंपरा में जगत जननी जगदम्बा को संपूर्ण चराचर जगत की माता, शक्ति और संहार-सृजन की आदि संचालिका माना गया है। नवरात्रि के पावन अवसरों, देवी जागरण, और माता के दरबार में गूंजने वाले इस भजन का मूल भाव साधक के भीतर अदम्य साहस, भक्ति, समर्पण और भयमुक्ति का संचार करना है। पवन सिंह की अपनी विशिष्ट और गूंजती हुई गायकी शैली में गाया गया यह गीत न केवल श्रोताओं को झूमने पर विवश करता है, बल्कि उन्हें भगवती के चरणों में पूर्ण रूप से आत्मसमर्पण करने की प्रेरणा भी देता है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय गीत के संपूर्ण बोल, इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व, कठिन शब्दों के अर्थ, और देवी साधना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे ताकि भक्त माता के चरणों में अपनी निष्ठा को और अधिक प्रगाढ़ कर सकें।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मुखड़ा (Refrain):

ऊँचे पर्वत भवन निराला, सजता है दरबार मैया का,
भक्तों की हर पीड़ा हरने, आती हैं शेरावाली मैया।
हम तो गाएं गुण मैया के, रोम-रोम में नाम बसा,
मैं तो शेर हूँ शेरावाली का, मुझको किस बात का डर है भला!

अंतरा 1:

पापियों का नाश करने जब-जब जग में भार बढ़ा,
सिंह सवार होकर मैया रणचंडी का रूप धड़ा।
दुष्टों का संहार किया और भक्तों को गले लगाया,
ऐसी मैया की महिमा को सारा जग है शीश नवाया।
चरणों की धूल ले माथे पर, जीवन सफल बना डाला,
मैं तो शेर हूँ शेरावाली का, मुझको किस बात का डर है भला!

अंतरा 2:

अष्टमी और नवमी के दिन दर्शन को जो भक्त जाता,
खाली झोली उसकी मैया कभी न वापस लौटता।
सुख-समृद्धि और वैभव की वर्षा करती अंबे रानी,
भक्तों की रक्षा करने को जागती है जगदम्ब भवानी।
पवन सिंह गुण गाए मैया, जीवन भर बलिहारी जाऊं,
चरनन की सेवा पाकर भवसागर पार कर जाऊं।

समापन पंक्ति:

बोलो सच्चे दरबार की जय! शेरावाली माता की जय!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

पवन सिंह द्वारा गाए गए इस लोकप्रिय भोजपुरी देवी गीत का भावार्थ अत्यंत गहन और प्रेरणादायी है। गीत के मुखड़े में कवि और गायक ने माता के ऊँचे पर्वतीय धाम (जैसे वैष्णो देवी या अन्य शक्तिपीठों) का स्मरण करते हुए उनके दरबार की दिव्यता का वर्णन किया है। भक्त कहता है कि जब उसके रोम-रोम में माता का नाम बस गया है और वह भगवती शेरावाली का अनन्य सेवक यानी 'शेर' बन चुका है, तो उसे संसार के किसी भी संकट या भय से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। यह अभयदान केवल सच्ची भक्ति से ही प्राप्त होता है।

पहले अंतरे में माता के दुष्टनाशिनी और कारुणिक दोनों रूपों का सुंदर संतुलन दिखाया गया है। जब पृथ्वी पर अधर्म और पाप बढ़ता है, तो माता आदिशक्ति रणचंडी या महाकाली का रूप धारण कर दुष्टों का विनाश करती हैं, किंतु अपने आश्रित भक्तों पर वात्सल्य की वर्षा करती हैं। साधक जब माता के चरणों की धूल को अपने माथे से लगाता है, तो उसका मनुष्य जन्म धन्य हो जाता है। दूसरे अंतरे में नवरात्रि के विशेष पर्वों (अष्टमी और नवमी) का प्रसंग है, जहां माता के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त निराश नहीं लौटता। अंत में गायक पवन सिंह स्वयं को माता का समर्पित सेवक बताते हुए उनके चरणों में बारंबार प्रणाम करते हैं और भवसागर से तरने की प्रार्थना करते हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत का मूल भाव निडरता, अटूट विश्वास और शरणागति (Surrender) है। आधुनिक भोजपुरी लोक संगीत और देवी गीतों की परंपरा में जहां एक ओर मनोरंजन होता है, वहीं इस प्रकार के गीत भक्तों के भीतर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं। संदेश स्पष्ट है कि जो व्यक्ति मां दुर्गा की शरण में आ जाता है, उसके जीवन के सारे कष्ट स्वतः दूर हो जाते हैं। यह गीत हमें सिखाता है कि अहंकार का त्याग कर मां के चरणों में समर्पित होने से आंतरिक शक्ति जागृत होती है।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम (Song Name) मैं शेर हूँ शेरावाली का (Lyrical Video)
गायक (Singer) पवन सिंह (Pawan Singh)
वर्ष (Release Year) 2021
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri / Devi Geet)
विधा (Genre) देवी भजन / भोजपुरी भक्ति गीत
मुख्य थीम (Theme) माता दुर्गा की महिमा, निर्भयता और भक्ति
संबंधित पावन पर्व शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि, मंगलवार और शुक्रवार की पूजा

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

भोजपुरी फिल्म और संगीत जगत में 'पावर स्टार' के नाम से विख्यात पवन सिंह ने अपनी ओजस्वी और सुरीली आवाज से इस देवी गीत को अमर बना दिया है। उनकी गायकी की विशेषता यह है कि वे शब्दों के उच्चारण में स्पष्टता और लोक-संस्कृति की मिठास दोनों का अनूठा समावेश करते हैं। वर्ष 2021 में रिलीज हुआ यह वीडियो गीत सोशल मीडिया और यूट्यूब पर अत्यधिक लोकप्रिय हुआ। इसके निर्माण में विभिन्न संगीतकारों, गीतकारों और वीडियो एडिटर्स का योगदान रहा है जिन्होंने इसे दृश्य और श्रव्य दोनों रूपों में भक्तों के लिए मनमोहक बनाया। ऐसे लोकप्रिय भजनों के माध्यम से आज की युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों से जुड़ रही है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल अर्थ (Simple Meaning) संदर्भ (Context)
शेरावाली शेर पर सवारी करने वाली माता दुर्गा माँ जगदम्बा का संबोधन
निराला अद्भुत, सबसे अलग और अलौकिक माता के दरबार की विशेषता
रणचंडी युद्ध के मैदान में दुष्टों का संहार करने वाला उग्र रूप मां दुर्गा का शक्ति रूप
भवसागर जन्म-मृत्यु का दुःखों से भरा संसार संसार रूपी सागर जिससे पार होना है
बलिहारी न्योछावर होना, समर्पित होना भक्त का माता के प्रति प्रेम

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

भारतीय सनातन संस्कृति में संगीत को ईश्वर प्राप्ति का एक सुगम मार्ग माना गया है। संगीत सम्राट तानसेन और मीराबाई से लेकर आधुनिक संतों तक, सभी ने भजन-कीर्तन को मानसिक शुद्धि का माध्यम बताया है। जब भोजपुरी आंचल में ऐसे देवी गीत गाए जाते हैं, तो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों का वातावरण भक्तिमय हो जाता है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि के नौ दिनों में जब सुबह-शाम इन गीतों के स्वर गूंजते हैं, तो घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और दिव्यता का वास होता है। यह गीत हमें याद दिलाता है कि विपत्ति के समय मनुष्य को घबराने के बजाय आदिशक्ति का स्मरण करना चाहिए।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • भयमुक्त जीवन: जब ईश्वर या माता पर अटूट विश्वास हो, तो जीवन का कोई भी संकट डरा नहीं सकता।
  • शरणागति का भाव: अहंकार त्यागकर माता के चरणों में झुकने से ही वास्तविक शांति मिलती है।
  • धर्म का मार्ग: पाप और अधर्म के विरुद्ध खड़े होने की शक्ति मां दुर्गा की उपासना से ही मिलती है।
  • नियमित स्मरण: प्रतिदिन देवी गीतों और भजनों का श्रवण करने से मन में सात्विक विचारों का विकास होता है।
  • संस्कृति से जुड़ाव: अपनी मातृभाषा (भोजपुरी) और लोक परंपरा के माध्यम से धार्मिक उत्सवों को मनाना हमारी सांस्कृतिक थाती को सुरक्षित रखता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

इस प्रकार के देवी गीतों को सुनने और गुनगुनाने के लिए निम्नलिखित अवसर अत्यंत उत्तम माने जाते हैं:

  • नवरात्रि के नौ दिन: शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दौरान घटस्थापना और पूजन के समय।
  • माता की चौकी और जागरण: रात्रि कालीन देवी जागरण या संकीर्तन के आयोजनों में।
  • दैनिक पूजा के समय: प्रातःकाल या संध्याकालीन आरती और पूजा के पश्चात।
  • मंगलवार और शुक्रवार: विशेष रूप से देवी पूजन के दिनों में वाहन चलाते समय या घर के कार्यों के दौरान।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

गीत शीर्षक मैं शेर हूँ शेरावाली का
गायक पवन सिंह
रिलीज वर्ष 2021
संगीत शैली भोजपुरी देवी गीत / लोक भजन
मुख्य संदेश निडरता, माता के प्रति समर्पण और सुरक्षा का भाव
संबंधित पावन कथा दुर्गा सप्तशती एवं महिषासुर मर्दन प्रसंग
प्लेटफॉर्म यूट्यूब एवं डिजिटल ऑडियो प्लेटफॉर्म

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस प्रसिद्ध भोजपुरी देवी गीत के गायक लोकप्रिय और ऊर्जावान कलाकार पवन सिंह हैं, जिन्हें वर्ष 2021 में इस गीत के लिए अपार सराहना मिली।

यह गीत मुख्य रूप से शारदीय और चैत्र नवरात्रि, माता के जागरण, कन्या पूजन, तथा साप्ताहिक मंगलवार और शुक्रवार की देवी पूजा के समय अत्यधिक सुना जाता है।

इस गीत का मुख्य संदेश यह है कि जो भक्त मां दुर्गा की शरण में रहता है और खुद को उनका सच्चा सेवक मानता है, उसे संसार के किसी भी भय या संकट से डरने की आवश्यकता नहीं होती।

हाँ, यह एक पूर्णतः सात्विक और भक्तिमय देवी गीत है जिसे परिवार के सभी सदस्य मिलकर सुन सकते हैं और इससे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त कर सकते हैं।

नवरात्रि में देवी गीतों का संकीर्तन करने से घर का वातावरण पवित्र होता है, नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और माता रानी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आप हमारी वेबसाइट पर श्री दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती के पाठ के बारे में भी विस्तार से पढ़ सकते हैं।

पवन सिंह ने अपने करियर में सैकड़ों लोकप्रिय देवी गीत गाए हैं जैसे 'चुनरिया लेइले अइहा', 'मैया के दरबार में', और कई अन्य पारंपरिक भोजपुरी भजन जो नवरात्रि के दौरान हर घर में बजाए जाते हैं।

यह गीत अत्यंत मधुर और लोकप्रिय भोजपुरी भाषा में गाया गया है, जिसमें हिंदी के शब्दों का भी सुंदर समन्वय है ताकि हर कोई इसे आसानी से समझ सके।

निश्चित रूप से, देवी गीतों और भजनों का नियमित श्रवण मन को शांत करता है, तनाव कम करता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है। आप अन्य स्तोत्रों के लिए शिव तांडव स्तोत्र और श्री हनुमान चालीसा के पावन पाठ भी देख सकते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख Bhaktilok.in के संपादकीय मंडल द्वारा सनातन संस्कृति, लोक संगीत परंपरा और देवी उपासना के दृष्टिकोण से पूरी तरह सत्यापित और संकलित किया गया है। सामग्री का उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी और भक्ति भाव प्रदान करना है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन पौराणिक ग्रंथ एवं दुर्गा सप्तशती (मार्केडय पुराण संदर्भ)
  • भोजपुरी लोक संगीत एवं पारंपरिक देवी गीत परंपरा
  • पवन सिंह आधिकारिक संगीत एलबम एवं डिजिटल रिलीज अभिलेख (2021)
  • भारतीय संस्कृति एवं भक्ति साहित्य कोष

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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