Diwali Vrat Katha मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

दीवाली में दियरी जरवतानी

पढ़ें दीवाली में दियरी जरवतानी का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

भोजपुरी लोक संस्कृति और महालक्ष्मी भक्ति का पावन संगम

"दीवाली में दियरी जरवतानी" (Diwali Mein Diyari Jarawatani) एक अत्यंत लोकप्रिय और हृदयस्पर्शी भोजपुरी भक्ति गीत है, जो दीपावली के महापर्व पर देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश के आगमन की खुशी को दर्शाता है। यह गीत केवल सुर और ताल का संगम नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध ग्रामीण लोक संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों और सनातन धर्म की गहरी आध्यात्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। भोजपुरी भाषी क्षेत्रों (विशेषकर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश) में दीपावली के पावन अवसर पर इस गीत को अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ गाया व सुना जाता है। "दियरी जरवतानी" का अर्थ है "मिट्टी का दीपक जला रही हूँ"। यह गीत एक भक्त के हृदय की उस व्याकुलता और हर्ष को प्रकट करता है, जब वह अपने घर-आँगन को साफ-सुथरा कर, दीपों की कतारें सजाकर, धन और ऐश्वर्य की देवी महालक्ष्मी का स्वागत करने के लिए तैयार होता है। इस विस्तृत लेख में हम इस पावन गीत के बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी परंपराओं का सांगोपांग विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

दीवाली में दियरी जरवतानी

(मुखड़ा)
दीवाली में दियरी जरवतानी हो, मैया तोहरी आरती उतारतानी।
अंगना बहारतानी, चौक पुरातानी हो, मैया तोहरी आरती उतारतानी।
दीवाली में दियरी जरवतानी हो, मैया तोहरी आरती उतारतानी॥

(अंतरा - 1)
गोबर से अंगना-दुअरिया लिपावली, गंगाजल छिड़क के पवित्र बनावली।
फूलन के माला से दुआर सजावतानी हो, मैया तोहरी आरती उतारतानी।
दीवाली में दियरी जरवतानी हो, मैया तोहरी आरती उतारतानी॥

(अंतरा - 2)
रिद्धि-सिद्धि संग लेके आवहु गनेशा, दूर करहु मैया सभकर कलेशा।
लड्डू-पेड़ा थरिया में सजा के ले अइली, मोदक के भोग लगावतानी हो।
दीवाली में दियरी जरवतानी हो, मैया तोहरी आरती उतारतानी॥

(अंतरा - 3)
सोने के थाली में कपूर के बाती, जगमग-जगमग करत बा राती।
अंधियारा मिटा के अंजोर फैलावल, श्रद्धा के फूल चढ़ावतानी हो।
दीवाली में दियरी जरवतानी हो, मैया तोहरी आरती उतारतानी॥

(अंतरा - 4)
जुग-जुग जियसु मोरा सुहाग और गोतिया, घर-घर बरसे सुख-संपत्ति के मोतिया।
चंदा शर्मा तोहरे चरनिया में आईल, भक्ति के अरज सुनावतानी हो।
दीवाली में दियरी जरवतानी हो, मैया तोहरी आरती उतारतानी॥

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह गीत भोजपुरी भाषा की मिठास और भक्ति रस से सराबोर है। इसके प्रत्येक अंतरे में दीपावली की तैयारियों और देवी लक्ष्मी के प्रति अनन्य समर्पण का सुंदर चित्रण किया गया है:

घर की शुचिता और स्वागत की तैयारी

गीत के प्रारंभिक अंशों में गायिका कहती है कि हे माता लक्ष्मी! मैं दीपावली के इस पावन पर्व पर आपके स्वागत के लिए मिट्टी के दीपक (दियरी) जला रही हूँ और आपकी आरती उतारने की तैयारी कर रही हूँ। मैंने अपने आँगन को साफ किया है, बुहारा है और वहाँ सुंदर रंगोली (चौक) सजाई है। यह इस बात का प्रतीक है कि देवी लक्ष्मी का वास वहीं होता है जहाँ स्वच्छता, पवित्रता और सकारात्मक ऊर्जा होती है।

पंचतत्वों की शुद्धि और प्राकृतिक शृंगार

प्रथम अंतरे में ग्रामीण परिवेश की सुंदर झलक मिलती है। गोबर से आँगन और मुख्य द्वार को लीपना और गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र करना हमारी प्राचीन सनातन परंपरा का हिस्सा है। फूलों की मालाओं से मुख्य द्वार को सजाना प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और शुभ शकुन का प्रतीक है। भक्त अपने भौतिक और मानसिक परिवेश को शुद्ध कर माता के आगमन की प्रतीक्षा कर रहा है।

विघ्नहर्ता गणेश और रिद्धि-सिद्धि का आह्वान

दीपावली पूजन में भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की संयुक्त पूजा का विधान है। गीत में प्रार्थना की गई है कि हे माता! आप अकेले नहीं, बल्कि विघ्नहर्ता भगवान गणेश और उनकी पत्नियों रिद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (आध्यात्मिक शक्ति) के साथ हमारे घर पधारें। हमारे जीवन के समस्त क्लेशों और दुखों का नाश करें। थाली में सजे लड्डू, पेड़े और मोदक का भोग लगाकर भक्त अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहा है।

प्रकाश की विजय और अंधकार का नाश

कपूर की बाती और सोने की थाली में सजी आरती रात के घने अंधकार को चीरकर चारों ओर प्रकाश फैला रही है। यह केवल भौतिक अंधकार का नाश नहीं है, बल्कि अज्ञान, दरिद्रता और नकारात्मकता रूपी आंतरिक अंधकार को मिटाकर ज्ञान, समृद्धि और सकारात्मकता रूपी प्रकाश को जीवन में लाने का आध्यात्मिक संदेश है।

लोक कल्याण और सुहाग की कामना

अंतिम अंतरे में लोक-कल्याण और पारिवारिक सुख की कामना की गई है। भारतीय नारी अपने सुहाग, संतान और संपूर्ण परिवार (गोतिया-परिवार के सदस्य) की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती है। वह चाहती है कि सबके घरों में सुख और संपत्ति के मोती बरसें। अंत में, गायिका स्वयं को माता के चरणों में समर्पित करते हुए अपनी भक्तिमयी अर्जी स्वीकार करने की विनती करती है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना "पूर्ण शरणागति" (Surrender), "वात्सल्य और श्रद्धा" तथा "सामुदायिक समरसता" है। यह गीत हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण संदेश देता है:

  • आंतरिक और बाह्य शुचिता: जैसे हम दीपावली पर अपने घरों को साफ करते हैं, वैसे ही हमें अपने मन से ईर्ष्या, द्वेष और क्रोध को निकालकर उसे पवित्र बनाना चाहिए।
  • सामूहिकता का महत्व: गीत में केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार, समाज और गोतिया के लिए सुख-समृद्धि की कामना की गई है, जो सनातन धर्म के "वसुधैव कुटुम्बकम्" के सिद्धांत को दर्शाता है।
  • श्रद्धा का मूल्य: ईश्वर भौतिक वस्तुओं से नहीं, बल्कि भक्त की सच्ची श्रद्धा और प्रेम से प्रसन्न होते हैं। मिट्टी का एक छोटा सा दीपक भी यदि सच्ची श्रद्धा से जलाया जाए, तो वह साक्षात महालक्ष्मी को आकर्षित कर लेता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण बिंदु (Parameter) जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) दीवाली में दियरी जरवतानी (Diwali Mein Diyari Jarawatani)
मुख्य गायिका (Singer) चंदा शर्मा (Chanda Sharma) / पारंपरिक लोक शैली
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
विधा (Genre) भोजपुरी देवी गीत / दीपावली विशेष भजन
मुख्य विषय (Theme) महालक्ष्मी पूजन, दीपावली उत्सव, पारिवारिक सुख-समृद्धि
मुख्य वाद्य यंत्र (Instruments) ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम, बांसुरी
उपयुक्त अवसर (Occasion) धनतेरस, दीपावली, लक्ष्मी पूजन, कार्तिक मास

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

यह गीत भोजपुरी लोक संगीत की सुप्रसिद्ध गायिका चंदा शर्मा द्वारा गाया गया है। भोजपुरी लोक संगीत में चंदा शर्मा का योगदान अत्यंत सराहनीय रहा है, विशेषकर उनके पारंपरिक और भक्ति गीतों ने जनमानस के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया है। इस गीत का संगीत पारंपरिक लोक धुनों पर आधारित है, जो सीधे मिट्टी की सोंधी खुशबू और ग्रामीण अंचल की याद दिलाता है। ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक इस गीत को और भी अधिक कर्णप्रिय और भक्तिमय बना देती है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द (Bhojpuri Word) सरल हिंदी अर्थ (Hindi Meaning) संदर्भ / महत्व (Contextual Significance)
दियरी (Diyari) मिट्टी का छोटा दीपक (Clay Lamp) अंधकार को दूर करने और ज्ञान का प्रतीक।
जरवतानी (Jarawatani) जला रही हूँ (Lighting) भक्त द्वारा की जा रही सेवा और साधना।
बहारतानी (Baharatani) झाड़ू लगाना / साफ करना (Sweeping) घर और मन की शुद्धि का प्रतीक।
चौक पुरातानी (Chowk Puratani) रंगोली या चौक बनाना (Making Rangoli) शुभ कार्यों की शुरुआत में बनाया जाने वाला मांगलिक चिह्न।
दुअरिया (Duariya) मुख्य द्वार / चौखट (Doorstep) जहाँ से माता लक्ष्मी का घर में प्रवेश होता है।
अंजोर (Anjor) उजाला / प्रकाश (Light) अज्ञानता के नाश और ज्ञान के उदय का प्रतीक।
गोतिया (Gotiya) कुटुंब / पट्टीदार / रिश्तेदार (Kinship) पारिवारिक एकता और सामूहिक कल्याण की भावना।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सनातन धर्म में दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने या आतिशबाजी करने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह एक महान आध्यात्मिक साधना का काल है। कार्तिक मास की अमावस्या की घनी काली रात में जब चारों ओर अंधकार होता है, तब मिट्टी के नन्हें दीपक जलाकर हम यह संदेश देते हैं कि सत्य और प्रकाश की सत्ता सदैव अंधकार पर भारी रहती है।

इस भोजपुरी गीत में प्रयुक्त शब्द "दियरी जरवतानी" इसी आध्यात्मिक सत्य को रेखांकित करता है। मिट्टी का दीपक हमारे इस नश्वर शरीर का प्रतीक है, उसमें भरा तेल हमारी श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, और जलती हुई लौ हमारी आत्मा की जाग्रत अवस्था है। जब हम इस भाव से दीपक जलाते हैं, तो हमारे भीतर की सोई हुई चेतना जाग्रत होती है और हम साक्षात देवी लक्ष्मी (जो केवल धन नहीं, बल्कि अष्टलक्ष्मी के रूप में ज्ञान, धैर्य, विजय, संतान, धान्य, आदि की प्रदाता हैं) का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

सांस्कृतिक रूप से, यह गीत भोजपुरी भाषी समाज की सादगी और उनकी समृद्ध लोक परंपराओं को संजोए हुए है। यह दिखाता है कि कैसे आधुनिकता के इस दौर में भी लोग अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं और गोबर से लीपने, गंगाजल छिड़कने जैसी पवित्र लोक-परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

इस पावन लोकगीत से हमें अपने दैनिक जीवन के लिए कई महत्वपूर्ण सीख मिलती हैं:

  1. स्वच्छता ही ईश्वरत्व है: गीत में सबसे पहले घर की सफाई और सजावट पर बल दिया गया है। यह सिखाता है कि शारीरिक और मानसिक स्वच्छता ही ईश्वर की कृपा पाने का पहला मार्ग है।
  2. कृतज्ञता का भाव: ईश्वर ने हमें जो कुछ भी दिया है, उसके प्रति कृतज्ञ होना और उन्हें नैवेद्य (भोग) अर्पित करना हमारी संस्कृति का मूल है।
  3. निःस्वार्थ प्रार्थना: प्रार्थना में केवल अपनी भलाई नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज ("सुहाग और गोतिया") की भलाई की कामना होनी चाहिए।
  4. सादा जीवन, उच्च विचार: मिट्टी के दीये और साधारण फूलों से की गई पूजा भी उतनी ही फलदायी होती है जितनी सोने-चांदी के बर्तनों से की गई पूजा। महत्वपूर्ण केवल हृदय का भाव है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि इस गीत को दीपावली के पूरे सप्ताह (धनतेरस से लेकर भाई दूज तक) सुना जाता है, लेकिन इसका मुख्य गायन दीपावली की शाम को महालक्ष्मी पूजन के समय या उससे ठीक पहले किया जाता है। घरों में जब महिलाएं दीप प्रज्वलित करती हैं और उन्हें घर के कोने-कोने में रखती हैं, तब इस गीत को बजाया या गाया जाता है। यह गीत घर के वातावरण को अत्यंत शांत, पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

विशेषता (Feature) विवरण (Description)
गीत का शीर्षक दीवाली में दियरी जरवतानी
मुख्य देवी-देवता माता महालक्ष्मी, भगवान श्री गणेश
काव्य रूप भोजपुरी लोक भजन (Folk Devotional Song)
मुख्य संदेश अंधकार पर प्रकाश की विजय, आंतरिक शुद्धि, लोक कल्याण
प्रसिद्ध गायिका चंदा शर्मा
सांस्कृतिक क्षेत्र बिहार, पूर्वांचल (उत्तर प्रदेश), झारखंड
संबंधित आरती ॐ जय जगदीश हरे आरती, लक्ष्मी जी की आरती

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस गीत का मुख्य अर्थ है "दीपावली के पावन अवसर पर मैं माता लक्ष्मी के स्वागत के लिए मिट्टी के दीपक जला रही हूँ और उनकी आरती उतार रही हूँ।" यह गीत घर की सफाई, सजावट और माता लक्ष्मी के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

इस गीत को सुप्रसिद्ध भोजपुरी लोक गायिका चंदा शर्मा ने गाया है। उनकी मधुर आवाज ने इस पारंपरिक गीत को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।

मिट्टी का दीपक पंचतत्वों (मिट्टी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) का प्रतिनिधित्व करता है। यह अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान और समृद्धि के प्रकाश का प्रसार करने का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, मिट्टी के दीये जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस गीत में मुख्य रूप से धन और ऐश्वर्य की देवी माता महालक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश (रिद्धि-सिद्धि सहित) का आह्वान किया गया है।

भोजपुरी समाज में "गोतिया" का अर्थ अपने कुल, कुटुंब या सगे-संबंधियों से होता है। गीत में गायिका अपने सुहाग के साथ-साथ अपने पूरे कुटुंब की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना करती है, जो हमारी सामूहिक पारिवारिक भावना को दर्शाता है।

मूल रूप से यह भोजपुरी लोकगीत है, लेकिन इसकी मधुर धुन और सुंदर भावों के कारण इसे देश-विदेश में रहने वाले सभी भोजपुरी भाषी और अन्य संगीत प्रेमी भी दीपावली के अवसर पर बड़े चाव से सुनते हैं।

यह गीत मन को शांत करता है, भक्ति भाव जाग्रत करता है और घर के वातावरण को मांगलिक व सकारात्मक बनाता है। इसे सुनने से पूजा के समय एकाग्रता और आनंद की अनुभूति होती है।

गीत में गंगाजल, गोबर (आँगन लीपने के लिए), फूलों की माला, लड्डू, पेड़ा, मोदक, कपूर की बाती और सोने की थाली जैसी पारंपरिक पूजा सामग्रियों का उल्लेख किया गया है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "दीवाली में दियरी जरवतानी" गीत के साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इस सामग्री को तैयार करने में पारंपरिक भोजपुरी लोक साहित्य, वैदिक पूजा पद्धतियों और क्षेत्रीय लोक परंपराओं का संदर्भ लिया गया है। यह सामग्री पूर्णतः मौलिक और लोक-भावनाओं के अनुरूप है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री (Editorial Curated Content)

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भोजपुरी लोकगीत संग्रह एवं क्षेत्रीय सांस्कृतिक अध्ययन।
  • सनातन धर्म की दीपावली पूजन पद्धति एवं कार्तिक महात्म्य कथा।
  • श्रीमद्भगवद्गीता और पुराणों में वर्णित दीपदान का महत्व।
  • चंदा शर्मा के आधिकारिक भक्ति एल्बम और लोक संगीत संकलन।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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