Baadi Sher Par Sawaar Bhojpuri Devi Geet By MANOJ TIWARI 'MRIDUL' - सम्पूर्ण जुक बॉक्स परिचय एवं भक्ति भाव
भोजपुरी लोक संस्कृति और देवी उपासना के पावन संगम पर आधारित 'बाड़ी शेर पर सवार' (Baadi Sher Par Sawaar) मनोज तिवारी 'मृदुल' द्वारा स्वरबद्ध एक अत्यंत लोकप्रिय और ऊर्जावान भोजपुरी देवी गीत जुक बॉक्स (Devi Geet Jukebox) है। शारदीय और चैत्र नवरात्र के पवित्र अवसरों पर जब सम्पूर्ण उत्तर भारत, विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का जनमानस माँ दुर्गा की आराधना में लीन होता है, तब लोक कलाकारों के भजन एवं गीत इस भक्तिमय वातावरण को और अधिक जीवंत बना देते हैं। मनोज तिवारी 'मृदुल' ने अपनी ओजस्वी और मधुर वाणी से इस ऑडियो जुक बॉक्स के माध्यम से विंध्याचल, मैहर और माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों का सजीव चित्रण किया है। इस जुक बॉक्स में कुल सात चुनिंदा देवी गीत और भजन शामिल हैं, जिन्हें जाने-माने गीतकारों जैसे भोलानाथ गहमरी, साधुशरण ललित, जितेंद्र सिंह 'जीत' और स्वयं मनोज तिवारी 'मृदुल' ने अपने शब्दों से पिरोया है। टी-सीरीज़ (T-Series Bhakti Sagar) द्वारा प्रस्तुत यह ऑडियो अलबम न केवल माँ शेरावाली की महिमा का गुणगान करता है, बल्कि भोजपुरी भाषा के मधुर आंचल में लोक आस्था की गहरी जड़ों को भी प्रदर्शित करता है। नवरात्र के दिनों में माता के दरबार में हाजिरी लगाने, पंडालों में गूंजने और हर घर में माँ की महिमा का स्मरण करने के लिए यह जुक बॉक्स एक अमूल्य धरोहर है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस जुक बॉक्स के सभी गीतों, उनके रचनाकारों, संगीत निर्देशकों, आध्यात्मिक महत्व और भोजपुरी देवी गीत परंपरा पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सम्पूर्ण गीत एवं भजन लिरिक्स | Complete Devi Geet Jukebox Lyrics
टी-सीरीज़ प्रस्तुत - Baadi Sher Par Sawaar Bhojpuri Devi Geet Jukebox
सदियों से चली आ रही लोक परंपरा और आधुनिक भक्ति संगीत के इस अद्भुत समन्वय के सभी गीतों के मुख्य बोल निम्नलिखित हैं:
विंध्याचल मंदिर में (Vindhyachal Mandir Mein)
गीतकार एवं गायक: मनोज तिवारी 'मृदुल'
संगीत निर्देशक: विजय कपूर
विंध्याचल मंदिर में जागेS बतिया...
मैया के दरस करे आईल बाटे जातियां...
लाल चुनरिया सोहे अउर माथे बिंदिया...
झुकेला त्रिकूट पर्वत पर सगरी दुनिया...
मैया तोहरे चरनिया में मोर मनवा रमेला!
बाड़ी शेर पर सवार (Baadi Sher Par Sawaar)
गीतकार एवं गायक: मनोज तिवारी 'मृदुल'
संगीत निर्देशक: विजय कपूर
बाड़ी शेर पर सवार मोर माई शेरावाली...
दर्शन देबु कि ना देबु हो महतारी...
अखियां बिछवले बाड़ी भक्तन के टोली...
कब्बू सुनबु हे भवानी हमार बोली...
झूला झुलेली मैया मोर पियरकी चुनरिया में!
कैसे के आ ई तोहरा धाम (Kaise Ke Aai Tohra Dham)
गीतकार: भोलानाथ गहमरी | गायक: मनोज तिवारी 'मृदुल'
संगीत निर्देशक: विजय कपूर
कैसे के आई तोहरा धाम हे भवानी...
रस्ता में बहता दरिया अपार...
कैसे पार लगबू तू ही बताव हे...
पार लगावे वाली तू त तारनहार...
चरण कमल पर झुके संसार!
मैहर वाली मैया (Maihar Wali Maiya)
गीतकार: साधुशरण ललित | गायक: मनोज तिवारी 'मृदुल'
संगीत निर्देशक: विजय कपूर
मैहर वाली मैया के दर्शन पाके...
धन्य भईल मोर भाग हो...
त्रिकूट पर विराजे शारदा भवानी...
झूले ला हर भक्तन के लाग हो...
शारदा माई के महिमा अपार बा!
अर्जी पठाउले बानी (Arji Pathaule Baani)
गीतकार एवं गायक: मनोज तिवारी 'मृदुल'
संगीत निर्देशक: विजय कपूर
अर्जी पठाउले बानी मैया तोहरे दरबार में...
सुन लीहS पुकार मोरी संकट के भार में...
झोली पसार के बानी बइठल दुअरिया...
कब ले डेराईबू हे जग के महतारीया!
सभी के आसरा तोहार (Sabhi Ke Asra Tohar)
गीतकार: जितेंद्र सिंह 'जीत' | गायक: मनोज तिवारी 'मृदुल'
संगीत निर्देशक: विजय कपूर
सभी के आसरा तोहरे चरनन में मैया...
मैया मोरी सुन लीहS पुकार...
दुखवा हरे वाली तूही त भवानी...
पार लगाबू नइया हमार...
जग जननी तूही जगत के आधार!
चुनरिया लेहारे ना (Chunariya Lehare Na)
गीतकार: भोलानाथ गहमरी | गायक: मनोज तिवारी 'मृदुल'
संगीत निर्देशक: विजय कपूर
चुनरिया लेहारे ना मैया तोहर पवन पुरवैया में...
झुलेलन झुलुवा मोरी मईया भवानी...
भक्तन के भीड़ बाटे भारी दुअरिया...
जय हो शेरावाली महारानी!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth of Bhojpuri Devi Geet
मनोज तिवारी 'मृदुल' द्वारा गाए गए इन देवी गीतों में ग्रामीण भारत की सादगी, माँ के प्रति अनन्य प्रेम, विरह और समर्पण का अनूठा भाव झलकता है। भोजपुरी लोकगीतों की यह विशेषता रही है कि वे ईश्वर को किसी दूर आसमान की शक्ति नहीं, बल्कि अपने परिवार के सबसे करीबी सदस्य, अपनी 'मैया' और 'महतारी' के रूप में देखते हैं।
जब गायक 'बाड़ी शेर पर सवार' गाता है, तो वह उस आध्यत्मिक दृश्य का वर्णन करता है जहाँ माँ दुर्गा सिंह पर आरूढ़ होकर अपने भक्तों के सभी संकटों को दूर करने के लिए प्रकट होती हैं। विंध्याचल और मैहर जैसे शक्तिपीठों का उल्लेख इन गीतों में केवल भौगोलिक स्थानों के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक चेतना के जीवंत केंद्रों के रूप में किया गया है। भक्त अपनी असमर्थता और जीवन की कठिनाइयों का वर्णन करते हुए माँ से करुणा की भीख मांगता है—"कैसे के आई तोहरा धाम, रस्ता में बहता दरिया अपार।" यह जीवन रूपी भवसागर को पार करने की छटपटाहट है, जहाँ माँ ही एकमात्र तारनहार नजर आती हैं। 'चुनरिया लेहारे ना' गीत में प्रकृति और भक्ति का सुंदर सामंजस्य है, जहाँ पुरवैया हवा के झोंकों में माँ की लाल चुनरी लहराती है और पूरा वातावरण देवीमय हो जाता है।
गीत की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
यह ऑडियो जुक बॉक्स भोजपुरी भक्ति संगीत की स्वर्ण अवधि का प्रतिनिधित्व करता है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- लोक शैली और शास्त्रीय भक्ति का मेल: गीतों में लोक धुनों (Folk Tunes) की मिठास के साथ-साथ उच्च कोटि के भक्ति भाव का समावेश है।
- प्रसिद्ध शक्तिपीठों की वंदना: विंध्याचल (उत्तर प्रदेश) और मैहर (मध्य प्रदेश) के प्रसिद्ध त्रिकूट पर्वतों और माँ शारदा-विंध्यवासिनी के स्वरूप का सजीव वर्णन।
- शीर्ष कलाकारों का योगदान: भोलानाथ गहमरी और साधुशरण ललित जैसे दिग्गज गीतकारों के बोलों को मनोज तिवारी की अनूठी लोक-गायकी शैली ने अमर बना दिया है।
- नवरात्र उत्सव का अनिवार्य अंग: नवरात्रि के नौ दिनों में घरों, मंदिरों और दुर्गा पंडालों में गूंजने वाला यह एक आदर्श एल्बम है।
गीत गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Listen
इन पावन देवी गीतों को सुनने और इनके साथ संकीर्तन करने के लिए निम्नलिखित समय और विधियां अत्यंत उपयुक्त मानी जाती हैं:
- शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों में प्रातःकाल स्नान के पश्चात या संध्या आरती के समय इस जुक बॉक्स को बजाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
- माता की चौकी एवं जागरण: घरों में आयोजित होने वाली माता की चौकी, जवारा विसर्जन और मंडप पूजन के दौरान इन गीतों का आनंद लिया जा सकता है।
- दैनिक पूजा-आराधना: प्रातःकाल दीप प्रज्वलित करते समय मन को एकाग्र करने और माँ भगवती का स्मरण करने हेतु यह उत्तम माध्यम है।
गीत की जानकारी | Jukebox Song Information Table
| एल्बम का नाम (Album) | Baadi Sher Par Sawaar (बाड़ी शेर पर सवार) |
|---|---|
| गायक (Singer) | मनोज तिवारी 'मृदुल' (Manoj Tiwari 'Mridul') |
| संगीत निर्देशक (Music Director) | विजय कपूर (Vijay Kapoor) |
| प्रमुख गीतकार (Lyricists) | मनोज तिवारी 'मृदुल', भोलानाथ गहमरी, साधुशरण ललित, जितेंद्र सिंह 'जीत' |
| संगीत लेबल (Music Label) | टी-सीरीज़ भक्ति सागर (T-Series Bhakti) |
| भाषा (Language) | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| मुख्य विषय (Theme) | माँ दुर्गा, विंध्यवासिनी और मैहर वाली माता की भक्ति एवं वंदना |
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल हिंदी अर्थ (Simple Meaning) | संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| महतारी | माता, जननी | माँ दुर्गा के लिए स्नेहपूर्ण संबोधन |
| तारनहार | पार लगाने वाला, उद्धारकर्ता | संसार रूपी भवसागर से पार लगाने वाली देवी |
| अर्जी | प्रार्थना, निवेदन, विनती | भक्त द्वारा अपनी मनोकामना पत्र रूप में रखना |
| पुरवैया | पूर्व दिशा से बहने वाली सुहानी हवा | ऋतु और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक |
| त्रिकूट | तीन चोटियों वाला पर्वत | विंध्याचल और मैहर स्थित पवित्र पर्वत शिखर |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
भोजपुरी क्षेत्र में लोक संगीत हमेशा से समाज की धड़कन रहा है। जब लोक संगीत में भक्ति रस मिल जाता है, तो वह जन-जन की जुबान पर चढ़ जाता है। मनोज तिवारी 'मृदुल' ने अपनी गायकी के जरिए उत्तर भारत की संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाई है। 'बाड़ी शेर पर सवार' जैसे गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये मनुष्य के भीतर छिपे अहंकार को मिटाकर उसे विनम्रता और शरणागति की ओर ले जाते हैं। जब एक सामान्य ग्रामीण या शहर का व्यक्ति इन गीतों को सुनता है, तो उसका मन अपनी मां और जगत जननी माँ अम्बे के चरणों में लीन हो जाता है। यह संस्कृति पीढ़ियों से संस्कारों के आदान-प्रदान का काम करती चली आ रही है।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons & Spiritual Message
- अटूट विश्वास: कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर और माँ शक्ति पर अटूट विश्वास रखना चाहिए।
- विनम्रता और समर्पण: भक्त की पुकार तभी सुनी जाती है जब उसका हृदय अहंकार से मुक्त होकर पूर्णतः समर्पित होता है।
- लोक संस्कृति का सम्मान: अपनी भाषा, माटी और लोक परंपराओं से जुड़े रहकर ही आध्यात्मिक और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है।
- संकट में धैर्य: जीवन रूपी दरिया पार करते समय विचलित न होकर माँ के आशीर्वाद का स्मरण करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह मार्गदर्शिका लोक संगीत, भोजपुरी भक्ति परंपरा और देवी उपासना के सांस्कृतिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रामाणिक जानकारियों के साथ संकलित की गई है। इसका उद्देश्य पाठकों को संगीत के साथ-साथ उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गहराई से परिचित कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- टी-सीरीज़ भक्ति सागर आधिकारिक ऑडियो आर्काइव
- भोजपुरी लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक परंपरा के ग्रंथ
- विंध्याचल एवं मैहर शक्तिपीठ के ऐतिहासिक तथा धार्मिक संदर्भ
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