Chhath Puja Geet बुधवार विशेष (भगवान श्री गणेश व बुध देव)

पूजब लक्ष्मी माई के

पढ़ें पूजब लक्ष्मी माई के का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

सनातन संस्कृति और लोक पर्वों की श्रृंखला में दीपावली और छठ पूजा का विशेष स्थान है, जहाँ जगत जननी आदिशक्ति माँ लक्ष्मी की उपासना का अटूट विधान है। लोक गायिका अनु दुबे की सुमधुर वाणी में गाया गया यह पारंपरिक गीत और भजन "पूजब लक्ष्मी माई के" माँ महालक्ष्मी की महिमा, करुणा और कृपा का अत्यंत मनोहारी बखान करता है। यह भजन न केवल दीपावली और लोक आस्था के महापर्व छठ के पावन अवसर पर गूँजता है, बल्कि हर उस घर में श्रद्धा का दीप जलाता है जहाँ सुख-समृद्धि, रिद्धि-सिद्धि और वैभव की कामना की जाती है। इस विस्तृत एवं समग्र मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय भजन के संपूर्ण बोल, भावार्थ, आध्यात्मिक महत्व, लोक परंपराओं और महालक्ष्मी उपासना के रहस्यों पर विस्तार से चर्चा करेंगे, जिससे साधક का जीवन भक्ति के प्रकाश से आलोकित हो सके।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

अनु दुबे प्रसिद्ध देवी गीत - पूजब लक्ष्मी माई के (Anu Dubey Laxmi Mata Song)


मंगलाचरण एवं मुखड़ा:

निर्मल मन करि ध्यान लगाइके,
मिलि सब जन पूजब लक्ष्मी माई के।
दीपावली के पावन तिहार पर,
जोति जगाइके, मनाइके, पूजब लक्ष्मी माई के।।

प्रथम अंतरा:

धन-धान्य और वैभव की दाती, कमल पुष्प जिनसन मन भाति।
हाथ में खड़ग त्रिशूल विराजे, साथ गणेश-कुबेर जी साजे।
चरण धोइके, अलख जगाइके,
मिलि सब जन पूजब लक्ष्मी माई के।।

द्वितीय अंतरा:

घर-आंगन में रंगोली सजाव, दीपक से हर अंधियारा भगाव।
मैया के चरणों में शीश झुकाव, जीवन में सुख-शांति लेइ आव।
सुमरन गाइके, अरज सुनाइके,
मिलि सब जन पूजब लक्ष्मी माई के।।

तृतीय अंतरा:

गरीब हो या अमीर सब एक समान, मैया की कृपा से पावे वरदान।
जो सच्चे मन से ध्यान लगावे, माता उसके भंडार भरावे।
शीश नवाइके, भोग लगाइके,
मिलि सब जन पूजब लक्ष्मी माई के।।

अंतिम चरण / समापन:

अनु दुबे गावे मैया की महिमा अपार, मैया उतारे सब भक्तों का पार।
जय लक्ष्मी माता, जय महालक्ष्मी माता,
सब मिलि बोलिए जय लक्ष्मी माता।।

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

अनु दुबे द्वारा प्रस्तुत इस लोक भजन "पूजब लक्ष्मी माई के" का मूल भाव सामूहिक सहभागिता, शुद्धता और माँ लक्ष्मी के प्रति अनन्य समर्पण है। भजन की शुरुआत में गीतकार और गायिका भक्तों से आह्वान करती हैं कि वे अपने मन को निर्मल (पवित्र) करके, पूरे ध्यान और श्रद्धा के साथ माँ लक्ष्मी का पूजन करें। दीपावली और लोक पर्वों के विशेष संदर्भ में यह भजन बताता है कि जब पूरा समाज मिलकर दीपक की ज्योति जलाता है, तो अंधकार स्वतः ही दूर हो जाता है।

मध्यवर्ती पंक्तियों में माता महालक्ष्मी के स्वरूप का वर्णन किया गया है। वे केवल धन-धान्य की ही देवी नहीं हैं, बल्कि साधक के जीवन में आध्यात्मिक वैभव और मानसिक शांति की भी प्रदात्री हैं। उनके दरबार में ऊंच-नीच का भेद समाप्त हो जाता है। जो भी भक्त सच्चे हृदय से अपनी अर्जी माता के चरणों में रखता है, माँ उसके सभी कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन हमें सिखाता है कि भौतिक समृद्धि के साथ-साथ आंतरिक संतोष और परोपकार की भावना भी माता लक्ष्मी की सच्ची पूजा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

इस पारंपरिक लोक भजन की विशेषता इसकी सरलता और गहराई दोनों में निहित है। यह गीत भोजपुरी और हिंदी भाषी क्षेत्रों की लोक संस्कृति में गहराई से रचा-बसा है। इसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:

  • लोक संस्कृति का समन्वय: यह भजन पारंपरिक लोक शैली और शास्त्रीय भक्ति भाव का सुंदर संगम है।
  • सामूहिक उत्सव का संदेश: 'मिलि सब जन पूजब' पंक्ति समाज में एकता, भाईचारा और मिलजुलकर पर्व मनाने का संदेश देती है।
  • दीपावली और छठ का पर्व संदर्भ: यह गीत दीपावली के महालक्ष्मी पूजन तथा छط पूजा गीत परंपराओं के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है।
  • मानसिक शुद्धि पर बल: भजन का आरंभ ही 'निर्मल मन' की शर्त से होता है, जो भक्ति की पहली सीढ़ी है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को सुनने और गाने के लिए निम्नलिखित समय और विधियां अत्यंत उपयुक्त मानी जाती हैं:

  • दीपावली पूजन के दौरान: लक्ष्मी-गणेश पूजन के समय रात्रि वेला में इसे पृष्ठभूमि में बजाया जा सकता है।
  • शुक्रवार व्रत एवं संध्या वंदन: माता लक्ष्मी के विशेष वार शुक्रवार की संध्या को घर में दीप जलाकर इसे गाया जा सकता है।
  • पारिवारिक अनुष्ठान और महिला मंगल गीत: पर्व-त्योहारों के अवसर पर महिलाएँ समवेत स्वर में इस गीत को गाकर वातावरण को भक्तिमय बना सकती हैं।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन की केंद्र बिंदु जगत जननी माँ महालक्ष्मी हैं, जिन्हें भगवान विष्णु की अर्धांगिनी और श्री, प्रज्ञा, तथा कमलेश्वरी के रूप में पूजा जाता है। इसके साथ ही इस भजन में भगवान कुबेर और विघ्नहर्ता गणेश का भी स्मरण किया जाता है, क्योंकि दीपावली पूजन में लक्ष्मी के साथ इन देवताओं की अनिवार्यता होती है। लोक गायिका अनु दुबे ने अपनी सुरीली आवाज से इस पारंपरिक शैली को आधुनिक डिजिटल माध्यमों तक पहुँचाया है।

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह रचना सदियों से चली आ रही लोक परंपरा और आधुनिक संगीत संयोजन का एक बेहतरीन उदाहरण है। अनु दुबे जैसी प्रतिष्ठित लोक कलाकारों ने जब इस विधा को अपनी आवाज दी, तो यह घर-घर में प्रसिद्ध हो गया। इसकी पृष्ठभूमि मुख्य रूप से ग्रामीण भारत की उस संस्कृति पर आधारित है जहाँ हर पर्व उल्लास, गीत और सामूहिक सहभागिता के साथ मनाया जाता है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा लोक-सुलभ हिंदी और भोजपुरी के मिश्रित स्वरूप (संस्कृतनिष्ठ लोक भाषा) में है। काव्य शैली अत्यंत सरल, प्रवाहमयी और संगीतात्मक है। तुकबंदी इतनी सहज है कि कोई भी श्रवणकर्ता इसे आसानी से गुनगुना सकता है। इसमें रूपक और उपमा अलंकारों का स्वाभाविक प्रयोग हुआ है, जैसे ज्योति जलाना आंतरिक प्रकाश का प्रतीक है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

भजन हमें केवल गाने या सुनने की प्रेरणा नहीं देता, बल्कि जीवन के गहरे सत्यों से भी अवगत कराता है:

  • शुद्ध आचरण: धन तभी फलीभूत होता है जब मन निर्मल और आचरण नैतिक हो।
  • सबकी उन्नति: माता सबके भंडार भरती हैं, इसलिए संकुचित न होकर समग्र कल्याण की भावना रखनी चाहिए।
  • अंधकार पर प्रकाश की विजय: दीपक जलाने का संदेश है कि ज्ञान और भक्ति से जीवन का अंधकार मिटाया जाए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
निर्मल मन छल-कपट रहित शुद्ध हृदय पूजा के लिए मानसिक तैयारी
अलख जगाइके जागृति लाना या चेतना जगाना आध्यात्मिक जागरण
वैभव सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और धन माता लक्ष्मी की कृपा का फल
अरज प्रार्थना या विनती भक्त द्वारा ईश्वर के समक्ष निवेदन

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"निर्मल मन करि ध्यान लगाइके, मिलि सब जन पूजब लक्ष्मी माई के।"
इस पंक्ति का अर्थ है कि यदि आप माँ लक्ष्मी की कृपा पाना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम अपने हृदय के द्वेष और अहंकार को मिटाकर शुद्ध मन से उनका ध्यान करें और समाज के सभी लोग मिलकर माता की आराधना करें।

"धन-धान्य और वैभव की दाती, कमल पुष्प जिनसन मन भाति।"
माँ लक्ष्मी को संसार में समस्त प्रकार के धन, अन्न और ऐश्वर्य देने वाली माना गया है। उनका आसन और प्रिय पुष्प कमल है, जो यह सिखाता है कि कीचड़ (कठिन परिस्थितियों) में रहकर भी कैसे कमल की तरह पवित्र और सुंदर रहा जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं मंत्र | Related Mantra & Shlok

माता लक्ष्मी की आराधना के साथ निम्नलिखित प्रसिद्ध लक्ष्मी गायत्री मंत्र का जाप करने से भजन का फल कई गुना बढ़ जाता है:

"ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नी च धीमहि तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॐ॥"

इसके साथ ही नियमित रूप से माँ लक्ष्मी के मूल बीज मंत्र "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का १०८ बार जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

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विषय विवरण
भजन का नाम पूजब लक्ष्मी माई के (Poojab Laxmi Maai Ke)
प्रसिद्ध कलाकार / गायिका अनु दुबे (Anu Dubey)
आराध्य देवी माँ महालक्ष्मी (Maa Mahalakshmi)
भाषाभोजपुरी / लोक हिंदी
मुख्य विषय दीपावली, लोक पर्व और लक्ष्मी पूजन
भक्ति भाव समर्पण, उल्लास और सामूहिक आराधना
उपयुक्त अवसर दीपावली, शुक्रवार व्रत, धनतेरस

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन मुख्य रूप से दीपावली, धनतेरस, और माता लक्ष्मी से जुड़े व्रत-त्योहारों के अवसर पर गाया और सुना जाता है।

इस लोकप्रिय भजन को प्रसिद्ध लोक और भक्ति गायिका अनु दुबे (Anu Dubey) ने अपनी मधुर आवाज से सजाया है।

माता लक्ष्मी की सच्ची उपासना से न केवल भौतिक सुख, धन और धान्य की प्राप्ति होती है, बल्कि मन में शांति, संतोष और आध्यात्मिक समृद्धि का भी वास होता है।

हाँ, इसे विशेषकर संध्याकाल या पूजा के समय और किसी भी मांगलिक उत्सव पर गाया जा सकता है।

दीपावली की रात्रि में माता लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश, भगवान कुबेर और माँ सरस्वती का पूजन अनिवार्य माना गया है।

"ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" तथा लक्ष्मी गायत्री मंत्र का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है।

लोक गीत हमारी सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखते हैं और जटिल धार्मिक अनुष्ठानों को आम जनमानस तक सरल भाषा में पहुँचाते हैं।

इस भजन का मुख्य संदेश शुद्ध मन से सामूहिक रूप से ईश्वर की आराधना करना और समाज में प्रेम व प्रकाश फैलाना है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह मार्गदर्शिका और भजन पाठ पारंपरिक लोक साहित्य, सांस्कृतिक अनुष्ठानों और संगीत परंपराओं के गहन अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। इसमें दी गई सभी सामग्रियां भक्तों को आध्यात्मिक प्रेरणा देने के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। यह सामग्री संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसे आधुनिक पाठकों की रुचि और प्रामाणिकता को ध्यान में रखकर अद्यतन किया गया है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • सनातन लोक संस्कृति और पर्व परंपराएं
  • देवीभागवत पुराण एवं महालक्ष्मी व्रत कथा संग्रह
  • पारंपरिक भोजपुरी एवं हिंदी भक्ति गीत संकलन
  • अनु दुबे के लोकगीत और संगीत एलबम के संदर्भ

संबंधित भजन एवं लेख

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 14 Oct 2026

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