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भर दिहले गोदिया छठी मईया सबसे हिट

पढ़ें भर दिहले गोदिया छठी मईया सबसे हिट का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आध्यात्मिक महत्व भक्तिलोक पर।

Bhojpuri Devi Geet / Chhath Special

संपूर्ण गीत, बोल और भक्ति भाव

प्रकाशन तिथि: नवम्बर 2021 | श्रेणी: भोजपुरी भक्ति गीत / छठी मईया भजन | संकलन: Bhaktilok Editorial Team

लोक आस्था के महापर्व छठी मइया की महिमा अपरंपार है और भोजपुरी संगीत जगत में इस पावन पर्व पर आधारित गीतों का एक विशिष्ट स्थान रहा है। अंतरा सिंह प्रियंका (Antra Singh Priyanka) द्वारा स्वरबद्ध तथा लोक संगीत की धुनों पर सजा यह अत्यंत ही पावन लोकगीत "भर दिहले गोदिया छठी मईया सबसे हिट" छठी मइया के दरबार में अंचल पसारकर संतान सुख और मंगलमय जीवन की कामना करने वाली हर माता-बहनों के अंतर्मन की सच्ची पुकार है। लोकगीतों की यह परंपरा पूर्वांचल, बिहार और झारखंड की संस्कृति की रीढ़ है, जहाँ छठी मैया को साक्षात प्रकृति और सूर्य देव की शक्ति के रूप में पूजा जाता है। इस भजन/गीत के माध्यम से साधक अपनी श्रद्धा, उपवास की कठोर साधना और मइया के प्रति अनन्य प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं। यह गीत न केवल सुनने में कर्णप्रिय है, बल्कि यह लोक मानस में मातृत्व, त्याग, सेवा और अटूट विश्वास के भावों को भी प्रगाढ़ करता है।

जब कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, तब संपूर्ण वातावरण छठी मइया के गीतों से गूंज उठता है। ऐसे पावन अवसरों पर यह गीत हर व्रती के चेहरे पर संतोष और आंखों में श्रद्धा के आंसू ले आता है। इस विस्तृत लेख में हम इस लोकप्रिय गीत के संपूर्ण बोल (Lyrics), इसका सरल हिंदी अर्थ, सांस्कृतिक महत्व और महापर्व से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियों को प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

स्थाई (म-खड़ा / Refrain):

घाट पर सोहे केकरा दउरा कवन भाग के जागल बा,
भर दिहले गोदिया छठी मईया सबसे हिट लागल बा!
अरे बान्हल बिया नियम धरम से सोहागिन सूप सजइले बा,
छठी मइया के महिमा देखS जग में नाम कमाइले बा!


अंतरा 1:

बरसा बरसि से आस लगइले, दुआरा पर ढेरा दउरा सजइले,
रोवे जिया जब गोदिया खाली, मइया सुनली अरज हमारी।
छठी मइया अईली द्वारे, भाग खुल गईले हमारे,
भर दिहले गोदिया छठी मईया सबसे हिट लागल बा!


अंतरा 2:

केरवे के पात पर उगलन सुरुज मलखा,
छठी मइया के बरतिया धइले सब कुल बलखा।
निर्मल मन से जे जे धइले, मनवां वांछित फल ओहू मिलैले,
भर दिहले गोदिया छठी मईया सबसे हिट लागल बा!


समापन / अंत:

अंतरा सिंह प्रियंका के सुर में गूंजे गान,
छठी मइया के चरणन में समर्पित प्राण!
बोलो छठी मइया की जय! सूर्य देव की जय!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह लोकगीत एक भक्त और छठी मइया के बीच के संवाद तथा मइया की असीम अनुकंपा का अत्यंत सजीव चित्रण प्रस्तुत करता है। गीत के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि जो भी माता पूरी निष्ठा, पवित्रता और नियम-धर्म के साथ खरना और अष्टयाम का यह कठिन व्रत रखती है, छठी मइया उसकी सूनी गोद को अवश्य भर देती हैं।

भावार्थ: घाट पर सजे हुए टोकरी (दउरा) और व्रतियों की लंबी कतार को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि उनका भाग्य जाग उठा है। मइया ने उनकी झोली खुशियों से भर दी है और यह लोकगीत और यह पर्व संसार में सबसे श्रेष्ठ और अनूठा प्रतीत हो रहा है। वर्षों की तपस्या और मन्नतों के बाद जब छठी मइया भक्त के द्वार पर अपनी कृपा बरसाती हैं, तो सारा दुख कपूर की तरह उड़ जाता है। कर्च के पत्तों पर सुशोभित भगवान भास्कर (सूर्य देव) को अर्घ्य देने की यह परंपरा हमारी प्राचीन संस्कृति की अमूल्य थाती है। निर्मल हृदय से जो भी इस व्रत को करता है, उसे उसकी कामना के अनुसार संतान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत का मूल भाव मातृत्व की लालसा, अटूट विश्वास और छठी मैया के प्रति पूर्ण समर्पण है। लोक संस्कृति में छठी मइया को बाल-गोपाल की रक्षा करने वाली और संतान को दीर्घायु प्रदान करने वाली जगत जननी माना गया है। यह गीत समाज को यह संदेश देता है कि कठिन से कठिन समय में भी यदि ईश्वर और प्रकृति के प्रति आस्था बनी रहे, तो असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। धैर्य, नियम-संयम और शुद्धता इस व्रत और गीत के केंद्र में हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

गीत का नाम भर दिहले गोदिया छठी मईया सबसे हिट (Bhar Dihale Godiya Chhathi Maiya Sabse Hit)
गायिका अंतरा सिंह प्रियंका (Antra Singh Priyanka)
शैली / विधा भोजपुरी छठी गीत / लोकगीत / Bhojpuri Devi Geet
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य विषय छठी मइया की महिमा, संतान प्राप्ति, लोक आस्था
पर्व प्रसंग छठ पूजा (Chhath Puja Mahaparv)

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / प्रयोग
दउरा बांस का बना हुआ सूप या टोकरी पूजा की सामग्री सजाने के लिए प्रयुक्त
सोहागिन सौभाग्यवती स्त्री, सुहागन व्रत करने वाली माताएं
अरज प्रार्थना, विनती मइया से संतान और सुख की गुहार
केरवे के पात केले का पत्ता जिस पर प्रसाद रखकर भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है
मलखा / भास्कर सूर्य देव षष्ठी तिथि को पूजे जाने वाले देवता

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, पर्यावरण, स्वच्छता और सूर्योपासना का सबसे बड़ा उत्सव है। इस दौरान गाए जाने वाले लोकगीत वेदों और पुराणों की ऋचाओं जितने ही प्रभावशाली माने जाते हैं क्योंकि इनमें आम जनमानस की सीधी भाषा में ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त होती है। अंतरा सिंह प्रियंका द्वारा गाया गया यह गीत आधुनिकता के दौर में भी पारंपरिक लोक संस्कृति को सहेजने का एक सुंदर प्रयास है। यह गीत नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और क्षेत्रीय लोक संगीत से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सनातन संस्कृति में छठी मइया (माता षष्ठी) को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और बच्चों की रक्षक देवी माना गया है। ऐसे गीतों का श्रवण करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मन को असीम शांति मिलती है। इसी प्रकार के अन्य पारंपरिक और आधुनिक लोकगीतों के आनंद के लिए आप भक्ति गाना भोजपुरी में और Latest Bhakti Song के हमारे विशेष संग्रह देख सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • अटूट विश्वास: कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर और प्रकृति पर भरोसा नहीं छोड़ना चाहिए।
  • नियम और अनुशासन: जीवन में सफलता और शांति के लिए संयम, पवित्रता और अनुशासन अनिवार्य हैं।
  • कृतज्ञता: जीवन में सुख-समृद्धि मिलने पर प्रकृति और ईश्वरीय शक्ति के प्रति हमेशा आभार व्यक्त करना चाहिए।
  • सांस्कृतिक जुड़ाव: अपनी मातृभाषा और लोक परंपराओं का सम्मान करना हमारी पहचान को मजबूत करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह लोकप्रिय गीत प्रसिद्ध भोजपुरी गायिका अंतरा सिंह प्रियंका (Antra Singh Priyanka) द्वारा गाया गया है।

छठी मइया की मुख्य पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाए जाने वाले 'छठ महापर्व' के दौरान की जाती है।

छठ पूजा में मुख्य रूप से भगवान सूर्य (सूर्य नारायण) और प्रकृति की देवी षष्ठी मैया की उपासना की जाती है।

इस गीत का मुख्य संदेश छठी मइया की महिमा, व्रतियों के अटूट विश्वास और मइया द्वारा उनकी मनोकामनाओं को पूर्ण करने का उत्सव मनाना है।

ऐसे पावन गीत मुख्य रूप से छठ पर्व के दौरान घाटों पर, रेडियो, संगीत प्लेटफार्मों तथा Bhaktilok जैसी धार्मिक वेबसाइटों पर लिरिक्स के साथ उपलब्ध होते हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख लोक आस्था और भोजपुरी संस्कृति के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसमें गीत के मूल शब्दों, उसकी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और धार्मिक महत्व को प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत किया गया है ताकि पाठकों को संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके।

स्रोत एवं संदर्भ

  • 1. पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत संग्रह एवं मौखिक परंपरा
  • 2. सनातन संस्कृति एवं छठ महापर्व अनुष्ठान पद्धति
  • 3. क्षेत्रीय संगीत एवं लोक आस्था ग्रंथ

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 10 Oct 2026

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