Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Wo Hai Kitni Deendayal Sakhi Tujhe Kya Batlaau

पढ़ें Wo Hai Kitni Deendayal Sakhi Tujhe Kya Batlaau | Lakhbir Singh Lakkha | Devi Bhajan 2021 का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा विधि एवं आ

"वो है कितनी दीनदयाल सखी तुझे क्या बतलाऊं" (Wo Hai Kitni Deendayal Sakhi Tujhe Kya Batlaau) केवल एक भजन नहीं, बल्कि एक भक्त के हृदय की वह पुकार है जो साक्षात् आदि शक्ति के ममतामयी स्वरूप का साक्षात्कार कराती है। सुप्रसिद्ध भजन सम्राट लखबीर सिंह लख्खा की ओजस्वी और भावपूर्ण आवाज में गाया गया यह भजन 'प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी' एल्बम का एक अनमोल रत्न है। इस भजन में भक्त अपनी सखी (या स्वयं के अंतर्मन) को संबोधित करते हुए माता दुर्गा के उस 'दीनदयाल' स्वरूप का वर्णन कर रहा है, जो दीन-दुखियों पर अकारण ही करुणा बरसाती हैं। सनातन धर्म में देवी को 'करुणासिंधु' और 'भक्तवत्सला' कहा गया है, और यह गीत उसी दार्शनिक सत्य को सरल शब्दों में पिरोता है। इस लेख में हम इस भजन के गहरे आध्यात्मिक अर्थ, इसकी काव्य शैली और देवी भक्ति के विभिन्न आयामों पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मुखड़ा:

वो है कितनी दीनदयाल सखी तुझे क्या बतलाऊं,
वो है कितनी भाग्यशाल सखी तुझे क्या बतलाऊं।
मेरी मैया शेरों वाली, मेरी मैया मेहरां वाली,
वो है कितनी दीनदयाल सखी तुझे क्या बतलाऊं।

अंतरा 1:

जब जब भी मैंने पुकारा, दौड़ी आई मेरी मैया,
मझधार में डूबी नैया, पार लगाई मेरी मैया।
वो है कितनी ममतामयी सखी तुझे क्या बतलाऊं,
वो है कितनी दीनदयाल सखी तुझे क्या बतलाऊं।

अंतरा 2:

खाली झोली भर देती है, बिगड़ी बात बना देती है,
अपने भक्तों के कष्टों को, पल में दूर भगा देती है।
वो है कितनी शक्तिशाली सखी तुझे क्या बतलाऊं,
वो है कितनी दीनदयाल सखी तुझे क्या बतलाऊं।

अंतरा 3:

लख्खा भी चरणों का चेला, मैया ने हाथ पकड़ा है,
दुनिया के इस मेले में, मैया ने साथ पकड़ा है।
वो है कितनी मेहरां वाली सखी तुझे क्या बतलाऊं,
वो है कितनी दीनदयाल सखी तुझे क्या बतलाऊं।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

इस भजन का भावार्थ अत्यंत गहरा और शरणागति के सिद्धांत पर आधारित है। यहाँ भक्त अपनी सखी से कहता है कि माता की कृपा का वर्णन शब्दों में करना असंभव है।

दीनदयाल और भाग्यशाल स्वरूप

भजन की शुरुआत में 'दीनदयाल' शब्द का प्रयोग किया गया है। 'दीन' का अर्थ है वह जो असहाय है, और 'दयाल' का अर्थ है दया करने वाली। माता दुर्गा केवल असुरों का संहार करने वाली चंडी ही नहीं हैं, बल्कि वे अपने भक्तों के लिए अत्यंत कोमल हृदय वाली माँ भी हैं। भक्त कहता है कि वह कितनी 'भाग्यशाल' (सौभाग्य प्रदान करने वाली) है, इसका अनुमान लगाना भी कठिन है।

संकट में सहायक (मझधार में नैया)

जीवन को एक सागर और मनुष्य के अस्तित्व को एक 'नैया' (नाव) माना गया है। जब संसार के थपेड़ों से भक्त की जीवन-नौका डूबने लगती है, तब केवल जगदम्बा ही वह शक्ति हैं जो उसे पार लगाती हैं। यहाँ 'पुकार' का अर्थ केवल शब्द नहीं, बल्कि हृदय की व्याकुलता है।

ममता और शक्ति का संगम

भजन में माता को 'ममतामयी' और 'शक्तिशाली' दोनों कहा गया है। यह देवी के दो प्रमुख पक्षों को दर्शाता है: 'सौम्य' और 'उग्र'। जहाँ वे अपने भक्तों के लिए शीतल छाया की तरह ममतामयी हैं, वहीं उनके दुखों और शत्रुओं के लिए वे अत्यंत शक्तिशाली और संहारक हैं।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस भजन की मुख्य भावना 'वात्सल्य' और 'आत्म-निवेदन' है।

  • अटूट विश्वास: यह गीत संदेश देता है कि यदि विश्वास सच्चा हो, तो माँ दौड़ी चली आती है।
  • दीनता का स्वीकार: भक्त स्वयं को 'दीन' (तुच्छ) मानकर माँ की शरण में जाता है, जो कि भक्ति मार्ग की पहली सीढ़ी है।
  • कृतज्ञता: लखबीर सिंह लख्खा ने इस भजन के माध्यम से अपनी सफलता और जीवन का श्रेय माता के चरणों में अर्पित किया है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण जानकारी
गीत का नाम वो है कितनी दीनदयाल सखी तुझे क्या बतलाऊं
गायक लखबीर सिंह लख्खा (Lakhbir Singh Lakkha)
एल्बम प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी
गीतकार गुरु जी राम लाल शर्मा, सरल कवि, संतोष सिंह
संगीत निर्देशक सुरिंदर कोहली
संगीत लेबल टी-सीरीज (T-Series)
भाषा हिंदी (मिश्रित पंजाबी पुट)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस भजन की सफलता के पीछे तीन प्रमुख स्तंभ हैं:

  1. लखबीर सिंह लख्खा: उनकी बुलंद आवाज और माता के प्रति उनका समर्पण इस भजन को जीवंत बना देता है। लख्खा जी ने देवी भजनों की एक नई शैली विकसित की है जो शास्त्रीय और लोक संगीत का मिश्रण है।
  2. सुरिंदर कोहली: संगीत निर्देशक के रूप में उन्होंने ढोलक, मंजीरा और सिंथेसाइजर का ऐसा तालमेल बिठाया है जो सुनने वाले को झूमने पर मजबूर कर देता है।
  3. गीतकार (गुरु जी राम लाल शर्मा): इनके शब्द सरल हैं लेकिन उनमें भक्ति का रस कूट-कूट कर भरा है। 'सखी' संबोधन का प्रयोग इसे एक व्यक्तिगत संवाद का रूप देता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द अर्थ संदर्भ
दीनदयाल गरीबों/असहायों पर दया करने वाली माता का करुणामयी रूप
मेहरां वाली कृपा बरसाने वाली (पंजाबी शब्द 'मेहर' से) देवी की कृपा दृष्टि
मझधार नदी या समुद्र के बीच की धारा जीवन के कठिन संकट
चेला शिष्य या सेवक भक्त का समर्पण
भाग्यशाल सौभाग्य प्रदान करने वाली माता का वरदहस्त

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

यह भजन भारतीय समाज में, विशेषकर उत्तर भारत में, जागरण और चौकियों का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।

  • शक्ति पूजा का आधार: यह भजन 'देवी महात्म्य' के उस श्लोक की याद दिलाता है जहाँ कहा गया है - "शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे" (अर्थात: शरण में आए हुए दीनों और पीड़ितों की रक्षा में तत्पर रहने वाली)।
  • सांस्कृतिक एकता: पंजाबी और हिंदी शब्दों का मेल इसे पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक लोकप्रिय बनाता है।
  • मनोवैज्ञानिक प्रभाव: यह भजन अवसाद या संकट के समय व्यक्ति को यह विश्वास दिलाता है कि वह अकेला नहीं है, एक ईश्वरीय शक्ति उसका हाथ थामे हुए है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  1. धैर्य और विश्वास: जीवन की 'नैया' जब मझधार में हो, तो घबराने के बजाय उस परम शक्ति पर विश्वास रखना चाहिए।
  2. अहंकार का त्याग: स्वयं को 'चेला' या 'दीन' मानना अहंकार को समाप्त करता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति होती है।
  3. सकारात्मकता: यह गीत सिखाता है कि 'बिगड़ी बात' भी बन सकती है, बस पुकार में सच्चाई होनी चाहिए।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यद्यपि भक्ति का कोई समय नहीं होता, फिर भी यह भजन निम्नलिखित अवसरों पर विशेष रूप से गाया जाता है:

  • नवरात्रि: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान माता के पंडालों में यह गीत गूंजता है।
  • माता की चौकी/जागरण: रात भर चलने वाले जागरणों में लख्खा जी के इस भजन पर भक्त झूम उठते हैं।
  • मंगलबार और शुक्रवार: ये दिन देवी की पूजा के लिए विशेष माने जाते हैं।
  • दैनिक पूजा: कई भक्त अपने दिन की शुरुआत इस भजन को सुनकर करते हैं ताकि उन्हें मानसिक शक्ति मिल सके।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य देवता माता दुर्गा / शेरोंवाली माता
मुख्य भाव करुणा और शरणागति
प्रसिद्ध पंक्ति "मझधार में डूबी नैया, पार लगाई मेरी मैया"
संगीत शैली भक्ति सुगम संगीत
उपलब्धता यूट्यूब, स्पॉटिफाई, टी-सीरीज भक्ति सागर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भजन के मूल और सबसे प्रसिद्ध गायक लखबीर सिंह लख्खा हैं।

यह भजन टी-सीरीज द्वारा जारी प्रसिद्ध एल्बम "प्यारा सजा है तेरा द्वार भवानी" से है।

'सखी' का अर्थ सहेली या मित्र है। यहाँ भक्त अपने मन की बात किसी प्रिय पात्र से साझा कर रहा है, जो भक्ति की 'सख्य भाव' परंपरा को दर्शाता है।

हाँ, यह नवरात्रि के दौरान सबसे अधिक सुने जाने वाले भजनों में से एक है।

यह पंजाबी मूल का शब्द है, जिसका अर्थ है "कृपा करने वाली" या "दया बरसाने वाली"।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख भक्तिलोक के विद्वानों द्वारा धार्मिक ग्रंथों और संगीत विशेषज्ञों के परामर्श से तैयार किया गया है। लखबीर सिंह लख्खा के भजनों ने भारतीय भक्ति संगीत को एक नई ऊंचाई दी है। "वो है कितनी दीनदयाल" भजन विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रेरणादायक है जो जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे हैं। यह गीत हमें याद दिलाता है कि ईश्वर की शक्ति हमारी कल्पना से कहीं अधिक दयालु है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।

स्रोत एवं संदर्भ

  • श्रीमद्देवी भागवत पुराण - देवी की करुणा का वर्णन।
  • टी-सीरीज भक्ति सागर - आधिकारिक संगीत विवरण।
  • लखबीर सिंह लख्खा आधिकारिक डिस्कोग्राफी।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

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