Pawan Singh, Priyanka Singh | Ft. Jiya Roy | Bhojpuri Devi Geet 2021
URL Slug: 2021/10/video-pawan-singh-priyanka-singh-ft.html | Categories: bhakti gana bhojpuri mein, Devi Bhajan, Devi Geet, Latest Bhakti Song
भजन परिचय एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती का समवेत स्वरूप जगत जननी माँ काली के चरणों में समर्पित यह पावन भोजपुरी देवी गीत "काली माई किरिया" भोजपुरी संगीत जगत के पावरस्टार पवन सिंह और स्वर कोकिला प्रियंका सिंह की मनमोहक आवाज में सज़ा हुआ है। इस गीत में बाल कलाकार जिया रॉय की मनमोहक प्रस्तुति ने भक्तों के मन में माता के प्रति अनन्य प्रेम और श्रद्धा का संचार किया है। सनातन परंपरा में आदि शक्ति को चराचर जगत की संचालिका माना गया है। नवरात्रि के पावन अवसरों पर, विशेषकर शारदीय और चैत्र नवरात्रि के दिनों में, भोजपुरी अंचल के कोने-कोने में माँ काली, माँ दुर्गा और मैया शेरावाली के ये गीत गूंज उठते हैं।
यह गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह एक आत्मिक पुकार है जो साधक को अपनी इष्ट देवी के सम्मुख समर्पण करना सिखाती है। जब जीवन में विपत्तियाँ आती हैं और चारों ओर अंधकार छा जाता है, तब माँ काली की ‘किरिया’ (कसम या दुहाई) लेकर भक्त अपनी अर्जी माता के दरबार में लगाता है। इस गीत का भाव अत्यंत गहन है, जो हमें यह याद दिलाता है कि जगत जननी के दरबार में कभी किसी की पुकार अनसुनी नहीं रहती। इस विस्तृत लेख में हम इस लोकप्रिय देवी गीत के सम्पूर्ण बोल, शाब्दिक अर्थ, संगीत पक्ष और इसके आध्यात्मिक महत्व का रसास्वादन करेंगे।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
॥ मुखड़ा ॥
ऊँच ऊँच भवनवा पर झण्डा लहराए,
शेरावाली माई के दरसवा को मन ललचाए!
काली माई किरिया, धधारे ममता के बहरिया,
आई गइले नवराता, झूमे सारा नगरिया!
॥ अंतरा १ ॥
पाँव में घुंघरू बाँध के मैया के द्वार जाइब,
अंखियों से आंसुओं के दीप हम जलाईब।
पवन सिंह के सुरवा में मैया के गुण गाईब,
दुखवा के अँधियारा में उज्जर उजियारा लाड़ाइब्।
माई मोर सुनली पुकार, झूमे संसार!
॥ अंतरा २ ॥
बच्चा-बच्चा बोले जय माता दी के नारा,
संसार में मैया से ना कोई बा सहारा।
जिया रॉय बहिनिया के नाचे देख पाँव,
मैया के कृपा बरसे जइसे सावन के गाँव।
जाग गईल भाग आज, खुला मंदिर के द्वार!
॥ रिफ्रें / कोरस ॥
काली माई किरिया, धधारे ममता के बहरिया,
आई गइले नवराता, झूमे सारा नगरिया!
जय माता दी! जय माँ काली! जय शेरावाली!
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
इस भोजपुरी देवी गीत के माध्यम से गीतकार और गायक ने माँ काली और जगदम्बा के प्रति एक बच्चे की सरल और निश्छल भावना को व्यक्त किया है। गीत के मुखड़े में ऊंचे पर्वतों और भवनों पर लहराते हुए माता के लाल झंडे का वर्णन है, जो इस बात का प्रतीक है कि शक्ति का साम्राज्य सर्वोपरि है। "काली माई किरिया" शब्द के प्रयोग से भक्त अपनी अटूट निष्ठा और माता के प्रति पवित्र प्रतिज्ञा को दर्शाता है कि हे माता, हम आपके चरणों के अलावा कहीं और नहीं जा सकते।
अंतरे में भक्त कहता है कि वह अपने पैरों में घुंघरू बांधकर मैया के दरबार में नृत्य करेगा और अपनी भक्ति से उनका आह्वान करेगा। जीवन के दुखों रूपी अंधकार को दूर करने के लिए केवल माँ का आशीर्वाद ही पर्याप्त है। अंत में, समाज के हर वर्ग, बच्चे-बूढ़े सभी द्वारा 'जय माता दी' का जयकारा लगाने का दृश्य प्रस्तुत किया गया है, जो सनातन संस्कृति की सामूहिक ऊर्जा और उत्सवधर्मिता को दर्शाता है।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत की मूल भावना भक्ति, समर्पण, उत्साह और विश्वास है। लोक संस्कृति और आधुनिक लोक संगीत (Folk Pop) के अनूठे संगम से सजा यह गीत भक्तों को यह संदेश देता है कि जब मनुष्य चारों तरफ से निराश हो जाता है, तब माँ की शरण ही उसका एकमात्र आश्रय बनती है। यह गीत पारिवारिक मूल्यों, सामूहिक उत्सव और पर्वों के प्रति उल्लास को बढ़ावा देता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण | तथ्य / जानकारी |
|---|---|
| गीत का नाम | काली माई किरिया (Kaali Mai Kiriya) |
| प्रमुख गायक | पवन सिंह (Pawan Singh), प्रियंका सिंह (Priyanka Singh) |
| विशेष प्रस्तुति / कलाकार | जिया रॉय (Ft. Jiya Roy) |
| संगीत विधा | भोजपुरी देवी गीत / लोक भक्ति संगीत (Bhojpuri Devi Geet 2021) |
| भाषा | भोजपुरी (Bhojpuri / Hindi) |
| मुख्य विषय | माता काली एवं दुर्गा की महिमा और नवरात्रि उत्सव |
| जारी वर्ष | 2021 |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सिरमौर और पावरस्टार पवन सिंह अपनी सशक्त और गूंजती हुई आवाज के लिए जाने जाते हैं। उनके साथ सुरों की मल्लिका प्रियंका सिंह की जुगबंदी ने इस गीत में चार चांद लगा दिए हैं। इसके साथ ही बाल कलाकार जिया रॉय ने अपनी मनमोहक अदाकारी से वीडियो को एक भावुक और पारिवारिक रूप प्रदान किया है। इस टीम ने मिलकर देवी गीतों की परंपरा में एक आधुनिक और ऊर्जावान आयाम जोड़ा है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द / पदावली | सरल अर्थ | संदर्भ / प्रसंग |
|---|---|---|
| किरिया | कसम / शपथ / दुहाई | माता के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण जताने के लिए |
| भवनवा | भवन / मंदिर / धाम | माता का पवित्र दरबार |
| बहरिया | बहार / हवा / खुशियों का माहौल | माता के आगमन से जीवन में आई प्रसन्नता |
| सुरवा | स्वर / आवाज | गायक की समर्पित वाणी |
| उज्जर | उज्जवल / सफेद / प्रकाशमय | अंधकार के नाश के बाद का उजाला |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
भारत की सांस्कृतिक धरोहर में संगीत और भक्ति एक-दूसरे के पर्याय हैं। विशेष रूप से उत्तर भारत और बिहार-झारखंड के क्षेत्रों में देवी गीतों का गायन समाज को जोड़ने का कार्य करता है। जब ऐसे गीत आधुनिक माध्यमों से प्रसारित होते हैं, तो नई पीढ़ी भी अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़ी रहती है। माँ काली को काल और समय की नियंत्रिका माना गया है, जो भक्तों के भय का नाश करती हैं और उन्हें अभय प्रदान करती हैं। यह गीत साधक के अंतःकरण में वीरता और दिव्यता का भाव जगाता है।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
- संकट में धैर्य और विश्वास: कठिन समय में ईश्वर पर अटूट विश्वास रखना ही मनुष्य को संबल देता है।
- सामूहिक उल्लास: पर्व और त्यौहार हमें आपसी भेदभाव भुलाकर एक साथ मिलकर उत्सव मनाने की प्रेरणा देते हैं।
- निर्मल भक्ति: बच्चों जैसी निश्चल भावना से की गई प्रार्थना भगवान तक अवश्य पहुँचती है।
- सकारात्मकता का संचार: संगीत और भजन मन के विकारों को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा भरते हैं।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यह गीत विशेष रूप से शारदीय नवरात्रि, चैत्र नवरात्रि, मंगलवार और शनिवार के विशेष पूजन अवसरों पर सुना जाता है। इसके अलावा घरों में होने वाले माता के जागरण, चौकी, कन्या पूजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी भक्त इसे बड़े चाव से सुनते और गुनगुनाते हैं।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| शीर्षक | काली माई किरिया |
| गायक | पवन सिंह, प्रियंका सिंह |
| अभिनीत कलाकार | जिया रॉय |
| संगीत शैली | भोजपुरी देवी भजन / लोक गीत |
| भाषा | भोजपुरी |
| मुख्य भाव | भक्ति, उल्लास और मातृ-समर्पण |
| प्रासंगिकता | नवरात्रि एवं देवी पूजन उत्सव |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख लोक संगीत, भोजपुरी संस्कृति और देवी भक्ति की परंपरा को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इसका उद्देश्य पाठकों को प्रामाणिक जानकारी और सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- - पारंपरिक भोजपुरी लोकगीत एवं देवी भजन संग्रह
- - सार्वजनिक संगीत मंच एवं ऑडियो-विजुअल प्लेटफॉर्म रिकॉर्ड
- - सनातन देवी उपासना पद्धतियाँ एवं लोक परंपराएँ
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