Punjabi Devi Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Pawan Singh का सबसे दर्द भरा विदाई गीत

पवन सिंह का दर्द भरा देवी विदाई गीत 'कईसे के करब बिदाई'। सम्पूर्ण बोल, आध्यात्मिक भावार्थ और सांस्कृतिक महत्व पढ़ें केवल Bhaktilok पर।

हिंदू धर्म और भोजपुरी लोक संस्कृति में शारदीय नवरात्रि का अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण स्थान है। नौ दिनों तक आदिशक्ति मां दुर्गा की असीम श्रद्धा और भक्ति के साथ आराधना करने के बाद, विजयादशमी के दिन माता की विदाई का क्षण आता है। यह क्षण अत्यंत भावुक और हृदयस्पर्शी होता है। इसी भावुकता और विरह की वेदना को स्वर देते हुए भोजपुरी संगीत जगत के सुप्रसिद्ध गायक पवन सिंह ने वर्ष 2021 में एक अत्यंत दर्द भरा देवी विदाई गीत "कईसे के करब बिदाई" (Kaise Ke Karab Bidai) प्रस्तुत किया। यह भजन केवल एक गीत नहीं है, बल्कि प्रत्येक सनातनी भक्त के हृदय की वह पुकार है जो नौ दिनों तक माता को अपने घर में बेटी और माता के रूप में पूजने के बाद उनके प्रस्थान पर निकलती है। इस लेख में हम इस विदाई गीत के संपूर्ण बोल, उसका गहरा आध्यात्मिक भावार्थ, सांस्कृतिक महत्व और इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताओं का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

॥ कईसे के करब बिदाई ॥

मुखड़ा:
कईसे के करब तोहार विदाई मोरी मैया हो,
अँखिया में आंसू भरल बा...
कईसे के करब तोहार विदाई मोरी मैया हो,
अँखिया में आंसू भरल बा...
नौ दिन रखनी सजो के तोहे अंगना,
आजु उजाड़ भईल मोरा ई अंगना...
कईसे के करब तोहार विदाई मोरी मैया हो,
अँखिया में आंसू भरल बा...

अंतरा 1:
मैया हो मैया तू त चल देलू छोड़ के,
हमनी के दिलवा तू काहे देलू तोड़ के...
मैया हो मैया तू त चल देलू छोड़ के,
हमनी के दिलवा तू काहे देलू तोड़ के...
केकरा भरोसे अब रहब हम मैया हो,
केकरा के कहब पुकार...
कईसे के करब तोहार विदाई मोरी मैया हो,
अँखिया में आंसू भरल बा...

अंतरा 2:
सोना के थारी में भोजन परोसनी,
गंगा के जलवा से गोड़वा पखारनी...
सोना के थारी में भोजन परोसनी,
गंगा के जलवा से गोड़वा पखारनी...
कवनो कमी भईल सेवा में हमरा से,
काहे तू फेर लेलू मुंहवा मोरी मैया हो...
कईसे के करब तोहार विदाई मोरी मैया हो,
अँखिया में आंसू भरल बा...

अंतरा 3:
अगले बरस मैया जल्दी तू अईहा,
भक्तन के झोली में खुशियां तू भरिहा...
अगले बरस मैया जल्दी तू अईहा,
भक्तन के झोली में खुशियां तू भरिहा...
पवन के अरज सुनऽ शेरावाली मैया हो,
चरनन में राखिहा सरन...
कईसे के करब तोहार विदाई मोरी मैया हो,
अँखिया में आंसू भरल बा...

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह विदाई गीत भोजपुरी लोक संवेदना और मातृ-भक्ति का एक अनुपम उदाहरण है। गीत के माध्यम से भक्त अपनी आराध्या मां दुर्गा के विसर्जन या विदाई के समय उत्पन्न होने वाले विरह और दुःख को व्यक्त कर रहा है।

मुखड़े का भावार्थ:

भक्त अत्यंत व्याकुल होकर माता से प्रश्न करता है कि "हे मेरी मैया! मैं आपकी विदाई किस प्रकार करूं? मेरी आँखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ रहा है।" भक्त कहता है कि नौ दिनों तक मैंने आपको अपने घर के आंगन में अत्यंत लाड-प्यार और श्रद्धा से सजाकर रखा था। आज आपके जाने से मेरा यह आंगन सूना और उजाड़ प्रतीत हो रहा है। यह भाव ठीक वैसा ही है जैसे किसी बेटी की विदाई के समय उसके पिता के घर का आंगन सूना हो जाता है।

प्रथम अंतरे का भावार्थ:

भक्त माता से शिकायत भरे लहजे में कहता है कि "हे मां! आप हमें इस संसार में अकेला छोड़कर जा रही हैं। आपके जाने से हमारा हृदय टूट गया है। अब हम किसके भरोसे इस जीवन की नैया को पार लगाएंगे? संकट आने पर हम किसे पुकारेंगे?" यह समर्पण और पूर्ण शरणागति का भाव है, जहां भक्त माता को ही अपना सर्वस्व मानता है।

द्वितीय अंतरे का भावार्थ:

भक्त अपनी सेवा और पूजा-अर्चना का स्मरण करते हुए कहता है कि "हे मां! मैंने सोने की थाली में आपके लिए छप्पन भोग परोसे और गंगाजल से आपके पावन चरणों को पखारा। यदि मेरी इस अल्प सेवा में कोई त्रुटि रह गई हो, तो मुझे क्षमा कर देना। लेकिन आप हमसे अपना मुखड़ा मोड़कर क्यों जा रही हैं?" यह भक्त की विनम्रता और सेवा भाव की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

तृतीय अंतरे का भावार्थ:

गीत के अंतिम भाग में भक्त अपनी आंसुओं भरी विदाई को स्वीकार करते हुए माता से प्रार्थना करता है कि "हे शेरावाली मां! अगले वर्ष आप पुनः हमारे घर शीघ्र आना और अपने सभी भक्तों की झोली को सुख, समृद्धि और खुशियों से भर देना। गायक पवन सिंह माता के चरणों में शीश झुकाकर प्रार्थना करते हैं कि हमें सदैव अपने चरणों की शरण में रखना।"

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना 'करुण रस' और 'भक्ति रस' का अद्भुत सम्मिश्रण है। भारतीय संस्कृति में ईश्वर को केवल एक अमूर्त शक्ति नहीं, बल्कि परिवार के एक सदस्य के रूप में देखा जाता है। विशेषकर पूर्वी भारत (बिहार और उत्तर प्रदेश) में माता दुर्गा को घर की बेटी के रूप में माना जाता है जो अश्विन मास में अपने मायके आती हैं और नौ दिनों के बाद पुनः अपने ससुराल (कैलाश पर्वत) लौट जाती हैं।

यह गीत हमें सिखाता है कि ईश्वर के प्रति हमारा संबंध केवल भय या याचना का नहीं होना चाहिए, बल्कि वह प्रेम, अधिकार और आत्मीयता पर आधारित होना चाहिए। विदाई का यह दुःख इस बात का प्रतीक है कि भक्त का हृदय माता के प्रति अगाध प्रेम से भरा हुआ है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Title) कईसे के करब बिदाई (Kaise Ke Karab Bidai)
मुख्य गायक (Singer) पवन सिंह (Pawan Singh)
श्रेणी (Category) भोजपुरी देवी विदाई गीत (Bhojpuri Devi Bidai Geet)
रिलीज वर्ष (Release Year) 2021
मुख्य विषय (Theme) दुर्गा विसर्जन और विदाई की करुणा (Devi Visarjan & Farewell)
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
संगीत शैली (Music Style) पारंपरिक लोक एवं भक्ति संगीत (Traditional Folk & Devotional)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस कालजयी विदाई गीत को भोजपुरी फिल्म उद्योग के 'पावर स्टार' कहे जाने वाले पवन सिंह ने अपनी सुरीली और भावुक आवाज दी है। पवन सिंह अपनी उच्च स्वर श्रेणी (High Pitch) और भक्ति गीतों में भावुकता का संचार करने के लिए जाने जाते हैं। उनके इस गीत में प्रयुक्त संगीत और वाद्ययंत्रों (जैसे शहनाई, ढोलक और मंजीरा) का संयोजन श्रोताओं की आँखों को नम कर देता है। इस गीत के गीतकार और संगीतकार ने पारंपरिक भोजपुरी लोक धुनों को आधुनिक संगीत के साथ इस प्रकार पिरोया है कि यह सीधे हृदय को स्पर्श करता है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

भोजपुरी शब्द हिंदी अर्थ संदर्भ/महत्व
कईसे के (Kaise Ke) किस प्रकार / कैसे विदाई की असमर्थता और व्याकुलता को दर्शाने के लिए।
करब (Karab) करूंगा / करेंगे भविष्य काल की क्रिया।
अंगना (Angana) घर का आंगन वह पवित्र स्थान जहां माता की प्रतिमा स्थापित की गई थी।
भईल (Bhail) हो गया अतीत की घटना को दर्शाने के लिए।
गोड़वा (Godwa) चरण / पैर माता के पावन चरणों के लिए आदरसूचक शब्द।
पखारनी (Pakharni) धोया / साफ किया चरण धोने की पवित्र सेवा।
अईहा (Aiha) आइयेगा अगले वर्ष पुनः आने का निमंत्रण।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सनातन धर्म में विसर्जन की प्रक्रिया अत्यंत दार्शनिक है। यह हमें जीवन के शाश्वत सत्य से परिचित कराती है। सृष्टि का नियम है कि जिसका सृजन हुआ है, उसका विसर्जन भी निश्चित है। नौ दिनों तक हम जिस निराकार शक्ति को साकार रूप (मूर्ति) में पूजते हैं, अंततः उसे पुनः निराकार रूप में विलीन करना होता है।

सांस्कृतिक दृष्टिकोण से, यह गीत भोजपुरी समाज की पारिवारिक संरचना और भावनाओं को दर्शाता है। बिहार और पूर्वांचल में बेटियों की विदाई के समय गाए जाने वाले पारंपरिक 'समदाउन' (विदाई गीत) की झलक इस देवी गीत में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह गीत मनुष्य और ईश्वर के बीच के लौकिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाता है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • स्वीकार्यता (Acceptance): जीवन में हर मिलन के बाद विदाई निश्चित है। हमें सुखद क्षणों के जाने के बाद भी धैर्य बनाए रखना चाहिए।
  • निस्वार्थ सेवा (Selfless Service): भक्त जिस प्रकार बिना किसी स्वार्थ के नौ दिनों तक माता की सेवा करता है, उसी प्रकार हमें समाज और परिवार की सेवा करनी चाहिए।
  • आशावादी दृष्टिकोण (Optimism): गीत का अंत निराशा से नहीं, बल्कि अगले वर्ष माता के पुनः आगमन की आशा और प्रार्थना के साथ होता है। यह हमें सिखाता है कि कठिन समय के बाद अच्छा समय अवश्य आता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर गाया और सुना जाता है:

  • शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन (विजयादशमी): जब मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
  • चैत्र नवरात्रि विसर्जन: चैत्र मास की नवरात्रि के समापन पर।
  • दुर्गा पूजा पंडालों में: विसर्जन यात्रा के दौरान भक्तों के बीच भक्तिमय और भावुक माहौल बनाने के लिए।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का मुख्य स्वर करुणा, विरह, समर्पण और अगाध श्रद्धा
गायक की विशेषता पवन सिंह की भावपूर्ण और उच्च स्वर की प्रस्तुति
सांस्कृतिक जुड़ाव भोजपुरी लोक परंपरा और समदाउन शैली
मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और अगले वर्ष पुनः आगमन की कामना

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस अत्यंत लोकप्रिय और भावुक देवी विदाई गीत के मुख्य गायक भोजपुरी के प्रसिद्ध कलाकार पवन सिंह हैं।

यह गीत शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर वर्ष 2021 में रिलीज किया गया था और यह उस वर्ष का सबसे लोकप्रिय विदाई गीत बना था।

ये गीत मुख्य रूप से नवरात्रि के अंतिम दिन यानी विजयादशमी (दशहरा) को माता दुर्गा की मूर्ति विसर्जन के समय गाए और सुने जाते हैं।

इस गीत में मुख्य रूप से 'करुण रस' और 'भक्ति रस' की प्रधानता है, जो भक्त और भगवान के बीच के विरह को दर्शाती है।

भोजपुरी संस्कृति में देवी दुर्गा को घर की बेटी माना जाता है। उनकी विदाई को एक बेटी की मायके से विदाई की तरह अत्यंत भावुकता और आंसुओं के साथ मनाया जाता है।

हाँ, गीत के अंतिम अंतरे में भक्त माता से प्रार्थना करता है कि "अगले बरस मैया जल्दी तू अईहा", जो आशा और अटूट विश्वास का प्रतीक है।

इस गीत में शहनाई, ढोलक, मंजीरा और कीबोर्ड का बहुत ही सुंदर मिश्रण है, जो विदाई के माहौल को जीवंत बनाता है।

नहीं, यह गीत बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड सहित पूरे देश और विदेशों में जहां भी भोजपुरी भाषी और मां दुर्गा के भक्त रहते हैं, वहां अत्यंत चाव से सुना जाता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख "संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" के अंतर्गत आता है। हमारी संपादकीय टीम ने इस भोजपुरी देवी गीत के साहित्यिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहलुओं का गहन विश्लेषण किया है। पवन सिंह के इस विदाई गीत ने भोजपुरी भक्ति संगीत को एक नई ऊंचाई दी है, जहां लोक संवेदना और शास्त्रीय भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। यह गीत हर वर्ष नवरात्रि के समापन पर भक्तों के दिलों को छूता रहेगा।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • शारदीय नवरात्रि और देवी भागवत पुराण की विसर्जन परंपराएं।
  • भोजपुरी लोक साहित्य और पारंपरिक विदाई (समदाउन) गीत संग्रह।
  • पवन सिंह के आधिकारिक भक्ति एल्बम और संगीत समीक्षाएं (2021)।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

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