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Rowele Bajhiniya - रोवेले बझिनिया - Devigeet (Mukesh Singh Yadav)

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"रोवेले बझिनिया" (Rowele Bajhiniya) भोजपुरी लोक संस्कृति और देवी भक्ति परंपरा का एक अत्यंत भावुक और मर्मस्पर्शी देवी गीत (Devi Geet) है, जिसे सुप्रसिद्ध लोक गायक मुकेश सिंह यादव (Mukesh Singh Yadav) ने स्वर दिया है। वर्ष 2021 में रिलीज हुआ यह भजन आदिशक्ति मां दुर्गा के प्रति एक निःसंतान महिला की गहरी वेदना, सामाजिक उपेक्षा और अंततः जगदम्बा की असीम अनुकंपा पर अटूट विश्वास को दर्शाता है। सनातन धर्म में मां दुर्गा को केवल संहारक ही नहीं, बल्कि ममतामयी जननी और सृष्टि का आदि कारण माना गया है। जब एक भक्त हृदय अपनी समस्त पीड़ाओं को समेटकर मां के चरणों में गुहार लगाता है, तो मां का हृदय द्रवित हो उठता है। यह गीत इसी करुण रस और वात्सल्य रस के अद्भुत समन्वय को प्रस्तुत करता है, जो श्रोताओं के हृदय को झंकृत कर देता है।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

।। रोवेले बझिनिया - देवी गीत ।।

(मुखड़ा)
रोवेले बझिनिया ठाढ़ होखे देवघरवा ए मईया हो...
रोवेले बझिनिया ठाढ़ होखे देवघरवा ए मईया हो...
सुनीं सुनीं अरज हमार, गोदी में बालक दे दऽ ना!
मईया गोदी में बालक दे दऽ ना...।।

(अंतरा 1)
सभ कोई मारेला बोलिया ए मईया, जियरा जरेला दिन-रात हो...
सभ कोई मारेला बोलिया ए मईया, जियरा जरेला दिन-रात हो...
केहू ना पूछेला बात, जिनगी भइल बा अन्हार हो...
मईया गोदी में बालक दे दऽ ना...।।

(अंतरा 2)
सवा लाख के चढ़इबो चुनरिया, नारियल फलवा चढ़ाइब हो...
सवा लाख के चढ़इबो चुनरिया, नारियल फलवा चढ़ाइब हो...
महिमा गाई जग संसार, दुअरिया ठाढ़ बानी तोहार हो...
मईया गोदी में बालक दे दऽ ना...।।

(अंतरा 3)
मुकेश सिंह यादव अरज लगावे, चरन में शीश नवावे हो...
मुकेश सिंह यादव अरज लगावे, चरन में शीश नवावे हो...
करिहा बेड़ा पार, मईया जग कल्याणी हो...
मईया गोदी में बालक दे दऽ ना...।।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह देवी गीत भोजपुरी लोक संवेदना और भक्ति की पराकाष्ठा का जीवंत उदाहरण है। गीत में एक ऐसी स्त्री की मनोदशा का चित्रण किया गया है, जो संतान सुख से वंचित है और समाज के तानों से व्यथित होकर जगत जननी मां दुर्गा की शरण में आई है।

मुखड़े का भावार्थ: मां के दरबार में करुण पुकार

गीत की शुरुआत में गायिका (या भक्त) मां के मंदिर (देवघर) के द्वार पर खड़ी होकर अत्यंत करुण स्वर में विलाप कर रही है। वह कहती है कि हे मां! यह निसंतान स्त्री आपके द्वार पर खड़ी होकर रो रही है। मेरी इस करुण पुकार को सुनिए और मेरी सूनी गोदी को एक नन्हे बालक से भर दीजिए। यहाँ 'देवघर' शब्द देवी के पावन धाम का प्रतीक है, जहाँ हर दुखी हृदय को शरण मिलती है।

प्रथम अंतरे का भावार्थ: सामाजिक उपेक्षा और आंतरिक पीड़ा

प्रथम अंतरे में समाज की उस कड़वी सच्चाई को उजागर किया गया है, जहाँ एक निःसंतान महिला को उपेक्षा और कटु वचनों का सामना करना पड़ता है। भक्त कहती है कि हे मईया! समाज के लोग मुझे ताने मारते हैं, जिससे मेरा हृदय दिन-रात जलता रहता है। कोई मुझसे सीधे मुंह बात नहीं करता और मेरी पूरी जिंदगी अंधकारमय हो गई है। इस पीड़ा को केवल आप ही दूर कर सकती हैं, क्योंकि आप ही इस संसार की आदि माता हैं।

द्वितीय अंतरे का भावार्थ: मन्नत और पूर्ण समर्पण

द्वितीय अंतरे में भक्त मां के प्रति अपनी श्रद्धा और मन्नत को व्यक्त करती है। वह कहती है कि हे मां! यदि आप मेरी झोली भर देंगी, तो मैं आपके चरणों में सवा लाख की सुंदर चुनरी और नारियल-फल अर्पित करूंगी। मैं पूरे संसार में आपकी महिमा का गुणगान करूंगी। मैं आपके द्वार पर पूरी श्रद्धा के साथ खड़ी हूं, मेरी लाज रख लीजिए।

तृतीय अंतरे का भावार्थ: शरणागति और कल्याण की कामना

अंतिम अंतरे में गायक मुकेश सिंह यादव स्वयं को मां के चरणों में समर्पित करते हुए प्रार्थना करते हैं कि हे जग कल्याणी मां! हम आपके चरणों में अपना शीश नवाते हैं। हमारी इस अरदास को स्वीकार करें और इस भक्त का बेड़ा पार करें। आपकी कृपा से ही इस संसार का कल्याण संभव है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस देवी गीत की मुख्य भावना 'करुण भक्ति' और 'आत्मसमर्पण' है। यह गीत केवल एक पारंपरिक भजन नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में महिलाओं की सामाजिक स्थिति और उनकी आंतरिक पीड़ा को भी दर्शाता है।

  • सामाजिक संदेश: गीत अप्रत्यक्ष रूप से समाज को यह संदेश देता है कि किसी भी महिला को निःसंतान होने के कारण प्रताड़ित या उपेक्षित नहीं किया जाना चाहिए।
  • आध्यात्मिक संदेश: जब संसार के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब केवल ईश्वर (आदिशक्ति) का ही सहारा बचता है। मां दुर्गा की शरण में जाने से हर असंभव कार्य संभव हो जाता है।
  • अटूट विश्वास: भक्त का मां के प्रति विश्वास इतना दृढ़ है कि वह अपनी पीड़ा को सीधे मां के समक्ष रखती है, जैसे कोई बच्चा अपनी मां से रूठकर या रोकर अपनी बात मनवाता है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण (Parameter) जानकारी (Details)
गीत का नाम (Song Name) रोवेले बझिनिया (Rowele Bajhiniya)
गायक (Singer) मुकेश सिंह यादव (Mukesh Singh Yadav)
श्रेणी (Category) देवी गीत / भोजपुरी भजन (Devi Geet / Bhojpuri Bhajan)
रिलीज वर्ष (Release Year) 2021
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य विषय (Theme) संतान प्राप्ति हेतु मां दुर्गा से करुण प्रार्थना
संगीत शैली (Music Style) पारंपरिक लोक संगीत (Traditional Folk Music)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

इस सुंदर और भावुक देवी गीत को अपनी मधुर और दर्दभरी आवाज से सजाया है मुकेश सिंह यादव ने। मुकेश सिंह यादव भोजपुरी लोक संगीत जगत में अपनी अनूठी गायकी और विशेष रूप से भक्ति गीतों के लिए जाने जाते हैं। उनके भजनों में मिट्टी की सोंधी महक और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। इस गीत के माध्यम से उन्होंने एक साधारण भक्त की आंतरिक भावनाओं को बहुत ही संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

कठिन शब्द (Word) सरल अर्थ (Meaning) संदर्भ (Context)
बझिनिया (Bajhiniya) निःसंतान महिला (बांझ) वह स्त्री जिसे संतान सुख प्राप्त न हुआ हो।
ठाढ़ (Thadh) खड़ी होना मां के दरबार में प्रार्थना की मुद्रा में खड़े होना।
देवघरवा (Devgharwa) देवी का मंदिर / पावन धाम वह पवित्र स्थान जहाँ मां वास करती हैं।
जियरा (Jiyara) हृदय / मन / प्राण आंतरिक पीड़ा और मानसिक संताप।
बोलिया (Boliya) कटु वचन / ताने समाज द्वारा दिए जाने वाले उलाहने।
चढ़इबो (Chadhaibo) अर्पित करना मां के चरणों में भेंट चढ़ाना।

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

सनातन धर्म में मां दुर्गा को 'जगदम्बा' (जगत की माता) कहा गया है। देवीभागवत पुराण के अनुसार, मां दुर्गा ही समस्त चराचर जगत की जननी हैं। इस गीत का सांस्कृतिक महत्व इस बात में निहित है कि यह भोजपुरी भाषी क्षेत्रों (बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड) की लोक संस्कृति और वहां की महिलाओं के जीवन संघर्ष को दर्शाता है।

नवरात्रि के पावन अवसर पर इस प्रकार के देवी गीतों का श्रवण और गायन अत्यंत फलदायी माना जाता है। यह गीत हमें सिखाता है कि मां के दरबार में अमीर-गरीब, सुखी-दुखी सभी एक समान हैं। मां अपने किसी भी बच्चे को निराश नहीं करतीं। जब कोई भक्त सच्चे मन से श्री दुर्गा चालीसा या इस प्रकार के करुण भजनों का गान करता है, तो मां की कृपा अवश्य बरसती है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

यह भजन हमें कई महत्वपूर्ण जीवन मूल्य सिखाता है:

  1. धैर्य और विश्वास: जीवन में चाहे कितनी भी कठिन परिस्थितियां क्यों न आएं, हमें ईश्वर पर अपना विश्वास नहीं खोना चाहिए।
  2. सहानुभूति और संवेदनशीलता: समाज को निःसंतान महिलाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए और उन्हें हीन भावना से नहीं देखना चाहिए।
  3. शरणागति का महत्व: जब मानवीय प्रयास असफल हो जाते हैं, तब पूर्ण शरणागति ही शांति और समाधान का मार्ग प्रशस्त करती है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह भजन विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर सुना और गाया जाता है:

  • शारदीय एवं चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा के समय इस गीत को सुनने से मन में करुणा और भक्ति का भाव जाग्रत होता है।
  • मंगला गौरी व्रत एवं तीज: सुहागिन महिलाओं द्वारा किए जाने वाले व्रतों के दौरान भी इस गीत का विशेष महत्व है।
  • पारिवारिक अनुष्ठान: मुंडन, जनेऊ या गृह प्रवेश जैसे मांगलिक अवसरों पर देवी पूजन के समय इस गीत को गाया जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
मुख्य कलाकार मुकेश सिंह यादव
गीत का प्रकार भोजपुरी देवी गीत (Devi Geet)
मुख्य रस करुण रस और भक्ति रस
आध्यात्मिक संदेश मां दुर्गा की शरण में जाने से हर कष्ट का निवारण होता है।
उपयुक्त अवसर नवरात्रि, मंगलवार/शुक्रवार देवी पूजा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस भावुक और सुप्रसिद्ध देवी गीत के मुख्य गायक मुकेश सिंह यादव हैं, जिन्होंने अपनी सुरीली आवाज से इस भजन को जीवंत किया है।

इस गीत का मुख्य विषय एक निःसंतान महिला (बझिनिया) की पीड़ा और संतान प्राप्ति के लिए मां दुर्गा से की गई करुण प्रार्थना है।

यह देवी गीत वर्ष 2021 में रिलीज हुआ था और इसे देवी भक्तों के बीच बहुत पसंद किया गया।

भोजपुरी लोक संस्कृति और ग्रामीण अंचलों में 'बझिनिया' शब्द का प्रयोग उस महिला के लिए किया जाता है जिसे संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ हो।

इस गीत को सुनने से मन में करुणा, श्रद्धा और मां दुर्गा के प्रति अटूट विश्वास जाग्रत होता है। यह मानसिक शांति और संबल प्रदान करता है।

हाँ, नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के पंडालों और घरों में इस गीत का श्रवण और गायन अत्यंत लोकप्रिय है।

इस गीत में पारंपरिक भोजपुरी लोक वाद्य यंत्रों जैसे ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम और बांसुरी का बहुत ही सुंदर प्रयोग किया गया है।

शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा का एक रूप 'स्कंदमाता' है, जो कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं। वे अपने भक्तों को संतान सुख और मातृत्व का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है। इस गीत की समीक्षा करते हुए हमारे संगीत और आध्यात्मिक विशेषज्ञों ने पाया कि यह भजन भोजपुरी लोक संवेदना का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह गीत न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करता है, बल्कि समाज के उपेक्षित वर्ग की आवाज बनकर उभरता है। मुकेश सिंह यादव की गायकी ने इस गीत को एक कालजयी रचना बना दिया है, जो हर वर्ष नवरात्रि में भक्तों के आंसुओं और प्रार्थनाओं के माध्यम से मां के चरणों में अर्पित होता है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • श्रीमद्देवीभागवत पुराण - स्कंदमाता और मां दुर्गा की महिमा।
  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं पारंपरिक देवी गीत संग्रह।
  • मुकेश सिंह यादव आधिकारिक भक्ति संगीत एल्बम (2021)।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 07 Oct 2026

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