bhakti gana bhojpuri mein मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Ankush Raja and Kajal Raghwani का छठ गीत (Chhath Geet)

अंकुश राजा और काजल राघवानी का लोकप्रिय छठ गीत 'बेटा दे दS ये माई' सुनें। छठी मइया की महिमा और संतान प्राप्ति की प्रार्थना पर आधारित यह गीत भक्तिपूर्ण है।

भोजपुरी छठ गीत एवं लोक संगीत

Ankush Raja and Kajal Raghwani का छठ गीत | बेटा दे दS ये माई | Bhojpuri Chhath Geet

प्रकाशन तिथि: अक्टूबर २०२१ • श्रेणी: Bhojpuri Devi Geet / Latest Bhakti Song

लोक आस्था के महापर्व छठ की पावन बेला में भोजपुरी संगीत जगत के लोकप्रिय गायक अंकुश राजा (Ankush Raja) और लोकप्रिय अभिनेत्री काजल राघवानी (Kajal Raghwani) का यह छठ गीत "बेटा दे दS ये माई" अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक भावनाओं से ओत-प्रोत है। छठ महापर्व सूर्य षष्ठी व्रत के रूप में मनाया जाता है, जहाँ छठी मइया (माता षष्ठी) और भगवान सूर्य की उपासना की जाती है। इस गीत में एक गृहस्थ परिवार की उस मनोकामना का अत्यंत मार्मिक और सजीव चित्रण किया गया है, जहाँ माता छठी के दरबार में संतान प्राप्ति की गुहार लगाई जा रही है। भोजपुरी लोक संस्कृति में छठ के गीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि अंतःकरण की शुद्धि, पारिवारिक कल्याण और लोक-कल्याण की कामना के पावन माध्यम होते हैं। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस लोकप्रिय गीत के संपूर्ण बोल, इसका साहित्यिक एवं आध्यात्मिक अर्थ, लोक परंपरा में इसकी प्रासंगिकता तथा छठ पर्व के सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

घाट सजले बा सुंदर हो माई, भोरहि से लागल बा डेरा हो माई। अंकुश राजा अरज करे सुनी हs, झोली हमार खाली ना तू मुनी हs... मुखड़ा: बेटा दे दS ये माई, छठी मइया बेटा दे दS, अंखियां के तारा हमके गोदिया में भर दS! काजल राघवानी करे तोहरे गुणगान, सुन लीहS पुकार छठी मइया धरि के ध्यान। अंतरा १: उगत सूरज देव के अरघ हम गिराईब, सोहर के गानवा मिलि-जुलि हम गाईब। भरल रहे गोदिया, सदा सुहाग जोहार, तोहरे चरणवा में बाटे प्राण हमार। छठी मइया हे... किरपा बनाइ रखिहs, बालकन के जीवन तू संवारि रखिहs! अंतरा २: घाट पर सोहेला दउरा के डेकोरेशन, तोहरा महिमा के बा दुनिया दीवानाेशन। अंकुश राजा के मन तनी धधकेला, भगत के पुकार आवे दूर ले अकेला। सुन लीहS अरजिया हे जगत के महारानी, गावे काजल राघवानी तोहरे गुन बानी!

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

यह लोकगीत छठी मइया के प्रति एक भक्त की अनन्य निष्ठा, विनय और संपूर्ण समर्पण भाव को व्यक्त करता है। गीत के मुखड़े में गायक अंकुश राजा और सह-कलाकार छठी माता से अत्यंत करुण स्वर में प्रार्थना करते हैं कि वे उनकी सूनी गोद को भर दें और उनके जीवन में प्रकाश लाएं। लोक संस्कृति में 'बेटा' या 'संतान' की मांग केवल वंश वृद्धि तक सीमित नहीं है, अपितु यह जीवन की निरंतरता, पितृ ऋण से मुक्ति और वंश बेल को आगे बढ़ाने की एक पारंपरिक सामाजिक-आध्यात्मिक आकांक्षा है।

अंतरा भागों में घाट की सजावट, सूप-दउरा के साथ व्रती महिलाओं का उत्साह, उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा का जीवंत वर्णन मिलता है। कलाकार यह विश्वास दिलाते हैं कि यदि छठी मइया उनकी मनोकामना पूर्ण करती हैं, तो वे पूरी निष्ठा से लोकगीत और सोहर गाकर माता का आभार व्यक्त करेंगे। यह गीत विशुद्ध रूप से लोक-आस्था, पारिवारिक सुख और छठी मइया की महिमा का गुणगान करता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत का केंद्रीय भाव मातृत्व, श्रद्धा, लोक-संस्कृति और प्रार्थना है। छठ महापर्व को भारत के सबसे कठिन और पवित्र व्रतों में गिना जाता है, जिसमें चार दिनों तक कठोर अनुशासन और स्वच्छता का पालन किया जाता है। इस गीत के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना और कठिन तपस्या कभी निष्फल नहीं होती। छठी मइया अपने हर भक्त की पुकार सुनती हैं और उनके परिवार में सुख-समृद्धि का संचार करती हैं।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण तथ्य / जानकारी
गीत का नाम बेटा दे दS ये माई (Beta De Da Ye Mai)
मुख्य गायक अंकुश राजा (Ankush Raja)
अभिनेत्री / सह-कलाकार काजल राघwani (Kajal Raghwani)
संगीत शैली भोजपुरी छठ गीत / लोक भक्ति संगीत
भाषा भोजपुरी (Bhojpuri)
मुख्य विषय छठी मइया की वंदना, संतान प्राप्ति की कामना एवं व्रत महिमा
रिलीज वर्ष २०२१ (2021)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

अंकुश राजा भोजपुरी संगीत उद्योग के एक बेहद प्रतिष्ठित और लोकप्रिय पार्श्व गायक व अभिनेता हैं, जिनकी आवाज में लोकगीतों की सोंधी खुशबू और मिठास मिलती है। उनके साथ स्क्रीन साझा करने वाली काजल राघwani अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता और शालीनता के लिए जानी जाती हैं। इस जोड़ी ने छठ महापर्व की गरिमा और पवित्रता को ध्यान में रखते हुए इस गाने में अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। ऐसे गीत भोजपुरी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द / पदावली सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / उपयोग
भोरहि से सुबह तड़के से ही / भोर होते ही घाट पर तैयारियों के आरंभ होने के संदर्भ में
अरज प्रार्थना या विनती माता के चरणों में भक्त की गुहार
दउरा बांस से बना पारंपरिक दौरा / सूप रखने का साधन छठ पूजा में प्रसाद और फल सजाने का पात्र
सोहर शुभ अवसर पर गाया जाने वाला पारंपरिक गीत संतान के जन्म या उत्सव पर गाये जाने वाले गीत
जोहार अभिवादन, वंदना या सम्मान प्रकट करना माता के प्रति श्रद्धा निवेदन

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व सूर्य उपासना का विश्व का इकलौता ऐसा पर्व है जिसमें डूबते हुए सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि सनातन संस्कृति में अस्त होते हुए को भी सम्मान दिया जाता है। छठी मइया (माता षष्ठी) को प्रकृति की देवी और बच्चों की रक्षक माना जाता है। यह लोकगीत इस सांस्कृतिक चेतना को जीवंत करता है जहाँ व्यक्ति अपनी हर मनोकामना लेकर लोकगीतों के माध्यम से सीधे प्रकृति और ईश्वरीय शक्ति से जुड़ता है। इस प्रकार के संगीत समाज को जोड़े रखने, सांस्कृतिक मूल्यों को संचित करने और सामूहिक उत्सवधर्मिता को बढ़ावा देने का कार्य करते हैं।

संस्कृति प्रेमियों के लिए ऐसे पारंपरिक गीत अत्यंत प्रेरणादायक होते हैं। आप इस प्रकार के अन्य सांस्कृतिक अनुष्ठानों और कथाओं के लिए हमारे अन्य लेख जैसे भोजपुरी देवी गीत और लेटेस्ट भक्ति गीत संग्रह का अवलोकन कर सकते हैं।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

  • अटूट विश्वास: जीवन की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ईश्वर और प्रकृति पर विश्वास बनाए रखना चाहिए।
  • परंपराओं का सम्मान: अपनी संस्कृति, लोकगीतों और पर्वों को सहेजकर रखना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
  • कृतज्ञता का भाव: सुख प्राप्ति के बाद समाज और ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त करने की संस्कृति अपनानी चाहिए।
  • सामूहिकता: छठ जैसे पर्व समाज में आपसी भेदभाव मिटाकर मिलजुलकर रहने का संदेश देते हैं।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत मुख्य रूप से कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तक मनाए जाने वाले छठ महापर्व के दौरान सुना और गाया जाता है। जब व्रती महिलाएं और उनके परिवारजन नदी या तालाब के घाटों पर सूप और दउरा सजाकर पहुंचते हैं, तब इस प्रकार के लोकगीत वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना देते हैं। इसके अलावा संगीत प्रेमी इसे अपने मोबाइल, टेलीविजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विशेष रूप से बजाते हैं।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

विशेषता विवरण
गीत शीर्षकबेटा दे दS ये माई
गायकअंकुश राजा
कलाकारकाजल राघवानी
संगीत विधाभोजपुरी छठ लोकगीत
भाषाभोजपुरी
मुख्य भावसंतान प्राप्ति की कामना और छठी मइया की वंदना
संबंधित पर्वछठ महापर्व (सूर्य षष्ठी व्रत)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस लोकप्रिय छठ गीत को प्रसिद्ध भोजपुरी गायक अंकुश राजा (Ankush Raja) ने गाया है, तथा इसमें वीडियो और अभिनय में काजल राघवानी (Kajal Raghwani) ने अपनी उपस्थिति दी है।

यह गीत मुख्य रूप से लोक आस्था के महापर्व 'छठ' के अवसर पर कार्तिक शुक्ल पक्ष के दौरान घाटों पर और घरों में सुना जाता है।

छठ पर्व में मुख्य रूप से भगवान सूर्य नारायण और प्रकृति की देवी छठी मइया (माता षष्ठी) की उपासना की जाती है।

इस गीत का मुख्य संदेश छठी मइया के दरबार में अपनी मनोकामना (विशेषकर संतान प्राप्ति) लेकर सच्ची श्रद्धा और विनीत भाव से प्रार्थना करना है।

हाँ, यह आधुनिक शैली में रचित एक लोकप्रिय भोजपुरी लोकगीत है जो पारंपरिक छठ पर्व की थीम और लोक संस्कृति पर पूरी तरह आधारित है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री Bhaktilok.in के उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुसार तैयार की गई है। इस लेख में प्रस्तुत गीत के बोल, अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भ लोक परंपराओं पर आधारित हैं। संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के तहत हमारा उद्देश्य पाठकों को सटीक, प्रामाणिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जानकारी प्रदान करना है। किसी भी सुझाव या सुधार के लिए आप संपर्क कर सकते हैं।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 12 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!