Chhath Puja Geet मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

Shilpi Raj Chhath Puja Song (Na Ye Dada Na Ho Chhath Geet)

पढ़ें Shilpi Raj Chhath Puja Song 2021|Na Ye Dada Na Ho Chhath Geet|Chhath Puja Song 2021||Chhath geet. का शुद्ध पाठ, शब्दार्थ, विस्तृत हिंदी भावार्थ, पूजा व

छठ पूजा, लोक आस्था और सूर्य उपासना का एक ऐसा महापर्व है जो न केवल धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक एकता और प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम का जीवंत प्रतीक है। इस पावन अवसर पर गाए जाने वाले पारंपरिक और आधुनिक छठ गीत इस पर्व की आत्मा हैं। वर्ष 2021 में रिलीज हुआ शिल्पी राज का लोकप्रिय छठ गीत "ना ये दादा ना हो" (Na Ye Dada Na Ho) इसी अटूट श्रद्धा और पारिवारिक संवाद को अत्यंत खूबसूरती से दर्शाता है। यह गीत विशेष रूप से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, छठ पर्व की तैयारियों में आने वाली चुनौतियों और छठी मैया के प्रति अनन्य समर्पण को रेखांकित करता है। भोजपुरी लोक संगीत की समृद्ध परंपरा में इस गीत ने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। प्रस्तुत लेख में हम इस लोकप्रिय छठ गीत के बोल, उसके गहरे आध्यात्मिक और सांस्कृतिक निहितार्थ, कठिन शब्दों के अर्थ, और इस महापर्व से जुड़ी विभिन्न परंपराओं का एक विस्तृत और विद्वतापूर्ण विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।

सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics

मुखड़ा:

ना ये दादा ना हो, देवें के परी दौरा,
छठ माई के बरतिया में होई ना कतहुं कसरिया हो।
ना ये दादा ना हो, देवें के परी दौरा,
छठ माई के बरतिया में होई ना कतहुं कसरिया हो।

अंतरा १:

गेहूं धोवल बाटे सुघड़ सुखा के,
पिसवा के ले आईहें सनेहिया जगा के।
ठेकुआ छनाई शुद्ध घीव में हमार,
बाजेला मधुर छठी माई के सोहरिया हो।
ना ये दादा ना हो, देवें के परी दौरा,
छठ माई के बरतिया में होई ना कतहुं कसरिया हो।

अंतरा २:

केरा के घवद ले आईहें बजार से,
सजल बावे दौरा हमार फल-फूल से।
अरघ देवे चलब हम सब मिलके,
गंगा जी के पावन ककरिया हो।
ना ये दादा ना हो, देवें के परी दौरा,
छठ माई के बरतिया में होई ना कतहुं कसरिया हो।

अंतरा ३:

छठी माई के महिमा बा अपरम्पार,
सभकर बेड़ा पार करेलीं जगदाधार।
शिल्पी गावे गीत सुहावन,
झूमेला कुल डगरिया हो।
ना ये दादा ना हो, देवें के परी दौरा,
छठ माई के बरतिया में होई ना कतहुं कसरिया हो।

गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth

शिल्पी राज द्वारा गाए गए इस मधुर छठ गीत में एक बहन अपने बड़े भाई (दादा) से संवाद कर रही है। वह भाई को छठ महापर्व की महत्ता और उसकी पवित्रता के बारे में समझाते हुए कहती है कि इस व्रत में किसी भी प्रकार की कमी या कसर नहीं रहनी चाहिए।

प्रथम भाग का भावार्थ

गीत के मुखड़े में बहन अपने भाई से कहती है कि "हे भैया (दादा), हमें छठी मैया की पूजा के लिए बांस का सुंदर दौरा (टोकरी) तैयार करना ही होगा। इस महापर्व में किसी भी स्तर पर कोई कसर या लापरवाही नहीं होनी चाहिए।" यह संवाद दर्शाता है कि छठ पर्व में शुद्धता और नियमों का पालन कितनी कड़ाई से किया जाता है।

द्वितीय भाग (प्रसाद की तैयारी) का भावार्थ

प्रथम अंतरे में बहन भाई को प्रसाद की तैयारी के बारे में बताती है। वह कहती है कि गेहूं को अत्यंत पवित्रता के साथ धोकर और सुखाकर रख दिया गया है। अब भाई को इसे आदर और प्रेम के साथ चक्की से पिसवाकर लाना है। इस आटे से शुद्ध देसी घी में महाप्रसाद 'ठेकुआ' तैयार किया जाएगा। घर में छठी मैया के आगमन की खुशी में मंगल सोहर गाए जा रहे हैं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है।

तृतीय भाग (अर्घ्य और घाट की यात्रा) का भावार्थ

द्वितीय अंतरे में बहन कहती है कि बाजार से केले का पूरा घवद (घौद/गुच्छा) और विभिन्न प्रकार के मौसमी फल-फूल लाकर दौरे को सजाया गया है। अब हम सभी परिवारजन एक साथ मिलकर गंगा नदी के पावन तट (घाट) पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देने चलेंगे। यह दृश्य भारतीय समाज की सामूहिक भागीदारी और पारिवारिक समरसता को प्रदर्शित करता है।

गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message

इस गीत की मुख्य भावना "समर्पण, पवित्रता और पारिवारिक सहयोग" है। छठ पूजा केवल एक व्यक्ति का व्रत नहीं है, बल्कि यह पूरे परिवार और समाज का सामूहिक अनुष्ठान है। गीत के माध्यम से निम्नलिखित संदेश दिए गए हैं:

  • पारिवारिक सामंजस्य: भाई और बहन के बीच का यह संवाद दिखाता है कि कैसे परिवार का हर सदस्य अपनी जिम्मेदारी निभाता है।
  • परम शुद्धता: गेहूं धोने से लेकर प्रसाद बनाने तक, हर कार्य में अत्यधिक पवित्रता का ध्यान रखा जाता है।
  • प्रकृति से जुड़ाव: बांस का दौरा, मिट्टी के चूल्हे, ताजे फल और नदी का किनारा यह दर्शाते हैं कि यह पर्व पूरी तरह से प्रकृति को समर्पित है।

गीत की जानकारी | Song Information

विवरण क्षेत्र जानकारी (Information)
गीत का नाम (Song Name) ना ये दादा ना हो (Na Ye Dada Na Ho)
गायिका (Singer) शिल्पी राज (Shilpi Raj)
रिलीज वर्ष (Release Year) 2021
भाषा (Language) भोजपुरी (Bhojpuri)
श्रेणी (Category) छठ गीत (Chhath Geet)
मुख्य विषय (Theme) छठ पूजा की तैयारियां और पारिवारिक संवाद
संगीत शैली (Music Style) भोजपुरी लोक संगीत (Folk Devotional)

गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators

यह गीत भोजपुरी संगीत जगत की जानी-मानी गायिका शिल्पी राज द्वारा गाया गया है। शिल्पी राज अपनी खनकती आवाज और पारंपरिक लोक गीतों को आधुनिक पुट देने के लिए प्रसिद्ध हैं। वर्ष 2021 में रिलीज हुए इस गीत ने बहुत ही कम समय में लाखों श्रोताओं के दिलों में जगह बना ली। इस गीत का संगीत और इसके बोल इतने सरल और कर्णप्रिय हैं कि यह हर आयु वर्ग के लोगों को आकर्षित करता है। इसके माध्यम से भोजपुरी संस्कृति की मिठास और छठ पर्व की गरिमा को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया गया है।

कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings

शब्द (Word) सरल हिंदी अर्थ (Meaning) संदर्भ (Context)
दादा (Dada) बड़ा भाई / भइया बहन द्वारा भाई को आदरपूर्वक संबोधन
दौरा (Daura) बांस की बड़ी टोकरी जिसमें छठ पूजा का प्रसाद और फल रखे जाते हैं
बरतिया (Baratiya) व्रत करने वाला / व्रत अनुष्ठान छठ व्रत की पावन प्रक्रिया
कसरिया (Kasariya) कमी या त्रुटि पूजा में किसी भी प्रकार की भूल न होना
घवद (Ghavad) केले का पूरा गुच्छा छठ पूजा का मुख्य फल प्रसाद
अरघ (Arghya) अर्घ्य / जल देना अस्ताचलगामी और उदीयमान सूर्य को जल अर्पित करना
ककरिया (Kakariya) कंकड़युक्त किनारा / घाट नदी या तालाब का पवित्र तट

गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance

छठ महापर्व में लोक गीतों का महत्व केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि ये गीत इस महापर्व की पूरी विधि और दर्शन को पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित करने का माध्यम हैं। शिल्पी राज का यह गीत भी इसी सांस्कृतिक श्रृंखला का एक हिस्सा है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता हैं जो संपूर्ण जगत को ऊर्जा प्रदान करते हैं। उनकी पत्नी उषा और प्रत्यूषा (जिन्हें लोक भाषा में छठी मैया कहा जाता है) की आराधना से जीवन में सुख, समृद्धि और संतान की प्राप्ति होती है। इस गीत में प्रयुक्त शब्द "सनेहिया जगा के" (स्नेह जगाकर) यह दर्शाता है कि ईश्वर की साधना केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि अत्यंत प्रेम और भाव से की जाने वाली आंतरिक यात्रा है।

सांस्कृतिक रूप से, यह गीत पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण जीवन की जीवंत झांकी प्रस्तुत करता है, जहां आज भी संयुक्त परिवार और सामूहिक उत्सवों का विशेष महत्व है।

गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons

शिल्पी राज के इस छठ गीत से हमें कई महत्वपूर्ण जीवन सीख मिलती हैं:

  1. सामूहिकता की भावना: अकेले कोई भी बड़ा कार्य सिद्ध नहीं हो सकता। परिवार के सभी सदस्यों का सहयोग ही किसी अनुष्ठान को सफल बनाता है।
  2. शुद्धता और अनुशासन: जीवन में सफलता और मानसिक शांति के लिए आंतरिक और बाह्य शुद्धता अत्यंत आवश्यक है।
  3. प्रकृति का सम्मान: मिट्टी, बांस, फल और नदियों का संरक्षण करना हमारा परम कर्तव्य है, क्योंकि इन्हीं से हमारा जीवन संचालित होता है।

गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing

यह गीत विशेष रूप से छठ पूजा के चार दिवसीय अनुष्ठान के दौरान सुना और गाया जाता है:

  • नहाय-खाय (प्रथम दिन): जब व्रत की शुरुआत होती है और घर की सफाई की जाती है।
  • खरना (द्वितीय दिन): जब प्रसाद के लिए गेहूं सुखाया और पिसाया जाता है।
  • संध्या अर्घ्य (तृतीय दिन): जब दौरा सजाकर घाट की ओर प्रस्थान किया जाता है।
  • उषा अर्घ्य (चतुर्थ दिन): जब उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।

एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance

मुख्य बिंदु संक्षिप्त विवरण
गीत का शीर्षक ना ये दादा ना हो
मुख्य कलाकार शिल्पी राज
रिलीज का माध्यम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (YouTube/Audio Apps)
मुख्य वाद्य यंत्र ढोलक, मंजीरा, बांसुरी, सिंथेसाइज़र
काव्य रस भक्ति रस, वात्सल्य रस
संबंधित पर्व छठ पूजा (सूर्य षष्ठी व्रत)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

इस गीत का मुख्य विषय छठ पूजा की तैयारियां हैं, जिसमें एक बहन अपने भाई से संवाद करते हुए पूजा की सामग्री और प्रसाद की शुद्धता सुनिश्चित करने का आग्रह करती है।

शिल्पी राज भोजपुरी फिल्म और लोक संगीत उद्योग की एक अत्यंत लोकप्रिय पार्श्व गायिका हैं। उनका यह विशेष छठ गीत वर्ष 2021 में रिलीज हुआ था।

दौरा बांस से बनी एक बड़ी टोकरी होती है, जिसमें छठ पूजा के सभी पावन प्रसाद जैसे ठेकुआ, फल, नारियल और अन्य पूजन सामग्री रखकर घाट तक ले जाई जाती है। इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

इसका अर्थ है कि पूजा की हर तैयारी में केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि मन में अगाध प्रेम, श्रद्धा और भक्ति भाव का होना अनिवार्य है।

छठ पूजा का मुख्य महाप्रसाद 'ठेकुआ' (गेहूं के आटे, गुड़ और घी से बना) होता है। इसके अलावा कसार (चावल के आटे के लड्डू) और मालपुआ भी बनाए जाते हैं।

यह गीत पारंपरिक लोक धुनों पर आधारित है, लेकिन इसे आधुनिक संगीत संयोजन और शिल्पी राज की अनूठी गायन शैली के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह युवाओं के बीच भी बेहद लोकप्रिय है।

सूर्य देव को अर्घ्य देना उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का तरीका है। वे पृथ्वी पर जीवन के मुख्य स्रोत हैं। छठ पूजा में डूबते और उगते दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जो जीवन के चक्र को दर्शाता है।

यह गीत श्रोताओं के मन में गहरी पारिवारिक आत्मीयता, मातृभूमि के प्रति प्रेम और छठी मैया के प्रति असीम श्रद्धा व समर्पण का भाव जाग्रत करता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह लेख लोक आस्था के महापर्व छठ और उससे जुड़े सांस्कृतिक गीतों के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। शिल्पी राज का गीत "ना ये दादा ना हो" आधुनिक समय में लोक परंपराओं के संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। हमारी संपादकीय टीम ने इस गीत के बोलों की शुद्धता और उसके सांस्कृतिक संदर्भों का गहन विश्लेषण किया है। यह सामग्री पूरी तरह से मौलिक और शोध पर आधारित है।

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री - अंतिम अपडेट: 2026

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • भोजपुरी लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक अध्ययन संस्थान
  • श्रीमद्भागवत पुराण एवं भविष्य पुराण (सूर्य उपासना प्रसंग)
  • बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश की पारंपरिक छठ पूजा लोक कथाएं

संबंधित भजन एवं लेख

यदि आप छठ पूजा और अन्य पावन पर्वों के बारे में अधिक जानना चाहते हैं, तो हमारे निम्नलिखित लेख अवश्य पढ़ें:

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 08 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!