छठ पर्व बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों की सबसे पवित्र और लोकप्रिय परंपरा है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की उपासना की जाती है। वर्ष 2019 में भोजपुरी संगीत जगत के सुपरस्टार पवन सिंह (Pawan Singh) का छठ गीत "छठी मईया के होता आगमन" उत्तर भारत के हर घर में गूंजा। यह गीत केवल एक मनोरंजन सामग्री नहीं, बल्कि छठ व्रतियों की आस्था, परदेसियों की घर वापसी की ललक, बाजार की रौनक और गंगा घाट की पवित्रता का जीवंत चित्रण है। इस गीत की पंक्तियाँ "हरियर दूब अब तऽ छिलाए लागल" आज भी छठ के दिनों में हर गली-मोहल्ले में सुनाई देती हैं। इस विस्तृत लेख में हम इस गीत के सम्पूर्ण बोल, भावार्थ, गीत की जानकारी, सांस्कृतिक महत्व और छठ पर्व से जुड़ी आध्यात्मिक परंपराओं का गहन विश्लेषण प्रस्तुत कर रहे हैं।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
मुखड़ा (Mukhda):
हरियर दूब अब तऽ छिलाए लागल
गंगा जी के घाट चारू ओर लिपाए लागल
हरियर दूब अब तऽ छिलाए लागल
गंगा जी के घाट चारू ओर लिपाए लागल
होखे लागल बा पूजा अर्चन
छठी मईया के होता आगमन
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्
अंतरा 1:
सजल बाजार, सेउवा, अनार, नारियल, शरीफा, सिंघारा बिकाता
सजल बाजार, सेउवा, अनार, नारियल, शरीफा, सिंघारा बिकाता
घर-घर के कोन, गमकऽता सोन, कहे की पूरी आ ठेकुआ छनाता
पूरा युपी बिहार बा मगन
छठी मईया के होता आगमन
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्
अंतरा 2:
श्याम आजाद दिवाली के बाद, जाये के रहले बम्बे ना गईले हो
श्याम आजाद दिवाली के बाद, जाये के रहले बम्बे ना गईले हो
छोड़ी अरब मनावे परब, सब परदेसी घरे आ गईले हो
मेहरी संगे छठ करीहें पवन
छठी मईया के होता आगमन
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्
गीत का भावार्थ एवं अर्थ | Song Meaning & Bhavarth
इस छठ गीत का प्रत्येक पद छठ पर्व की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गहराई को उजागर करता है। "हरियर दूब अब तऽ छिलाए लागल" पंक्ति में कवि बताते हैं कि छठ पर्व के आगमन के साथ ही घर-आंगन और गंगा घाट को हरी दूब (दूर्वा घास) से सजाया जाने लगता है। यह दूब केवल सजावट नहीं, बल्कि पवित्रता, समृद्धि और नई ऊर्जा का प्रतीक है। "गंगा जी के घाट चारू ओर लिपाए लागल" — यह पंक्ति गंगा घाटों की सफाई और गोबर-मिट्टी से लेपन की परंपरा को दर्शाती है, जो छठ व्रतियों की शुद्धता और समर्पण का प्रतीक है।
"होखे लागल बा पूजा अर्चन, छठी मईया के होता आगमन" — यहाँ कवि कहते हैं कि पूजा-अर्चन की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं क्योंकि स्वयं छठी मैया (षष्ठी देवी) का आगमन हो रहा है। छठी मैया को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन माना जाता है, जो संतान, सुख-समृद्धि और आरोग्य की देवी हैं। "स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्" का उद्घोष भक्ति भाव की पराकाष्ठा है, जिसमें भक्त अपनी देवी का हृदय से स्वागत करते हैं।
दूसरे अंतरे में "सजल बाजार, सेउवा, अनार, नारियल, शरीफा, सिंघारा बिकाता" पंक्ति छठ पूजा की सामग्री की सूची प्रस्तुत करती है। सेउवा (सेवई), अनार, नारियल, शरीफा (सीताफल), सिंघारा (सिंघाड़ा) — ये सभी प्रसाद सामग्री हैं जो छठ व्रत में अनिवार्य रूप से चढ़ाई जाती हैं। "घर-घर के कोन, गमकऽता सोन, कहे की पूरी आ ठेकुआ छनाता" — घर के कोने-कोने में सोने जैसी चमक है क्योंकि हर घर में पूरी और ठेकुआ बन रहा है। ठेकुआ छठ पर्व का सबसे प्रमुख प्रसाद है, जो आटा, गुड़ और घी से बनाया जाता है।
तीसरे अंतरे में "श्याम आजाद दिवाली के बाद, जाये के रहले बम्बे ना गईले हो" — यह पंक्ति परदेस में काम करने वाले श्रमिकों की भावना को व्यक्त करती है, जो दिवाली के बाद मुंबई (बम्बे) जाने की सोच रहे थे, लेकिन छठ पर्व के कारण नहीं गए। "छोड़ी अरब मनावे परब, सब परदेसी घरे आ गईले हो" — अरब देशों में काम करने वाले प्रवासी भी छठ पर्व मनाने के लिए घर लौट आए हैं। यह छठ पर्व की उस महान सामाजिक शक्ति को दर्शाता है, जो परदेसियों को अपने घर-परिवार और मातृभूमि की ओर खींच लाती है। "मेहरी संगे छठ करीहें पवन" — गायक पवन सिंह अपनी पत्नी (मेहरी) के साथ छठ व्रत करने की बात कहते हैं, जो वैवाहिक सुख और पारिवारिक एकता का प्रतीक है।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| गीत का नाम | छठी मईया के होता आगमन (Chhathi Maiya Ke Hota Aagman) |
| गायक | पवन सिंह (Pawan Singh) |
| गीतकार | श्याम आजाद (Shyam Azad) |
| संगीत | पारंपरिक लोक संगीत शैली |
| भाषा | भोजपुरी (Bhojpuri) |
| वर्ष | 2019 |
| विषय | छठ पर्व, छठी मैया, सूर्य उपासना |
| शैली | लोकगीत / भक्ति गीत |
छठ पर्व का सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व | Cultural & Spiritual Significance
छठ पर्व सनातन धर्म की उस अनूठी परंपरा का प्रतीक है, जिसमें सूर्य देव की उपासना की जाती है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और इसमें डूबते सूर्य (अस्ताचलगामी) और उगते सूर्य (उदीयमान) दोनों की आराधना की जाती है। छठ पर्व की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पुरोहित की आवश्यकता नहीं होती — व्रती स्वयं अपने परिवार के साथ नदी, तालाब या घाट पर जाकर पूजा करते हैं। यह पर्व सामूहिकता, समानता और प्रकृति-प्रेम का प्रतीक है।
छठ पर्व में छठ पूजा विधि का विशेष महत्व है। चार दिवसीय इस पर्व में नहाय-खाय, खरना, सायं अर्घ्य और उषा अर्घ्य शामिल हैं। व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं और गंगा जल से सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। छठी मैया को संतान की रक्षक देवी माना जाता है, इसलिए यह पर्व विशेष रूप से संतान प्राप्ति और उनकी दीर्घायु के लिए किया जाता है।
इस गीत में वर्णित "हरियर दूब" और "गंगा जी के घाट" की छवि छठ पर्व की प्रकृति-केंद्रित आध्यात्मिकता को दर्शाती है। गंगा मैया को छठ पर्व में विशेष स्थान प्राप्त है, क्योंकि गंगा जल को सर्वाधिक पवित्र माना जाता है। छठ पर्व में सूर्य देव की आरती और छठी मैया की वंदना की परंपरा है, जिससे भक्तों को आरोग्य, समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
भोजपुरी छठ गीतों की परंपरा और पवन सिंह का योगदान
भोजपुरी संगीत में छठ गीतों की एक समृद्ध परंपरा रही है। शारदा सिन्हा जैसी महान गायिकाओं ने छठ गीतों को अमर बनाया है। पवन सिंह ने अपने इस गीत के माध्यम से छठ पर्व के पारंपरिक लोकगीतों को आधुनिक संगीत के साथ जोड़कर नई पीढ़ी तक पहुँचाया। इस गीत की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरल भाषा और हृदयस्पर्शी भाव हैं, जो श्रोताओं को सीधे छठ पर्व की याद दिलाते हैं।
पवन सिंह का यह गीत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छठ पर्व की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का माध्यम भी है। गीत में वर्णित बाजार की रौनक, परदेसियों की घर वापसी और पारिवारिक एकता की भावना छठ पर्व की सामाजिक प्रासंगिकता को दर्शाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: "छठी मईया के होता आगमन" गीत किसने गाया है?
यह गीत प्रसिद्ध भोजपुरी गायक पवन सिंह (Pawan Singh) ने गाया है। गीत के बोल श्याम आजाद ने लिखे हैं और यह 2019 में रिलीज़ हुआ था।
प्रश्न 2: छठी मैया कौन हैं और उनका क्या महत्व है?
छठी मैया को षष्ठी देवी या सूर्य देव की बहन माना जाता है। वे संतान की रक्षक देवी हैं और छठ पर्व में उनकी विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि छठी मैया की कृपा से संतान को आरोग्य, दीर्घायु और समृद्धि प्राप्त होती है।
प्रश्न 3: छठ पर्व में कौन-कौन सी सामग्री चढ़ाई जाती है?
छठ पूजा में ठेकुआ, पूरी, सेउवा (सेवई), अनार, नारियल, शरीफा (सीताफल), सिंघारा, गन्ना, केला, अदरक, हल्दी, सुपारी, पान और हरी दूब आदि प्रमुख सामग्री हैं। ये सभी प्रसाद सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित किए जाते हैं।
प्रश्न 4: छठ पर्व कितने दिनों तक मनाया जाता है?
छठ पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है — नहाय-खाय (पहला दिन), खरना (दूसरा दिन), सायं अर्घ्य (तीसरा दिन) और उषा अर्घ्य (चौथा दिन)। व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखते हैं।
प्रश्न 5: छठ पर्व में सूर्य देव की उपासना क्यों की जाती है?
सूर्य देव को ऊर्जा, आरोग्य और जीवन का स्रोत माना जाता है। छठ पर्व में डूबते और उगते सूर्य दोनों की आराधना की जाती है, जो जीवन के उतार-चढ़ाव में संतुलन और आस्था का प्रतीक है। सूर्य उपासना से आत्मविश्वास, ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
प्रश्न 6: क्या छठ पर्व में पुरोहित की आवश्यकता होती है?
नहीं, छठ पर्व में पुरोहित की आवश्यकता नहीं होती। व्रती स्वयं अपने परिवार के साथ घाट पर जाकर पूजा और अर्घ्य अर्पित करते हैं। यह पर्व सामूहिकता और समानता का प्रतीक है।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
यह लेख संपादकीय रूप से तैयार सामग्री है, जिसमें पवन सिंह के छठ गीत "छठी मईया के होता आगमन" के सम्पूर्ण बोल, भावार्थ, गीत की जानकारी और छठ पर्व की सांस्कृतिक-आध्यात्मिक पृष्ठभूमि को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। लेख में दी गई जानकारी लोक परंपराओं, छठ पर्व की प्रचलित मान्यताओं और भोजपुरी संगीत परंपरा पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि वे छठ पर्व से जुड़ी विधियों और परंपराओं का पालन अपने क्षेत्रीय रीति-रिवाजों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार करें।
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