बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सबसे पावन और महापर्व छठ पूजा के अवसर पर लोक आस्था का जो विहंगम दृश्य देखने को मिलता है, वह अद्वितीय है। इस पावन पर्व की आत्मा इसके पारंपरिक और आधुनिक लोकगीतों में बसती है। सुप्रसिद्ध लोक गायक पवन सिंह द्वारा गाया गया भक्ति रस से सराबोर गीत "छठी माई के घाटवा पे आजन बाजन" (Chhathi Mai Ke Mahima Apar) इसी पावन परंपरा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। वर्ष 2020 में रिलीज हुआ यह भोजपुरी छठ गीत न केवल कानों को सुरीला लगता है, बल्कि साधक के अंतर्मन में अगाध श्रद्धा, पवित्रता और समर्पण का संचार करता है। इस गीत में छठी मैया की महिमा, गंगा घाटों की अनुपम छटा, और व्रतियों के कठिन संकल्प को बेहद भावुक और संगीतमय ढंग से प्रस्तुत किया गया है। आइए, इस पावन गीत के बोल, इसके गहरे आध्यात्मिक भावार्थ और सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से समझें।
सम्पूर्ण गीत के बोल | Complete Lyrics
छठी माई के घाटवा पे आजन बाजन - गीत के बोल
|| मुखड़ा ||
छठी माई के घाटवा पे आजन बाजन बाजे हो,
आजन बाजन बाजे, शोभन सोहर साजे हो।
छठी माई के घाटवा पे आजन बाजन बाजे हो...
|| अंतरा 1 ||
कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए,
बहंगी लचकत जाए, बात जे पूछे बटोहिया, बहंगी केकरा के जाए?
तू त अंधर होबे रे बटोहिया, बहंगी छठी माई के जाए...
छठी माई के घाटवा पे आजन बाजन बाजे हो...
|| अंतरा 2 ||
नारियल केरा के घवदा, दउरा में सजल बा,
दउरा में सजल बा, अरघ देवे के बेरिया, सुरुज देव उगल बा।
छठी माई के महिमा अपार, जग सारा पूजे हो...
छठी माई के घाटवा पे आजन बाजन बाजे हो...
|| अंतरा 3 ||
पटना के घाटवा पे भीर भईल भारी बा,
भीर भईल भारी बा, अरघ देवे खातिर ठाढ़ सब नर-नारी बा।
पवन गावेले भजनिया, माई के चरनिया साजे हो...
छठी माई के घाटवा पे आजन बाजन बाजे हो...
गीत का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Song Meaning & Bhavarth
यह पावन छठ गीत भोजपुरी लोक संस्कृति और सनातन धर्म की गहरी आस्था का प्रतिबिंब है। गीत के प्रत्येक छंद में महापर्व छठ की पवित्रता और श्रद्धा का सजीव चित्रण किया गया है:
घाट की सुंदरता और मंगल ध्वनि (मुखड़ा)
गीत की शुरुआत में गायक कहते हैं कि छठी मैया के पावन घाट पर तरह-तरह के वाद्य यंत्र (आजन-बाजन) बज रहे हैं। चारों तरफ मंगलमय सोहर और लोकगीत गाए जा रहे हैं। यह दृश्य अत्यंत ही मनोहारी और दिव्य है, जहां हर तरफ केवल पवित्रता और भक्ति का वास है।
बहंगी और बटोहिया का संवाद (प्रथम अंतरा)
यह अंश पारंपरिक छठ गीतों की आत्मा है। इसमें "कांच ही बांस" (कच्चे बांस) से बनी बहंगी का वर्णन है, जो फलों और प्रसादों से भारी होने के कारण लचक रही है। जब एक राहगीर (बटोहिया) पूछता है कि यह बहंगी किसकी है और कहां जा रही है, तो उसे उत्तर मिलता है कि "हे राहगीर! क्या तुम देख नहीं सकते? यह पावन बहंगी हमारी आराध्य छठी मैया के घाट पर जा रही है।" यह संवाद श्रद्धा की पराकाष्ठा को दर्शाता है, जहां महापर्व के दौरान किसी भी प्रकार की अज्ञानता या टोक को स्वीकार नहीं किया जाता।
नैवेद्य और सूर्य देव का आगमन (द्वितीय अंतरा)
इस अंतरे में पूजा की सामग्री का सुंदर वर्णन है। दउरा (बांस की टोकरी) में नारियल और केले के घवद (गुच्छे) सजाए गए हैं। जैसे ही सूर्य देव उदित होते हैं, सभी व्रती और श्रद्धालु उन्हें अर्घ्य देने के लिए तैयार हो जाते हैं। यह प्रकृति और मानव के सीधे जुड़ाव का प्रतीक है।
गंगा घाट का विहंगम दृश्य (तृतीय अंतरा)
अंतिम अंतरे में पटना के ऐतिहासिक गंगा घाटों का वर्णन है, जहां लाखों की संख्या में नर-नारी एक साथ खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दे रहे हैं। गायक पवन सिंह स्वयं को छठी मैया के चरणों का सेवक बताते हुए उनके गुणगान में लीन हैं।
गीत की मुख्य भावना एवं संदेश | Theme, Emotion & Message
इस गीत की मुख्य भावना पूर्ण समर्पण (Total Surrender) और सामूहिकता (Community Unity) है। छठ पूजा एक ऐसा पर्व है जिसमें कोई पुरोहित या बिचौलिया नहीं होता; भक्त सीधे प्रकृति और ईश्वर से जुड़ता है। यह गीत संदेश देता है कि ईश्वर की साधना के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं है, बल्कि बांस की टोकरी, मिट्टी के चूल्हे और शुद्ध अंतःकरण से बनाई गई 'ठेकुआ' जैसी साधारण भेंट भी छठी मैया को अत्यंत प्रिय है। यह गीत समाज में समानता और समरसता का संदेश फैलाता है।
गीत की जानकारी | Song Information
| विवरण बिंदु (Parameter) | जानकारी (Details) |
|---|---|
| गीत का नाम (Song Name) | छठी माई के घाटवा पे आजन बाजन (Chhathi Mai Ke Mahima Apar) | मुख्य गायक (Singer) | पवन सिंह (Pawan Singh) |
| श्रेणी (Category) | भोजपुरी देवी गीत / छठ गीत (Chhath Geet) |
| संगीतकार (Music Composer) | छोटू रावत (Chhotu Rawat) |
| गीतकार (Lyricist) | पारंपरिक / अरुण बिहारी (Arun Bihari) |
| रिलीज वर्ष (Release Year) | 2020 |
| भाषा (Language) | भोजपुरी (Bhojpuri) |
गीत के रचनाकार एवं कलाकार | Artists & Creators
भोजपुरी संगीत जगत में पवन सिंह को उनकी सुरीली और दमदार आवाज के लिए जाना जाता है। उनके द्वारा गाए गए देवी गीत और छठ गीत हर साल करोड़ों लोगों के घरों में गूंजते हैं। इस गीत में संगीतकार छोटू रावत ने पारंपरिक लोक धुनों को आधुनिक वाद्य यंत्रों के साथ इस प्रकार पिरोया है कि यह गीत बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक सभी को समान रूप से आकर्षित करता है। गीतकार अरुण बिहारी ने पारंपरिक छठ गीतों के मूल तत्वों को बनाए रखते हुए इसे एक नया और सुगम रूप दिया है।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Word Meanings
| शब्द (Word) | सरल अर्थ (Meaning) | सांस्कृतिक संदर्भ (Context) |
|---|---|---|
| घाटवा (Ghatwa) | नदी या तालाब का किनारा (Ghat) | वह पवित्र स्थान जहां खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। |
| आजन बाजन (Aajan Baajan) | शहनाई, ढोल और अन्य मंगल वाद्य | पर्व के दौरान बजने वाले शुभ और मांगलिक संगीत का प्रतीक। |
| बहंगिया (Bahangiya) | बांस की बनी कांवड़ | जिसमें दोनों तरफ दउरा रखकर कंधे पर ढोया जाता है। |
| बटोहिया (Batohiya) | राहगीर या पथिक | संसार रूपी मार्ग पर चलने वाला साधारण मनुष्य। |
| अरघ (Aragh) | अर्घ्य (Offering) | दूध या जल से सूर्य देव को दी जाने वाली अंजलि। |
| दउरा (Daura) | बांस की बड़ी टोकरी | जिसमें छठ पूजा का महाप्रसाद और फल रखे जाते हैं। |
गीत का आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व | Spiritual & Cultural Significance
छठ पूजा का त्योहार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है। पवन सिंह का यह गीत इस महापर्व के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करता है:
- प्रकृति की पूजा: इस गीत में बांस, नारियल, केला और सूर्य देव का उल्लेख है, जो यह दर्शाता है कि सनातन धर्म में प्रकृति को ही साक्षात ईश्वर माना गया है।
- शुद्धता और नियम: गीत में प्रयुक्त शब्द और इसकी धुन मन को शांत करती है और व्रतियों को उनके कठिन चार दिवसीय निर्जला व्रत के दौरान संबल प्रदान करती है।
- लोक विरासत का संरक्षण: ऐसे गीत हमारी आने वाली पीढ़ी को अपनी जड़ों, भाषा और लोक परंपराओं से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गीत से मिलने वाली जीवन सीख | Life Lessons
यह पावन गीत हमें केवल भक्ति का मार्ग ही नहीं दिखाता, बल्कि व्यावहारिक जीवन के लिए भी कई महत्वपूर्ण सीख देता है:
- सादगी और पवित्रता: जीवन में जितनी सादगी होगी, मन उतना ही शुद्ध होगा। बांस की टोकरी और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग हमें सादगी सिखाता है।
- सामूहिक सहयोग: छठ पर्व पर पूरा समाज मिलकर घाटों की सफाई करता है और एक-दूसरे की मदद करता है। यह सामाजिक समरसता की सबसे बड़ी सीख है।
- धैर्य और संकल्प: 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखना यह सिखाता है कि दृढ़ संकल्प से किसी भी कठिन परिस्थिति पर विजय पाई जा सकती है।
गीत सुनने का अवसर एवं परंपरा | When to Listen / Sing
यद्यपि इस गीत को कभी भी सुना जा सकता है, लेकिन इसका वास्तविक आनंद कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक चलने वाले चार दिवसीय महापर्व छठ के दौरान आता है। इसे विशेष रूप से निम्नलिखित अवसरों पर बजाया और गाया जाता है:
- खरना के दिन: जब व्रती प्रसाद तैयार करते हैं।
- संध्या अर्घ्य के समय: जब पूरा परिवार दउरा लेकर नदी के घाट की ओर प्रस्थान करता है।
- उषा अर्घ्य (सुबह का अर्घ्य): जब उगते सूर्य देव की प्रतीक्षा की जाती है।
एक नजर में गीत की जानकारी | Song at a Glance
| मुख्य बिंदु | संक्षिप्त विवरण |
|---|---|
| गीत का शीर्षक | छठी माई के घाटवा पे आजन बाजन बाजे हो |
| गायक | पवन सिंह (Pawan Singh) |
| मुख्य विषय | छठ महापर्व, सूर्य उपासना, छठी मैया की महिमा |
| उपयुक्त अवसर | छठ पूजा (Kartik & Chaitra Chhath) |
| संबंधित देवी-देवता | छठी मैया (प्रकृति देवी) और सूर्य देव |
| संगीत शैली | पारंपरिक भोजपुरी लोक संगीत (Bhojpuri Folk) |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
"संपादकीय रूप से तैयार सामग्री" — इस लेख का संपादन और संकलन सनातन धर्म के पारंपरिक ग्रंथों, लोक संस्कृति के विशेषज्ञों और प्रामाणिक संगीत स्रोतों के आधार पर किया गया है। हमारा उद्देश्य पाठकों तक शुद्ध, त्रुटिहीन और उच्च गुणवत्ता वाली आध्यात्मिक सामग्री पहुंचाना है।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
- श्रीमद्भागवत पुराण एवं भविष्य पुराण (सूर्य उपासना प्रसंग)
- बिहार एवं पूर्वांचल की पारंपरिक लोक संस्कृति और मौखिक इतिहास
- पवन सिंह के आधिकारिक भक्ति एल्बम और संगीत समीक्षाएं
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