देवी गीतों की पावन परंपरा में "रखिहs मोर लाज माई" एक अत्यंत भावपूर्ण और हृदयस्पर्शी भजन है। पवन सिंह द्वारा स्वरबद्ध यह गीत न केवल एक भक्ति रचना है, बल्कि यह एक भक्त की अपनी आराध्या के प्रति अनन्य पुकार है। नवरात्रि के पावन अवसर पर जब भक्त मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करते हैं, तब ऐसे भजन मन में श्रद्धा और विश्वास का संचार करते हैं। यह गीत 'शरणागति' के भाव को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपनी समस्त चिंताओं और जीवन की मर्यादा का भार मां के चरणों में समर्पित कर देता है। इस भजन की लय और शब्द-चयन इसे एक 'ब्लास्ट' करने वाला यानी अत्यंत प्रभावशाली और ऊर्जावान देवी गीत बनाते हैं, जो हर भक्त के हृदय को झंकृत कर देता है।
सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics
(मुखड़ा)
रखिहs मोर लाज माई, रखिहs मोर लाज
भक्तन के तू ही सहारा, रखिहs मोर लाज माई
सगरी दुनिया के तू ही तारणहारी
रखिहs मोर लाज माई, रखिहs मोर लाज...
(अंतरा 1)
अंगना में तोहरे ज्योत जगेला
भक्तन के मनवा में प्रेम जगेला
आके दरस दिखा दs माई, रखिहs मोर लाज
रखिहs मोर लाज माई, रखिहs मोर लाज...
(अंतरा 2)
दुखिया के तू ही तs दुखवा हरतारी
ममता के सागर, तू ही महतारी
झोली भर दs माई, रखिहs मोर लाज
रखिहs मोर लाज माई, रखिहs मोर लाज...
भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth
इस भजन का मूल भाव 'शरणागति' है। भक्त अपनी माता से प्रार्थना करता है कि हे जगत जननी! आप ही मेरी एकमात्र आधार हैं। जिस प्रकार एक छोटा बालक अपनी माता के आंचल में सुरक्षित महसूस करता है, उसी प्रकार भक्त अपनी मान-मर्यादा और जीवन की रक्षा के लिए मां दुर्गा का आह्वान करता है। "रखिहs मोर लाज" का अर्थ है कि हे मां, मेरे मान-सम्मान और मेरी भक्ति की लाज आप ही रखें। इस संसार रूपी सागर में भटकते हुए जीव के लिए मां की कृपा ही एकमात्र नौका है। भजन के माध्यम से भक्त यह स्वीकार करता है कि उसके पास अपनी शक्ति नहीं है, जो कुछ भी है, वह मां की ही कृपा है।
भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance
- भक्ति भाव: यह भजन समर्पण और विनय का प्रतीक है।
- सांस्कृतिक महत्व: भोजपुरी लोक-भक्ति परंपरा में ऐसे गीतों का विशेष स्थान है जो नवरात्रि के दौरान घर-घर में गूंजते हैं।
- ऊर्जा का संचार: इसकी लयबद्ध धुन मन में सकारात्मक ऊर्जा और देवी के प्रति प्रेम जागृत करती है।
भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing
इस भजन को नवरात्रि के नौ दिनों में, विशेषकर सुबह की पूजा और शाम की आरती के समय गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसे किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में या सत्संग के दौरान गाया जा सकता है। गाते समय मन में मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।
भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings
| शब्द | अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| लाज | मर्यादा / सम्मान | भक्त की रक्षा का भाव |
| तारणहारी | पार लगाने वाली | संसार सागर से मुक्ति |
| महतारी | माता / जननी | वात्सल्य भाव |
एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information
| भजन का नाम | रखिहs मोर लाज माई |
| देवी | मां दुर्गा |
| भाषा | भोजपुरी / हिंदी |
| भाव | समर्पण और विनय |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, देवी जागरण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
"रखिहs मोर लाज माई" भजन किस देवी को समर्पित है?
यह भजन मुख्य रूप से जगत जननी मां दुर्गा को समर्पित है, जो शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं।
क्या इस भजन को नवरात्रि में सुनना शुभ है?
जी हाँ, नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के भजनों को सुनना और गाना अत्यंत पुण्यदायी और सकारात्मक माना जाता है।
पवन सिंह के देवी गीतों की क्या विशेषता है?
पवन सिंह के देवी गीत अपनी ऊर्जावान धुन और भक्तिपूर्ण शब्दों के लिए जाने जाते हैं, जो भक्तों को झूमने पर मजबूर कर देते हैं।
शरणागति का क्या अर्थ है?
शरणागति का अर्थ है स्वयं को पूर्णतः ईश्वर के चरणों में समर्पित कर देना और यह विश्वास रखना कि वही हमारी रक्षा करेंगी।
क्या इस भजन को घर पर गाया जा सकता है?
बिल्कुल, आप इसे अपने घर के मंदिर में पूजा के समय या किसी भी शुभ अवसर पर गा सकते हैं।
मां दुर्गा की उपासना से क्या लाभ होता है?
मां दुर्गा की उपासना से मानसिक शांति, शक्ति और जीवन में आने वाली बाधाओं का नाश होता है।
क्या यह भजन किसी विशेष संप्रदाय का है?
नहीं, यह भजन सनातन धर्म की भक्ति परंपरा का हिस्सा है और सभी भक्त इसे गा सकते हैं।
भक्ति गीतों का जीवन में क्या महत्व है?
भक्ति गीत मन को एकाग्र करने और ईश्वर के प्रति प्रेम विकसित करने का सबसे सरल माध्यम हैं।
संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री। यह लेख भक्ति परंपरा और लोक गीतों के आधार पर संकलित किया गया है।
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